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जाहिरा ने बहुत ही धीमी आवाज़ से कहा तो फैजान तो जैसे एक लम्हे के लिए चौंक गया कि यह क्या हुआ कि उसकी बहन जाग गई है और उसने अपने भाई के हाथ को अपनी चूत पर पकड़ लिया है।फैजान के मुँह से जाहिरा का निप्पल सरक़ चुका था. और मैं हँसने लगा।फिर हम वहाँ से निकल गए और घर पहुँचने ही वाले थे कि भैया ने बीच में कार रोक दी और बोले- यार एक बार और चूस दे।मैंने स्माइल दी और भैया के लंड के ऊपर मुँह लगाकर चूसने लगा. मेरा हमेशा ही सेक्स करने को दिल करता है।वो बोली- मन तो मेरा भी बहुत करता है?मैंने लोहा गरम देख कर हथौड़ा मार दिया.

लेकिन उनकी बारह साल की नपुंसकता के सामने पराए मर्द के साथ सेक्स करने की सोचना पाप नहीं लग रहा था।और तो और. मैं उसे कॉल कर देती हूँ।तभी मुझे अहसास हुआ कि मैं अपना सेल फोन तो अपनी पर्स समेत वहीं जाहिरा को दे आई थी।मैंने नावेद की तरफ मुँह किया और अपने होंठ उसके कानों के क़रीब ले जाकर बताया कि मेरे पास फोन नहीं है।नावेद अपने होंठ मेरे कानों के पास लाया और इस बार अपने होंठों को मेरे कानों से छूते हुए बात करने लगा।‘भाभी.

ताकि हमें एक-दूसरे की याद आती रहे।उसके बाद मैं लन्दन में पढ़ाई के लिए चला गया और वो भी पढ़ाई के बहाने शहर छोड़ के चली गई।उस दिन के बाद मैंने कभी उसे देखा नहीं, वो कहाँ है, कैसी है मुझे कुछ पता नहीं है।मैं दुआ करता हूँ कि वो जहाँ भी रहे.

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उसी बिस्तर पर लेट कर मैंने कन्डोम के एक पैकेट को खोलकर अन्दर का माल बाहर निकाला।पहली बार मैं एक कन्डोम को हाथ में ले रही थी.

फिर मेरी सलवार खींच दी।अब मैं सिर्फ पैन्टी और ब्रा में थी। फिर अनु ने मेरी ब्रा भी निकाल दी और वो मेरे तने हुए मम्मों को चूमने-चाटने लगा।अनु के साथ ये करते हुए बहुत सेक्सी लग रहा था. केवल 2-3 बार मुठियाते ही मैंने वीर्य छोड़ दिया और उन दोनों के मुँह में बारी-बारी से गिरा दिया।वे दोनों पूरा का पूरा वीर्य निगल गईं और दोनों ने मेरा लंड बारी-बारी से चाट कर साफ़ कर दिया।दो बार झड़ने से और लगभग सारा वीर्य बाहर निकल जाने से मैं भी थक गया था और मेरा लंड भी सिकुड़ गया।यह देखकर वे दोनों हँसने लगीं. उनका भीगा हुआ गोरा बदन और भी सेक्सी लग रहा था।फिर उन्होंने अपनी बुर के ऊपर साबुन लगाया और मसल-मसल कर साफ़ करने लगीं। बुर के ऊपर काले-काले घने बाल बहुत सेक्सी लग रहे थे।वो उनको धो रही थीं.

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इतने में जाहिरा टीवी लाउंज में दाखिल हुई तो मैंने अपनी नज़र उस पर नहीं डाली और भी ज्यादा बेतक्कलुफी से फैजान से चिपक गई।फैजान का हाथ अभी भी मेरी शर्ट के अन्दर मेरी चूची से खेल रहा था। उसकी बहन ने आते ही सब कुछ देख लिया था।मैंने देखा कि चंद लम्हे तो वो वहीं रसोई के दरवाजे पर खड़ी हुई यह नज़ारा देखती रही. तो वो भी मेरी बातें सुन सके और मैं उसको उत्तेजित करने की लिए ऐसी बातें कर रही थी।ऐसी उत्तेजना भरी बातें करते समय मेरी खुद की चूत में रस निकलने लगा था।अब आगे लुत्फ़ लें. मैंने उसको अपना लौड़ा दिखा दिया।उसने मेरा खड़ा लण्ड देखते ही उसे अपने हाथ में ले लिया और फिर अचानक से मुँह में लेकर चूसने लगी।मुझे पता ही नहीं चला कि ये क्या हो गया। मैं मना करता रहा और वो मेरा लौड़ा चूसती रही.

मैं बोला- अच्छा ऐसा करो, सारा दिन हम चारों एक दूसरे के निकट नहीं आएंगे। ताकि किसी को शक न हो और रात के डिनर के बाद फैसला करेंगे कि रात कैसे और किस के साथ गुज़ारनी है. आज तुझे ऐसा चोदेंगे कि तू चुदाई भूल जाएगी।मैंने भी उसका लंड पकड़ा और बोली- देखते हैं साले कितना दम है तेरे इस लौड़े में. बस एक शॉर्ट्स पहन कर बाहर आ गया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !रॉनी- अरे भाई ये सलमान बनकर कहाँ जा रहे हो?पुनीत- तू यहाँ बैठ कर बियर का मज़ा ले.

