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उस गीलेपन को महसूस करते ही मैं उत्तेजित हो उठा और तब मैंने रिया की पेंटी को नीचे की ओर खींच कर उसके पैरों में डाल दिया. महिलाओं के लिए सबसे अच्छी ब्रा!वो बस मुझे चोदे ही चले जा रहे थे कि तभी एक झटके से अपना लण्ड बाहर निकाला और मुझे सीधा लिटा दिया, जब तक कुछ सोच पाती मनोज भैया के लण्ड से सड़के की नहर निकल पड़ी, जो मेरी चूचियों और पेट पर फ़ैल गई।हम दोनों की पस्त और निढाल हो कर गिर पड़े। मैंने प्यार से मनोज भैया का लण्ड हाथों में लिया और कहा- बहुत जान है तुम्हारे लण्ड में.

वो मुझे बोल रही थी- विशाल अब तुम बड़े हो गए हो, अब तो तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी!मैं- क्या कहा आपने?चाची- शादी बुद्धू शादी.बीएफ ब्लू पिक्चर हिंदी बीएफ: अरे नहीं यार मेरी शादी पक्की हो गई है।रणजीत- क्या बात है… वाह यार मुबारक हो।सीमा- इसी सिलसिले में मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ। रविवार को घर जा रही हूँ पापा ने बुलाया है, वहीं लड़के वाले भी मुझे देख लेंगे।रणजीत- तो ठीक है… एक घंटे में मेरी ड्यूटी ऑफ हो जाएगी। तुम वहीं आ जाना जहाँ हम मिले थे।सीमा के शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी हो गई थी और एक हल्की सी शरम उसके गालों पर दिख रही थी।वो बोली- ठीक है.

तो चाची ने कहा- सीखना नहीं है?‘मैं कुछ समझा नहीं?’तो अब चाची ने अपनी शरम छोड़ते हुए कहा- इसकी क्लास तो रात में ही लगती है!मैं- यह आप क्या कह रही हैं?मुझे तो सब समझ आ गया था कि आज चाची मुझसे चुदने वाली हैं, और मैं भी खुश था.प्रेम गुरु की अनन्तिम रचनामैं जैसे ही बेड पर बैठा पलक फिर से मेरी गोद में आकर बैठ गई और फिर उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी। मैंने एक बार फिर से उसके होंठों को चूम लिया।जीजू, तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे?”नहीं मेरी खूबसूरत परी… मैं तुम्हें कैसे भूल पाऊँगा….

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पहले पहले तो मुझे सारी कहानियाँ काल्पनिक लगती थी पर पिछले कुछ दिनों से कुछ कहानियाँ वास्तविक लगी तो दिल किया कि मैं भी कुछ आप लोगों से शेयर करूँ, मैं ऐसा नहीं कहूँगा कि आप सच मानो पर जो मैं कहने जा रहा हूँ वो सच हैं.

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के दूसरे वर्ष में था। मेरे पड़ोस मे एक लड़की रहती थी और वो 12वीं में थी। उम्र 19 के आस-पास थी, पर लगती कॉलेज की लड़कियों जैसी मस्त गोल-मटोल, अपनी माँ की तरह उस के बड़े-बड़े मम्मे, मस्त गोल-गोल कूल्हे, ऊँचाई साढ़े 5 फुट की रही होगी, पर देखते ही लण्ड खड़ा हो जाए. हमने तो सोचा वो भी तेरे साथ ही होगा, तभी तूने उसको यहाँ बैठाया है।जोजफ अंकल- पर यार वो तो खुद मजे ले रहा था, उसको खुद इस सबमें मजा आ रहा था… सच !अनवर अंकल- और तो और… वो तो शर्त तक लगाकर गया है।मेहता अंकल- क्या शर्त… कैसी शर्त?अनवर अंकल- अरे वो जो सामने बैठी है ना… उस पर… और अपनी वही पुरानी शर्त कि ‘इसने लहंगे के नीचे क्या पहना है?’मेहता अंकल- ओह. यह अच्छा किया, कहाँ चोट लगी है देखूं!अंजलि ने कुछ असहज भाव से प्रिया की ओर देखा, तभी मेरी नजर अंजलि की स्कर्ट में लगे खून की तरफ चली गई।मैंने कहा- अरे खून तो अभी भी निकल रहा है, चलो जल्दी अन्दर… मैं फर्स्ट एड बॉक्स लाता हूँ!मैं तुरन्त अपने कमरे में गया और फर्स्ट एड बॉक्स लेकर प्रिया के कमरे में पहुँच गया। तब तक वह दोनों सोफे में बैठ गई थीं।मैंने प्रिया से कहा- जाओ पानी की बोतल ले आओ.

मैं ज़िंदगी में पहली बार ही किसी स्त्री के मुख से इतनी गन्दी भाषा सुन रहा था…मुझे बहुत परेशान देख उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- चल उसके सामने ही मुझे चोदना… मुझे पता है कहाँ ले गया होगा वो कमीना उसको…और मैं उसके साथ आगे को बढ़ गया…अभी हम एक गैलरी की ओर गए ही थे कि मुझे श्याम दिख गया…मैं जल्दी से उसकी ओर लपका- अरे श्याम. एक दिन एक पिक्चर के शो में मैंने उसके होंठ चूमते चूमते उसके गालों को चूमा बाद में गले पर आ गया और बाद में उसकी छाती पर आया, तब उसने एक टॉप पहना था तो उसने उस टॉप के बटन खोल दिए और उस वक़्त पहली बार मैंने उसके बोबे चूसे. और वो हंसने लगी, इसके बाद स्वाति बोली- सायरा खान, यह हार की शर्म या सरेआम दो लड़कों के सामने हम सबको अपनी नंगी जवानी दिखाने की शर्म है.

मैं कहाँ उसके इस मजाक का जवाब देने की हालत में था, मैंने उससे हाथ मिलाया और कमरे के अन्दर दाखिल हुआ, दरवाजा बंद किया और सीधा उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये, उसके शरबती होंठों का वो स्वाद तो भूले नहीं भूलता यार! मैंने अपने हाथों से उसके चेहरे को थामा और उसको इस कदर चूमने लगा जैसे उसे अब मैं खा ही जाऊँगा. लेकिन मेरा नज़रिया अब बदल गया था, जैसे ही बहन मुझसे लिपटी मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी गाण्ड पर रख दबा दिया. फिलहाल तो मेरे दिल को यही लग रहा था…तभी मैंने देखा उस आदमी ने सलोनी को कसकर बाँहों में जकड़ लिया और उसको फिर से अपनी गोद में बिठाने को नीचे कर रहा है.

