बीएफ सिनेमा हिंदी में

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मैं एक शरीफ बच्चे की तरह अन्दर गया और जैसे ही उसको कमोड से उठाने लगा, रानी ने मना कर दिया.होटल में टीवी देख कर थोड़ा टाइम पास किया मगर मेरे दिमाग से उस लड़की का ख्याल जा ही नहीं रहा था.

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मेरे पेटीकोट का कपड़ा किसी मोटे कपड़े के बने कंडोम की भांति लग रहा था, जिसका सूखापन योनि के टपकते रस से गीला होता हुआ मुझे महसूस हो रहा था. मेरा मन तो कर रहा था कि अभी लपक कर बहन चोद दूँ … पर मैं ये पहली चुदाई स्पेशल बनाना चाहता था. दूसरी तरफ ये भी तो गलत है कि उसके अलावा मैं किसी लड़की को देखकर उत्तेजित होता हूँ.

आज से मेरा आप लोगों से रिश्ता खत्म!वो पांव पटकते हुए उधर से चली गई. अब मेरी बारी थी, उसका माल निकालने की … तो मैं जोर से उंगली करने लगा. मैंने जवाब अपने फोन के मैसेज बॉक्स में लिख कर हाथ थैले पर टिकाकर उसको दिखाया.

दूसरे दिन स्कूल के पास आकर हम दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और वो मुझे उस दोस्त के कमरे के पास छोड़ कर बोला- मैं अकेला कमरे में जा रहा हूँ. फिर उन्होंने मुझसे पूछा- अब दर्द कुछ कम हुआ?मैं मरी हुई कुतिया की आवाज में बोली- जी. तभी दीदी जोरों से ‘आह्ह्घघ …’ की आवाज करती हुई अकड़ने लगीं और उन्होंने मेरे मुंह में चूत का रस छोड़ दिया.

मैं बिल्कुल नहीं चाहता कि तुम्हारी ज़िंदगी में कोई संकट आए या तुम मेरे पास आ जाओ. मैं वापस लौटने लगी तो बड़ी मौसी बोलीं- इधर आ!मैं अन्दर गई, बड़ी मौसी ने जल्दी से अपनी चोली बंद की और ‘किसी से कहना नहीं’ कहकर चली गईं.

घर आते ही मैंने बीवी से कहा- ये तुम्हारा सारा सामान है … मेरा मार्केट में कुछ काम रह गया है, मैं अभी निपटा कर आता हूँ.

बातों बातों में उन्होंने मुझसे पूछा कि शरद के तबादले के बाद तुम अपने आपको कैसे संभाल रही हो?मैंने उन्हें अपनी सारी बातें बेझिझक बता दीं.

सुबह उठी तो पूरा दिन बस उसकी लंड को लेकर सोच रही थी कि कैसे आज अपनी बुर चुदवा कर ठंडी करूं. उसकी चूत का चीरा बहुत छोटा सा था और पहले जब मैंने उसकी चूत में उंगली घुसाई थी, तभी यह अहसास भी हो गया था. उसकी चूत का चीरा बहुत छोटा सा था और पहले जब मैंने उसकी चूत में उंगली घुसाई थी, तभी यह अहसास भी हो गया था.

जैसे ही मेरा शेर गुफा में गया, बाई की जोर से आवाज निकली ‘आह … ओह्ह. इधर मेरी पत्नी ने एक लड़के को जन्म दिया और उधर में अमिता के प्रेगनेंसी के 2-3 महीने तक मैंने जमकर चुदाई का मजा लिया. मैंने आशीष से कहा- यार आज पढ़ने का मूड नहीं है … कहीं घूमने चलें!उसने मुझे साफ मना कर दिया और बोला- नहीं, क्लास जरूर लेंगे.

मैंने उनको बिस्तर पर हाथ रख कर नीचे खड़ा किया और पीछे से उनकी चूत में लंड फंसा कर एक जोरदार धक्का दे मारा.

उसकी तेज़ तेज़ चुसाई से मेरे लौड़े ने वीर्य छोड़ दिया तो वो गटागट करके पी गई. ये सुनकर अंकल ने एक लंबी सांस छोड़ी और बोले- क्यों मुझमें … मेरा मतलब मेरी उम्र में तुमको क्या खासियत पसंद है?मैं बोली- अब देखिए, अभी कोई लड़का होता … तो इतने काम के बदले उसको कुछ ना कुछ चाहिए होता. मैंने धीरे से अपना लंड पीछे को लिया और जोर से अन्दर की तरफ ठांसा तो उसके मुंह से ‘आह्ह अअह …’ निकल गया.