और इसी बहाने उसकी चूचियों को दबा दिया।वो कुछ नहीं बोली लेकिन उसकी नज़र मेरे लंड पर ही थी और कहते हैं ना कि अगर चुदी हुई लड़की अगर अच्छा लंड देख ले. हुआ कुछ ऐसे कि लड़की की वरमाला के बाद मैं सोने के लिए एक कमरे में चला गया।मुझे पता नहीं था कि वो लड़कियों के तैयार होने का कमरा था।मेरी अभी नींद लगी ही थी कि लड़कियाँ वहाँ आ गईं। ग़लती से एक लड़की ने मेरे पाँव पर पाँव रख दिया। मेरी हल्की सी ‘आह्ह.

जैसे उसकी चूत मेरे लंड को पूरा निचोड़ लेगी और पूरा लंड निगल लेगी।फिर मैंने दूसरा आसन बनाया और उसको अपने ऊपर बिठा कर चोदा और मैं इस आसन में उसके फुदकते बोबों को दबाने लगा।कसम से जो मज़ा आ रहा था उसे बयां नहीं किया जा सकता, मुझे तो ऐसा लग रहा था. तो मेरी पैन्टी तक पूरी ऊपर दिख जाए। मैंने नाभि से ऊँचा एक रेड कलर का टॉप पहना हुआ था, अन्दर ब्लू कलर की ब्रा-पैन्टी नेट वाली थीं, ब्रा तो टॉप में से साफ़ दिख रही थी। मेरे रसीले होंठों पर डार्क रेड कलर की लिपस्टिक लगी थी और बाल खुले किए. जिस पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। शायद यह उसका पहली बार था और मेरा भी पहली ही बार था।जब हम वापस आ रहे थे तो उसने कहा उसे ‘वो’ एक बार और करना है।तो मैंने एक गली के आगे गाड़ी लगाई और उसे किस करने लगा।इस बार उसने भी साथ दिया और मस्त तरीके से हम दोनों एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे.

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बहुत ही अच्छे लग रहे थे।उन गोल चूचों पर सजे हुए गुलाबी निपल्स को मैं बेताबी से चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरे चूचे को दबाने लगा।इसके साथ ही मैंने उसकी चूत मैं. साली को चुटकियों में ले आऊँगा।आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. ’ मैं उसको कन्डोम देते हुए बोला।सोनिया- ओके।उसने मुझे कन्डोम पहना दिया फिर मैंने उसको गोद में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत पर उंगली फिराने लगा।कुछ देर ऐसा करने के बाद एक उंगली उसकी चूत में डाल दी, उसके मुँह से सीत्कार निकल रही थी.

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और अब तो आपको सताने के लिए मैं भी मिल गई हूँ।फैजान जाहिरा के सामने की तरफ आया और अपने शॉर्ट में हाथ डाल कर अपना लंड बाहर निकाल कर बोला- एक किस तो कर दो प्लीज़.

बाद में मेरी चाची यानि उसकी माँ जो खुद भी बहुत चुदक्कड़ थी… उसने अपनी बेटी और दामाद को चुदाई के बारे में बताया।अब अक्सर वो सब साथ में चूत चुदाई और गाण्ड मरवाने का मज़ा लेते हैं।उसी ने मुझे गाण्ड में लंड लेने का तरीका और मज़े के बारे में बताया था।उसकी दो लड़कियाँ हैं जब तू बड़ा होगा. हम कल आ रहे हैं बाकी बातें वहीं आकर करेंगे।पुनीत- गुड्डी को टोनी ने कभी नहीं देखा और ना कभी देख पाएगा क्योंकि पापा कितने सख़्त मिज़ाज हैं गुड्डी को लेकर उस बेचारी को किसी फ्रेण्ड तक के साथ अकेली बाहर जाने की इजाज़त नहीं है। हमारे पड़ोसी तक गुड्डी को नहीं पहचानते. तो मेरा लंड ने हाफ पैन्ट में तंबू सा बनाया हुआ था और मैं लगातार उसे धीरे-धीरे सहला भी रहा था।भाभी लौड़े की तरफ देख कर बोली- और बताओ.

दोस्तो, आपको हमारी सच्ची घटना पसंद आई या नहीं, कृपया हमें लिखें[emailprotected]पर्…हम पत्येक पत्र का उत्तर देने का प्रयत्न करेंगे।धन्यवाद. तो उसकी कमर बिल्कुल ही नंगी लगती थी। नीचे उसकी जाँघें भी और मेरी जाँघें भी पूरी नंगी हो रही थीं। लेकिन सामने से वो अपनी चूचियों को नहीं देखा रही थी।लेकिन ज़ाहिर है कि मैं ऐसा नहीं कर रही थी और अपना पूरा जोबन उन दोनों बहन-भाई के सामने गीली बनियान में एक्सपोज़ कर रही थी. सेक्स प्लेफिर हमने पी और वो नाश्ता तैयार करने लगी और मैं नहाने चला गया।वो और मैं भी घर में सिर्फ़ जॉकी डाल घूमने लगे। हमने साथ में नाश्ता किया और फिर वो घर का काम करने लगी और मैं कमरे में चला गया।वो तीन घंटे बाद मेरे कमरे में आई वो अभी भी सिर्फ़ तौलिये में ही थी, वो आकर बोली- और जानू.

