बीएफ सेक्स नंगी फिल्म

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पर औरत को बहुत तकलीफ़ होती है। इसलिए मैं भी तेरा लण्ड अपनी बुंड में नहीं सहन कर सकती हूँ।फिर अचानक पता नहीं उसके मन में क्या आया. फिर धीरे-धीरे मैंने उसकी सूट की चैन खोली और कमर पर किस करते हुए उसे उसके बदन से अलग कर दिया।उसने नीचे लाइट ग्रीन कलर की सॉफ्ट ब्रा पहनी थी. तो शादी की गर्मी लगभग ख़्त्म ही समझो।बिल्कुल मेरे माता-पिता की तरह पति भी मेरी खूबसूरती से परेशान थे। उनकी नाकामयाबी.

मेरे घर पर कोई नहीं है।मैंने मम्मी को बताया- भैया के घर जा रहा हूँ।उन्होंने ‘हाँ’ कहा और मैं जल्दी से निकल गया।जैसे ही मैंने उनके घर की बेल बजाई. टोनी- कैसा नाटक भाई आप बताओ?सन्नी ने आगे का गेम उसको समझा दिया। उसके बाद कुछ देर वहाँ पीने का प्रोग्राम चला और सन्नी वहाँ से चला गया।दोस्तो, शुरू में जिस नकाबपोश ने पूजा की चुदाई की थी.

मैं तो अपनी चूत की आग मिटा कर ही आऊँगी।पूजा को दरवाजे की ओर आता देख कर वो शख्स जो कब से सब देख रहा था.

बस हम दोनों को ये जानते हैं कि हम दोनों बुर में ऊँगली करते हैं पर चाची और बहन की तरह बुर या गाण्ड चटवाना या चुदाई की बातें नहीं की हैं।तो मैंने कहा- इतना काफ़ी है।और मैंने अपना सारा प्लान माँ को बता दिया।अगले दिन सुबह प्लान के मुताबिक मैं लुँगी पहन कर बाहर गया तो देखा माँ और दीदी बातें कर रही थीं।मुझे देख कर माँ ने दीदी से कहा- जा भाई के लिए चाय ले आ।तो दीदी रसोई में चली गईं.

तो अचानक से बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई और थोड़ी ही देर में झमाझम बारिश होने लगी। मैं और जाहिरा दोनों ही पिछले सहन में भागीं कि बारिश देखते हैं।देखते ही देखते बारिश तेज होने लगी। मैंने कहा- जाहिरा आओ बारिश में नहाते हैं।जाहिरा बोली- लेकिन भाभी यह नई ड्रेस खराब हो जाएगी. मैं उस समय तक एकदम कुँवारी थी, मैंने कभी किसी के साथ सेक्स तो क्या उंगली भी नहीं की थी।एक बार पापा-मम्मी और भैया किसी काम से बाहर गए हुए थे और मेरे मामा जी को मेरे घर पर रहने के लिए आना था।उस दिन मेरी तबियत थोड़ी ख़राब थी तो मैं कॉलेज नहीं गई थी।मैं सुबह 9 बजे उठी. मैं उसे पढ़ाई के बारे में समझाने लगा।कुछ देर बाद हम लोग इधर-उधर की बातें करने लगे।जब उसने एकदम से मुझसे पूछा- वर्जिन किसे कहते हैं?तो मैं हैरान रह गया, मैंने अपने दिल में सोचा कि आज तो कमाल ही हो गया.

आज वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।मैंने जाते ही उसे गले से लगा लिया और चूमने लगा। हमारा ये चुम्बन 10 मिनट चला होगा. और फिर तू तो मेरे सामने कई बार नंगी हो चुकी है।तो दीदी मेरी ओर इशारा करने लगी।माँ बोलीं- ये बेचारा तो वैसे ही परेशान है और ये भी तो नंगा ही है और तुझसे छोटा ही है. उसने फिर से मेरी चूत में अपना हथियार डालने लगा। मैडम मेरी चूत और उसके घुसते हुए लंड को चाटने लगी।कुछ देर में वो भी झड़ गया।अब हम सब ही बहुत थक चुके थे और मुझे आज सही में बहुत मजा आया था.

उधर जाहिरा अब अपनी टाइट्स के अन्दर हाथ डाल कर अपनी चूत को सहला रही थी और आँखें बंद किए हुए खुद को ओर्गैज्म पर ले जाने की कोशिश कर रही थी।यह सब वो अपने भाई के सामने कर रही थी.

जो पहले से ही काफ़ी बड़े थे और मेरे दबाने और मसलने और ज्यादा बड़े हो गए थे।थोड़ी देर बाद मैं उसकी गर्दन पर चुम्बन करते हुए उसके चूचों को चुम्बन करने लगा। मैंने एक हाथ से उसकी जींस का बटन खोल दिया और उसके अन्दर हाथ डाल कर पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।कुछ देर बाद मैंने उसकी जींस नीचे की और उसकी चूत को सहलाने लगा और ऊँगली डालने लगा।अब आगे. मेरे लण्ड के मुँह में पानी आने लगा।अब हम दोनों बिस्तर पर नंगे ही 69 अवस्था में आ गए थे और एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा और एक उंगली अन्दर डाल दी. मैं आपका लंड बिस्किट की तरह गर्म-गर्म चाय में डुबो कर ना ले लूँ?फैजान भी इस बात पर हँसने लगा और उन दोनों की शरारतों और अठखेलियों पर मेरी भी हँसी छूट गई.

जिससे चूत पानी-पानी हो गई और धारा से धारा मिल गई यानि मुनिया भी झड़ गई।पुनीत ने जब चूत से लौड़ा बाहर निकाला तो सफेद और लाल रंग का मिला-जुला पानी लौड़े के साथ बाहर आया।पुनीत- आह मुनिया. इसके बाद टोनी अलग हो गया और वो चारों एक साथ गाड़ी में एक होटल गए। वहाँ खाने का ऑर्डर दिया और बातें करने लगे।पुनीत- अरे यार हमारा तो दूसरा प्रोग्राम था ना. मैंने देखा कि लोहा गरम है इस पर हथौड़ा मार देना चाहिए।अब मैंने एक उंगली से उसकी चूत को कपड़ों के ऊपर से ही सहला दिया। वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि मुझसे चिपक गई।मैं इतना अच्छा मौका कैसे जाने दे सकता था.