फिर मैंने पूछा- आप क्या पढ़ाई करती हैं?उन्होंने बताया- हां, मैं एमए कर रही हूं. अब मुझे कुछ और भी चाहिए था, जिससे दिल में जल रही आग को शांत किया जा सके. पिछले भागपति की गैरमौजूदगी में मेरी अन्तर्वासनामें आपने पढ़ा था कि मैं राजीव सर के साथ व्हिस्की पी रही थी और अचानक से कुछ ऐसा होता चला गया कि राजीव सर ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.

अब अर्शिया मेरे घर पर ही थी और हम सब बातें करते हुए मस्ती कर रहे थे.

मैंने अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाल दिया और उसकी चूत चोदने लगा. मैं भाभी के बड़े बड़े मम्मों को खचाखच सटासट भंभोड़ते हुए मजा लेते हुए उनकी गांड पर जोर जोर से चाटें मारने लगा.

बीएफ सिनेमा हिंदी में भाभी मेरी ओर देख कर गुस्से में बोली- तुम्हें शर्म नहीं आई क्या किसी गैर औरत को देखते हुए? मैं अभी अपने पति से बात करती हूं. दर्द के मारे उसका चेहरा लाल हो गया मगर मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुंच गया था।उसकी चूत में लंड डालकर जो मजा आ रहा था वो दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास था.

बीएफ सिनेमा हिंदी में मैं खुद को भी देखने लगी कि मैं कितनी खराब लगती हूँ कि कोई मुझे तवज्जो ही देता. कामवाली बाई के होंठ बहुत बड़े और ऐसे रसीले थे मानो उनका मजा हर एक घंटे में कोई लेता हो.

एक बेटी कॉलेज में थी तो दूसरी स्कूल में … और मेरे पति एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे.

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नाज जब भी मेरे साथ बिस्तर पर होती तो मैं उससे कहता- एक बच्चा तुम भी कर लो. यह बात सुनने के बाद मेरे जान में जान आयी तो मैं गाड़ी चालू करके चलाने लगा. मुझे पता नहीं क्यों ये लग रहा था कि ये तो मेरी लुगाई बनने के चक्कर में दिख रही है.

मुमताज ने मेरे लण्ड को चूमा तो मैंने लण्ड का सुपारा उसके मुँह में दे दिया. मैंने सिगरेट जलाई और उसका स्मोक मैं लेकर किस करते करते उसको दे देता था. अब अंकल मां के ऊपर चढ़ गए और मां के दोनों पैरों को चौड़ा करके अपना लंड मां की चूत पर सैट कर दिया.

वो घुटनों के बल बैठ गई और लंड को अपने मुँह में लेकर मजे से चूसने लगी.

दोस्तो, इसके बाद मैंने कई बार चंडीगढ़ जाकर अशी को चोदा और अब भी उससे ही प्यार करता हूँ. उसका एक हाथ मेरे हाथ पर आया और उसने मेरे उस हाथ को अपनी चूचियों पर रखवा दिया. ये बात मां सुन रही थीं और खुश भी हो रही थीं … लेकिन मेरा प्लान कुछ और ही था.

लगभग 4-5 मिनट के बाद अब मेरा लंड भी अकड़ रहा था और उसकी चूत में आखिरी झटके मार रहा था. आइसक्रीम खाने के बाद मैंने उससे कहा- तुम बैठो, मैं नहा कर आता हूँ … थोड़ा फ्रेश फील होगा. एसी चैक करते टाइम मेरी नजरें उन मोहतरमा से हट ही नहीं रही थीं, उनके रसभरे उभार मुझे हद से ज्यादा पागल कर रहे थे.

इसके बाद उसने मेरी गांड को कुछ मिनट सहलाया और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल कर आराम आराम से चोदने लगा. दीदी की चूत जैसे ही लंड पर पड़ी, हम दोनों आंख बंद करके परम आनन्द की प्राप्ति में खो गए थे.