लेकिन आज जाहिरा की खूबसूरती को देख कर मुझ पर भी नशा सा छा रहा था।मैं सोच रही थी कि अगर मेरा यह हाल हो रहा है. पर मैं रुका नहीं और लगातार उसकी चूत पर वार पर वार करता गया। मैं उसे तेजी से चोदता जा रहा था और वो दर्द से कराह रही थी।फिर थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो मेरा साथ देने लगी और अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदवाने लगी। उसने मुझे जोर से अपनी बाँहों में कस रखा था और मेरे लंड के जोरदार झटकों से उसके मुँह से चीखें निकल रही थीं।‘अह.

मेरे हाथ में आ गया।तब मैंने अपना पैर एक-दूसरे के पैरों में फंसा दिया।मेरी बहन की नाज़ुक सी कली मेरी बाँहों में थी. जैसे इन्हें लंड और गोटियों को अपने आप से अलग करना है।दस मिनट तक ये ज़ुल्म ढाने के बाद उन्होंने मुझे आज़ाद किया. मैं तो प्यार करना चाह रहा हूँ।यह कहते हुए फैजान ने जाहिरा के टॉप की डोरी को नीचे खींचा और उसकी एक चूची को नंगा कर लिया। जाहिरा जल्दी से अपनी चूची को छुपाते हुए तड़फ उठी।जाहिरा- छोड़ दो भैया.

लेकिन मैंने उसकी कोई भी बात सुनने से इन्कार कर दिया और आख़िर जाहिरा को मेरी बात माननी ही पड़ी।रात हुई तो मैं और फैजान अपने कमरे में आकर लेट गए. उसी वक्त वो एकदम से फिर से अन्दर आ गईं।अब मैं उनके सामने नंगा खड़ा था, मेरा लण्ड देख कर वो कामुकता से हँसने लगीं।फिर मेरे नजदीक आकर खरोंच देख कर हँस कर बोलीं- तुम तो बहुत बाल-बाल बचे. फैजान अपने लंड की टोपी को अपनी बहन के गुलाबी होंठों पर आहिस्ता-आहिस्ता फिराता हुआ बोला- तुम आज से मेरी बहन भी हो और मेरी बीवी भी हो.

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उसे चूमने लगा और समझाने लगा- पहली बार में तो थोड़ा दर्द होता ही है।हम दोनों 5 मिनट तक इसी अवस्था में पड़े रहे. पर बोली कुछ नहीं।मैं बताता भी जा रहा था और बगल में भाभी के कमर को सहला रहा था।भाभी थोड़ा काँपते आवाज़ में बोली- और क्या करते हो?मैंने जरा और जोर से कमर को दबाते हुए कहा- उसके बाद.

तो वो बोली- मैंने इस फंक्शन के प्रोग्राम में भाग नहीं लिया था।मैंने कारण पूछा तो बोली- मुझे कोई डान्स सिखाने वाला ही नहीं था।तो मैं बोला- अरे मुझसे कहती. और उसे अपने ही बहन की तरफ जाने का पूरा-पूरा मौका देना चाहती थी।दो दिन के बाद सुबह जब फैजान ऑफिस के लिए कमरे में ही तैयार हो रहा था. इसलिए उनकी चूचियों पर हाथ फिराने में मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी।चाची मेरी इस तकलीफ़ को समझ गईं और मेरे होंठ छोड़ कर बैठ गईं और बोलीं- ये कपड़े अपने मिलन में अड़चन डाल रहे हैं.

जैसे उसकी चूत मेरे लंड को पूरा निचोड़ लेगी और पूरा लंड निगल लेगी।फिर मैंने दूसरा आसन बनाया और उसको अपने ऊपर बिठा कर चोदा और मैं इस आसन में उसके फुदकते बोबों को दबाने लगा।कसम से जो मज़ा आ रहा था उसे बयां नहीं किया जा सकता, मुझे तो ऐसा लग रहा था. इसलिए ज्यादा रश नज़र नहीं आ रहा था। फैजान ने गैलरी की तीन टिकट ली और हम ऊपर गैलरी में आ गए। वहाँ गैलरी में भी बहुत कम लोग ही बैठे हुए थे. लेकिन उसकी आँखें अभी भी बंद थीं।पेट पर हाथ फेरने की बाद फैजान ने अपना हाथ थोड़ा सा नीचे लिए जाते हुए जाहिरा की जांघ पर रख दिया। जाहिरा की जाँघें उसकी चुस्त लैगी में फंसी हुई थीं।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !जाहिरा के जिस्म से चिपकी हुई उसकी चमड़ी के रंग की लेग्गी ऐसी ही लग रही थी.