लेकिन उसकी एक न चली और मैंने उसकी चूत को उंगलियों से आहिस्ता-आहिस्ता कुरेदना शुरू कर दिया।इसका असर यह हुआ कि उसका प्रतिरोध लगभग समाप्त हो गया और उसने अपने पैरों को थोड़ा सा खोल दिया, अब मेरे लिए उसकी जाँघों और चूत से खेलना आसान हो गया था.

लेटने से पहले उन्होंने मेरे माथे पर चुम्बन किया और मुस्कुरा कर सो गईं।अब तक मैं ये जान चुका था कि माँ को सब पता है और वो जागी रहती हैं पर चूँकि वो कुछ नहीं कहतीं और चुपचाप मज़े लेती थीं. लेकिन लाइट आ जाने पर सब लोग नीचे आकर सो जाते थे।हुआ यह कि सभी लोग ऊपर सो रहे थे लाइट आ गई तो सब लोग नीचे आकर सो गए.

बीएफ सेक्स नंगी फिल्म सारे लोग तथा बहन आराम से सो रहे थे। मैं अपनी भांजी की चूत का उद्घाटन करने जा रहा था। अब मैंने उसकी चड्डी कमर से घुटनों तक नीचे को खिसका दी।मैंने फिर एक बार आस-पास सभी को देखा. फिर मैंने अपने पैंट की चैन खोल कर लंड को बाहर निकाल दिया और अपने पैर को उसकी साड़ी के अन्दर चूत के ऊपर पैन्टी पर रख दिया.

बीएफ सेक्स नंगी फिल्म कि वो मेरे लण्ड के नीचे आ ही गई थी।मैंने भी अपने कपड़े पहने और हम दोनों बाहर आकर जीने में बैठ गए।चुदाई में तो समय का खयाल ही नहीं रहा। थोड़ी देर में उसकी दीदी आ गई और वह अपने कमरे में चली गई। फिर कुछ दिन बाद उसने अपने दोस्त से शादी कर ली व उसके बाद हम कभी नहीं मिले. यदि मुझसे इस कहानी में कोई गलती हो जाए तो पहली कहानी मान कर मुझे माफ़ कर दीजिएगा।मेरा नाम अनामिका जैन है.

ताकि उसका भाई उसकी आवाज़ ना सुन सके।मैंने दोबारा से उसकी गर्दन पर अपनी गरम-गरम साँसें छोड़ते हुए कहा- आज तो तू क़यामत लग रही है।जाहिरा बोली- और भाभी आप तो हर रोज़ और हर वक़्त ही क़यामत लगती हो.

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लेकिन मैं अभी भी खामोश बैठी हुई थी।वो थोड़ा सा मेरी तरफ दोबारा झुका और अपने होंठों को मेरे नंगे कन्धों पर रख कर बोला- प्लीज़ भाभी नाराज़ ना हों. कुछ नहीं होगा।मैंने उसकी चूत में लण्ड को और अन्दर घुसाना शुरू किया।जल्द ही उसने अपना रस छोड़ दिया और ‘पुच. कुछ ही देर में जाहिरा का हाथ फिसलता हो अपने भैया के लौड़े पर आ गया। उसने अपने भाई के लंड पर अपना हाथ रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसको सहलाने लगी। पीछे से वो अपने होंठों को फैजान की गर्दन पर टच कर रही थी। कभी-कभी मौका देख कर उसे चूम भी लेती थी। जाहिरा के फैजान की गर्दन पर चूमने की हल्की सी आवाज़ मेरे कान में भी आई।‘ना कर.

हॉस्टल में रह कर ठीक से पढ़ाई कर सकूँगी।पूजा- तेरे पापा को पता है कि तू उनके राज़ जान गई है?पायल- ये मैं नहीं जानती. मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था और उसे भी चुदास चढ़ रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर चित्त लिटाया और उसकी चूत में अपना लण्ड डालने लगा. तो माँ हँसने लगीं और चाय बनाने लगीं।चाय पीकर मैं रसोई से बाहर आ गया और माँ नंगी ही खाना बनाने लगीं। फिर उसके बाद कुछ नहीं हुआ.

लगता है तुमने आज ही हेयर रिमूविंग की है।जाहिरा ने शर्मा कर कहा- हाँ सुबह आपके जाने के बाद किए थे।फैजान- यानि कि तुमने मेरे लिए अपनी चूत के बाल साफ़ किए हैं ना?जाहिरा शर्मा कर बोली- अब ज्यादा भी खुशफ़हमी में ना रहें आप.

मेरे लौड़े के चूत में अन्दर जाते ही हम दोनों तो जैसे जन्नत में पहुँच गए।उसका पति हम दोनों के बाजू से अपनी वाइफ से चिपक गया।वो कामुक निगाहों से अपनी वाईफ को देखने लगा और उसकी वाईफ सिसकारियाँ लेते हुए बोली- दीप देखो ना विजय का लण्ड कैसे मेरी चूत में जा रहा है।तभी दीप बोला- हाँ डार्लिंग. दोस्तो, आपको हमारी सच्ची घटना पसंद आई या नहीं, कृपया हमें लिखें[emailprotected]पर्…हम पत्येक पत्र का उत्तर देने का प्रयत्न करेंगे।धन्यवाद. जैसे वो छूटने वाला हुआ तो जाहिरा ने उसका लंड उसके शॉर्ट्स के अन्दर ही डाल दिया और ऊपर से दबा दिया।इसी के साथ ही फैजान का पूरे का पूरा पानी उसके शॉर्ट्स के अन्दर ही निकलने लगा।‘ऊऊऊहह.

