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”उस समय बकरी गर्म न हो तो?”तो बकरा कर लेता है और जबरदस्ती चढ़ जाता है. मीराबाई की फोटोउसने मेरी तरफ देखा, तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया क्योंकि मेरा लौड़ा जड़ तक साफ़ दिख रहा था.

वो अपने हाथ की बीच वाली उंगली को अपनी चूत के अन्दर बाहर कर रही थी और अपने एक चूचे को हाथ से मसल रही थी. सेक्सी भोजपुरी चुदाई वीडियोआपने कभी किसी हलवाई को जलेबी बनाते तो जरूर ही देखा होगा, ऐसी ही वो मेरे लंड पर गोल गोल घूम कर कुछ जलेबी सी बना रही थीं.

हम दोनों अक्सर देर रात तक टीवी देखते रहते और कई बार तो वह टीवी देखते देखते ही सामने सोफा पर सो जाता था.बीएफ बीएफ बढ़िया: इस जवान मोसी की चुदाई कहानी पर आप सभी के रिप्लाई और मेल का इन्तजार रहेगा.

कुछ कहने के लिए मैंने अपना मुँह उसके होंठों से हटाया, तो निशा अचरज भरी नजरों से मुझे देख रही थी.फिर जब वो मस्त लौंडा क्लास के अन्दर आया, तो उसको क्लास की सारी लड़कियां भी देखती रह गईं.

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उसकी आंखों में शोखी देख कर मुझे लगने लगा था कि दिल्ली की लौंडिया है, साली लंड लेने में ज्यादा नखरे नहीं करेगी.ऐसा कहकर मैं बाहर आ गया और घर पर कॉल करके मम्मी पापा को गुड न्यूज दी कि मेरी जॉब लग गई है.

जब अशी ने हद ही कर दी, तो उसको (प्रियंका को) बीच में आना पड़ा और उसने यह सब मुझे बता दिया. बीएफ बीएफ बढ़िया मेरा जब भी मन होता, मैं सुबह की फ्लाइट से जाता और होटल में उसे चोद कर शाम तक वापस आ जाता.

वो मोन करने लगीं और अपने दोनों हाथों से अपनी चादर पकड़ कर कुछ इठने सी लगीं.

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इसी बात को लेकर मुझे थोड़ा संदेह था कि पता नहीं संजना ठीक से लंड चूसेगी या नहीं … लेकिन उसने मेरा लंड ऐसे चूसा कि पहली बार उसे लंड मिला हो. दो शायद उनकी सास थीं और एक नई नवेली दुल्हन जैसी ही थी, उसकी उम्र करीब 25-26 साल की थी. अब वो सिर्फ उस छिद्र में जोर जोर से अपनी उंगली अन्दर बाहर कर रहा था.

आज की चुसाई के बाद अब ऐसा लगने लगा था कि हम दोनों की ही लंड चुत चूसने की मतलब ओरल सेक्स भूख बढ़ गई थी. अब वो बार बार मायके जाने और मेकअप के ऑर्डर का नाम बता कर अक्सर घर से बाहर रहने लगी है. उसी पल उसने आगे को होकर खुद को मेरी गिरफ्त से अलग किया और फुर्ती से पलट कर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया.

अब तो मैंने आराम से अपने होंठ खोले और उसके कोमल हाथ को अपने होंठों से चूसने लगा. मेरा लौड़ा उस शैम्पू से ज्यादा मोटा और सख्त हो गया था और उसकी गांड का छेद मेरे लौड़े की मार से सिकुड़ और फैल रहा था. बाप बीवी और दोनों बेटियों को छोड़कर अपना घर कहीं और बसा चुका है, मां अंधी है, बेचारी को कुछ दिखाई नहीं देता.

बाप बीवी और दोनों बेटियों को छोड़कर अपना घर कहीं और बसा चुका है, मां अंधी है, बेचारी को कुछ दिखाई नहीं देता. नाज की चूत शबाना के मुँह पर टिकाकर मैंने शबाना की चूत में अपना लण्ड पेल दिया.

चूसते हुए अब मैं उसकी मखमली जांघों तक पहुंच चुका था और मैंने उसकी संगमरमर सी चिकनी जांघों को चूस चूस कर खूब गीला कर दिया था.