बीएफ सेकसी विडियो तभी ऊपर किसी की आने की आहट सुनकर मैंने तुरंत अपनी उँगली गाण्ड से बाहर निकाली और भाभी ने अपनी साड़ी को नीचे कर लिया।मित्रो. तब तो मैं उसे देखता ही रह गया। उसने काली जींस और सफेद टॉप पहना हुआ था। मेरे मन में तो उसी वक्त खयाल आया कि इसे यहीं पटक कर चोद दूँ.

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भाई कुछ बोलता उसके पहले टोनी ने फ़ोन काट दिया और कार की तरफ़ बढ़ गया।इधर सुनील और विवेक की नज़र सन्नी पर ही थी. वो छोटे बच्चे की तरह मेरे लौड़े को चूसने लगी।उसने पहली बार किसी का लौड़ा अपने मुँह में लिया था, उसने करीब 15 मिनट तक मेरा लौड़ा चूसा।फिर वो नशीली आवाज में बोली- अब और देर न करो. इसलिए अब मैं सोचने लगा कि कैसे ऑफिस की छुट्टी मारी जाए और आज दिन भर में कम से कम एक बार तो उसके सामने अपना नंगा बदन लेकर कैसे जाऊँ।उसी कामुक सोच में मैंने ऑफिस के दोस्त को फोन करके बता दिया कि कुछ निजी काम की वजह से मैं या तो देरी से ऑफिस आऊँगा.

हम सब पकडे जा सकते थे और हमारे घरवाले हमें कहीं का नहीं छोड़ते। अब के बाद हम एक दुसरे के नज़दीक नहीं आएंगे इस सारे ट्रिप में. और वो मुझसे 10 साल छोटी थी।रोज़ाना फैजान खुद ऑफिस जाते हुए जाहिरा को कॉलेज छोड़ कर जाता और वापसी पर साथ ही लेता आता था। मुझे भी कभी भी इस सबसे कोई दिक्कत नहीं हुई थी। जैसा कि ननद-भाभी में घरों में झगड़ा होता है. राजस्थानी ब्लू सेक्सी पिक्चरसुबह तुझे कॉलेज भी जाना है।जाहिरा ने एक नज़र अपने भैया पर डाली और फिर मुस्कराते हुई बिस्तर से नीचे उतर कर वॉशरूम में चली गई।कुछ देर बाद वापिस आई तो उसने मुझे दरम्यान में धकेल दिया और खुद मेरी जगह पर लेट गई।उसके चेहरे पर एक शरारती सी मुस्कराहट थी।उसका भाई उसकी तरफ ही देख रहा था और मेरी नज़र बचा कर उसे दरम्यान में आने का इशारा भी किया.

फिर देख मैं तुझे हमेशा के लिए अपने पास काम पर रख लूँगा। तू दिन के 500 रुपये तक कमा लेगी। चल अब थोड़ा ऊपर दबा.

नहीं तो प्राब्लम हो जाएगी, यह पानी ऐसे गिरता रहेगा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !पायल उठी और बाथरूम में जाकर बैठ गई और अपना ध्यान इस बात से हटाने की कोशिश करने लगी।दोस्तो, एक बहुत पुराना राज. और तुम मेरी बहन के साथ ऐसा कैसे कर सकते हो यार?सूर्या- पता नहीं यार कैसे हो गया… मैं खुद ही दिल से बुरा महसूस कर रहा हूँ।मैं- तुम्हारे महसूस करने से क्या सब ठीक हो जाएगा.

जाहिरा चाय की ट्रे साइड टेबल पर रख कर मेरे पास बैठ गई और मेरी चूत पर अपना हाथ फेरते हुए बोली- भाभी सुबह ही सुबह यह आपको क्या हो गया है?मैंने जाहिरा के हाथ की उंगली को लिया और उसे अपनी चूत के अन्दर डालते हुई बोली- देख तो सही. फिर मैंने उसके देखते ही देखते उसके होंठों पर चुम्बन कर दिया और फिर हाथों को चूम लिया।फिर उसके गले में चुम्बन करने लगा और फिर उसे अपनी बाँहों में भरकर उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसे होंठों को बुरी तरह चूमने लगा।अब मैंने उसके बोबों को दबाना चालू किया और उसने मेरा लंड पकड़ लिया. कल रात तुमने इतने मजे लिए और मैं तुम्हें अंजलि समझ कर चोदता रहा और तुमने उस समय बीच में कहा था कि दीदी जाग जाएगी.

तभी सोच लिया था कि इसे जरूर चोदूँगा।वैसे भी पति से ना बनने के कारण उसे भी एक तगड़े लण्ड की सख्त जरूरत थी।मैंने किसी ना किसी बहाने उसके घर जाना शुरू कर दिया। जल्दी ही हमारी अच्छी बनने लगी। उसे देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था।एक बार तो उसने मेरे लण्ड को पैन्ट में तंबू बनाए हुए देख भी लिया था.