देखो मना नहीं करना।मैं समझा कि पूजा मजाक कर रही है लेकिन पूजा ने अलमारी से एक मोटी सी कैंडिल निकाली… जिसको देखता ही रह गया। उस कैंडिल की शक्ल बिल्कुल लंड की तरह थी और जिसकी लम्बाई एक फुट की थी। जिसे देख कर मेरी गाण्ड फटने लगी कि यदि इसने सचमुच मेरे गाण्ड में डाल दिया. पुनीत पेट के बल लेट गया और मुनिया उसके कंधे-कमर आदि को दबाने लगी।मुनिया के छोटे-छोटे और मुलायम हाथों के स्पर्श से पुनीत के जिस्म में वासना की लहर दौड़ने लगी. जाहिरा- भाभी यह क्या है?मैं- अरे यार तुम्हारे लिए कुछ नई ब्रा मँगवाई हैं मेरा तो मार्केट में चक्कर लग ही नहीं पा रहा था.

वो पता नहीं अभी किस हालत में बैठे हों।तो इस तरह से नावेद को सब कुछ पता चल जाएगा और फिर उन दोनों बहन-भाई को भी एंजाय करने का वक़्त नहीं मिलेगा।हम इतनी देर में हॉल में एंटर हुए थे तो अन्दर फिर से बहुत ही अँधेरा हो गया था।नावेद बोला- भाभी फैजान भाई कहाँ पर बैठे हैं. और कहा- तू मुझे कितना प्यार करता है? क्या तू अपनी मॉम की माँग भर सकता है? मॉम की बात सुनकर मेरा चेहरा खिल उठा।मैंने मॉम से कहा- ओह मॉम आई रियली लव यू.

तो छत पर उसका पैर फिसल गया।इससे उसके पैर में मोच आ गई और वो वहीं पर गिर गई और ज़ोर से चिल्लाई- ऊऊयय्यी माँ. तो वैसे ही नंगे एक-दूसरे की बाँहों में बाँहें डाल कर सो गए।अब क्या था साली तो पट चुकी थी और चुद भी चुकी थी. पर मेरे समझाने के बाद वो मान ग़ई।उसने लंड को अपने मुँह में डाल लिया और पागलों की तरह चूसने लगी।मुझे भी इसमें बहुत मज़ा आ रहा था.

तो उससे मिलकर वो निकल जाए, इसीलिए वो वहीं बिस्तर पर बैठ गई।उधर बाहर टोनी अपने दोस्तों के साथ पायल का इन्तजार कर रहा था और उससे कुछ दूरी पर टोनी के भाड़े के गुंडे भी खड़े उसके इशारे का इन्तजार कर रहे थे।विवेक कोल्ड ड्रिंक लेने गया तो उसे दूर सन्नी खड़ा हुआ दिखाई दिया.

और उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कल्याणी कुछ बोल क्यों नहीं रही थी।शायद कल्याणी को लग रहा था कि मैं ही उसे टच कर रहा हूँ।मैंने नितिन को किसी से कुछ न कहने को कहा. कुछ दिन पहले मैंने इन दोनों के साथ उस जालिम को देखा है। मैं उसकी सूरत कभी नहीं भूल सकता तुम मानो या ना मानो. लेकिन फिसल गया। फिर मैंने अपना सुपाड़ा चमड़ी से ढक लिया और सही एंगिल बना कर उसे चूत में दबाने लगा। बड़ी कोशिश के बाद लण्ड का अगला सिरा चूत में घुस कर.

ताकि अगली बार जब वह आए तो मुझसे शरमाए नहीं।इस बार तो मैंने उसकी दीदी की चूत से ही अपने लण्ड का काम चलाया।अगले दिन वो वापस चली गई व ठीक 10 दिन बाद फिर आ गई. यदि मुझसे इस कहानी में कोई गलती हो जाए तो पहली कहानी मान कर मुझे माफ़ कर दीजिएगा।मेरा नाम अनामिका जैन है.

मैं नहा कर आती हूँ।वो नहाने चली गई। मैंने फटाफट घर के सारे खिड़कियाँ व दरवाजे बंद किए और बाथरूम के दरवाजे की दरार से उन्हें नहाते हुए देखने लगा।वो पूरी नंगी होकर नहा रही थी और साबुन को बार-बार अपनी चूत पर और चूचियों पर रगड़ रही थी. अब मेरा लण्ड रॉड की तरह कड़क हो गया था। मैं लगातार मन्जू को चुम्बन कर रहा था।मंजू बोली- और मत तड़पा सैम. इसलिए मेरा और मेरे लौड़े का बुरा हाल हो रहा था।अब मैं अपने घर वापस आ गया था। वैसे तो चाची से फोन पर बात होती रहती थी और हम फोन सेक्स किया करते थे.

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वहाँ पर इसको एक दुकानदार चोदता था और ये उससे सामान फ्री में ले जाती थी।मैं- क्या बात कर रहा यार तू?दोस्त- सच यार तू भी ट्राई मार के देख.

मैं डर गई और जल्दी से मॉम के कमरे की तरफ़ भागी और नॉक किया।आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. फैजान भी हमारी साथ ही नहाने लगा। लेकिन अभी तक कोई भी कुछ भी शरारत नहीं कर रहा था।फैजान का पूरा जिस्म बिल्कुल ही नंगा था और नीचे जो कॉटन शॉर्ट्स पहने हुए था. कॉलेज के समय से ही मेरे काफ़ी ब्वॉय-फ्रेण्ड रहे हैं और मैंने शादी के पहले खूब जी भर के चूत और गाण्ड मरवाई है। यहाँ तक कि अपने प्रोफेसर्स तक के लौड़े खाए हैं।मेरी जब शादी हुई तो पति को पता चल गया था कि मैंने खूब चुदवाया है। दिखने में मैं माल हूँ.

तो हम एक कैफे में कॉफी पीने चले गए और वहाँ हम दोनों ने एक-दूसरे के बारे में काफ़ी बातें की।वो मुझसे काफ़ी इंप्रेस हो गई थी. एक लम्हे के लिए तो शायद फैजान को सब कुछ भूल गया और उसने आहिस्ता-आहिस्ता अपनी बहन की चूची को दबाना शुरू कर दिया।फिर जैसे उसे अचानक से अहसास हुआ तो उसने अपने होंठ और हाथ दोनों ही अपनी बहन के जिस्म से पीछे कर लिए. क्सक्सक्स वीडियो सेक्सी हिंदी मेंमेरे सामने कैसी शरम और अब तो दीदी के सामने भी शरमाने की कोई ज़रूरत नहीं है।इस कहानी के बारे में अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे जरूर लिखें।कहानी जारी है।[emailprotected].