इसी ऊहापोह के बीच उसकी मासूम सी सूरत पर छाई निश्चल मुस्कान ने मेरे सारे बड़े बड़े सवालों के जवाब एक पल में दे दिए. उसकी चुत ने मेरे लंड को ऐसे जकड़ रखा था … जैसे किसी ने लंड को मुठ्ठी में भींच रखा हो. अन्दर जाते ही पहले तो उसने मेरी अधखुली साड़ी उतारी और बिस्तर पर मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया.

मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर लिया और उसकी गांड पकड़ कर जोर जोर से झटके मारने लगा.

मैंने पूछा- घास का ढेर किधर है?वो इस बार बहुत जोर से हंस दीं- मेरा एसी उधर लगा है. मैंने पूछा- आपको कोई बच्चा नहीं है?उन्होंने कहा- नहीं कोई बच्चा नहीं है. लंड के सुपारे के चूत के मुहाने पर जाते ही रंगोली सिहर गयी और चिल्ला दी- आह … धीरे!उसी समय साहिल ने तेज़ी से अपना लंड रंगोली की चूत में घुसा दिया.

और बिना कुछ ज्यादा सोचे समझे मैंने अपने मोबाइल के इन बॉक्स में नंबर लिख कर उसको बता दिया. मैंने उसको उठाया और किचन की पट्टी पर बिठा कर उसके जांघों के बीच में आ गया था.

धीरे धीरे उसने पहल करते हुए मेरे होंठ अपने होंठों में दबाए और धीरे धीरे चूसने लगी. वो मजे से ब्लू फिल्म देखने लगी और मैं धीरे धीरे उंगली अन्दर बाहर करने लगा. मुझे पता था कि अगर फिर से कोमल के पास गया तो शायद मैं खुद को रोक नहीं पाऊं … इसलिए मैं सोफे पर ही लंड हिला कर सो गया.

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वो डायरेक्टर के पास गई और उससे जबरन हाथ मिलाती हुई अपना परिचय देने लगी.

हैलो फ्रेंड्स, मैं आपके सामने अपनी एक और मस्त सच्ची सेक्स कहानी के साथ पुन: हाजिर हूँ. आज पहली बार मुझे एक साथ दो सुंदर लड़कियों की चूत चोदने का मौका मिल रहा था. अब सभी जवान, बूढ़ी और पॉव रोटी सी फूली … गीली और चिकनी चूतों को नमस्कार.

मेरे पड़ोस में मेरी एक प्यारी सी लड़की रहती है, जिससे मैं बचपन से प्यार करता आ रहा हूँ … लेकिन उसे अपना प्यार जताने की मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई. मुझे उसी समय न जाने दिमाग में क्या आया कि मैंने आंटी की ब्रा पैंटी उठा कर अपनी जेब में रख ली. ब्लू पिक्चर बिहारी सेक्सीपेशे से में एक फ्रीलांस लेखक हूँ, मैं सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय रहता हूँ.

शाम को जब वह वापस जाने लगा तो मेरे मम्मी पापा ने कहा- तुम कुछ दिन यहीं रुक ज़ाओ. मैं भी जवान लड़का था ऐसे किसी औरत का पहली बार मेरे से संपर्क होने से मेरा लंड खड़ा हो गया और उनके पिछवाड़े को छूने लगा.

इंडिया के हिसाब से इंडियन का … अफ्रीका और अमेरिका के हिसाब से उनका मैटर करता है. उफ … रंगोली की काली ब्रा से उसके बड़े बड़े गोरे गोरे दूध बाहर आने को बेताब थे. मैंने अपना एक हाथ सीट पर रखा था और दूसरे में सब्जी का थैला पकड़ा हुआ था.

सरोज बोली- राज, तूने गलती तो की है और तू कमरा छोड़ेगा, तो अम्मा का घाटा भी हो जाएगा. अब्बू ने अपने कुर्ते से अपना लण्ड पोंछा और फिर से मेरी बुर पर रखा, मेरी चूचियों को मुँह में लिया और धीरे धीरे लण्ड को अन्दर धकेलने लगे. अरे गोगी पुत्तर तू उठ गया?” रोशन अपने नंगे जिस्म को सोढ़ी के लंड पर बैठे बैठे ही चादर से लपेटते हुए बोली.

मैं रंगोली के कमरे में गया, वो बिस्तर पर औंधे मुँह करके सोई हुई थी.