फिर तो पापाजी 69 की अवस्था में लेट कर मेरी टाँगे चौड़ी कर के मेरी चूत रानी को चूसने लगे और मैं उनके लण्ड राजा को. अब हम रोज ही चुदाई करेंगे।यह सुन कर मुझे भी बहुत खुशी हुई, उसके बाद माँ गाँव से चाचा को देख कर दस दिन बाद आईं, तब तक हमारी रासलीला जारी रही।उसके बाद मुझे जब भी मौका मिलता मैं उसे चोद देता।एक बार मैंने उसकी गान्ड भी मारने की कोशिश की, लेकिन उसे ज्यादा ही दर्द हुआ तो मैंने उसकी गान्ड नहीं मारी।तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी? मुझे जरुर मेल करें।.

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!और मैंने अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया और एक ही झटके में पूरा लंड उसके गले तक डाल दिया। वो सांस भी नहीं ले पा रही थी, फिर मैंने बाहर निकाला।फिर वो बोली- तुम जबरदस्ती मत करो. मैं घूम गया, आपी ने अपनी सलवार खोल कर नीचे कर ली और ऊपर से चादर डाल कर बोली- चल अब लगा दे!मैं बोला- आपी, कैसे लगाऊँ? तुमने तो चादर डाल रखी है. चाटते ही जाओ पूरा मुँह घुसेड़ दो अन्दर।मैं समझ गया कि अन्नू की बुर अब लंड माँगने लगी है। मैंने सोचा कि अगर चाटता रहा तो वो झड़ जाएगी और मेरा चोदने का सपना अधूरा ही रह जाएगा। तो मैंने उठकर अपने लंड को उसके मुँह में देना चाहा।तो उसने कहा- पहले इसे साफ कर लो।मैंने कहा- जानू असली मजा लंड को इसी अवस्था में चाटने में है। देखो ये मेरा नमकीन पानी है.

यह फ़िल्म एक लड़की और उसके ट्यूशन मास्टर की थी, लड़की की उम्र करीब 18 साल और मास्टर की उम्र करीब 35 साल की थी.

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एक ही कप में !और फिर साथ में ही नहाए, हमने फिर कोई चुदाई नहीं की, पर अगले दिन हम साथ में घूमे और काफी देर एक-दूसरे के साथ रहे। मुंबई से हैदराबाद भी साथ में आए।वो ट्रिप मुझे हमेशा याद रहेगी।हमने एक-दूसरे से कोई संपर्क नहीं रखा, हम चाहते भी यही थे। एक अल्प समय पर प्यार से भरा हुआ रिश्ता, जो ज़िन्दगी भर अपनी मीठी याद दिलाता रहे।आपको मेरी कहानी कैसी लगी। मुझे मेल करके जरुर बताइएगा।[emailprotected]. आशा- चल दिया पर नए साल वाले दिन पक्का उसका लंड मुझे अपने अंदर चाहिए?कविता शर्म से लाल हो गई, 2 दिन तक उसने बात नहीं की, मैंने उसे कई एस एम एस किये पर रिप्लाई नहीं आया.

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बीएफ ब्लू पिक्चर हिंदी बीएफ बीच बीच में रूक रूक कर रीटा अपनी कीचड़ हुई चूत में से ऊँगलियाँ निकाल कर चूत का हल्का नमकीन पाईन-एपल जूस किसी भूखी बिल्ली की तरह चुसड़-चुसड़ की आवाज़ से चाट लेती थी. ओह… मुझे तो लग रहा है यह फट गई है प्लीज बाहर निकाल लो नहीं तो मेरी जान निकल जायेगी आया… ईईईई…!’मैं उसे बातों में उलझाए रखना चाहता था ताकि उसका दर्द कुछ कम हो जाए और मेरा लण्ड अन्दर समायोजित हो जाए। कहीं ऐसा ना हो कि वो बीच में ही मेरा काम खराब कर दे और मैं फिर से कच्चा भुन्ना रह जाऊँ। इस बार मैं बिना शतक लगाए आउट नहीं होना चाहता था।‘माया तुम बहुत खूबसूरत हो.

मेरा भेजा सटक जाता था और हाथ लौड़े पर चला जाता था।उनका हमारे घर आना-जाना था, तो मुझे बहुत मज़ा आता था। जब मैं घर पर होता और भाभी आतीं, मैं उनको देख कर मुस्कुरा देता था, वो भी मुस्कुरा देती।मैं उनकी ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को आतुर चूचियों को देखता था, वो भी इस बात जानती थीं।उनके पति कई-कई दिनों तक बाहर रहते थे, ऊपर से उनकी मदमस्त जवानी.

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!मैंने कहा- ठीक है।उन्होंने कहा- ठोकते वक़्त मेरी आँखों में देखते रहना।मैंने अपना लंड आंटी की गुफा में घुसा दिया और आंटी चिल्ला उठी- आ. और फिर हम लोगों ने खाना साथ में ही खाया फिर थोड़ी देर बातें करने के बाद सोने की तैयारी होने लगी।मामी बोलीं- तुम भी यहीं सो जाना. !पर वो कहाँ मानने वाले थे? किसी गोली की तरह पहले ही झटके में उनका आधा लण्ड अन्दर जा चुका था, और फिर पूरा समा गया। वो किसी कुत्ते की तरह अपनी कमर जोर से हिलाते हुए मुझे चोद रहे थे।पसीने से तर हो चुके मनोज ने कहा- बस अब मैं झड़ जाऊँगा.

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अब मुझे सीधा लिटा कर वे मेरी टाँगों की तरफ चले गए और मेरी जाँघों से लेकर पाँव तक चूमा और फिर जाँघों के बीच झुक कर मेरी योनि को करीब 15-20 बार चूमा और फिर चूसने लगे.

कि आप हमेशा मेरे साथ रहोगे… मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ…मैंने भी वादा किया और उसे खुशी से विदा किया… उसका भाई उसको लेने आया था… मेरा साला पता नहीं साला क्यों आ गया…मैं जाना चाहता था उसको घर छोड़ने…. !’मुझे उसकी गालियों की कोई परवाह नहीं थी। जब मैंने यह महसूस किया कि अब वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी है तो मैंने नया पैंतरा आज़माया।मैं उठ कर खड़ा हुआ और बोला- पम्मी चल उठ और बेड के बिल्कुल सेंटर में लेट. और’ चिल्लाती रही और मैं भी लगातार धक्के मारता रहा।पहले कुछ 5 मिनट में मैं पहली बार झड़ गया।फिर दूसरी बार वो मेरा लंड चूस रही थी उस वक़्त मैं दूसरी बार झड़ गया। हम दोनों अब धीरे-धीरे थकने लगे थे।तो कुछ देर आराम करने के बाद मैंने उसकी चूत को चोदना चालू किया। सारा वक़्त वो ‘आ… आ.