मैंने अपनी बीवी से कहा- तुम्हारी इस सहेली को पहले कभी नहीं देखा और यह हमारी शादी में भी नहीं आई थी।वो बोली- जिस दिन हमारी शादी थी. जैसे मैं उसे थोड़ी नाराज़गी दिखा रही हूँ।नावेद ने दोबारा से अपना हाथ मेरी नंगी बाज़ू पर रखा और आहिस्ता आहिस्ता मेरी नंगी बाज़ू को सहलाते हुए बोला- भाभी प्लीज़.

फिर मैंने उसकी उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत पर किस किया तो वो काँप उठी।फिर मैंने उसकी पैन्टी भी उतार दी. और फिर उन्होंने बताया कि हम दोनों 12वीं क्लास से एक-दूसरे की अच्छी दोस्त हैं पर बारहवीं कक्षा के बाद नयना मेडिकल में चली गई और दीप्ति मैनेजमेंट की तरफ चली गई थी।अब नयना ने मुझे टीज़ करने की तैयारी शुरू की और वो धीरे-धीरे अपने टॉप को ऊपर करने लगी। जैसा कि मैंने कहा है शुरूआत में उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी. और मैं तो खुद को बिल्कुल बिना कपड़ों के उन दोनों के हवाले करने वाला हूँ। यह सब सोचते हुए मैं अपने अपार्टमेंट से उतर कर नयना के अपार्टमेंट में जा चुका था।पड़ोस वाली बिल्डिंग में ही रहता था इसलिए वॉचमैन ने भी ज़्यादा कुछ पूछने की ज़रूरत नहीं समझी।मैं लिफ्ट में चढ़ गया.

’ मैंने कह दिया।आरती मुझे याद करे और मैं न जाऊँ ये तो संभव ही नहीं था। होली आने में अभी 8-10 दिन थे। मैंने उसी दिन शताब्दी में रिज़र्वेशन करा लिया।ट्रेन चल पड़ी थी. ‘लेकिन माँ ज्यादा तनने के कारण मेरे लंड में अब बहुत खुजली हो रही है।’ मैंने लंड माँ की तरफ बढ़ाते हुए कहा।तो माँ बोलीं- ठीक है. तभी मुझे महसूस हुआ कि माँ की बुर से कुछ मुलायम सा चमड़े का टुकड़ा लटक रहा है।जब मैंने उसे हल्के से खींचा तो पता चला कि वो माँ की बुर की पूरी लम्बाई के बराबर यानि ऊपर से नीचे तक की लंबाई में बाहर की तरफ निकला हुआ था और जबरदस्त मुलायम था।उस समय मेरा लंड इतना टाइट हो गया था कि लगा जैसे फट जाएगा.

वहीं मेरा दोस्त भी आ गया था। तब तक और मैंने उसे एक पेपर में अपना नंबर लिखा और दोस्त से बोला- ये कागज़ उसे दे दो।उसने दे दिया.

दोनों बड़े आराम से देख रहे थे। तभी एक ऐसा सीन आया कि मेरी आँखें बस स्क्रीन पर जम कर रह गईं। एक आदमी एक बहुत ही मस्त लड़की को किस कर रहा था और उसके चूचे दबा रहा था. देख लेना और अगर कुछ चेंज-वेंज करना हो तो भी करवा लाऊँगा।मैंने भी बड़े ही साधारण तरीके से उससे बैग लिया और उसे कमरे में एक तरफ ‘ओके’ कह कर रख दिया.

मैं नहीं बताऊँगा और मैं आपका काम भी कर दूँगा।बस उस दिन से आंटी मेरे से बहुत खुल कर बातें करने लगीं और मेरे से एक दिन बोलीं- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?मैंने कहा- नहीं. वो आगे की तरफ़ झुकी ताकि छूट सके… लेकिन उसकी इस हरकत से लंड और टाइट हो गया क्योंकि अब उसका मुँह नीचे बिस्तर पर टिका था और घुटने उठे हुए थे।‘उओ आआहह. फिर देखना कितना मज़ा आएगा।मैंने सारा प्रोग्राम जाहिरा को समझाया और फिर हम दोनों रसोई में खाना बनाने के लिए आ गए।जैसे ही दोपहर में फैजान घर वापिस आया तो सबसे पहले मैंने उसे वेलकम किया। मैं गेट पर हस्बे मामूल.

उसको अच्छा लग रहा था, उसके लंड में अकड़न शुरू हो गई थी। तभी तो उसके मुँह से ऐसी बात निकल पड़ी।पायल तो वैसे भी अपने होश में नहीं थी, पुनीत की बात सीधे उसकी चूत पर लगी यानि उसकी चूत ये सोच कर गीली हो गई कि पुनीत के सामने जब वो नंगी होगी. तो अब तो दिल्ली में रहती है।मैं- तब तो उसको मेरे बेडरूम मे आने में ज्यादा देर नहीं लगेगी!सोनाली- हाँ. ये बात पुनीत जानता था।आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected].

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पॉर्न फोटो

तो अन्दर कमरे की रोशनी में मेरे ही बिस्तर पर दोनों बहन-भाई एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे।जाहिरा- प्लीज़ भैया. सिर्फ अंडरवियर में रह गया था।वो दवा लेकर आईं और मजाक करते हुए बोलीं- इसे भी उतार देते।हम दोनों हँसने लगे।वो बोलीं- चल बिस्तर पर लेट जा।मेरा अंडरवियर गीला होने के कारण मेरा लौड़ा साफ दिख रहा था, उनकी नजर मेरे मोटे लण्ड से हट नहीं रही थी।दवा लगा कर बोलीं- तुम्हारे अन्दर भी चोट आई है ना. वो शबनम क्या बोल रही थी? कि वो अपने जीजू से उसकी सील तुड़वा के रहेगी? आरती जैसी भोली-भाली नासमझ लड़की को वो किस बहाने कहीं ले जाकर किस-किस से चुदवा देगी। यह कौन जान सकता है??’इससे तो अच्छा है कि तू ही सबसे पहले भोग ले.

