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जैसे ही वो रुकी, मैंने अपन स्पीड तेज कर दी और उसको जोर जोर से चोदने लगा.पर चिंटू मेरी चूत को चूसने और चाटने के साथ साथ अपनी उंगली से मेरी चुत को चोद भी रहा था.

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ये सुन कर वो डर जाती हैं, मुझसे ऐसा इलाज पूछती हैं कि जो ईज़ी हो और उनकी चूत को भी कोई नुकसान ना हो. फिर एग्जाम हो गए और मुझे 25 दिनों के लिए घर जाना था, तो मैंने और दिव्या ने जाने की तैयारी की. पर दीदी से गले तो लग सकता हूँ।”कहते हुए एक हाथ उसकी कमर में और गर्दन में डालकर सीने से लगा लिया। मधु की लम्बाई लगभग मेरे ही बराबर थी.

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वो मुझसे लिपट गई और बोली- तुम कितनी बार तो मना चुके हो सुहागरात, अब बचा क्या है?मैंने कहा- बचा तो बहुत कुछ है. मेरे दोस्त को अपनी मम्मी के पास भी जाना था और वह मुझ पर बहुत विश्वास भी करता था तो उसने मुझसे कहा कि उसकी ट्रेन का समय हो रहा है और तुम अपना काम खत्म होने के बाद गेट पर ताला लगाकर चाबी अपने साथ ही ले जाना. मैं विनय के लंड को उठा कर उसके नीचे देखने लगी और उसमे मुँह लगा कर सूँघने लगी.

तभी अचानक ही मेरी कमर अपने आप ऊपर हो गई और मेरी चूत ने पानी निकाल दिया. मैं उन्हें धन्यवाद कहना चाहूंगा जिन्होंने अन्तर्वासना जैसे पोर्टल का सृजन करके लोगों को एक मंच दिया कि वो अपनी आपबीती को कहानी के रूप में कह सकें.

मॉम लम्बी लम्बी आहें भरते हुए नवीन का का पानी अपनी चुत में डलवा रही थीं मानो मॉम को अनंत सुख मिल रहा हो.

पापा तो काम के सिलसिले में पहले से ही अधिकतर समय घर से बाहर किसी न किसी दूसरे शहर में ही घूमते रहते थे.

मेरा परिवार एक मध्यम वर्गीय परिवार था तो मुझे भी दूसरी लड़कियों की तरह सजना संवरना और महँगी चीजों का शौक था. हमारा एक बैडरूम फर्स्ट फ्लोर पे था, मैं धीरे से ऊपर पंहुचा तो कमरा अन्दर से बंद था और आवाजें आ रही थी. मुझे देखने में तो बहुत मज़ा आया मगर मैंने कहा कि ऐसे थोड़ी ना हर किसी के आगे नंगी होकर उसका लिया जाता है.

मैं उनकी छोटे मोटे कामों में मदद भी कर देता था और वो अक्सर कहती थी- यार तू मेरा दुख का सबसे बड़ा साथी है, हमेशा मेरी मदद करता है और तेरी वजह से मैं इस मुश्किल समय में इतना सब कर पा रही हूँ।इसी तरह 4 महीने बीत गए लेकिन भाभी के पापा को कोई आराम नहीं मिल रहा था और उनकी हालत वैसी की वैसी ही रही. तभी मेरे फ्रेंड का फ़ोन आया कि वो गेस्ट होटल पहुँच गए हैं, नीचे हैं, तू उनको देख कर रूम में सुला दे!मैंने कपड़े पहने और भाभी को ऊपर बेड पर लिटाया और बोला- मैं उनको छोड़ कर वापस आता हूँ! फिर बची हुई एक एक बियर पियेंगे और मस्त चुदाई करेंगे!तो भाभी बोली- मेरे अंदर अब हिम्मत नहीं बची… अब बस!मैंने कहा- जानेमन, अभी तो रात जवान हुई है, अभी आपकी गांड भी मारनी है. वो चला गया तो भाभी मेरे से बात करने लगी, बोली- तुमने कितनी गर्ल फ्रेंड निपटाई?मैंने कहा- सच बताऊँ तो शादी से पहले 8 लड़कियों निपटा चुका हूँ.

तो मैंने झट से मोबाइल पर अंतरवासना डॉट कॉम खोल कर दिल्ली वाली भाभी की कहानी उनको दे दी कि इसको पढ़िए, ये मैंने ही लिखी है.