पर मैं तो कभी आपसे नहीं मिला।फिर मेरे पति ने मेरी तरफ देखा तो मैंने भी कह दिया- मैं भी नहीं जानती!तब उसने बताया- नहीं. अब इशानी थोड़ी शांत हो गई थी।कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]कहानी का अगला भाग :एक दूसरे में समाये-3. किसको क्या पता हमारे बारे में… तेरी शादी की वक्त आने तक ही तू मेरा हबी… सब कुछ सिखा दूँगी तुझे तब तक.

पर मैं तो कभी आपसे नहीं मिला।फिर मेरे पति ने मेरी तरफ देखा तो मैंने भी कह दिया- मैं भी नहीं जानती!तब उसने बताया- नहीं. बहादुर पारो के तरबूज से रसभरे चूतड़ों को हाथों से चोड़ाता बोला- मेरी रानी, मेरे कमरे में चल तो बताता हूँ कि एक औरत दूसरी औरत की कैसे ले सकती है.

रात में मुझे कौन सा दूध पिलाया था? मेरी अभी वह दूध पीने की उम्र थोड़े ही है!’और यह कह कर स्कूल की बस पकड़ने घर से निकल गई।दोपहर को मैं स्कूल से लौटी तो सान्याल अंकल अपने घर के बाहर खड़ा मेरा इंतज़ार कर रहे थे।मुझे देखते ही बोल पड़े- पिंकी कल घोर में क्या हुआ. सलोनी ने भी तो गाली दी थी… वो भूल गई… अगर तू देगी तो मैं भी दूंगा।शिखा रानी धीमी आवाज़ में बोली- तू राजे बड़ा कमीना है. !और यह कहते हुए झड़ गई और मेरा लंड मेरी वृंदा के काम-रस से भीग गया और अब पूरा कमरा मेरी सेक्सी वृंदा की आवाज से गूंज रहा था।थोड़ी देर बाद मैं नीचे लेट गया और वृंदा मेरे ऊपर आ गई और मेरी तरफ मुँह करके मेरे ऊपर बैठ गई।उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत में डाल लिया और वह जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। मैं भी नीचे से धक्के लगाने लगा।उसके मुँह से मादक सीत्कारें ‘आआह्ह्ह्ह ऊऊम्म्म्म आआह्ह्ह्ह.

मुझे नहीं पता था कि खून निकल रहा है, मुझे भी दर्द हो रहा है और मैं चड्डी तक नहीं पहन पा रहा हूँ।मैं उससे शाम को सिर्फ झगड़ती ही रही।अगले कुछ दिनों तक मेरी योनि में दर्द रहा, साथ ही योनि के ऊपर और नाभि के नीचे का हिस्सा भी सूजा हुआ रहा, योनि 2 दिन तक खुली हुई दिखाई देती रही।मैं अगले 2 हफ्ते तक सम्भोग के नाम से ही डरती रही।अपने प्यारे ईमेल मुझे लिखें।.

मोहित शर्मा जयपुरमेरा नाम मोहित है, मैं जयपुर का रहने वाला हूँ। मेरी लम्बाई 6 फुट है और कसरत करने की वजह से शरीर भी अच्छा बना हुआ है। मेरा लंड 6 इंच लम्बा और 2. !और यह कह कर मेरा सिर अपनी चूचियों में जोर से दबा लिया। हम कुछ देर यूँ ही पड़े रहे और फिर उठे तो देखा कि सुमीना की चूत से खून निकल आया था। जो उसकी चूत और झाण्टों पर लगा था।खून को देख कर सुमीना डर गई और बोली- लगता है कि मेरी चूत फट गई है और अब क्या होगा…!तो मैंने समझाया- डरने की कोई बात नहीं है सभी को पहली बार ऐसा ही होता है. रीटा ने अपनी मस्त जानलेवा कामुक जवानी को शीशे में निहारते हुए पन्जों के बल उचक कर गोरी-गोरी बाहें ऊपर उठा शीशे को तड़का देने वाली अंगड़ाई तोड़ी तो चटाक चटाक की आवाज से रीटा की तंग टैरालीन की शर्ट के टिच्च बटन खुलते चले गये.

कॉम पर पढ़ रहे हैं।मैं- तो अब क्या इरादा है?सुनीता- हे सुरभि, क्या बात करती है, मुझे शर्म आती है।सुनील सुनीता के हाथ पर हाथ हुए बोला- सच सुनीता जी, मैंने आपसे ज्यादा खूबसूरत औरत नहीं देखी।कहानी जारी रहेगी।आपके मेल के इन्तजार में[emailprotected]. मैंने भी अपना पकड़ कर उसे ऊपर-नीचे कर रहा हूँ और सोच रहा हूँ कि तुमसे सेक्स कर रहा हूँ!फिर उसने कहा- मुझे महसूस करो और जोर-जोर से करो… मैं भी ऊँगलियाँ अपने नीचे तुम्हारा ‘वो’ समझ कर जोर-जोर से डाल रही हूँ.

देखता हूँ मुझसे जो भी हो सकता है।मैडम तो कुछ ज्यादा ही तेज़ थीं, वो तो बाहर ही खड़ी थीं।मैंने खुद को और उसे दोनों को गाली देते हुए दरवाज़ा खोला।वो एक टी-शर्ट और जींस में दिखी। उसे देख कर तो नहीं लग रहा था कि कहीं दर्द होगा, पर उसे वाकयी दिक्कत थी।मैंने उसे अन्दर बुलाया और बिठाया, तो बोली- जल्दी से थोड़ी मालिश कर दो. !मैं उसके पास गया और पूछा- यहाँ कैसे?तो वो बोली- डिनर पर बुला कर खुद भूल गए?तो मैंने कहा- ओह ‘सॉरी’ मैं तो भूल ही गया था।फिर हमने होटल के रेस्टोरेंट में ही डिनर किया।हमें काफी देर हो गई थी तो मैंने उससे कहा- इतनी रात को तुम कहाँ अपने होटल जाओगी, आज यहीं रुक जाओ!उसने कहा- यहाँ कहाँ? मेरा रूम आलरेडी बुक है। मैं एक और कमरा क्यूँ लूँ?तो मैंने कहा- मत लो एक और कमरा. मैंने कहा- मोनू बहुत अच्छा खेल रहा है, इसलिए मैं हार रहा हूँ, उसे क्या पता था कि मैं उसी की वजह से हार रहा हूँ.

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मुझे मालूम था कि दीदी बहुत लौड़ों से चुद चुकी है और मेरे लंड से भी बड़ा बॉस का लंड उसकी चूत में ना जाने कितनी बार जा चुका था, इसलिए दीदी ने चुद-चुद कर अपनी चूत का भोसड़ा बना लिया था.