जिससे नाईटी नीचे गिर गई।अब माँ और मैं पूरी तरह नंगे हो गए थे।मैं पीछे से हट कर माँ के सामने आ गया और मूढ़े पर बैठ कर माँ की बुर को फैलाते हुए उनकी बुर से बाहर लटकते हुए चमड़े को मुँह में भर लिया और चूसने लगा।माँ ने मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर से और सटा दिया. तभी वो बोरोलीन लेकर आ गईं और मेरे लंड को हाथ में लेकर सुपारे पर लगाने लगीं। जिसकी वज़ह से मेरा लंड खड़ा होने लगा और करीब 6 लम्बा हो गया. चाची के सेक्सीअगर ऐसा था तो उसने कोई ऐतराज़ क्यों नहीं किया और अगर उसने सब कुछ जानते हुए भी कोई ऐतराज़ नहीं किया तो फिर तो यह मेरी बहुत बड़ी कामयाबी थी कि मैं दोनों बहन-भाई को इतना क़रीब लाने में कामयाब हो गई थी और मैं अपनी इस कामयाबी पर दिल ही दिल में बहुत खुश हो रही थी।अगली शाम जाहिरा ने मेरी कहने पर एक स्किन कलर की टाइट्स और टी-शर्ट पहन ले.

दीप्ति नीचे कार्पेट पर पीठ के बल लेट गई और उसने वो लंबी सी ककड़ी को अपनी चूत के ऊपरी हिस्से में खड़ा पकड़ लिया और कहा- चल.

कुछ बात भी हो जाएगी।तब मैंने उससे कहा- तुम यहाँ? तुम तो शिमला में रहती थी न?तब उसने बताया- मैं यहाँ कॉलेज में पढ़ती हूँ। यहीं एक रूम किराये पर लिया हुआ है।मैंने पूछा- कहाँ?तो उसने बताया- द्वारका में।मैंने उसका नंबर लिया और उसे अपना नंबर दिया. मैं वहाँ से चुपचाप गाड़ी लेकर अपनी ससुराल आ गया।मैंने घन्टी बजाई और मेरी गदराई बदन की मालकिन सलहज ने गेट खोला और मुझे देखकर चौंक गई और बोली।सलहज- जीजू.

तब भी मेरी ड्रेसिंग काफ़ी मॉड ही होती थी।मैं अक्सर जीन्स और टी-शर्ट पहनती थी या सलवार कमीज़ पहनती तो. अब मेरा लण्ड रॉड की तरह कड़क हो गया था। मैं लगातार मन्जू को चुम्बन कर रहा था।मंजू बोली- और मत तड़पा सैम. कुछ उसने बताए और हम दोनों 3 बार डिसचार्ज होने के बाद एक साथ बिस्तर पर ही लेट गए।मैं- कहाँ से सीखा इतना अच्छा लंड चूसना और इतने सारे पोज़.

फिर मैंने अन्दर ही माल डाल दिया, उसके बाद ऐसा लगा कि जैसे मेरे शरीर में जान ही नहीं है।उसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और पहले ममता निकली.

अब वो भी उसका साथ देने लगी और उसकी कमर पर हाथ घुमाने लगी।कुछ देर बाद दोनों अलग हुए।पूजा- उफ़फ्फ़ कौन हो तुम. और आनन्द से मेरी आँखें बंद होने लगीं।उन्हें लंड चूसते हुए अभी 7-8 मिनट ही हुए थे कि मेरे लंड से माल की कई पिचकारियाँ उनके मुँह में छूट गईं।क्या करता. जैसे किसी ने अपना मोटा लंड तुम्हारी चूत में डाल दिया हो?मेरी बात सुनते ही जाहिरा के चेहरे का रंग फ़क़ हो गया, वो फ़ौरन बोली- क्या मतलब भाभी.

मराठी सेक्सी मराठी झवाझवीदो बच्चों की माँ हूँ। उम्र के इस पड़ाव में आकर मेरे अन्दर कुछ परिवर्तन आए हैं। अब मुझे 17-18 साल के लड़के अच्छे लगने लगे हैं। वैसे तो पति और मेरे बीच महीनों में कभी-कभार सम्भोग हो जाता है और ज्यादा कोई इच्छा भी नहीं रही. यार यह बात तो ठीक नहीं है कि हम लोग तो एसी चलाकर सो जाते हैं और उधर जाहिरा गर्मी में ही सोती है।फैजान- हाँ.

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समझे! बहुत बोलती थी कि तुम जैसे नामर्द से लड़की होना अच्छा है, अब साली रोएगी जब उसको अपनी मर्दानगी दिखाएँगे. मेरा होने को था।मैंने काफ़ी देर तक चोदता रहा और फिर झड़ गया, मैंने सारा माल लौड़े को बाहर निकाल कर आंटी की गाण्ड पर छोड़ दिया और हाँफने लगा।मैं थक गया था. अगले ही पल आरती मेरी बाँहों में थी और उसके स्तन मेरे सीने से चिपके हुए थे। हम लोग कुछ देर तक चूमा-चाटी चूसा-चूसी करते रहे।फिर वो अलग हट गई।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !‘अच्छा.

नीचे उसने सिर्फ़ एक काली और लाल मिक्स रंग की पैंटी पहनी हुई थी और नीचे से पूरी नंगी थी। उसकी टाँगें भी बहुत चिकनी और सेक्सी लग रही थीं।मैं- तुम्हारे पैर भी बहुत सेक्सी हैं. लेकिन इसके बावजूद भी जाहिरा ने अपनी पोजीशन को चेंज करने की और अपनी चूचियों को छुपाने की कोई कोशिश नहीं की।वैसे भी उसकी और मेरी शर्ट इतनी ज्यादा ओपन थी कि हमारे पास अपनी खुली चूचियों को छुपाने के लिए कुछ नहीं था।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !हमारी तवज्जो हटाने के लिए फैजान बोला- यार आज तो बाहर मौसम काफ़ी खराब हो रहा है. और तेरी भाभी कहाँ है?जाहिरा आहिस्ता से बोली- भैया वो उधर चली गई हुई हैं।फिर फैजान की आवाज़ आई- सॉरी जाहिरा.