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टीचर्स बीएफ भाभी की सुंदरता और उनके कामुक बदन को देख कर मेरे मन के ख्याल बदलने लगे. वो मुझे चूमते हुए बोली- चलो देखते हैं कितना बड़ा गेम बजाने वाला आइटम है.

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जैसे ही मैं उसकी तरफ घूमा, वो बोली- क्या हुआ भैया?मैंने कहा- तुम बाहर क्या कर रही हो? तुम्हें घर में सोना चाहिए था. यह घटना अभी कुछ दिन पहले ही घटित हुई है, मैं अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई 2015 में समाप्त करके जॉब की तलाश मैं दिल्ली आया, यहां मैं नॉएडा में रहता हूँ. मैं उसको अपनी बांहों में लेते हुए बोला- आ जा रानी, आज मौका अच्छा है.

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”मैंने आठ दस तुनके मारे तो अलका रानी ने सी सी सी करते हुए मुझे कस के बाँहों में बांध लिया.

रुक जाओ।लेकिन वो तो मज़े से मेरी सवारी कर रहा था, उसने अपनी थोड़ी स्पीड बढ़ा दी, मैंने बेडशीट कस कर पकड़ ली. मैं खड़े होकर उसके दोनों पैरों के बीच आ गया और अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ने लगा. मैंने उसकी एक ना सुनी और लंड फंसाए कुछ देर रुका रहा उसको चूमता और सहलाता रहा.

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फिर मैं उसकी लेग्गिंग्स को धीरे से खींचने लगा तो उसमें मुझे उसकी रजामंदी बिल्कुल साफ़ समझ आ गई क्यूंकि उसने अपने कूल्हे उठाकर लेंगिंग्स निकालने में मदद की. मैं धीरे धीरे उसी को निहार रहा था, बीच बीच में इधर उधर देख लेता था.

और हां… मैं आपको एक बात बताना भूल गया वो यह कि पारुल के मम्मे एक बच्चे के बावजूद भी बहुत टाइट थे।अब पारुल को भी लन्ड अपनी चूत में लेने की बहुत जल्दी थी लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि अंजलि गाड़ी ड्राइव करना नहीं जानती थी और अब रोड भी ऐसा नहीं था कि कहीं गाड़ी किनारे लगाई जाए. क्लास में मेरा एक दोस्त था रवि, जो बिलासपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर का था. मेरी चुदाई करते हुए उसने पूछा- जिससे फोन पर तुमने बात की थी, उसे कैसे जानती हो.

वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा तो मैंने भी उसे मुस्कुराते हुए उसके गाल पर एक हल्की सी चपत जड़ दी.

मैं देर से इसलिए झड़ा क्योंकि एक बार में उसकी चुत में लंड डालने से पहले ही झड़ चुका था. मैं बिल्कुल तड़पने लगी; मुझसे रहा नहीं जा रहा था; मेरे मुंह से अपने आप आवाज निकालने लगी- ऊंहहह आहहहह… मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा! कुत्ते क्या कर दिया!टीवी की आवाज़ तेज थी इसलिए आवाज वहीं रुक गई. मेरी चूत भी तुम्हारे लंड की प्यासी हो रही है, प्लीज इसकी आप भी प्यास बुझा दो न.

बालों में हाथ से सहलाने के बाद मैंने आंटी के माथे पर एक विश्वास वाला किस किया, जिससे उनका मुझ पर विश्वास और ज्यादा बढ़ गया था. अच्छा प्रिया! दो-एक बातें तो बता?”प्रिया की भवें प्रश्नात्मक तौर पर मेरी ओर उठी.

पर मुझमें अन्तर्वासना, कामवासना, कामुकता, चुदास जो कुछ भी आप कहें, कूट कूट कर भरी हुई है तो चुदाई के लिए मैं हर वक्त तैयार रहता हूँ. उसका पूरा लंड मेरी चुत को थप्पड़ पर थप्पड़ मारे जा रहा था और मैं बस ‘ऊह अयू हा हा…’ के सिवा कुछ नहीं बोल पा रही थी. आज तूने अपनी बहन को खुश कर दिया, आज मुझे मेरा राखी का गिफ्ट मिल गया, मैं खुश हो गई.

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यह कहकर उसने मेरे घी को, जिसे वीर्य कहते हैं, अपनी छाती पर मलना शुरू कर दिया था.