उतना जितना अभी तक नहीं हुआ होगा, पर तुमको बर्दाश्त करना होगा।तो वो बोली- इतने समय से बिना चुदाई के बर्दाश्त कर रही हूँ. 5 इन्च है। मैं एक डिजाईनर हूँ।अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है, बात दो हफ़्ते पहले की है, बिल्कुल सच्ची घटना है।रविवार को मेरी आधे दिन की छुट्टी होती है, तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं दोस्त को मिलने चला जाऊँ।मैंने अपने दोस्त को फोन किया उसका नाम अमित है जो सूरत में ही रहता है।मैंने उससे कहा- अमित तू कहाँ पर है?तो उसने कहा- मैं घर पर ही हूँ।मैंने उससे कहा- ठीक है. मैंने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके बगल में लेट गया और उसके होंठों से अपने होंठों को लगा दिया.

मैं बोला- अभी तो आधा भी नहीं गया और आप चीख पड़ी? और कविता मिस आप में तो हल्का सा भी नहीं गया, आप क्यों चीखी?कविता झेंप गई और बोली- जो कर रहे हो, चुपचाप करो. तभी पूजा का शरीर अचानक से सिकुड़ने लगा, उसकी आँखें बंद होने लगीं और पूजा मुझे अपनी टांगों के बीच में कसने लगी. दुर्लभ कश्यप ki gf!’‘सुम्मी, तुम्हारे मुँह से चुदाई की बात सुन कर मेरा लंड अब और इंतज़ार नहीं कर सकता… थोड़ा अपनी टाँगें और चौड़ी करो। मुझे तुम्हारी चूत बहुत अच्छी लगती है… मेरी जान।’‘मुझे भी आपका बहुत… उई.

पूनममेरा नाम पूनम है। मेरी ऊम्र 28 साल है। मैं तलाकशुदा हूँ। मेरे पति नामर्द थे इसीलिए मैंने उनसे पीछा छुड़ा लिया। मैं एक कोचिंग में बायोलॉजी पढ़ाती थी। हमेशा कोई न कोई कुत्ते की तरह मेरे भरे हुए बदन को घूरा करता था। चाहे वो मेरे छात्र हों या फिर चपरासी या साथी या फिर कोई और. उसकी इस हरकत से मैं थोड़ा घबराई, लेकिन फिर हिम्मत बांध कर लण्ड महाराज को हाथ से पकड़ा, ऊपर का मांस पीछे सरका कर सुपारे को बाहर निकाला और उसे अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया.

!लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और उसकी गांड को कसके चोदा और अपना सारा पानी उसकी गांड में ही डाल दिया। फिर कुछ देर तक हम दोनों लेटे रहे और सो गए।जब हम दोनों उठे तो उस से चला नहीं जा रहा था, तो मैंने उसे एक दर्द-निवारक दवा दी।उसने दवा खाई और कहने लगी- सर. !तो मैं हैरान हो गई कि अभी कुछ देर पहले इसी तरह की बात कर रही थी, अब अचानक क्या हो गया। मैंने भी उसे भांपने के लिए कह दिया- अगर ऐसा सोच नहीं सकती तो फिर हर वक़्त क्यों किसी के होने न होने की बात करती हो. !कुछ दिन बाद मैं अपने दोस्तों से बातें कर रहा था कि एक लड़की का कॉल आया।उसने मुझे बताया कि आपका नंबर मुझे अंजलि ने दिया है।मैंने उससे बातें भी खूब की, जैसे क्या कर रही है, मुझे देखा कि नहीं, मेरे से कब मिलोगी.

मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ।तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई और हम अपनी प्यार-मुहब्बत की बातें शुरू की, कुछ देर बाद मैंने उससे चुम्बन करने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया।वो चाय लेने के लिए कह कर रसोई में चली गई।मैंने उससे पूछा- बाकी लोग कहाँ हैं?तो उसने कहा- शादी में फैजाबाद गए हैं।तो मैंने पूछा- कब आएंगे?तो वो बोली- दो दिन बाद. आखिर मेरी जिंदगी में वो खास दिन आ ही गया, मैं सोनू को स्कूल भेज चुकी थी, हेमंत भी ऑफिस जा चुके थे, माही सो रही थी. पापाजी जी का ढेर सारा गाढ़ा रस, इतना ज्यादा और इतनी जोर से, निकलते हुए देख कर मेरी जोर से एक लंबी साँस निकल गई जिसे सुन कर पापाजी ने पलट कर देखा और मुझे देखते ही गुस्से में पूछा- तू यहाँ क्या कर रही है?उनकी गुस्से से भरी आवाज़ सुन कर मैं डर गई और बिना जवाब दिए वहाँ से भाग गई.

!उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ मेरे सामने थीं और मैं पागल हुए जा रहा था। उसने अपने होंठों मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगी। बड़ा मज़ा आ रहा था और वो मेरा लण्ड सहलाने लगी।मुझे लगा कि मैं सपना देख रहा हूँ या यहीं सपना भाभी के साथ हूँ।तब भाभी ने कहा- क्या सोच रहे हो?‘मैं आपके साथ हूँ.

!मैं कांप गई और मैं सहम कर उसकी तरफ़ मुँह करके उससे चिपक गई।मैंने उसे कस लिया, उसका शरीर मुझे गजब की गर्माहट दे रही थी। मैं अब गरम होने लगी थी, मेरी योनि में अब मैं हल्की नमी महसूस कर रही थी।अमर ने मुझसे कहा- सारिका. अंदर का नज़ारा देख के मेरे तो होश उड़ गए, पापाजी जी अपने नौ इंच लंबे और ढाई इंच मोटे लण्ड महाराज की बड़ी तस्सली से मालिश कर (मुठ मार) रहे थे.

मैंने मजबूती से पकड़ा और लण्ड थोड़ा बाहर निकाला, आगे-पीछे करता रहा, फिर गर्दन को बाजू में जकड़ कर और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए ताकि उसकी आवाज बाहर तक ना जा पाए. भाभी जोर-जोर से हंसने लगी- समीर, दिन में तो मैंने अपनी लिप्सटिक से तुम्हारा मुँह लाल किया था लेकिन पूजा ने तो अपने काम रस से तुम्हारा मुँह एक दम से सफेद बना दिया है, शाबाश पूजा…मैं बाथरुम में गया और अपना मुँह अच्छी तरह साबुन से धोया, कुल्ला किया और वापस कमरे में गया. तब मैंने देखा कि रस छूटने के बाद भी पापाजी का लण्ड महाराज अभी भी लोहे की छड़ की तरह अकड़ा हुआ है और वह अगली चढ़ाई के लिए तैयार है.

!ससुर जी- बहू सोच कर कॉल करियो, जो तू अताउल्ला से कहेगी तो मैं भी कह सकता हूँ कि मैंने तुझे पराए मर्द के साथ पकड़ लिया, इसलिए तू मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है और मेरे पास तो तेरी फोटो भी हैं। वो मैं अगर इंटरनेट पर डाल दूँ। तो तेरी दोनों बहनों की शादी तो होने से रही बेटा…!‘आप यहाँ से चले जाओ… मुझे आपसे बात नहीं करनी. उसने अगले कदम में मेरे वक्ष पर हाथ रखा तो मुझे मेरी अन्तर्वासना जागृत होने लगी और मैं उसकी गोदी में बैठ गई और उसको किस करने लगी. इससे पहले मैंने कभी इतनी सुन्दर लेडी नहीं देखी।उन्होंने मुस्कराकर ‘धन्यवाद’ दिया और सोफे पर मेरे पास ही आकर बैठ गईं और रूचि से बोली- राहुल को लाकर कोल्डड्रिंक दो… अभी विनोद भी आता ही होगा.