कुछ देर बाद मुझे भी लंड के प्रहार अच्छे लगने लगे और मैं उसके नीचे दब कर पिसती रही. अब मौसी ने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर कर लिया, जिससे उनकी पीठ मेरे सीने से लग गयी.

उसने खुद को समेटा और बैग को अपनी कमर से नीचे की तरफ आगे लंड को ढकते हुए लटका लिया. कॉलेज के वक़्त से ही मैं अपने बॉयफ्रेंड के खूब मज़े लेकर लंड चूसती थी. मेरा भी बदन पूरी तरीके से गर्म हो चुका था और लौड़ा भी अभी किसी भी टाइम अपना लावा उगल सकता था.

मैंने उससे हाय कहते हुए अपना परिचय दिया- मैं दिशा हूँ … अभी मेरे डैड घर पर नहीं हैं. आह … मेरी तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गई थी; मैं अपने आपको बहुत मुश्किल से संभाल पा रही थी. मैंने अपना अगला कामदेव का तीर फेंका और निशा के कोमल से हाथ को आराम से चूमा.

बीएफ सिनेमा हिंदी में दो मिनट बाद मैंने दीदी को किस करते हुए उनसे पूछा- दीदी, आपको मजा आया ना?दीदी- हां वीरू मेरे को तो बहुत मजा आया … पहली बार ऐसी धमाकेदार चुदाई हुई है. मुझे दिल्ली में 10 दिन रुकना पड़ा, तो मैंने सोचा कि मैं थोड़ा घूम भी लेता हूं.

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जैसे ही दीदी की गांड में मैंने सुपारा डाला, वो आह आह करने लगी और बोलने लगी- ये क्या कर रहे हो मौनू … बिना कंडोम लगाए ये सब क्यों कर रहे हो?मैंने लंड बाहर निकाल लिया और चुप हो गया. लेकिन तभी मुझे अहसास हुआ कि मेरे मुँह में हल्का सा अजीब सा स्वाद भी आ रहा था. मैंने कहा- और आप कौन सी कम हो … आप भी तो मुझे अपने मम्मों की झांकी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ती हो.

वो अन्दर आई तो मैंने देखा कि उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी और माफ़ी का सा भाव था. मैं आज से पहले किसी लड़की के साथ नहाया नहीं था, तो मुझे उसकी ये बात सुनकर बड़ा अच्छा लगा. सेक्सविडीओधीरे धीरे घी निशा की चूत में समा गया और मैंने अपनी उंगली से चुत में और घी लगा दिया.

शीना भाभी के शहद जैसे होंठों का रसपान करने में भारी आनन्द की प्राप्ति हो रही थी.

मैंने बोला- स्वाति में नींद में था और मुझे नहीं पता कि ये सब कैसे हो गया. अब्बू ने अपना कुर्ता निकाल दिया और पूरी तरह से नंगे होकर मुझसे लिपट गये.

दो दिन बाद दोपहर का समय था, बुर्का पहने एक भरे बदन की औरत आई और सलाम करके बोली- विजय भाई, मैं नाज की अम्मी हूँ. फिर मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर झुका दिया और नीचे जाकर गांड में लंड घुसा दिया. उसने सरिता भाभी से पूछा- क्या हुआ भाभी, आप इतनी घबराई हुई क्यों हो?सरिता भाभी ने अपने चूचे उसकी छाती से रगड़ते हुए कहा- किचन में चूहा है, मुझे बड़ा डर लग रहा है.

वो मेरे लंड पर ऐसे उल्टी टंग गई, जैसे उसकी गांड में खूंटा पर टांग दी हो.

उधर से उन्होंने अपने घर में फोन कर दिया कि मेरी ट्रेन छूट गई थी और मैं अब बाद में आऊंगी. 5 इंच मोटे लंड का मालिक भी बनाया है, जिसे मैंने सेक्स कहानी लिखने से पहले नटराज कम्पनी के स्केल से नापा है, ताकि लड़कियों को सही नाप की जानकारी दे सकूं. वो इतना चिकना था कि किसी बेलगाम सांड की तरह वो मेरी चूत की गहराई में फ़िसलते हुए घुस गया.

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आपको मेरी यह होटल हॉट सेक्स स्टोरी कैसी लगी, कृपया करके मुझे ईमेल पर बताएं. अब उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और अपने हाथों से मेरी टांगें चौड़ी कर फैला दीं. उसका पूरा लिंग मेरे हाथ पर रखा हुआ था, जो मेरे हाथ को पार करके आगे तक जा रहा था.