नाज को बकरी बना कर मैं उसके पीछे आया और उसकी गांड के चुन्नटों पर व्हिस्की टपकाकर पीने लगा.

एक ओर तो ये सरासर गलत था, पर दूसरी ओर मुझे भी उनके अकेलेपन का अहसास था. अब जल्दी से इसमें पेट्रोल भर दो, जिससे ये तुम्हें एक नई दुनिया में ले जा सके. बिस्तर पर लेट कर दीदी बोलीं- यार मौनू … आज तो मैं बहुत थक गई हूं … क्या तुम मेरी बॉडी दबा दोगे, यदि तुम्हारा मन हो तो प्लीज़ कर दो.

मैंने रानी के सामने अपने हाथ बढ़ा दिया और रानी ने थोड़ा सकुचाते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया. मैंने उनकी लैगिंग्स को उनके घुटनों तक नीचे कर दिया और पैंटी को नीचे करके उनकी चुत में उंगली करने लगा. लंड चुत में लेते ही वो हल्की सी आवाज में चीख उठीं- हाय जालिम धीरे चोद न!मैं बोला- हां जैसे पहली बार लंड ले रही हो अपनी चूत में.

कसम से उसकी गुलाबी और फूली हुई निबोड़ियों ने मुझे एकदम से पागल कर दिया और मैं उसके एक निप्पल को चूसने लगा.

बस तू गोगी पुत्तर को जल्दी सुला दिया कर … आह … आह … ले!ये कहते हुए सोढ़ी ने अपना सारा माल रोशन की गांड में निकाल दिया और उसी वक़्त रोशन ने भी अपनी चूत से ढेर सारा पानी सोढ़ी के लंड पर उड़ेल दिया. नाज से पहले मैं पचासों झिल्लियां फाड़ चुका था लेकिन जो मजा आज आ रहा था, अद्भुत था. क्योंकि चुत बहुत गीली हो चुकी थी तो लंड सरसराता हुआ अन्दर तक घुसता चला गया.

सक्सेना ने हंस कर मेरी गांड पर एक जोर से थप्पड़ लगाया और बोला- साली भोसड़ी की … सेक्रेटरी सेक्स के लिए ही रखी है मैंने … तू लंड लेगी तो माल भी तो कमाएगी. वो भी मुझे कभी एक चूसने को दे देतीं, तो कभी दूसरी चूची चुसवाने लगतीं. जेठ जी दुबारा से मुझे अपना लंड चूसने के कहे और मैं उनका लंड चूसने लगी और इस तरह से उनके लंड से पानी निकल गया.

उसकी दोनों टांगों को चौड़ा करके मैंने उसकी चूत को अपने हाथ से फैलाया.

उसने भी बिना देर किए, मेरे लंड को पैन्ट के ऊपर से ही पकड़ लिया वो मुझे एक प्यारी स्माइल देकर हवस भरी नजर से देखने लगी. वापस एक ही होटल में जाना होता था तो कम्पनी के ऑफिस से हम दोनों साथ में ही निकलते थे.

बीएफ बीएफ बढ़िया और उस समय मेरी नजर वाशरूम के दरवाजे से अंदर गयी तो में अचानक शॉक हो गया. फिर वो अपने एक हाथ से मेरी चुत को दबाने लगे, मुझे बहुत शर्म आ रही थी … लेकिन चुदने का मन भी कर रहा था इसलिए मैंने उन्हें मना नहीं किया.

बीएफ बीएफ बढ़िया नवीन ने सिक्युरिटी गार्ड से फोन करके बोला- कोई आए तो बोल देना कि साहब नहीं हैं और मैनेजर भी नहीं है. वो भी गर्मा गई थी, तो उसने एक पल के लिए मुझे अपने से दूर किया और झटके से अपना गाउन निकाल कर अपने तन से अलग कर दिया.

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मैं आपको बता चुका हूँ कि मैं पहले एक टूरिस्ट गाइड था, पर बाद में मैंने एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया था. मैं बहुत खुश हो गया था कि आज मुझे कुछ न कुछ तो जरूर करने को मिलेगा. नीचे सपाट मक्खन जैसा सपाट कोमल पेट, जिस पर अंगुलियां ही न टिक सकें.