बेडशीट सफेद थी तो खून ज्यादा लग रहा था।ये सब निशा देख कर बोली- जानू, अब ये सब तो होना ही था… अब मुझे तुम खुश कर दो।अब मैं भी उसकी चूत में ताबड़तोड़ धक्के लगाता रहा, अब निशा भी साथ दे रही थी और नीचे से अपनी गांड ऊपर कर कर के चुदवा रही थी।इस पोज़ में मैंने उसे दस मिनट चोद चोद के उसकी हालत खराब कर दी. करेले की पूंछ पीछे लटक रही थी… ऐसा लग रहा था जैसे कोई मोटा चूहा दीदी की चुत में घुस रहा हो, जिसकी पूंछ बाहर लटक रही हो और दीदी अपने बालों को नोंच कर चिल्ला चिल्ला कर चूहे को अन्दर घुसने दे रही हैं. जब वो पूरा 7 इंच का हो गया तो भाभी ने अपनी साड़ी ऊपर की और मेरे लंड पर एकदम से बैठ गईं.

वो बोली- तुमने जो मुझे दिया है वो अनमोल है, उसके हिसाब से तो ये बहुत कम हैं. मैंने मां को फ़ोन पकड़ा दिया और पास वाले रूम में चला गया और चुपचाप मां की बातें सुनने लगा. ಕ್ಸ್ ವಿಡಿಯೋಸ್लेकिन मेरे मन में कामुकता घर कर चुकी थी, मैं सोचने लगा कि क्या करूँ?तभी मैं उठ कर अपनी बहन के पास रसोई में चला गया और उस के पीछे जाकर खड़ा हो गया.

आंटी हंस दीं और बोलीं- सच में उसी दिन मैंने भी सोच लिया था कि तेरे लंड से ही अपनी चुत की खुजली मिटवाऊंगी. हालांकि इस दौरान इन्होंने काम पर जाना बन्द नहीं किया था क्योंकि वो भी बहुत जरूरी है.

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ये बात तब की है, जब मैं लखनऊ में अपनी चाची के घर में था, उनके घर में तीन लोग हैं. बीच बीच में वो बोल देती थी- यस राजेश उम्म्ह… अहह… हय… याह… फक मी हार्ड. उस समय उनकी साड़ी घुटनों तक उठी थी, जांघों के स्पर्श के एहसास ने मुझे रोमांचित कर दिया और मैं किसी तरह उसी स्थिति को पाने के लिए आतुर हो उठा.

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टीचर्स बीएफ थोड़ी देर इसी तरह रगड़ने के बाद दीदी ने करेले की नोक अपनी चुत के छेद पे रखी और एक ही झटके में आधा करेला अपनी चुत में घुसा दिया. जैसे ही मेरे लंड का सुपारा उनकी चूत से टच हुआ, उन्होंने होंठों को दांतों से दबाते हुए आँखें बंद कर लीं और अपने मुँह से कामुकता भरी मदमस्त सिसकारी निकालनी शुरू कर दीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’जिससे मेरा जोश बढ़ता चला गया.

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मगर मैं ऐसी ही थी नहीं, मैं किसी मर्द को अपने कोई भी अंग नहीं दिखाती थी, चाहे कुछ भी हो जाए. वहां के होटल ढाबे की तरह थे और सब लड़के लड़कियां छोटे छोटे कपड़ों में लेटे थे, घूम रहे थे. अभी 19 की उम्र में है। तब वो 18 साल की थी और उसकी गदर जवानी पर गांव के लड़के जान देते थे। मैं भी उनमें से एक था.

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कुछ देर बाद उसने अपने जीभ को मेरे मुँह के अन्दर डाल दिया और मैं उसकी जीभ को चूसने लगा.

मैंने उससे पूछा तो फिर आज अपनी मुराद पूरी कर लें?वो मुस्कुरा कर और अपनी चूचियां उभारते हुए बोली- कैसे?मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला कि होटल में चलते हैं. उससे फोन पर बात तो खूब होती ही थी सो मैंने उससे शादी के बारे में पूछा.

विनय ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को अपने होंठों में फंसा लिया. पापा सुबह ड्यूटी पर निकल गए, मम्मी सुबह 10 बजे निकल गईं और मैं अकेला घर पर रह गया था. वो मेरी आँखों में वासना से देखते हुए बोलीं- कैसे? कोई जादू है क्या?मैं गरम होकर बोला- वैसा ही कुछ है.

उसके बाद रुचिका कालेज चली गई और फिर लगभग एक घन्टे बाद मैं पहुँचा तो रुचिका मुझे देखकर मुस्कराई.