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पापा के पास जाने का इरादा नहीं है क्या? या मेरा लौड़ा तुझे ज़्यादा मज़ा देता है हा हा हा हा…रानी- बस बस… अपने मुँह मियां-मिठ्ठू ना बनो. मैंने कहा- बस हो गया…?‘बस फ़िलहाल यहीं तक! अगर जरूरत लगेगी तो मैं बुला लूँगी! तुम रहते कितनी दूर हो…!’उन्होंने मुझे पैसे देने चाहे तो मैंने अपनी एक दिन की सेलेरी ली क्यूंकि उस दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी ली थी।मैं वापिस अपने कमरे में आ गया।आदित्य पटेल[emailprotected]. पिंकी भी ठीक है, अभी बाहर खेलने गई हुई है।मैंने रामदीन से फोन लेने की नाकाम कोशिश की और वह कहने लगा- ठीक है.

एक हसीना से अपना लण्ड चुसवाते हुए ये सब देखना असीम सुख दे रहा था…एक दो बार और ऐसा हुआ… मगर सलोनी उसके काबू में बिल्कुल नहीं आ रही थी. इसके बाद जब भी वो मुझे चोदता, घोड़ी जरूर बनाता!मेरा पसंदीदा स्टाइल यह था कि मैं हेमंत को चित लेटा देती और उसके पेट पर नंगी बैठ जाती. कृष्णा सेक्सीमैंने एक स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली और विनायक ने ऑटो चलाना शुरू कर दिया।उस दिन की चुदाई से मुझे एक बेटी हुई जिसका नाम सविता है, हम दोनों खुशहाल जीवन जी रहे हैं.

!उन्होंने उठ कर मेरे बाल भी खोल दिए। मैंने आज शिफौन की नेट वाली गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी, जो एकदम मेरे शरीर से चिपकी हुई थी।ससुर जी- तू बिना घूँघट और खुले बालों के अच्छी लग रही है बहू.

बहुत बड़ा है।’ससुर जी मेरे नजदीक आकर बोले- तुमको अच्छा लगा?‘मैं तो आपका यह बड़ा लंड देख कर उसी दिन से पागल थी।’आज वही लौड़ा मेरी आँखों के सामने था तो मैंने बिना कुछ कहे उनका लौड़ा अपने हाथ में लेकर मसलने लगी।अब मैं नीचे बैठ गई और उनके लौड़े को हाथ से आगे-पीछे करने लगी।ससुर जी ने बोला- इसको मुँह में लो।तो मैंने कहा- नहीं बाबू जी. लो भाभी से बात करो।उन दोनों ने कुछ बात की फ़िर भाभी ने कहा- तुम थोड़ा बैठो, मैं ऊपर स्टोर में से कुछ समान और बिस्तर निकाल रही हूँ। अभी और भी थोड़ा काम है, फ़िर चाय बनाती हूँ.

जूही तुम तो बिना कपड़ों के मस्त लग रही हो… उस समय तो खून की वजह से मैंने ध्यान नहीं दिया और ये शरमा क्यों रही हो, मुझे भी तो दिखाओ अपनी जवानी।जूही- भाई प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।आरोही- ओये. वह उस आनन्द अनुभूति में बह गई और उसने मुझे आगे करने का इशारा कर दिया, तब मैंने उसे थोड़ा ढीला छोड़ा और अपने लंड को आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे उसे पूरा अन्दर तक घुसा दिया. फाड़ दो मेरी चूत।मैंने उसको खड़ा किया और उसकी फुद्दी पर अपना लंड रख कर और अपने होंठ उसके होंठ रख कर जोर से धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसके अन्दर चला गया वो अन्दर ही अन्दर बहुत चिल्लाई, उसके आंसू आ गए। मैंने फिर एक धक्का और मारा अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था.

फ़िर मैं उस पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और मैं उसको पूरे चेहरे पर चुम्बन करने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी.

पर बड़ा मजा आ रहा है चाची की कसम, करिये ना और…’चचाजी लंड पेलने लगे, आधा लंड अंदर गया तो काशीरा छटपटाने लगी- ओह. इस घर में हम दोनों अकले हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे का ख़याल रखना चाहिए… खुश रह बेटा और तू साड़ी में सिर पर पल्लू डाल कर बड़ी सुंदर लगती है… चल अब मैं स्कूल जा रहा हूँ. वो भी मुझे बहुत प्यार करते उन्होंने मेरे लिए दुबई से काम छोड़ कर आ गये लेकिन मैं उनके प्यार को समझ ना सकी.

राजपूती चूड़ीमैं गांड मरवाने के मूड में नहीं थी पर रोहित ने मुझे कुछ समझने का मौका ही नहीं दिया और एक धक्का लगा कर सुपारा मेरी गांड में फिट कर दिया. दूध खत्म करने के बाद उन्होंने मुझे फिर से चूमना शुरू किया और कहा- अब तुम्हारा दूध पीने की बारी है और मेरे स्तनों को दबाने लगे, जिससे मेरा दूध निकल गया और ब्लाउज भीग गया.

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उसने जी भर कर मेरे कूल्हों, कमर, पीठ और जाँघों को प्यार किया और फिर मुझे सीधा करके मेरे सामने अपना लिंग रख दिया. कभी कभी एकांत में भी तो चुदाई होनी चाहिए ना!शेष सातों दिन हम तीनों ने साथ मिल कर चुदाई का तरह तरह का खेल खेला. फिर मैंने भाभी की मालिश करनी चालू की, पहले तो उनकी चूचियों को खूब मसला, फिर उनके सारे जिस्म की मालिशकरने लगा तो वह तड़पने लगी और सिसकारी भरने लगी.

तब मुझे लगता है उसे अपने सीने से लगा लूँ, उसकी आँखों में इतना प्यार देख कर मुझसे रहा नहीं जाता!मैं उसके दिल की भावनाओं को समझ रही थी, पर वो रो न दे इसलिए बात को मजाक में उड़ाते हुए कहा- तो ठीक है. कॉम को!फेस बुक के अलावा लोगों ने मुझ से याहू मेल पर भी संपर्क किया, उन में से ही एक युगल भी था, उन्हें भी कहानी पसंद आई और उस बारे में काफी बातें भी की और मुझे यह जान कर बहुत ही ताज्जुब हुआ कि उन दोनों पति पत्नी को सबसे ज्यादा उत्तेजक बात यह लगी कि पति की मौजूदगी में दूसरे मर्द के साथ सेक्स. मैं उससे बात करती हूँ!और वे टीवी देखने लगीं।मेरी नज़र उनके मम्मों पर थी, मैंने उनसे कहा- भाभी आपने किसी से लव किया है।वो बोली- हाँ तेरे भाईसाहब से!मैंने कहा- गुड.