पर उसका बेझिझक यूँ बातें करने से और उसकी नज़रें जो मुझे देख कर मुझे बोल रही थीं कि तुम सचमुच कितने बेशरम हो. फिर मैंने अपने पैंट की चैन खोल कर लंड को बाहर निकाल दिया और अपने पैर को उसकी साड़ी के अन्दर चूत के ऊपर पैन्टी पर रख दिया. ??मैंने ‘हाँ’ में सिर हिलाया और फिर उसे अपने पास खींचते हुए अपना बाज़ू उसके कंधे पर दूसरी तरफ से रखते हुए बोली- चलो अब देखो फिल्म.

मैं अपने ऑफिस में बैठ कर रोजाना अपना कामकाज किया करता था।मेरे ऑफिस के सामने ही एक दुकान थी और उसमें एक खूबसूरत लड़की काम किया करती थी. पर चुदाई में मजा आ रहा था।दस मिनट बाद चाची की चूत ने लंड को और अधिक कस लिया, चाची सिसकारने लगीं, मेरा टोपा भी फूलने लगा, हम झड़ने वाले थे।मैंने उनकी चूची मसकी और इशारा किया तो चाची ने कहा- अन्दर ही आने दो।अब हमारी आँखें बंद हो गई थीं, एक आनन्द की लहर दौड़ उठी, हम दोनों एक साथ ही झड़ उठे।चाची की बच्चेदानी मेरे माल से भर गई थी।फिर चूत ने लंड को आजाद किया, लंड बाहर आया.

उसको ये बात सुनाई दे गई तो उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गई।रॉनी और पुनीत गाड़ी में बैठ गए उनके पीछे मुनिया भी आ गई और पीछे बैठ गई। कार फिर से अपनी मंज़िल की और बढ़ने लगी।पुनीत- क्यों मुनिया क्या कहा माँ ने तुझे?मुनिया- कुछ नहीं बाबूजी बस काम समझा रही थीं कि दिल लगा कर सब काम करना.

फैजान ने अपनी बहन के चेहरे की तरफ देखा और फिर फ़ौरन से ही मेरे चेहरे की तरफ देखने लगा कि यह क्या हो रहा है।मैं धीरे से मुस्कुराई और बोली- डोंट वरी डार्लिंग. सेक्सी आर्केस्ट्रा डीजेअभी तो मैंने टोपा को थोड़ा सा अन्दर फंसाया ही है।फिर फैजान ने जाहिरा की दोनों टाँगों को पकड़ कर ऊपर किया और उसकी जाँघों को अपने काबू में करते हुए अपने लंड के सुपारे को ही थोड़ा-थोड़ा आगे-पीछे करने लगा।इस थोड़ी-थोड़ी सी हरकत से जाहिरा भी अपने भाई के लंड से मुन्तजिर होने लगी और उसे भी मज़ा आने लगा- ईसस्स. दीपिका सेक्सी पिक्चर वीडियोउसकी चूत बहुत गरम थी और टाइट भी थी। मैं अपनी एक उंगली को अन्दर-बाहर करता रहा और वो मेरे लंड के साथ खेलती रही।अब वो बोलने लगी- अब नहीं सहा जाता. ’एक मर्द का अपने भाई का हाथ अपनी चूत पर लगते ही जाहिरा की चूत गरम होने लगी और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।अपनी सग़ी बहन की चूत पर अपनी उंगली फेरते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगली को उसकी चूत की दरार में घुसेड़ रहा था और उसकी उंगली पर उसकी अपनी ही बहन की चूत का पानी लग रहा था।फैजान ने अपनी उंगली ऊपर की ओर जाहिरा को दिखाते हुए कहा- देख.

इसी के साथ उसने बड़े ही जोश में लंड मेरी चूत में घुसाया और गपागप चोदने लगा। अब मुझे वाकयी मजा आ रहा था।मैंने उसके हाथ अपने चूचों पर रखवाए और बोली- दबा ना इन्हें.

ताकि तुम और सेक्सी दिखो।’बिना कुछ बोले उसने मुझसे पैसे लिए और कार का गेट खोलने लगी।तभी मैंने उससे कहा- अपना साइज बता दो. मेरी चूत में!अमित उठ कर भाभी के ऊपर आकर अपना लंड उनकी चुदासी चूत पर रगड़ने लगा।भाभी बोलीं- अब डाल भी दो यार. मैं तो ललचाई आँखों से उनको ही देख रहा था।मैं एक 2 सीटर कुर्सी पर बैठा था, मैंने भाभी से कहा- इसी पर आप भी आ जाओ न.

मेरी तरफ देखा कर वो धीरे-धीरे अपना घोड़े जैसा लंड मेरी चूत में घुसाने लगा।उधर टोनी ने अपना लंड मेरे मुँह में ठूँस दिया और वो उससे पेलने लगा।आगे के छेद में देखिए. तो मैं बोला- माँ क्या तुम्हारे उधर भी खुजली होती है?इस कहानी के बारे में अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे जरूर लिखें।कहानी जारी है।[emailprotected]. तो उसने एकदम आँखें बंद कर लीं।मैंने अपनी बीवी को नीचे लिटाया और धकापेल चुदाई शुरू कर दी।मेरे बीवी धीमे स्वर में मचल रही थी- आह.

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तो अन्दर कमरे की रोशनी में मेरे ही बिस्तर पर दोनों बहन-भाई एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे।जाहिरा- प्लीज़ भैया. तो मेरा लण्ड एक नाग की तरह फुंफकारता हुआ बाहर आ गया। इस वक्त मेरा लण्ड पूरा जवान हो कर 8 इंच का लम्बा और 3 इंच मोटा हो चुका था। उसे देखकर वो बहुत खुश हुई. टीवी की स्क्रीन में सोफा साफ़ दिखाई देता है। मैंने स्क्रीन से देखा कि दीपक मेरी गाण्ड को घूर रहा है और अपने लंड पर हाथ फिरा रहा है। मैंने भी मज़े लेने की सोची और मैंने अपनी टांग थोड़ी और चौड़ी कर लीं.

मेरे मुँह में निकालना।मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया और वो मेरा सारा का सारा माल पी गई।इसके बाद मैं बिस्तर पर ही लेट गया।चाची की हालत भी बहुत खराब हो चुकी थी। करीब बीस मिनट हम दोनों चुप रहे.