मैंने कहा- सरोज अभी तो टाइम है … आओ बिस्तर पर लेट कर बातें करते हैं. भाई के साथ गांड फाड़ सेक्स का ये सिलसिला लगातार 3 महीने तक चलता रहा था. अचानक से उठाने से सरिता की दोनों चुचियां विजय के हाथों से छूने लगीं.

यदि सुशी जी पहले कह देतीं तो मैं कुछ पहले ही चुत से लंड निकाल कर उन्हें वीर्य पिला देता.

मैं समझ गई कि अब्बू मेरी बुर चौड़ी करके अपने लण्ड का रास्ता बना रहे हैं. शायद ये व्हिस्की का असर था या मेरा वहम, पर बातों ही बातों में वो अपना हाथ मेरी पीठ पर सहला रहे थे. मेरी दीदी भी सुबह के टाइम पर कुछ सीखने जाती थीं, तो वो भी मेरे उठने के बाद चली गई थीं.

मैं समझ गया कि अब वो समय दूर नहीं है, जब मैं स्नेहा की चूत ले रहा होऊंगा. मुझे अन्दर से बड़ी उत्तेजना हो रही थी कि सहेलियों की बात आज सच होने जा रही है, जब मेरी चूत में लंड अन्दर जाने वाला है. उसकी चुत में दर्द खत्म हो गया था तो वो राजू का लंड चूस कर खड़ा करने लगी.

मैं उसके मम्मों को दबा रहा था और पीछे से इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उसका छूटना नामुनकिन था. अब मैंने उसकी टांगों को ऊपर उठा कर अपने कंधों पर रख लिया और उसकी बुर का छेद मेरे लंड के ठीक सामने आ गया.

दूसरे ही दिन मम्मी पापा को उनके दोस्त की मैरिज एनीवर्सरी में जाना था तो वो दोनों दिन में निकल गए थे. मैंने सिगरेट जलाई और उसका स्मोक मैं लेकर किस करते करते उसको दे देता था. उन्होंने मेरे बालों को छितरा दिया और हाथों से बालों को आगे की ओर करके मेरी गर्दन पर किस करना चालू कर दिया.

मेरी बीवी श्रुति ने टांगें फैला दीं और दोस्त ने अपना लौड़ा बीवी की चुत में पेल दिया.

आपको मेरी ये चुदाई गर्ल सेक्स स्टोरी कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल जरूर करें. आंटी के मुँह से मादक आवाज़ आ रही थी- यस्स रॉकी कम ऑन … पूरा दूध चूस लो … सब तुम्हारा ही है. एक रात 10 बजे हम दोनों बात कर रहे थे कि तभी अचानक से उसने बाय बोल दिया.

क्योंकि मैं भी नशे में थी तो मेरा थोड़ा सा मन कर गया था और इतने में मेरा यूरिन निकल गया. उस वक़्त मेरे मन में बस एक ही ख्याल था कि मुझे शरद को पूरी तरह से खुश करना है.

आज की सेक्स कहानी सरिता भाभी की अपने इसी नए पड़ोसी विजय के साथ की चुदाई की कहानी है. अब तक मैम ने भी मेरी पैंट घुटनों के नीचे सरका दी थी और मेरी अंडरवियर के ऊपर से मेरे लंड को मसलने लगीं. वो सब औरतें ठीक मेरे पास ही खड़ी थीं क्यूंकि बस में काफी भीड़ भी थी और कोई सीट खाली नहीं थी.

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इससे मेरी उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुंच गयी और मैं एकदम से जंगली हो गयी.

दीदी की सासू मां बोलीं- तुम्हारी दीदी अपने कमरे में हैं, जाओ उससे जाकर मिल लो. निशा ने अपने दोनों हाथों को मेरी पीठ पर जोर से कस लिया था मानो वह अब जल्दी से जल्दी अपनी चूत में लौड़ा घुसवाना चाहती हो. कुछ देर बाद उसने मुझे खड़ा किया और खुद बैठ कर मेरी अंडरवियर को उतारने की जगह एक झटके से फाड़ दिया और मेरे लंड को आज़ाद कर दिया.