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उसको उलटी करते समय बस इतना होश था कि वो मुझसे कह सकी- प्लीज़ बिट्टू मुझे संभालो.

इसी ऊहापोह के बीच उसकी मासूम सी सूरत पर छाई निश्चल मुस्कान ने मेरे सारे बड़े बड़े सवालों के जवाब एक पल में दे दिए. फिर हम दोनों ने तय किया कि जब तक कमरे का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक यूं ही रगड़ सुख से हम काम चला लेंगे. जैसे ही रोशन के कानों में सोढ़ी के गाने की आवाज आई वो अपने हाथ में कड़छी लिए हुए किचन से बाहर निकल कर ड्राइंगरूम में आ गई.

ये बात तब शुरू हुई थी, जब मैं और मेरे दोस्त नए साल की पार्टी में शहर से कुछ दूर के एक होटल में गए थे. अब इससे अच्छा शगुन क्या होगा, जब आंख खुलते ही दो सुंदर चुचे मुँह के सामने हों. इधर मैंने अपना फोन नंबर लिख दिया है, अगर आप चाहें तो मुझसे डायरेक्ट कांटेक्ट कीजिएगा.

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मेरी गोटियां भी बड़ी तेजी से भाभी की चूत के आसपास मानो चुम्बन लेने लगी थीं. मैंने फिर से अर्शिया के टॉप के बटन खोल दिए और ब्रा नीचे खिसका दी और उसके नंगे हो चुके बोबों को दबाने लगा. इसी पोज में मैंने अपने हाथ की एक उंगली उस डाइवोर्सी की गांड में डाल दी.

क्योंकि मैं बाइक से आया था तो मैं बारिश और हल्की होने का इन्तजार करने लगा या ये कहो मेरे मन में चोर आ गया था.

अर्शिया की चुत एकदम अमेरिकन लड़की जैसी थी, एकदम गुलाबी गुलाबी!चुत पर उगी हुई बारीक बारीक झांटें चुत की खूबसूरती को बढ़ा रही थीं.

तू अभी बहुत ही कमसिन और कच्ची कली है … मुझे तुझको प्यार करने में करीब एक सप्ताह लग जाएगा. मैंने चुत में से लंड को बाहर निकाल लिया और मालती से कहा- सुबह होने वाली है. हिंदी सेक्सी पिक्चर बीएफ”लण्ड के सुपारे पर तेल की चार बूँदें मलकर मैंने नाज की गांड में डाल दिया.

तभी कुछ लोग पीछे के दरवाजे से चढ़े, तो वो मेरी सीट से थोड़ा आगे हो गई. मुझे तो इतना अच्छा लग रहा था और मैं सोच रही थी कि मेरी जिंदगी में हर समय इसी तरह की अवस्था बनी रहे. उनकी कभी कभी वाली और जल्दी जल्दी वाली चुदाई से मेरी आग नहीं बुझ पाती थी.

अब मेरी मॉम की सिसकारियां निकालने लगी, आ आह उफ़ अहा जैसी आवाज़ मेरा जोश बढ़ाने लगीं मैं और जोर से चाटने लगा. धीरे धीरे घी निशा की चूत में समा गया और मैंने अपनी उंगली से चुत में और घी लगा दिया.

उन्होंने भी देरी नहीं और मुझे जोर से पकड़ कर बिस्तर की ओर धकेल दिया और मेरे ऊपर ऐसे चढ़ गए जैसे कोई कसाई अपने जानवर के ऊपर आ गया हो.

निशा ने चड्डी भी सफेद रंग की ही पहन रखी थी, जो आगे से पूरी तरह गीली थी. मैंने अपने लंड पर क्रीम लगाई और थोड़ी से उसकी चूत की फांकों में भी लगा दी. मैंने जगह बनाई और पहली ही कोशिश में उस अनन्त सुख में आ पहुंचा, जिसे हर मर्द पाना चाहता है.

नंगी पिक्चर दिखाना मैंने थोड़ा लंड अन्दर डालना चाहा, इतने में अन्वेषी भाभी आगे को खिसक गईं. अबसे 3 साल पहले घर वालों की पसंद से मेरी शरद से अरेंज्ड मैरिज हुई है.