तभी मुझे महसूस हुआ कि माँ की बुर से कुछ मुलायम सा चमड़े का टुकड़ा लटक रहा है।जब मैंने उसे हल्के से खींचा तो पता चला कि वो माँ की बुर की पूरी लम्बाई के बराबर यानि ऊपर से नीचे तक की लंबाई में बाहर की तरफ निकला हुआ था और जबरदस्त मुलायम था।उस समय मेरा लंड इतना टाइट हो गया था कि लगा जैसे फट जाएगा.

तो उसकी कमर बिल्कुल ही नंगी लगती थी। नीचे उसकी जाँघें भी और मेरी जाँघें भी पूरी नंगी हो रही थीं। लेकिन सामने से वो अपनी चूचियों को नहीं देखा रही थी।लेकिन ज़ाहिर है कि मैं ऐसा नहीं कर रही थी और अपना पूरा जोबन उन दोनों बहन-भाई के सामने गीली बनियान में एक्सपोज़ कर रही थी. मैंने देखा कि लोहा गरम है इस पर हथौड़ा मार देना चाहिए।अब मैंने एक उंगली से उसकी चूत को कपड़ों के ऊपर से ही सहला दिया। वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि मुझसे चिपक गई।मैं इतना अच्छा मौका कैसे जाने दे सकता था. सेक्सी वीडियो ब्लैक मैनतो वहीं चलते हैं!पूजा ने अपना बैग तैयार किया और जाने के लिए तैयार हो गई। वो पायल का इन्तजार कर रही थी कि वो बाथरूम से बाहर आए.

क्या कर रहे हैं?जाहिरा बोली- आ रहे हैं वो बस अभी आते हैं।वो मेरे सवाल का जवाब देने में घबरा रही थी। फिर वो आहिस्ता से बोली- भाभी आपने मेरी ब्रा वहीं बिस्तर पर ही डाल दी थी क्या?मैं- ओह हाँ. जिससे वो और गर्म हो गई, अब वो मेरे लण्ड को चूत में लेने के लिए तैयार थी। मैं उसकी चूत की दरार पर अपने सुपारे को रगड़ने लगा और मैंने एक हल्का सा धक्का लगाया।लेकिन लण्ड अन्दर जाने की बजाय बाहर को फिसल गया।फिर मैंने उसकी चूत पर और अपने लण्ड पर थूक लगाया और दरार में फंसा कर लौड़े में एक जोरदार धक्का मारा. फिर मुझे रसोई की पट्टी से घोड़ी बना कर खड़ा कर दिया और मेरी चूत में पीछे से अपना मुसद्दीलाल ठोक दिया।मैंने एक आह भरी मुझे जरा दर्द हुआ पर उसने मेरी चूचियों को अपनी मुठ्ठी में भर खूब मसला और मुझे चूमता रहा।कुछ ही देर बाद मुझे अपनी चूत में मजा आता महसूस हुआ।अब मैं भी उसकी ठापों का जबाव अपने चूतड़ों को पीछे करके उसके लौड़े पर चूत की ठोकर मारने लगी।बस कुछ बीस मिनट बद मुझे एक अकड़न सी हुई और मैं ‘आह.

और अब तो वो अपने कूल्हे ऊपर उठा कर अपनी गाण्ड का छेद भी चटवा रही थी।जब उसे लगा कि मैं उसके लिए सर हिला कर मना कर रहा हूँ. उसको तुरंत पकड़ लेगा। अब उसको ये तो पता है ना हमारी बहन गुड्डी कॉलेज में है और मुनिया ठहरी अनपढ़… सारा गेम खराब हो जाएगा।रॉनी- तो अब क्या करेंगे भाई.

मैं अपने लंड को उसके चेहरे के पास ले गया और उससे अपना मुँह घुमाने के लिए कहा। जब उसने अपना मुँह मेरी तरफ़ घुमाया.

मगर मुझे सब विस्तार से बताओ।अर्जुन ने जो हुआ वैसे ही बताना शुरू कर दिया।कमरे में आते ही निधि ने कहा- अब मुझे गन्ना दिखाओ. इस तरह हाथ रखने से मेरा हाथ उसकी चूची को छू रहा था और फैजान की कमर पर भी चल रहा था।मेरा दूसरा हाथ अभी भी फैजान की पैन्ट के ऊपर उसके लण्ड पर ही था। मैं महसूस कर रही थी कि जैसे-जैसे मैं और जाहिरा धीरे-धीरे बातें कर रही थीं. कुछ देर यूँ ही कुछ पल बातचीत हुई और हम दोनों घर चल दिए।उसके बाद हमारी बात होने लगी। हम कभी-कभी मिलते थे.

रोमांटिक सेक्सी वि तो देखा चूत एकदम चिकनी लग रही थी। फिर मैंने खूब चूचियां मसलीं और चूत भी खूब मसली।मैं धीरे-धीरे उसकी चूत में ऊँगली करने लगा. वो देखने में बहुत ही स्मार्ट था, मैं उसको देखती ही रह गई।शामली ने उससे मेरा परिचय करवाया।हम दोनों एक-दूसरे को देखते ही रह गए यह बात शामली ने नोट कर ली।वो जैसे मेरे मन को भा गया।मैं जब भी शामली के घर जाती वो मुझे वहाँ मिल ही जाता था.

और मेरे मुँह पर घिसने लगे।चूत चाटने वाले आदमी ने अपने लंड पर थूक लगाया और चूत पर घिसते हुए अपने लौड़े को भीतर घुसेड़ने लगा।कसम से. उस दिन हम लोगों ने क्या-क्या किया और किस तरह उन लोगों ने फिर से मुझे सता कर मेरा अपमान किया और कैसे अपनी आग बुझाई. उसने गाड़ी साइड में लगा दी और मेरे पास आ कर बैठ गया। मेरे हाथों को अपने हाथों में ले लिया मैंने पता नहीं एकदम से उसकी गोद में अधलेटी सी हो गई.