मैंने उंगली और अंगूठे से भाभी की चूत के बाहरी होंठों को थोड़ा खोला तो चूत की दरार के ऊपर बहुत ही सुंदर दाना सा बना हुआ था जो उसका क्लीटोरियस था. पूरा कमरा चुदाई की ठप ठप की आवाज से गूंज रहा था और चूत लंड के मिलन से एक अनोखी खुशबू चारों तरफ बिखरी हुई थी. शिल्पी राजxxxआह … हम दोनों की जीभों ने कुश्ती लड़ना शुरू की तो हम दोनों ही मदहोश हो गए.

इतने दिनों से बाहर भटकता हुआ बाकी का लंड भी सिस्टर की गांड के अन्दर घुस गया. ये सब देखकर मुझे दुख हुआ कि मेरी बीवी ने मुझे ऐसी बातें बताना तक ठीक नहीं समझा.

मैंने झटपट अपने कपड़े उतार दिए और अपना लम्बा मोटा लंड मैडम के सामने लहरा दिया. नीचे के इन हाथों का खेल एक दूसरे का बदन पर चल रहा था और ऊपर मोबाइल हाथ में लिए दोनों हाथों से जो बातें हो रही थीं, उनका खेल मन पर चल रहा था. दोस्तो, आपको मेरी रण्डी माँ की सेक्स कहानी कैसी लगी, आप कॉमेंट कर सकते हैं.

उस पार्टी में कम से कम ढाई सौ लोग आए हुए थे जिनमें आसपास के बिजनेसमैन और उनकी फैमिली के लोग ज्यादा थे. उसको इतना ज्यादा मज़ा आ रहा था कि वो मादक आवाजों से चिल्ला रही थी- आह और और जोर से … आह अअउ … आह. उधर अंकल जी भी मेरे मम्मों को अपनी पीठ पर रगड़ते हुए महसूस करके मुझे प्यार से देखने लगे थे.

उन्होंने अपनी दो उंगलियों में वैसलीन लगाकर जोर से मेरी गांड के अन्दर घुसा दिया.

चूंकि चाचा चाची दोनों जॉब पर चले जाते थे और हम पूरा दिन नंगे रह कर मस्ती करते थे. समारा मेरे गले को चूमने लगी और मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी।मैं बिल्कुल अनजान बनकर सब धीरे धीरे कर रहा था।समारा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगी.

बस फिर मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर सकी और इस तरीके की हरकत कर दी. उसके बाद वह कोचिंग लेने दिल्ली चली गयी और उसके जाने के बाद मैं भी एक बार उससे मिलने दिल्ली चला गया. क्योंकि हमें फोरप्ले करते हुए काफी टाइम हो चुका था और आज लौड़ा भी ज्यादा फुंफकार इसलिए मार रहा था कि मेरे जीवन में यह पहला मौका था जिसमें मुझे इतनी कमसिन लौंडिया चोदने को मिलने वाली थी.

जाने से एक दिन पहले मैंने शरद के लिए एक सरप्राइज पार्टी का इंतजाम किया और उसके आफिस के सारे दोस्तों को घर पर खाने पर आमंत्रित किया. ये बात मुझे उनकी कांपते हुए पैरों … और तेज़ हो रही सांसों से साफ पता चल रही थी. मैं उन्हें किस कर रहा था और बूब्स को दबा रहा था ताकि मेरा ध्यान किस और बूब्स में ही रहे और मैं जल्दी स्खलित न हो जाऊं.

बीएफ बीएफ बढ़िया उन्होंने धीरे-धीरे वैसलीन से सनी उंगली मेरी गांड की तरफ से छेद में फेरना शुरू कर दी. चूंकि आज हम दोनों दिन भर बहुत घूमे थे और नहाने के समय काफी मस्ती की थी, तो काफी थक गए थे.

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वो बला की खूबसूरत हसीना मेरे सामने सिर्फ एक थोंग वाली नीली पैंटी में खड़ी थी जिसका आगे का हिस्सा बड़ी मुश्किल से उनकी चूत को छुपा रहा था और पीछे का हिस्सा उनकी गांड की दरार में फंसा हुआ था. पर मेरे काम पर जाने के बाद शायद उसने अपनी चुत चुदायी करवा ली होगी … और मुझे पता नहीं लगने दिया होगा. बहुत देर तक उन्होंने मेरे बोबों को दबाया, फिर मुझको जोर से पलट दिया.