वो मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसकी चूत, साथ में उंगली में तेल लगा कर उसकी गांड में उंगली कर रहा था क्योंकि अब गाण्ड मारनी थी. अओह की आवाज आ रही थी क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तो दोस्तो, मैं 2 मिनट में झड़ गया और मैंने अपना सारा वीर्य चाची के मुँह में छोड़ दिया और दोस्तो, क्या बताऊँ, दिल को कितना सुकून मिला!पर दोस्तो, मैंने हार नहीं मानी. भाभी- अह्ह धीरे…आआ अह्ह!मेरा लंड अंदर जा रहा था, लेकिन मैंने उसे बाहर खींचा और एक झटके में पूरा अंदर डाला.

तभी मैंने थोड़ा जोर लगाया, लेकिन चिकनाई बहुत ज्यादा हो गई थी और उनकी चूत कसी होने के कारण लंड फिसल गया।मैंने फिर से लंड लगाया, फिर से वही हुआ।वो बोली- यार प्लीज जल्दी करो न. मैंने भाभी के पैरों को अपने कन्धों पर लिया और उनकी चूत पर लंड को रगड़ने लगा।वो गरम हो कर कहने लगी- अब और मत तड़पाओ.

क्या माल लग रही थीं।उन्होंने हरे रंग का चुस्त फिटिंग का सूट पहन रखा था, जिससे उनके गोल-गोल मम्मे स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।उनका फिगर 30:32:28 का था।जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो मेरी ओर बढ़ी और मुझे अपनी बाँहों में कस कर बोली- कैसे हो मेरे भान्जे साहब.

चूसी और चुदी हुई रीटा बुरी तरह शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथों में ढांप कर राजू की छाती में छिपने की कोशिश करने लगी. विद मेट फाइलफिर मैंने उसकी पीठ पर किस्सियाँ की और गांड मारने लगा, 15 मिनट बाद उसकी गांड में ही माल गिरा दिया, वो भी झर गई. लंड कैसे करते हैंजैसे ही राजू अंदर घुसने लगा, शरारती रीटा ने अपनी अधनंगी व अकड़ी हुई छातियाँ राजू से भिड़ाती हुई बोली- आऊचऽऽऽ, आई एम सारी भईया. !जूही- लो जी अब कपड़े पहनने की मेहनत करूँ आप निकालने की मेहनत करो… आख़िर में होना तो नंगी ही है, तो ऐसे में क्या बुराई है… हाँ.

अमर मेरे कूल्हों से खेलने में मग्न हो गए और मैं कभी उनके मुँह में अपने स्तनों को देती तो कभी चूमती हुई धक्के लगाने लगती.

शादी के पहले ही मैं माँ नहीं बनना चाहती।तब मैंने उसे बिस्तर पर लिटाकर, उसके बाजू में लेटकर उसके दूध को धीरे-धीरे से दबाते हुए विस्तार से आधे घंटे तक चुदाई के बारे में समझाया।उसे पूरी तरह समझाया कि कैसे झड़ने पर आनन्द मिलता है और फिर उस आनन्द से निकले हुए शुक्राणु और अंडाणु के मेल से गर्भ ठहरता है।अब मैंने उठकर उसकी चूत. आपका स्वागत है।तभी सुनील बोले- आप लोग एन्जॉय करो मैं और आकाश चलते हैं।उन लोगों के जाने के बाद दरवाजा अन्दर से बंद करके मैं राज के पास आ गई।राज जी बोले- नेहा तुम्हारी चर्चा जब से सुनी है. मेरी दीदी शिप्रा और पड़ोसन सोनिया द्वारा मेरी वर्षगाँठ और उसके बाद के दस दिन तक तोहफे में मुझे बहुत सेक्स दिया.

एक बार जब भैया किसी काम से 15 दिनों के लिए जयपुर से बाहर चले गए तो मैंने देखा कि भाभी उदास-उदास सी होने लगी थी और मैंने देखा कि वो दिन में कई बार अपनी चूत को अपने हाथ से खुजलाती रहती थीं. खैर मैंने एक ठंडी साँस लेते हुए कहा- ठीक है सोनिया, तुम जैसे कहोगी, मैं वैसे ही करुँगी, तुम चाहती हो कि मैं सबके सामने अपनी जींस उतारूं, ठीक, मैं अभी अपनी जींस उतार देती हूँ. लगता है मैं 2-3 दिन ठीक से चल भी नहीं सकूंगी।”मेरी जान तुम तो मुझे रात को ही कहोगी… एक बार आ जाओ !” वो हँसने लगा। मेरी भी हंसी निकल गई।रात की बात रात को देखेंगे….

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हरामजादी की चूत भी गीली हो गई है… चुदवाना चाहती है, अब ‘काम’ का टाइम है !’ यह कहते हुए उसने मुझे उसी बिस्तर पर पटक दिया, जहाँ मम्मी-पापा से चुदती थीं।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !‘नहीं रामू चाचा. अब उसने अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ कर चूत पर जमाया और कुछ देर रुक कर अचानक जोर से धक्का मारा, कच से लंड अन्दर हो गया, मेरे मुँह हाय निकली- ओ उ उ उ उ उ उ उ उ… ये क्या कर दिया!वो बेशर्मी से हंस दिया. जिसे मैं पी गया।उन्होंने मेरे लंड को अपने कोमल हाथों में लिया और प्यार से सहलाने लगी।फिर 8 इंच के लंड को मुँह में लेकर चाटने लगी।वो मेरा लंड लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी.

मैंने अपने लंड को उसके चूत से निकाला और अभी उसके मुँह में भी नहीं डाला था कि मेरे लंड ने माल छोड़ना चालू कर दिया.

मैंने उससे पूछा- नीलू, मेरा होने वाला है, कहाँ निकालू?वो बोली- मेरा यह पहला प्रेम है, मेरे अन्दर ही डालना.

हम दोनों कॉफी पीने लगे… क्रू मेम्बर बाहर चले गए और स्टूडियो का दरवाज़ा भी बंद हो गया…मोहित सर ने प्रोजेक्टर पर तीस फोटो दिखाए. यह लड़की जो अभी यहाँ से निकली है, कौन है और कहाँ रहती है?तो मानी बोला- इसका नाम स्वीटी है और इसी मोहल्ले में रहती है।मानी भी इसी मोहल्ले का रहने वाला था।मैं- यार क्या मस्त लड़की है… ऊपर से नीचे तक कयामत है. गाउन दिखाओआशा ने कविता के घर जाते ही पैंट खोल दी और लंड चूसने लगी, उसके दोनों हाथ मेरी गांड पकड़े हुए थे और पूरा लंड उसके गले के अंदर तक.