पूरा माल सरिता के चुदे छेद में डाल दिया।इस एक घंटे की धकापेल चुदाई में सरिता 5 बार झड़ी थी और मैं 2 बार झड़ा था।उसके बाद मैंने कुछ देर आराम किया फिर उसके चूतड़ों में दो चपत लगाईं. तो मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने अपना हाथ माँ की बुर के ऊपर हल्के से रख दिया और ऊँगलियों से उनकी बुर हल्के-हल्के दबाने लगा।पर माँ फिर भी कुछ नहीं बोलीं।मेरा लंड उत्तेजना की वज़ह से पूरा तना हुआ था और माँ की गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा था। माँ की बुर की चिकनाई मुझे महसूस हो रही थी और चिकना पानी उसकी बुर से निकल कर जांघों पर बह रहा था।मैं ऊँगलियों को और नीचे की तरफ करता जा रहा था. मैं वहाँ 5 दिन रहा और इन 5 दिनों में मैंने घर के हर कोने में उसको चोदा और शायद जितने पोज़ मैं जानता था.

सेक्सी पहेलियाँपर फिर मुझे लगा कि सुमन चाची अपने पैरों से मेरे पैर को रगड़ रही हैं। मैंने सोचा कि शायद ये मेरा वहम है और मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।लेकिन कुछ देर बाद ही चाची की पैर मेरे लंड तक पहुँच गए और उसे हिलाने लगीं। मेरा लंड अब खड़ा होने लगा था. ताकि किसी को कोई शक ना हो।आगे चलकर वो उसके साथ हो गया और अपने खेत पर ले गया।अर्जुन की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी.

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मगर मुझे ऐसा-वैसा कुछ नहीं करना।आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. लेकिन मेरी बीवी और उसके माता-पिता बड़े ही शक्की किस्म के लोग हैं। इसलिए मुझे अपनी नवविवाहित सेक्सी सलहज को चोदने का कोई मौका नहीं मिल पा रहा था। मैं बस उसके सेक्सी और चिकने बदन को जिसका उभार लगभग 36-32-38 था. जैसे कि अक्सर चूत वालियों की चुदते वक्त होती हैं।लगभग 10 मिनट के बाद चाची डिस्चार्ज हो गई और करीब 35 से 40 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ने एक साथ पानी छोड़ दिया।चाची लगभग 3 बार झड़ चुकी थी.

तो आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. चूस कर चाट कर शान्त की और निढाल हो कर एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए।जब हम दोनों पूरे खुश हो गए तब माँ जी मेरी तरफ देखने लगीं कि मेरी क्या प्रतिक्रिया है।लेकिन आज मुझे दुनिया का एक अलग सा मज़ा मेरी सासू माँ ने मुझे दिया था. तो चंद मिनटों में ही हमारे जिस्म बिल्कुल गीले हो गए और हमारी बनियाने भीग कर हमारे जिस्मों के साथ चिपक गईं।अब ऐसा लग रहा था कि जैसे हम दोनों ने सिर्फ़ और सिर्फ़ वो बनियाने ही पहन रखी हैं और कुछ भी नहीं पहना हुआ है।अब हम दोनों शरारतें कर रहे थे और एक-दूसरे को छेड़ रही थीं।मैंने शरारत से जाहिरा के निप्पल को चुटकी में पकड़ कर मींजा और बोली- जानेमन तेरी चूचियाँ बड़ी प्यारी लग रही हैं.

सामने उसका बेदाग जिस्म था। एकदम गोरे जिस्म पर उसकी काली ब्रा और पैन्टी देख कर लौड़े से पानी की बूँदें बाहर आ गईं। उसके बाद तो बस मेरा सर डर निकाल गया. इस लम्बी धारावाहिक कहानी में आप सभी का प्रोत्साहन चाहूँगा, मुझे ईमेल करके मेरा उत्साहवर्धन अवश्य कीजिएगा।कहानी जारी है।[emailprotected]. अब मेरी चूत को कौन मारेगा?वो मुस्कुरा दिया और उसने अपना मुझय हुआ लौड़ा मेरे आगे कर दिया।मैंने समझ लिया कि अब इसको खड़ा करना पड़ेगा तभी ये मेरी चूत चोदने लायक होगा और मैं उसके लण्ड को हिलाती रही.

तो वो हम दोनों के बारे में क्या सोचेगा?वो ये बोल कर नीचे चला गया और मुझे फोन किया- कितनी देर में आओगे?मैं- भाई तेरी बाइक खराब हो गई है. और उसको पटाने का दूसरा तरीका सोचने लगा।सो मैं उसको कुछ डान्स वीडियो एक पेन ड्राइव में देने गया और उसी में कुछ पॉर्न वीडियो और एक फोल्डर में भाई-बहन की चुदाई वाली कहानी डाल कर दे दिया और बोला- मैं एक दोस्त के घर जा रहा हूँ.

उसने एक ही झटका मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया।मेरी इतनी तेज़ चीख निकली और मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरी चूत में गरम सरिया घुसा दिया हो।मैं गाली देते हुए उसके पेट को पकड़ कर बोली- औउईई भैन के लौड़े.