नताशा इस बार जोर से छटपटाई लेकिन मैंने अपने लंड से उसके मुंह को तेजी के साथ चोदना शुरू कर दिया और दोबारा उसके कन्धों को थोड़ा सा उचका कर नीचे दबा दिया. मैंने उसके एक चुचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से दबाने लगा. मैंने उसकी बुर से गरम रस की धार को महसूस किया और समझ गया कि उसने अपना कामरस छोड़ दिया है.

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उसकी बुर में से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी बहन की बुर पानी चुद रही है, इसकी वासना जाग रही है, यह गर्म होने लगी है. मेरी कहानी है भाई बहन की चुदाई की… मेरे कई मामा हैं, सगे और दूर के रिश्ते के… अलग अलग मामाओं की 3 जवान लड़कियां मैंने चोदी हैं. फिर मेरा नम्बर कैसे मिला?तो उसने बोला- मैंने याद कर लिया था और ऑटो से उतरने के बाद अपने मोबाइल में नोट भी कर लिया था.

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विनय- नेहा, मेरे लंड को देखोगी, जो पूरी रात तुम्हारी याद में रोता रहा है?मैं उठ कर बैठ गई और विनय की चड्डी के ऊपर से ही उसके लंड को सहलाने लगी. फिर अम्मी ने मेरी पैंटी उतार कर मेरी चूत का पूरा रस चाट चाट कर साफ कर दिया और मुझे 69 पोजीशन में लेटा कर बोली- मेरी चूत चाट!मुझे बड़ा अजीब सा लगा, लन्ड तो कई बार चूसे थे पर चूत चाटना बड़ा गंदा लग रहा था. उसने हंस कर पूछा- क्यों?मैंने कहा कि तुम्हारी खूबसूरती को देखकर सोचता हूँ कि काश तुम मेरी बीवी होती.

प्रिया का दिल तेज़ी से धड़क रहा था, उसकी जलती गर्म सांसें मेरी कलाई झुलसाये जा रही थी. मैं उस समय भी खाली था, तो मैंने पूछा- अभी आ जाऊं?उसने कहा- हां आ जाओ. विवेक उत्तेजना से झूम गया, वो सीधी टांगें फैला कर लेट गया, कामिनी ने अभी उसके लंड को 8-10 बार ही चूसा होगा कि उसने कामिनी को अपने ऊपर खींच लिया.

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जैसे ही मेरी उंगलियाँ ब्रा के हुक पर ठहरती तत्काल प्रिया का बायाँ हाथ मेरे दाएं हाथ को इधर उधर झटक देता. कुछ ही देर में झड़ने को हुआ वो भी मेरे साथ ही झड़ गई और हम दोनों बाथरूम के फर्श पर नंगे ही लेटे रह कर पानी की बूंदों का मजा लेते रहे. उसने लपक कर मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी; अचानक उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया.

अब मैं भी कहाँ पीछे रहने वाली थी, मैं तो खुद दिन रात उसके लंड से चुदने के सपने देखा करती थी.

मैंने गुस्से से उनके बाजू पकड़े और उनको बेड पे पटक कर लंड फ़िर से उनकी चूत में डाल दिया और जोर जोर के झटके देने लगा.

सब्जी तथा ग्रीन सलाद परस कर भैया की दिया और पूछा कि प्याज लेना चाहेंगे तो उन्होंने हाँ में सर हिलाया. अचानक कामिनी एकदम से आधी उठ गई और उसने विवेक के लंड की तरफ अपना मुँह कर लिया और लंड पे जीभ मारने लगी. गुजराती रंडी सेक्सीवो उससे बोली कि पहले तुम्हारा टेस्ट लिया जाएगा, अगर पास हो गए तो नौकरी पक्की वरना मैं नहीं रखूँगी.

पर तब तक तो मेरे अन्दर हवस भर चुकी थी, मैंने दीदी से कहा- दीदी प्यार अलग है और शरीर की जरूरत अलग बात है. अब तक उसकी न सील टूटी होने की वजह से उसे दर्द हो रहा था, इसलिए दो मिनट तक मैं ऐसे ही रुका रहा और उसकी पूरी बॉडी को किस करता रहा. इसी बीच वो बोले जा रही थी- आह जीजू इन्हें चूसो… नोंचो इन्हें… आह मज़ा आ रहा है… मेरा सारा दूध पी जाओ…मैं उसके मम्मों को पीता रहा.