फिर कुछ पल बाद जब वो शांत हुई तो मैं आगे पीछे होकर लंड को अन्दर बाहर करने लगा. वो सबको नजरअंदाज करते हुए सबसे पीछे वाली सीट पर आकर बैठ गया जो पूरी खाली थी. कलर दार सूटवहां तक जाने में हम एक बार फिर से बुरी तरह भीग गए लेकिन वहां पहुंच कर उसने गाड़ी खड़ी की और हम उस कमरे की तरफ बढ़ गए.

मैंने उसे बिस्तर पर घोड़ी बनाया और उसकी गांड पर तेल लगाकर अपना लंड एकदम से पूरा घुसा दिया और तेज़ तेज़ झटके मारकर चोदने लगा.

फिर मैंने देखा कि ज़ीनिया की चुत से खून बह रहा है तो मैं समझ गया कि ये अभी राज से चुदी नहीं थी. दोस्तो, मेरी कंपनी में एक शादीशुदा औरत काम करती थी, उसकी उम्र कोई 23 साल होगी.

इसी के चलते मैंने सोचा कि अचानक से जाकर मैं अपने दोस्त को सरप्राइज दे दूँगा. इसके बाद, मेरी बीवी और दोस्त दोनों बहुत बार मिले और उन दोनों ने मेरे ही घर में, मेरे ही बेड पर चुदायी भी की. मैंने मुमताज को पीठ के बल लिटाकर चूतड़ के नीचे तकिया रखा और मुमताज पर लेटकर उसके होंठ चूसने लगा.

अंकल थोड़ा अलग लहज़े में पूछते हुए बोले- मतलब लड़कों में तुम्हारा इंटरेस्ट ही नहीं है … तो किसमें है?मैंने बोला- अरे अंकल, मेरा मतलब था कि मेरी उम्र के लड़कों में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है, जिनको सिर्फ जिस्म ही दिखता है.

उसका व्हाट्सएप चैक किया, तो पता चला कि सारे मैसेज ही उसकी सहेलियों के ही थे, जिसमें अधिकतर जोक्स ही थे और कुछ नहीं था. पिछली सेक्स कहानीदेसी माल की आगे पीछे चुदाईमें मैं सरोज को चोद रहा था. अब आगे Xxx भाभी हिंदी कहानी:मैं अभी भाभी को शीशे में उतारने की स्कीम सोच ही रहा था कि भाभी ने एक ऐसी बात कह दी कि मुझे रास्ता सूझ गया.

सेक्सी फिल्म माधुरी दीक्षितमैं अपनी गांड को गोल घुमा रहा था इससे मेरा लंड भाभी की चूत के अन्दर के हर एक हिस्से को अपने सुपारे से अपनी ताकत और सख्ती का अहसास दिला रहा था. कुछ मिनट बाद मैंने निशा को उठाया और उसकी बांहों को ऊपर करते हुए मैंने उसके कोमल से बदन से उसकी टी-शर्ट को अलग कर दिया.

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मैंने एक उंगली अंजुमन की चूत में घुसाई और अन्दर की गहराई को महसूस करने लगा. बचपन से ही पढ़ाकू रही हूँ और साथ ही साथ अपनी निजी जिंदगी में भी मैंने अब तक भरपूर मज़े लिए हैं. मैंने भी उसके होंठों को अपने होंठों से चूसते हुए लौड़े को पूरी ताकत से चुत के अन्दर डालना निकालना शुरू कर दिया.

इस जबरदस्त लंड से और तुम जैसे दिलदार आदमी से चुदना मेरी दिली ख्वाहिश है. फिर अचानक से उन्होंने ज़ोर से अपना सिर मेरे कंधे पर रखते हुए और अपने मम्मे मेरी पीठ पर गड़ा दिए. भाई अपने साथ पावर सेक्स की गोलियां लेकर आए थे, दूध के साथ हम दोनों ने ले ली थीं.

मैं इन सबका मज़े लेते हुए उसके नाजुक गर्दन पर हल्के हल्के किस कर रहा था और अपने दोनों हाथों से उसके पीठ से लेकर गांड तक सहला रहा था. ’बाहर से अनन्या की कोई आवाज नहीं आयी मगर मैं बस उसे छेद को फाड़ देना चाहता था. मैंने जैसे ही ऊपर पैर किया, रंगोली झाड़ू लगाने झुक गयी और उसके दो अलसाये दूध टी-शर्ट के अन्दर से झूलने लगे.