जाते-जाते उन्होंने मेरा फोन नम्बर ले लिया, बोले- अगली बार फिर बुलाएँगे और आराम से कुछ दिन तक चोदेंगे।फिर जाते वक्त सबने मुझे किस किया. बेबी ड्राइवरऔर मैं हँसने लगा।फिर हम वहाँ से निकल गए और घर पहुँचने ही वाले थे कि भैया ने बीच में कार रोक दी और बोले- यार एक बार और चूस दे।मैंने स्माइल दी और भैया के लंड के ऊपर मुँह लगाकर चूसने लगा. देहाती लड़की के सेक्सी वीडियोपर एक दिन उसके घर पर कोई नहीं था और मैं उनके घर कुछ मूवीज की डीवीडी लेने गया।मैंने जाकर उनके घर की घन्टी बजाई जब किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला. तो मैंने अपना लंड आंटी की गाण्ड पर सैट करके करारा धक्का मारा और मेरा आधा लंड आंटी की गाण्ड में घुसता चला गया।आंटी को बहुत दर्द हो रहा था और वो गालियाँ भी दे रही थीं- भेंचोद.

मेरी ही चाह मुझे होने लगी थी।मेरे प्रिय साथियों इस दास्तान की लेखिका नगमा तक आपके विचारों को भेजने के लिए आप डिसकस कमेंट्स पर लिख सकते हैं.

मन भर के चोद कर आता था।जब वो घर भी आती थी तो भी मैं आ जाता था और हम दोनों खूब मजे करते थे।तो दोस्तो, मेरे बहनचोद बनने की दास्तान कैसी लगी. आशिमा ने तो लार्ज बनवाए, हम दोनों दारू पीकर टुन्न हो गए, फिर जाकर एक सोफे पर गिलास लेकर बैठ गए।मगर मैं धीरे-धीरे पीने लगी और साथ में सिगरेट भी चलती रही।अब मैं खड़ी हुई और डान्स फ्लोर पर जाने लगी और वहाँ अकेले डान्स करने लगी।मैंने अपनी सहेली आशिमा को देखा उसको तो ज़्यादा चढ़ गई थी, मैं उसके पास गई तो बोली- मेरे को टॉयलेट ले चल. आंटी मुस्कुराने लगीं और कहने लगीं- ऐसे तो कमजोर हो जाओगे।मैंने कहा- अगर मेरी इतनी फिकर है तो आप मेरा काम कर दो.

मगर वो नजारा उसकी आँखों के सामने से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था।तो उसने कुछ सोचा और वापस पुनीत की तरफ़ करवट ले ली।दोस्तो, पूजा की कही हुई बातें और रात की तन्हाई. ’ मैं उसको कन्डोम देते हुए बोला।सोनिया- ओके।उसने मुझे कन्डोम पहना दिया फिर मैंने उसको गोद में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत पर उंगली फिराने लगा।कुछ देर ऐसा करने के बाद एक उंगली उसकी चूत में डाल दी, उसके मुँह से सीत्कार निकल रही थी. मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी उतार फेंकी और उसको चूमते हुए पेट से होता हुआ अपने होंठों को उसकी चूत पर रख दिए।संध्या ने बड़ी ही कामुक आवाज निकाली ‘आऊऊ ऊऊउह ऊऊऊ चच.

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उसी बिस्तर पर लेट कर मैंने कन्डोम के एक पैकेट को खोलकर अन्दर का माल बाहर निकाला।पहली बार मैं एक कन्डोम को हाथ में ले रही थी. उसने थोड़ा भाव खाते हुए आखिर में ‘हाँ’ कर दिया।उसके बाद तो हमारी घंटों फोन पर बातें होती रहती थीं।उन्हीं दिनों हमने अपनी सामने वाली सोसायटी में नया घर लिया था. मैं सोने जा रहा हूँ।उन्होंने कुछ नहीं कहा और मैं तेज़ी से अपने कमरे में आ गया। उनके नाम की मुठ्ठ मारी और सो गया।मुझे एग्जाम के दिनों में सुबह जल्दी उठ कर पढ़ने की आदत है.

मेरा हाथ बुक की वजह से किसी को नहीं दिख रहा था। मैंने धीरे-धीरे उसकी पीठ पर हाथ फेरना चालू किया। तब मुझे पता चला कि कल्याणी ने यूनिफार्म के अन्दर एक ब्रा और समीज पहनी हुई है। कल्याणी की समीज पीछे की तरफ फटी हुई थी।मैं पूरे जोश में था.

जो काफ़ी अश्लील और लैंगिक थे।लड़की बॉस के मोटे तगड़े लण्ड की प्रशंसा काफ़ी अश्लील और रंगीन शब्दों में कर रही थी और उसके साथ क्या कराना चाहती है.

अब मैंने मुंह चूत में डाल दिया और उसकी भग को और चूत के लबों को चाटने लगा। फिर मेरा पूरा ध्यान उर्मि की चूत में छिपे भगपर चला गया,. मैं उसको चूमने लगा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !उसकी ब्रा का हुक मैंने पहले ही खोल दिया था. हिंदी नई ब्लू फिल्मतो उस दिन मुझे बहुत बुरा लगता था। मतलब मुझे कुछ अच्छा नहीं लगता था।ठीक यही उनका भी हाल होता था।फिर एक दिन उन्होंने कहा- तुम मुझे अपनी पिक नहीं दिखाओगे?मैंने कहा- क्यों नहीं.