फिर वो मेरे मुँह में मुँह डाल कर चूसने लगा और पीछे हाथ ले जाकर मेरी ब्रा का हुक खोल दिया. जितने चुचे ब्रा के अन्दर थे, उतने ही ब्रा के बाहर भी दिखाई दे रहे थे.

”नहीं सर में पहले चूत में मोमबत्ती डालती थी, फिर धीरे धीरे केला, फिर बैगन और अब लौकी भी घुसा लेती हूँ.

मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था कि मैंने बेकार में कामिनी पर शक किया. मैंने उससे कहा कि मेरी भी स्टेप मदर है मगर वो मेरी फ्रेंड की तरह से ही है और एक स्टेप ब्रदर भी है, जो आज कल बंगलोर में सर्विस कर रहा है. जब वो कॉफी लेकर आई तो एक मस्त सेक्सी नाइटी में थी, मैं तो देखता ही रह गया.

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उस दिन रात को मेरा पति बहुत खुश नज़र आ रहा था और मुझसे सेक्सी बातें करने लगा. मैं तो जैसे इतना धन पा के धन्य हो गया और अंधेरे में ही बहूरानी की ब्रा और पैंटी को मसल मसल के सूंघने लगा. उन्हें इस बात का एहसास हो गया था, तो वो बोलीं- माफ करना, दरअसल मैं अपनी लीड ढूँढ रही थी.

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करीब 34 साइज़ के और उसकी तोप की तरह उठी हुई गांड का तो मैं शुरू से ही दीवाना था और उसका शरीर भी हल्का सा गदराया हुआ था. कुछ देर बाद हम दोनों उठे, मैंने देखा आंटी की गांड में से खून निकल रहा था.

मम्मी की वो सहेली हमारे पड़ोस में रहती हैं और उनका हमारे घर में आना जाना लगा रहता है.

काफ़ी देर चूसने के बाद मैं नीचे आया और मैं अपनी ज़ुबान उसकी नाभि में डाल कर घुमाने लगा. उसका लंड कोई ज़्यादा बड़ा लंड नहीं था, बस छह इंच लंबा और दो इंच मोटा था. मेरा नाम मैं बताना नहीं चाहता, आप मुझे बस वर्मा जी के नाम से जान लो.

भाभी के चूतड़ काफी मस्त थे, गोल-गोल और मुलायम थे… एकदम रुई के गद्दे की की तरह थे. तभी भाभी हंसते हुए बोल उठीं- अबे चुतियो, गांड मारना इतना आसान नहीं होता. उसके मम्मे तो कपड़े फाड़ दें कुर्ती के ऊपर से ऐसे टाइट दिखते रहते थे.

बस यूं लगा कि कोई गरम सरिया मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुसता चला गया.

टीचर्स बीएफ: मैंने कहा- क्या हुआ है तुम्हें, तुम कुछ कहना चाहती हो, तो मेरे छत वाले रूम पर आ सकती हो?उस वक्त लगभग दिन के एक बजे थे. मैंने अपनी हथेली को टोपों से थोड़ा नीचे को खिसका लिया और टोपे नीचे को उतरती हुई चूत में फंस गए!नताशा थोड़ी सी कुनमुनाई, लेकिन उसने टोपों को बाहर नहीं निकलने दिया.

अगर तुम्हारी तरफ से पूरी तरह ना हो जाए तो मैं उसी को उस लड़के से चुदवा दूँगी. वो मेरे घर अक्सर आया करती थी तो मैं उसे सेक्स के बारे में बताती और कहती कि आज मेरे पति ने किस तरह से मेरी मस्त चुदाई की. तभी उनका ध्यान मेरी पेंट में बने तम्बू की तरफ गया और वो हंसने लगीं.

”तौबा तौबा! क्या खुराफाती सोच थी… लड़की की!अच्छा! अब बता… मैं पास हुआ या फेल?”आप को क्या लगता है?”तू बता?”मुझे ख़ुशी है कि जिसे मैंने देवता माना, वो सच में एक देवता ही है.

मैं भी उससे गंदी गंदी बातें करने लगा- साली कमीनी तेरा पति तुझे अच्छे से नहीं चोदता, जो तू मुझसे चुद रही है. मुझे उसने बहुत बार चोदा, मुझे भी चुदाई में बहुत मजा आने लगा और थोड़े समय बाद उस लड़के के परिवार का दूसरी जगह ट्रान्सफर हो गया, तो वो चला गया. स्मिता एक खूबसूरत नाम ही नहीं, बल्कि एक खूबसूरती का एहसास और कामदेव का पूरे आशीर्वाद या प्रसाद थी.