प्रेषक : नामालूमसम्पादक : जूजा जीमैं आप लोगों के लिए अपनी ज़िंदगी का और खूबसूरत लम्हा एक कहानी के माध्यम से साझा कर रहा हूँ। बात उस समय की है जब मैं ग्रेजुयेशन कर रहा था। मेरे घर के पास एक फैमिली रहती थी।पति और पत्नी, जो रिश्ते में मेरी बुआ के लड़के और उनकी पत्नी यानि मेरे भाई और भाभी लगते हैं।चूंकि. भाभी हमारे बगल में लेटी हुई थी और हमें देखकर अपनी चूत को मसल रही थी और मैं भाभी के चूचों को दबोच रहा था. तब मुझे लगता है उसे अपने सीने से लगा लूँ, उसकी आँखों में इतना प्यार देख कर मुझसे रहा नहीं जाता!मैं उसके दिल की भावनाओं को समझ रही थी, पर वो रो न दे इसलिए बात को मजाक में उड़ाते हुए कहा- तो ठीक है.

मैं थोड़ा अंजान बन कर अनिल से बोली- देखो जब तुमने कल मेरे साथ जो किया उसके बाद मुझे बहुत सारा खून निकला और मैं इसीलिए डर रही हूँ।तो उस पर अनिल बोला- मेरी पूजा डार्लिंग. !उसने भी मेरी बात को समझा और सामान्य हो गई।तब मैंने सोचा कि चलो इसके दिल की बात इसके मुँह से आज निकलवा ही लेती हूँ और फिर मैंने अपनी बातों में उसे उलझाने की कोशिश शुरू कर दी।कुछ देर तो वो मासूम बनने का ढोंग करती रही पर मैं उसकी बचपन की सहेली हूँ इसलिए उसका नाटक ज्यादा देर नहीं चला और उसने साफ़ कबूल कर लिया कि उसे भी किसी मर्द की जरुरत है जो उसके साथ समय बिताए… उसे प्यार करे.

? यह कौन सा पहली बार तेरे अन्दर जाएगा !” वह मुझे लिटा कर छाती पर घुटनों के बल बैठ कर अपना लंड मेरे होंठों से रगड़ने लगा।हाय कितना मजा आ रहा था ! ऐसे करके नहीं, यह सब नहीं, उसने हाथ से मेरा ज़बड़ा खोला और फड़ाक से लंड घुसा दिया !चूस… सुना तुम बहुत मस्त लंड चूसते हो !” मैं धीरे-धीरे से उसका लंड चूसने लगा।देखो लंड तो चूस दूँगा.

सीधे मेरे पास आ गई… तेरे भाई ने मज़ा नहीं दिया क्या…!आरोही- आज तो पता नहीं भाई को क्या हो गया… बहुत मज़ा दिया मुझे…!जूही- सच्ची दीदी… भाई ने मज़ा दिया आपको…!राहुल बड़े प्यार से जूही के मम्मों को सहलाता हुआ बोला- मेरी रानी अब मज़ा लेने की तेरी बारी है, देख कैसे तुझे चोदता हूँ आराम से…!जूही शरमा कर अपना हाथ चेहरे पर लगा लेती है।राहुल- हय हय… तेरा ये शरमाना. रेणुकामुझे इस बात का पता था कि मरद चुदाई में ‘इसे’ हम लोगों के ‘बिल’ में डालते हैं।‘जैसा भी है, लेकिन यह मर्द का लौड़ा तेरी चूत में आज ज़रूर घुसेगा।” उसने अपना लंड सहलाते हुए मुझे कहा।फिर उसने मुझे बाँहों में ले लिया और मुझे चुम्बन करने लगा, मेरी चूचियाँ दबाने लगा और चूत को भी खोदने लगा।मैंने अपना नाटक जारी रखते हुए कहा- प्लीज़ मुझे छोड़ दे. अब हम दोनों अकेले थे तो मैंने कहा- हमारा बेटा कहाँ है?तो उन्होंने बताया कि वो बाहर बाकी बच्चों के साथ खेल रहा है.

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रात के करीब दो बजे जब क्लब बंद होने लगा तो जॉय ने कहा कि हम सब उसके साथ उसके हीरनन्दानी वाले अपार्टमेंट में चलते हैं. ’लेकिन उसने जवाब नहीं दिया तो मैंने सोचा कि लगता है ‘इसका खड़ा नहीं होता होगा।’मुझे अपनी जिन्दगी में पहली बार ऐसा बंदा मिला जिससे मुझे लौटना पड़ा।रात को चाय वाला आया, मैंने मना कर दिया कि आज नहीं मरवाऊँगा, पर उस साले ने ज़बरदस्ती मुझे नंगा किया, बिस्तर पर धकेल कर ऊपर सवार हो गया।लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस दिया।‘साली बाग़ में जाती हो. मेरे मामा जी आने वाले हैं शायद घर से कुछ पैसे लाए होंगे। मैं अभी जा रही हूँ नहीं तो वो गुड़गाँव चले जाएँगे…सो प्लीज़।रणजीत- ओके मैं तुम्हें नीचे तक छोड़ दूँगा चलो।रानी- नहीं इस रूप में आप कहीं नहीं जाएँगे।रणजीत- नहीं यार.

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तब भाई साब ने कहा- अमिता अकेली है और बच्चे भी नाना के यहाँ गए हैं एक महीने के लिये, तुम शाम को एक फ़ोन कर लेना घर पर या फ़िर घर जाकर आना।मैंने कहा- जी ठीक है!और मैं वहीं से ऑफ़िस चला गया।शाम को लौटने में देर हो गई, करीब सात बज चुके थे, अचानक सेल पर मेरी बीवी का फ़ोन आया- अरे भाभी का फ़ोन नहीं लग रहा. लो ना।उनके दूध पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और ज़ोर से अपना लंड मुँह में पेल दिया। वो बिल्ली की तरह चपड़-चपड़ चूसने लगीं।मैं- आय हाय मेरी प्यासी रखैल. फ़िर मैं बैड पर उसके पीछे जाकर उसे अपने दोनों पैरों के बीच में लेकर बैठ गया, फ़िर मैंने अपने हाथ उसके खुले बालों में डाले और उन्हें आगे की तरफ़ करते हुये उसकी पीठ पर हाथ फ़ेरने लगा और चूमने लगा और उसका ब्लाऊज़ पीछे से खोलने लगा, उसका ब्लाऊज़ खोलकर मैंने उतारा और साईड में रख दिया, ब्रा ना पहनी होने से अब उसका बदन ऊपर से बिल्कुल नंगा मेरी आँखों के सामने था जो एकदम शीशे की तरह साफ़ चमक रहा था.