मेरी कहानी आपको वासना के उस गहरे दरिया में डुबो देगी जो आपने हो सकता है कभी अपने हसीन सपनों में देखा हो. ’तभी मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर लेटा दिया और उसके ऊपर आकर उसकी चूत में लंड डालने लगा।तो वो बोली- नहीं. तो आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected].

अंजलि- तुम्हारे भइया आज सुबह ही ऑफिस के काम से दिल्ली गए हैं अब वे 2-3 दिन में आयेंगे।मैं- अच्छा भाभी. तो ऐसा करते हैं कि कल सुबह की कोचिंग के बाद मैं सीधा तुम्हारे साथ इधर ही आऊँगी। हमें पढ़ने के लिए स्कूल टाइम से पहले 1 घंटा मिल जाएगा।मैंने कहा- ठीक है.

वो औंधी लेट गई। फिर मैंने अलमारी मे से तेल की बोतल निकाली और थोड़ा सा तेल अपने हाथों में ले कर उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने उसकी पीठ पर मसाज करना शुरू कर दिया। पीठ के बाद पैरों की मालिश की और फिर उसे सीधा लेटने को कहा।वो सीधी हो गई.

उस पर मैडम ने कहा- मैं चखना चाहती हूँ।और मैं मैडम के मुँह में ही झड़ गया, मैडम ने एक बूंद भी नहीं छोड़ी. उनकी कमर पर हाथ फेरने से मेरे पूरे बदन में करेंट सा दौड़ गया।मैंने यह कहते हुए अपना पजामा खोल दिया कि भीग जाएगा।फिर मैंने ‘रबिंग पैड’ से कमर को ज़ोर से रगड़ा. चलो अब मैं आप लोगों के साथ ही बैठ कर देख लूँगा।अब मैं और नावेद कोल्ड ड्रिंक्स सिप करते हुए अन्दर की तरफ बढ़े.

क्सनक्सक्स कॉम को देखती रहीं।इस कहानी के बारे में अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे जरूर लिखें।कहानी जारी है।[emailprotected]. पर तेरे चाचा को ये पसंद नहीं है।मैंने कहा- ठीक है।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !चाची ने मेरा लंड पकड़ा और मुँह में ले लिया।चाची बड़ी मस्त होकर लण्ड चूस रही थीं.

नहीं तो प्राब्लम हो जाएगी, यह पानी ऐसे गिरता रहेगा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !पायल उठी और बाथरूम में जाकर बैठ गई और अपना ध्यान इस बात से हटाने की कोशिश करने लगी।दोस्तो, एक बहुत पुराना राज. अब ये इसको कच्चा खा जाएगा।पुनीत सीधा रॉनी के पास गया और बिस्तर पर बैठ गया।रॉनी- क्यों भाई अब आगे का क्या प्लान है?पुनीत- प्लान क्या था. जिसमें सन्नी ने दोबारा गोली मिला दी थी।खाने के बाद वो बुलबुल के सामने जाकर रुक गए।पुनीत- चलो भाई रॉनी जो काम अधूरा है.

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दोस्तो, मैं दिल्ली में रहने वाला एक नवयुवक हूँ, इस साईट का एक नियमित पाठक हूँ।मेरे साथ यह घटना मुझसे उम्र में बड़ी एक आंटी के साथ घटी थी। आंटी जी मेरे पड़ोस में ही रहती थीं।आंटी के कहने पर मैं उनके लड़के को पढ़ाने लगा और इस बहाने मुझे उनके घर जाने का अवसर मिलने लगा। धीरे-धीरे मेरी उनसे बातचीत होने लगी और अब तो हँसी-मजाक भी होने लगा था।आंटी मुझसे अब खुलने लगी थीं. तो वो बोली- मैंने इस फंक्शन के प्रोग्राम में भाग नहीं लिया था।मैंने कारण पूछा तो बोली- मुझे कोई डान्स सिखाने वाला ही नहीं था।तो मैं बोला- अरे मुझसे कहती. और एकदम से अपनी आँखें जोर से बंद करते हुए अपने दोनों हाथ मेरे और फैजान के सिर पर रख दिए और हम दोनों के सिर को नीचे अपनी चूचियों पर दबाने लगी और चिल्लाई- उफफ्फ़.

पायल के जाने के बाद पूजा वहीं बैठ कर पुराने लम्हों को याद करके मुस्कुराने लगी।दोस्तो, अब पायल जब तक नहीं आ जाती. इसलिए वहीं बैठा रहा। कुछ देर बाद चाची दो कटोरियों में आइसक्रीम ले कर आईं और बोलीं- लो खा लो।मैंने आइसक्रीम ले ली और चाची भी वहीं मेरे साथ सट कर बैठ गईं। हम दोनों टीवी देखने लगे। सुमन चाची की नरम गुंदाज़ जाँघें मेरी जांघों से छूने लगीं.