मौसी ने मुझे गले से लगा लिया और बोलीं- बेटा आज तूने मुझे जो मज़ा दिया है, उसके लिए मैं हर रात तड़पती हूँ. आंटी ने मेरे गाल पर एक जोर का तमाचा मारा और बोलीं- मादरचोद, मैं तीन महीने से तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ.

अब मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई और मैंने अर्शिया के होंठ अपने होंठों में दबा लिए और उनको चूमने लगा.

मैंने उनको हटाने की कोशिश की … क्योंकि मैं अभी-अभी झड़ी थी और पूरी तरह से गर्म भी नहीं हुई थी. सविता भाभी की सेक्सी वीडियो कार्टूनजब मैं आखिरी बार उस से चंडीगढ़ में मिला, तो मुझे उसका रवैया कुछ अजीब सा लगा. सपना चौधरी के नंगे वीडियोइस क्रिया को करने में मैं अपने दोनों हाथों को उनकी पिंडली से सरकाते हुए उनकी गांड के पास तक जा रहा था. फिर मैंने भी उसे पूरी तरह नंगी कर दिया और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.

आज सुबह वापस चल पड़ा है, अभी आता होगा, तुम बैठो मैं तब तक नहाकर आती हूँ.

मुझे इसी वजह से न जाने क्यों बार बार लगता था कि मेरी सुंदर बीवी मुझसे अलग न हो जाए. एक रात 10 बजे हम दोनों बात कर रहे थे कि तभी अचानक से उसने बाय बोल दिया. मैंने देर न करते हुए भाभी की चुत पर मुँह लगा दिया और चुत को चाटने लगा.

अब मेरे झटकों की स्पीड तेज होने लगी थी और मैं जोर-जोर से उसकी चूत में झटके मारे जा रहा था. कुछ पल बाद मैंने उसके पास जाकर बोबों पर किस भी किया और निप्पल को भी बहुत मजे से चूसा. उसके बाद मैं उनके लंड को हिलाने लगी और उनका लंड दोबारा पूरा खड़ा हो गया था.

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यह सुनकर नन्दिनी बोली- आपकी कोई गर्लफ्रेंड क्यों नहीं है?मैंने बोला- कोई सही लड़की मिली नहीं … शायद इसलिए. वो दोनों वासना से तप्त आंखों से मेरी तरफ देख रही थीं और लम्बी लम्बी सांसें ले रही थीं. वाह … रश्मि बुरा मत मानना, पर आज तुम कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही हो.

हम इंसान की जरूरतों में, सेक्स भी एक ऐसी जरूरत है, जो हर किसी को चाहिए.

सेक्स कहानी में आगे बताने से पहले मैं अपने फ्लैट पार्टनर के बारे में बता दूं, जो कि मेरे ऑफिस में साथ काम करता है.

जैसे ही मैं गिरने को हुई, तो आशीष ने मुझे पकड़ लिया और उसका हाथ मेरे चूतड़ों पर आ पड़ा. तब अमिता ने कहा कि उसके पति विवेक को 3 दिन के लिए दिल्ली जाना है इसलिए आज नहीं आई. ब्लू फिल्म सेक्सी ब्वॉयउनकी कभी कभी वाली और जल्दी जल्दी वाली चुदाई से मेरी आग नहीं बुझ पाती थी.

फिर हम लोग खाना खाकर रूम में आ गए और पूरे 4 दिन चुदाई के बाद घर आ गये. अब तक चूंकि मैम पूरी भीग चुकी थीं, तो साड़ी हटाने में उनका कोई विरोध नहीं हुआ. फिर लंड के टोपे को गांड के मुहाने पर रख कर घिसा तो मैडम ने अन्दर करने का कह दिया.

मैंने उसकी आंखों में झांकते हुए पूछा- क्या खाओगी?वो मेरी बात को शायद समझ गई थी इसलिए नजरें नीचे करके बोली- जो तुम खिलाना चाहो. कुछ देर बाद डांस खत्म हुआ तो मैं और वो साथ में कुछ बातें करते हुए एक कोने की तरफ चले गए.