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तो मैं बर्फ का टुकड़ा ले कर उसकी चूत की सिकाई करने लगा, तब जा कर कहीं उसकी चूत की सूजन ठीक हुई।उसके बाद जब वो ठीक हुई तो फिर मैंने उसको चोदा. फैजान- लेकिन तुमने उसे अपने नाईटी क्यों दी है?मैं- क्यों उस पर अच्छी नहीं लग रही क्या?फैजान- अच्छी तो लग रही है. जो के मुझे शादी से पहले ही उसके बिस्तर तक उसकी बाँहों में ले आई थी।शादी के 8-9 महीने बाद भी जब हमारी सेक्स लाइफ और हवस से भरी हुई ज़िंदगी पूरे सिरे पर थी.

धीरे से डालना।पर मैंने भी अपने शैतान जगा दिया, अब मैं उसको अपनी मर्ज़ी से चोदना चाहता था।मैंने उसको उल्टा लिटाया. तो बोली- ठीक है।हमने 8 बजे का प्लान बनाया।मैंने शाम तक सब काम निपटा लिए और आशिमा तो 7 बजे ही मेरे घर आ गई।मैं तो देख कर ही हैरान रह गई.

उनके यहाँ एक नौकरानी आती थी उसकी भी चूत मुझे चोदने को मिली।अब आंटी दूसरे शहर चली गई हैं। जब कभी भी वे रहने के लिए आती हैं.

वो नहीं देख पाएगी।यह कहते हुए मैंने उसके लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया, मेरे हाथ के छूने से उसका लण्ड उसकी पैन्ट के अन्दर अकड़ने लगा।मैंने उसके चेहरे को अपनी तरफ मोड़ा और फिर अपने होंठ फैजान के होंठों पर रख दिए और आहिस्ता आहिस्ता उसे चूमने लगी। फैजान ने अपनी होंठ पीछे हटाने चाहे. पर मुझे तो बस उस टाइम अजीब सा फील हो रहा था ये लग रहा था कि इसका ये मोटा लंड मेरी चूत में जल्दी से घुस जाए।फिर दीपक ने लंड पर हल्का सा ज़ोर लगाया और चूत में चिकनाहट की वजह से उसका टोपा अन्दर घुस गया।मेरे मुँह से दर्द भरी ‘आईई… ईई. पर चूत चाटने के खुमार में मैं वो दर्द भूल गया।मैं जल्दी से सोफे पर उल्टा लेट कर दीप्ति की चूत चाटने लगा।आआहह… क्या मज़ा आ रहा था.

पर उसे देख ना पाने का मलाल भी था।फिर उसका फोन आया और वो बहुत खुश हो रही होकर कह रही थी कि तुम तो बहुत हैण्डसम हो।मैंने उससे कहा- मुझे तो तुम दिखी ही नहीं?तो उसने कहा वो छुप कर देख रही थी। खैर अब हमारी दोस्ती प्यार में बदलने लगी थी।फिर हमने उस दिन शाम को मिलने का प्रोग्राम बनाया. बस रोये जा रही थी। उधर मेरा लण्ड लट्ठ की तरह उसकी चूत में गड़ा हुआ था।कुछ देर तक मैं यूं ही लेटा रहा और उसको यहाँ-वहाँ चूमता-दुलारता पुचकारता रहा. घुसाता है और पुल्ल-पुल्ल करके निकाल देता है।फिर भाभी भी अमित का जम कर साथ देने लगीं।अमित- भाभी आप अब ऊपर आ जाओ में नीचे आ जाता हूँ।भाभी- ठीक है.

मैंने कमरे का इंतजाम पहले से ही अपने दोस्त के कमरे में कर रखा था। मेरा दोस्त सुबह ऑफिस चला जाता था और रात को आता था।वो दो दिन के लिए गाँव जाने वाला था.

बीएफ सेक्स नंगी फिल्म: तो मेरी चूत ने तो फ़ौरन ही पानी छोड़ दिया।मैं अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और ना ही मैं इतनी जल्दी और इतनी आसानी से अभी फैजान को जाहिरा की चूत तक पहुँचने देना चाहती थी।अब आगे लुत्फ़ लें. सबसे ज्यादा मजाक कर रही थी।उस समय तो उसकी दीदी को चोदने के चक्कर में मैंने कुछ ज्यादा नहीं किया लेकिन उसको कैसे चोदूँ.

बस ऐसे ही थोड़ा थका हुआ हूँ।मैंने उसके गालों पर एक किस की और अपना हाथ उसकी पैन्ट की ऊपर से उसके लण्ड की तरफ ले जाते हुए बोली- आओ फिर मैं तुमको भी थोड़ा रिलेक्स कर दूँ।मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी अकड़ा हुआ है. तो मेरे चेहरे पर मुस्कान फैल गई।फैजान ने दोबारा से अपनी बहन की ब्रेजियर उठा ली हुई थी और उस पर आहिस्ता आहिस्ता हाथ फेरते हुए उसे फील कर रहा था. इसलिए कल मैं उन्हीं के लिए दवाई लेकर जल्दी में जा रही थी कि तभी आपसे टकरा गई।मैं- क्या तक़लीफ़ है आंटी को?वो- ये तो नहीं पता.

बस तुमसे जरा पतला है।अब वो पूरी तरह खुल चुकी थीं और पूरी मस्ती में बातें कर रही थीं।वो बोलीं- अब तक कितनी लड़कियों को चोद चुके हो?मैंने शरमाते हुए कहा- चाची मैंने आज तक कभी किसी को नहीं चोदा.

तो मुझे बाथरूम के अन्दर से कुछ ख़ुसर-फुसर की आवाजें आने लगीं। मैं उठ कर बाथरूम के दरवाजे के पास गई और अन्दर की आवाजें सुनने की कोशिश करने लगी। मेरा शक ठीक था. आज से मैं आप की गुलामी कबूल करती हूँ।उसके बाद हम दोनों फिर से सेक्स के लिए तैयार हो गए और अलग-अलग तरीके से सेक्स करने लगे।उस दिन मैंने उसे 5 बार चोदा और फिर मैंने उसे चुम्बन करके उसे अपने घर छोड़ दिया।उसके बाद मैंने उसे 3 बार और चोदा।आपको मेरी कहानी कैसी लगी. तो मैडम ने ही मुझसे पूछ लिया- तुम्हारा कितने इंच का है?मैं समझ तो गया था कि मैडम किसके बारे में बात कर रही हैं.