तो बताया क्यों नहीं?सोनाली- मैंने बहुत कोशिश की लेकिन तुमने कभी ध्यान ही नहीं दिया और अभी भी ज़बरदस्ती नहीं करती तो क्या तुम मानते?सूर्या- सुशान्त मुझे भाई बोलता है ना.

मैं मुंबई में कल्याण शहर से एक महाराष्ट्रियन परिवार से हूँ। मेरे परिवार में माँ-पापा और 2 छोटी बहनें हैं। हमारा कल्याण में खुद का घर है. फैजान को तो पहले ही पता था कि उसकी बहन ने नीचे से ब्रा नहीं पहनी हुई है और अब जब उसने अपनी चूचियों उसकी पीठ से लगाईं. अब पोजीशन बहुत मस्त बन गई। मेरे नीचे एक लड़का जिसका लंड गाण्ड में घुसा था और दूसरा लड़का मेरी चूत में लौड़ा घुसेड़े हुए था। दोनों धकापेल चोद रहे थे।मैडम मेरे बराबर में अपने मम्मों को चुसवा रही थी और एक लड़का मेरे मुँह में लौड़ा चुसवा रहा था।उनके पीछे से एक लड़का मैडम की गाण्ड मार रहा था। करीब 15 मिनट की बुरी तरह चुदाई चली। अब मैं और दोनों लड़के झड़ गए.

उसे गुदगुदी हो रही थी।मैंने उसके दोनों पैर अपनी कमर के इर्द-गिर्द डाल लिए और उसकी मक्खन सी चिकनी चूत पर अपने लंड की नोक को टिका दिया और बस सहलाते हुए एक तगड़ा धक्का मार दिया. मुझे मेरी कार दी और दोपहर को मुझे जाने दिया। मुझे भी बहुत मजा आया। ये चुदाई भी मेरी बहुत मस्त रही।तो दोस्तो, बताओ मेरी कहानी कैसे लगी. मेरा मन तो कर रहा था कि खा जाऊँ।मैंने चाची की चूत पर दांत से काट दिया तो चाची जोर से चिल्ला उठी और मैं हँसने लगा।तभी चाची ने भी मेरे लण्ड पर काट दिया और वो हँसने लगीं।लगभग आधे घंटे तक यही चलता रहा और अब सुबह के 4 बज चुके थे।फिर चाची ने कहा- चलो सोते हैं।मैंने मना कर दिया और कहा- अभी नहीं.

किंतु फ्लश और दरवाजा खुलने की आवाज़ सुन कर उन्होंने अपने बदन को तुरंत सामने से तौलिया से ढक लिया और हड़बड़ी में मुझे देखकर पीछे घूम गईं।जबकि पीछे पीठ पर तौलिया नहीं था और उनके पूरे नंगे बदन को देखकर मेरे पूरे बदन में सनसनी फ़ैल गई।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !क्या सेक्सी सीन था.

बीएफ सेकसी विडियो: वैसे गाण्ड मारने में खुद की गाण्ड भी फट जाती है और ये सब बड़े प्यार से करना होता है, पर मैंने ये कैसे किया. उसको जोरों की भूख लगी थी।वहाँ किसी ने उससे ज़्यादा बात नहीं की और उसको नाश्ता दे दिया। वैसे मुनिया को भी उनसें बात नहीं करनी थी.

क्या कर रहे हैं?जाहिरा बोली- आ रहे हैं वो बस अभी आते हैं।वो मेरे सवाल का जवाब देने में घबरा रही थी। फिर वो आहिस्ता से बोली- भाभी आपने मेरी ब्रा वहीं बिस्तर पर ही फेंक दी थी क्या?मैं- ओह हाँ. अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही थी।वो आए और मेरे पास आकर मुझसे ज़माने भर की बात करने लगे।मुझे इंतजार था कि वो कब अपना लण्ड मुझे दिखाएं. अब मेरे लौड़े के ऊपर सिर्फ एक निक्कर ही बची थी। अब आपस में हमारी रानों की नर्माहट को मैं महसूस कर रहा था।एक हाथ मैंने उसकी पीठ पर रख दिया और उसे आहिस्ता से सहलाने लगा.

हम भी थोड़ी देर में आ रहे हैं।जाहिरा ने एक मुस्कुराती हुई नज़र अपने भाई पर डाली और फिर अपने चूतड़ों को ठुमकाते हुए अन्दर चली गई।मैं फैजान के साथ चिपक कर बोली- देखा अपनी बहन को.

फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।वो फिर जल्दी ही झड़ गई और मैं अपनी जीभ से उसकी चूत से निकली हुई पूरी मलाई चाट गया और इस बीच मैं भी एक बार झड़ चुका था।अब वो चुदने के लिए पूरी तरह तैयार थी। जब उसने कहा ‘ये मेरा पहली बार है. अब आप बैठो मैं कुछ चाय नाश्ता लाती हूँ।” वो बोली और पायल छनकाती हुई भीतर चली गई।तभी मुझे सामने के मुख्य दरवाजे से भाभीजी आती दिखाई दीं. मेरी भांजी पुष्पा भी जाग रही थी, वो मेरी तरफ मुँह करके आ गई, हम दोनों के होंठ आपस में मिल गए मेरा नाज़ुक माल.