ये सब देखकर मुझे दुख हुआ कि मेरी बीवी ने मुझे ऐसी बातें बताना तक ठीक नहीं समझा.

अब मां भी सब भूल कर अंकल का साथ देने लगी थीं और अपनी गांड को ऊपर उठा कर लंड लेने लगी थीं. मैं आंटी के बेटे के स्कूल जाने का वेट कर रहा था ताकि हमारी चुदाई लीला चालू हो सके. बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद कार्तिकेय मेरी सेक्सी चुत में ही ढेर हो गया.

सेक्सी पिक्चर बताओ अच्छी इससे तो भाभी और जोर से उछलने लगीं और मेरी गांड पर चमाट लगाती हुई मेरी जीभ को चूसने लगीं. अब मैं भाभी के मस्त नंगे बदन को हर जगह सहला रहा था और उनकी गदरायी हुई जांघों को सहलाते भींचते हुए नीचे आने लगा.

चुदाई से पहले मैंने अपने लंड पर मैनफोर्स का स्ट्रॉबेरी फ़्लेवर का कंडोम लगा रखा था तो अलीज़ा के गर्भवती होने का कोई डर नहीं था. उन्होंने भी अपनी गांड से पैंटी नीचे सरकाई और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी चूत को मेरे होंठों पर रगड़ने लगीं. फिर अपने एक करीबी दोस्त के समझाने पर आखिर मैंने हिम्मत कर ही ली और आज मैं आप सबके लिए अपनी ज़िन्दगी के कुछ मज़ेदार किस्सों को इस सेक्स कहानी के माध्यम से सुना रही हूं.

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जब अंकल को लगा कि अब मां की कोशिश धीरे धीरे कम हो रही है, तभी अंकल ने मां की साड़ी को पेटीकोट के साथ कमर तक उठा दिया. उसने जाते हुए कहा- आओगे ना!मेरे पास हां कहने के अतिरिक्त कोई जवाब ही नहीं था. निशा ने तुरन्त ही मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों को बेतहाशा चूसने लगी.

झटके से रंगोली के दूध ऊपर नीचे होने लगे, उसकी आंखें बंद थीं और मुँह खुला था. मेरा सीना भी बहुत दुख रहा था और साथ ही मेरे गांड में भी एक अजीब सा दर्द स्टार्ट हो चुका था.

वो शायद मेरे इसी इशारे का इंतजार कर रहे थे, जो मैंने उनको अनजाने में दे दिया था.

इतना गोरा छोटा मुलायम हाथ लगाते ही फिसलने वाला लंड हाथ में लेकर उन्हें भी मजा आने लगा था. हालांकि पहली सेक्स कहानी का थोड़ा सा जिक्र जरूरी है, उसी कारण से इस सेक्स कहानी जन्म हुआ था. उसकी चुत में दर्द खत्म हो गया था तो वो राजू का लंड चूस कर खड़ा करने लगी.

वो लंड कड़क देख कर बोली- राज तुम पहले अपने लंड को मेरी गांड में घुसा दो. वो मुझे अपनी बांहों में कस कर चिपक गई और बोली- राज अपना पूरा वीर्य अन्दर बच्चेदानी में निकाल दे!मैंने दो तीन झटके लगाकर लंड का सारा वीर्य अन्दर बच्चेदानी में निकाल दिया और उसके ऊपर चढ़ कर लेट गया. वो भी ये सोच कर आया था कि दूसरों की तरह वो भी यहां अपना नसीब आजमाएगा.

मैं भी दीदी की मटकती गांड को देखकर उनके पीछे जाने लगा और किचन में जाकर दीदी के गांड में खड़ा लंड सैट करके उन्हें जोर से हग कर लिया.

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मैं जानबूझ कर पेपर्स निकालने में थोड़ा टाइम लगा रही थी ताकि उसे मेरे छेद से मजा मिल जाए. मुझे आज चुदाई से ज्यादा चुसाई में मज़ा आ रहा था तो मैं भी खुलकर पूरा जीभ डालकर चूस रहा था. ’ की आवाजें निकलने लगीं और उसकी इन आवाजों को सुनकर मेरा लंड तो लोहे से भी मजबूत होता जा रहा था.

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