धीरे धीरे वो मेरे सामने मटक रही थी और यह देख कर मेरा छोटा भाई फिर से सलामी देने लगा. हमारी कभी ज्यादा बातचीत नहीं होती थी, पर जब भी हम दोनों की नज़रें मिलतीं, तो उनके कुछ ना कुछ इशारे होते रहते थे. वो जब नहाकर बाथरूम से बाहर निकली, उसकी गीली जुल्फों के कारण उसकी टी-शर्ट कुछ गीली हो गई थी और उसके एकदम से टाइट चूचे थे, बिना ब्रा के साफ़ नुमाया हो रहे थे.

बीवी को मनाने वाली शायरी

ऑफिस जाने से पहले श्रेया ने हम दोनों को किस किया और हम ऑफिस के लिए निकल गए. निशा का अब तक रोम रोम खड़ा हो चुका था, जो उसकी तेज चलती हुई सांसों से पता चल रहा था. ’मैं उसकी चूत चाटने में लगा रहा और वो मेरा सर अपनी चुत में घुसाए अपनी गांड से मेरे मुँह पर धक्का देने में लगी रही.

तभी मैंने अपनी दो उंगलियां सीधी उसकी चूत में डाल दीं और वो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मेरे हाथ को चूत में धक्का देने लगी. एक बार हमारे बीच सेक्स की बातें शुरू हुईं तो वो तो जैसे खुलता चला गया.

किसी का कोई डर नहीं था … बस चरम सुख का आनन्द जो मुझे चाहिए था, मिल रहा था.

उसने झट से पैंट उतार कर डेस्क पर रख दी और मैं दोबारा से उसका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. इसके बाद मैं कॉलेज जाने लगी और मेरी नियमित तरीके से चुदाई होने लगी. मेरे लंड ने पीहू की बच्चेदानी पर चोट की थी तो पीहू जोर से चिल्ला पड़ी- उई मां मर गई … लंड को निकाल लो.

अब वो मेरे साथ मज़ा लेने लगी थी- आह आह हहह राज फक मी फास्ट ओह आहह हहह ऊईई ईई। फक मी फक मी राज!मेरा लन्ड समारा को जमकर चोद रहा था।समारा की चूत टाइट थी जिससे चुदाई का मज़ा बढ़ता जा रहा था।कुछ देर में समारा की चूत ने पानी छोड़ दिया. जितना मैं उसके बोबे को दबाता, वह उतनी ही जोर से मेरे होंठों को चबाती. करीब दस मिनट बाद उसकी चूत में सुर्खी आ गई और उसने कहा- मैं गई!उसके जाते ही मैंने भी उसकी चूत में अपना माल छोड़ दिया.

मुझे उसके बारे में पता था … क्योंकि कभी कभी उसके भाई से मेरी बात हो जाती थी.

बीएफ सिनेमा हिंदी में: मेरी उम्र 25 साल है, रंग गोरा है, हाईट 5 फुट 9 इंच है, दिखने में स्मार्ट दिखता हूं. अलीज़ा ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ लिया और लंड के ऊपर की खाल को अपने मुलायम हाथों से ऊपर करके गुलाबी टोपा निकाल कर देखा.

देखिए न आज बादल भी लगे हुए हैं … अगर बारिश हुई तो हम दोनों बारिश का पूरा मज़ा उठाएंगे. एक मिनट के घर्षण में मेर पूरा लौड़ा उसकी चूत में आराम से आने जाने लगा. गाँव की देसी चूत चुदाई कहानी में पढ़ें कि मेरी मकान मालकिन की मंझली बेटी देर रात मेरे कमरे में आ गयी, कहने लगी कि मेरी गांड चूत में खुजली हो रही है.

मैं अपनी सांसों को नियंत्रित करते हुए उसकी छोटी सी चूत को खाने में लगा था.

मेरा रंग एकदम गोरा और 34d-28-36 का फिगर है, जो मेरे लंबे कद की वजह से मुझ पर खूब जंचता है. तभी उन्होंने मुँह ऊपर उठा कर अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए और मुझे चूमने लगीं. मैं क्या करती, मेरी गांड की हालत उस बकरी जैसी हो रही थी जिसके सामने शेर खड़ा हो और कोई कहे कि हिम्मत रखो, कुछ नहीं होगा.