उधर मुझे डर लगता है, कहीं कोई सांप-बिच्छू ने काट लिया तो?तब उसने कहा- जीने का असली मजा तो डर में ही है।और वो जिद करने लगा, रात काफी हो चुकी थी, करीब 12 बज चुके थे तो मैंने भी हार कर ‘हाँ’ कह दी।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।[emailprotected]. लो इसे ! आह !”पर विनायक ने मेरी बात को जैसे सुना ही नहीं और अभी मैं पहले झटके के दर्द से उबर भी न पाई थी कि दूसरा झटका लगा। इस बार लंड हम दोनों के बदन से निकली चिकनाई के सहारे जड़ तक मेरी चूत में समा गया.

फिर मास्टर सोफे पर बैठ गया और लड़की घुटनों के बल बैठ कर उसकी पैंट की चैन खोलने लगी, मास्टर ने उसकी मदद की और अपने लंड को बाहर निकाल लिया.

जोर लगाओ और चोदो मुझे…!उसने मेरी बात सुनते ही एक हाथ मेरे चूतड़ के नीचे रख कर पकड़ा और अपना लिंग थोड़ा बाहर खींच कर फिर से धक्का दिया और फिर. और मैं तैयार हो गया मैं तो सांसारिक जीवन कैसे जीते हैं यह सीखना चाहता था पर चाची सेक्स सिखाना चाहती थी. !मैंने भी तेजी से चोदना चालू कर दिया और दस मिनट बाद उनका शरीर अकड़ने लगा और वह झड़ गईं।मैंने भाभी से पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?तो उन्होंने कहा- मेरी चूत में ही झड़ जा.

सील टूटने से मेरे लंड का अगला भाग सुन्न हो गया था।उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया। मैं उसकी चूत में धक्का मारने में लग गया।वो गाली देती और आवाजें निकालती. 00 बजे आ गई।वो मुझसे पूछने लगी कि क्या मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।तो मैंने उसे न में जवाब दिया। उसने मुझे हमारी गली की लड़कियों के चक्करों के बारे में बताया।उसने बोला- न तो आप किसी से प्यार करते हैं और न ही मैं। यह कहानी आप अन्तर्वासना. उम्म’ मैं सिर्फ़ चुदाई के दर्द को बयान कर रही थी।ऐसा बड़ा लंड अपनी चूत में कोहराम मचा रहा था, मेरे आनन्द की कोई सीमा नहीं थी, मैं मस्त हो कर अब उसका साथ दे रही थी। करीब 5-6 मिनट ऐसा चलता रहा।फिर ‘आआअहह.

वो बहुत ही छोटा सा, एकदम साफ और गुलाबी छेद था।उसकी गांड भी उसकी बुर की तरह बिल्कुल गुलाबी थी। तभी मैंने अपनी जीभ से उसकी गांड भी चाटी.

बीएफ ब्लू पिक्चर हिंदी बीएफ: उन्होंने कहा- प्लीज ये कॉन्डोम निकाल देता हूँ बिल्कुल मजा नहीं आ रहा है।मैंने मना किया, पर कुछ देर के सम्भोग में लगने लगा कि वो पूरे मन से नहीं कर रहे हैं।फिर उन्होंने मुझसे कहा- कॉन्डोम निकाल देता हूँ जब स्खलन होने लगूंगा तो लिंग बाहर निकाल लूँगा।मैंने उनसे पूछा- क्या खुद पर इतना नियंत्रण कर सकते हो?तो उन्होंने मुझसे कहा- भरोसा करो. मुझे इतनी शर्म महेसूस हो रही थी कि मैं वहाँ से हिल भी नहीं पा रही थी, शायद वो दोनों लड़के मुझे चोदना चाहते थे पर सोनिया ने उन्हें मना कर रखा था, सोनिया बहुत ही शातिर लड़की है इसलिए वो लोग मेरी नंगी चिकनी व गोरी गुलाबी चूत का नजारा ही कर रहे थे.

पर तूने अपने पति को क्या समझाया कि वो चुदाई न करने को राज़ी हो गया?शिखा रानी ने हंस कर कहा- हमने उनसे कहा कि हम कुछ दिन सिर्फ लंड चूस के आपका माल पीना चाहते हैं। आपको हमने चार साल तक मुँह में न झड़वा कर जो आपका मज़ा चूर किया हम उसकी भरपाई कम से कम दस पंद्रह दिन सिर्फ आपको चूस चूस कर आपकी मलाई ही पी कर करेंगे. पर उसने तो मुझे धोखा दे दिया था, पता नहीं उसको क्या काम पड़ गया था।मैंने रोजी को ही अपने शीशे में उतारने की सोची।मैं- अरे रोजी, नीलू कहाँ है आज?रोजी- क्यों उसने बताया नहीं आपको? बोल तो रही थी कि वो फोन कर लेगी आपको।मैं- अरे तो क्या वो आई थी? फिर कहाँ चली गई, उसको तबियत तो सही है ना?रोजी- अर्र हाँ सर… वो बिलकुल ठीक है…. चाय पीते हैं।दोनों कैंटीन में चले गए, नेहा ने चाय का ऑर्डर किया और डॉक्टर के केबिन में बैठ गए।‘अरे बाबा बोलो ना.

एक भी बाल नहीं था।मैंने झट से उनकी चूत को मुँह में ले लिया और चाटने और चबाने लगा। वो लगातार सिसकारियाँ लिए जा रही थीं।भाभी- हाय मेरे चोदू राजा.

तभी आंटी ने मुझे देखकर एक कातिल मुस्कान के साथ कहा- क्या हुआ बेटा? तुम्हारा मन नहीं लग रहा क्या, मैंने भी एक मुस्कान दी पर कुछ नहीं बोला. मैंने पेटीकोट को उसके पैरों से अलग किया, मेरे सामने अब वो पूरी तरह से नंगी खड़ी थी, उसकी चूत तो ना जाने अब तक कितना पानी छोड़ चुकी थी, मैंने बस कुछ देर उसको देखा, और बिना समय गंवाये उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया और अपनी जीभ को नुकीली करके उसकी चूत के अन्दर दाखिल कर दिया. तुम चाहो तो इन्हें छू सकते हो।रौनक- न न नहीं…रौनक शरमा रहा था तो मैंने उसका हाथ उठा कर अपनी जांघों पर रख लिया…रौनक मेरी जांघों को सहलाने लगा।मैं- कैसा लगा रौनक… मैं तुम्हें पसंद नहीं??रौनक- तुम… तुम्हें कौन नहीं पसंद करेगा… तुम इतनी सुन्दर जो हो…मैं- सच में… मैं तुम्हें सुन्दर लगती हूँ…?मैंने अपना टीशर्ट ऊपर किया और रौनक को अपने मम्मे चूसने को कहा.