बीएफ सरी वाली

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आलू भिंडी की सब्जी: बीएफ सरी वाली, तभी मैं अचानक से चीख पड़ी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … माँ मर गई!मैं झटके मारते हुए झड़ने लगी.

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आगे से अमन ने मेरी बीवी का मुँह पकड़ा हुआ था और वो श्रुति के मुँह में लंड पेलने में लगा था. राजस्थान मारवाड़ी वीडियो सेक्सीमैंने आते ही उसको दबोच लिया क्योंकि मैं चूत का प्यासा था और उसे चोद देने के लिए कई दिन से तड़प रहा था.

मुझ से नहीं रहा गया और लाईट ऑफ करके मैंने प्रिया को अपने गोद में बैठा लिया. सेक्सी पिक्चर जानवरअगर ट्रेन में हमें मौका न मिलता तो हम बाहर किसी गेस्ट हाउस में जाकर चुदाई के मजे लेते थे.

उसने कहा- क्या हुआ? अब तक तुम्हारा हुआ नहीं था क्या?मैंने कहा- देखो ना कितना खड़ा है.बीएफ सरी वाली: पता नहीं अगले सुबह क्या होने वाला था, पर अब मैं सोचना छोड़ आंखें बंद करके सो गई.

वहीं स्त्रियों को आनन्द तो आता है, मगर अधिक समय के घर्षण से पीड़ा होनी शुरू हो जाती है.वो सच में बहुत अच्छे लोग थे। अब तो मैं यही सोचता हूं कि वो जहां भी हों खुश ही होंगे। उसकी वाइफ अभी भी शायद उतनी ही मस्ती से चुदाई करवाती होगी.

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फिर मैंने अपने लंड को दीदी की चूत पर रखा और उसको दीदी की चूत पर पटकने लगा.फिर उसके बाद उसने अन्दर से ही आवाज लगाई कि आप दूध ले आओ ना … तब तक मैं बाहर निकल कर कपड़े पहन कर आपके लिए खाना लगा देती हूं.

ये ख्याल आते ही पता नहीं मेरे भीतर किसी 25 साल की युवती की भांति कामनाएं जागने लगीं और मैं पूरे तरोताजा हालत में पूरे जोश के साथ उसके साथ चुम्बन और आलिंगन में लग गई. बीएफ सरी वाली अनिल उसकी चूत में अपना प्यासा फन फनाता लंड डाल कर धक्के पर धक्के दे रहा था.

मैं उनका इशारा समझ गया और उनका पैर का अंगूठा चाटते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा.

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वो सीधा मेरे पास आकर मेरे सामने बैठ गया और मेरी टांगें पकड़ अपने दोनों तरफ फैलाते हुए मेरे बीच में आ गया. थोड़ी देर बाद उन्होंने बचा हुआ पानी मेरे मुँह में डाल दिया और मेरे होंठ चूसने लगीं. मैं जल्दी आकर विशाखा से हंसी मजाक करके उसको पटाने के चक्कर में रहता था.

मैंने खुद को उसके कंधों को पकड़ कर खुद को सहारा दिया और अपने घुटने मोड़ कर ऐसे धक्के देने लगी कि उसका लिंग ज्यादा भीतर जाए. फिर मैंने दो धक्के लगाये और मेरे लंड का माल आंटी की चूत में गिरने लगा. पहले वे बैंक की नौकरी करते थे। जब भी उनका मन होता है तो वह अक्सर मेरे पास आ जाते हैं.

फिर मैंने धीरे से आंटी की सलवार का नाड़ा खोल दिया और आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लग गया।मैंने देखा कि आंटी की चूत पानी-पानी हो गई थी. मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड भी नहीं था इसलिए मेरे अंदर लंड को लेकर काफी जिज्ञासा हो रही थी. फिर मैं उठा और दीदी को एक थप्पड़ मार कर बोला- चल साली, मेरे कपड़े खोल और मेरा लौड़ा चूस ले.

मैं- खाना तो खाएँगे लेकिन एक शर्त पर, आज की रात ख़त्म होने से पहले आप हमें किस करोगी. उधर से मैं एक दुकान पर गई और मैंने एक बहुत ही सेक्सी और बहुत ही छोटी सी रेड कलर की ब्रा पैंटी खरीदी.

अब तक आपने मेरी चोदाई कहानी के पहले भागमेरी पहली चोदाई कहानी-1में पढ़ा था कि रूबीना नाम की शादीशुदा लड़की से मैं दिल लगा बैठा था और उसको चोदना चाहता था.

वो कमरे के नाम पर पूरा एक घर था, उसके भीतर एक सोने का कमरा, जो कि काफी बड़ा था.

उसने मुझपे एक बम गिराया कि वो नलिनी और मेरे साथ हुए सब खेल को जान चुकी है. उसकी गांड मेरे सामने थी मैंने उसके गांड पर एक कसके झापड़ मारा … तो उसकी गोरी गांड पर मेरे हाथ का निशान बन गया. उसने पूछा- सिर्फ़ सुंदर?मैंने बोल दिया- मस्त माल है, देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

कांतिलाल ने अपने घुटने मोड़े और कविता की जांघों को अपनी जांघों के ऊपर रख कर कविता के ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूमने लगा. मैंने काव्या को उठा कर बेड पर पटक दिया और फिर उसके पेट पर दारू गिरा कर चाटने लगा. अब हम दोनों ने ही ठान लिया था कि चूत और लंड का मिलन करके ही रहेंगे.

मैंने पूरे मन से 4-5 मिनट खूब ज़ोर से उसकी चुदाई की और मैं फिर झड़ गया.

उस पर शारीरिक दबाव भी होता है और मानसिक भी … पहली डिलीवरी के समय तो मानसिक तनाव बहुत ज्यादा रहता है क्योंकि स्त्री प्रसव में होने वाले दर्द से भयभीत रहती है. जाते जाते उन्होंने बीजी से इशारा किया और कहा- इसका नहाना बाकी है … तुम दोनों नहा कर नाश्ता कर लेना. फिर कहने लगी- साले बैठा ही रहेगा? तू भी तो चोद मुझे?मैं उठ गया और मैंने उसे बेड पर ले जाकर घोड़ी बना दिया.

मैं बता दूं कि हम यहाँ किसी से दोस्ती करने नहीं बल्कि आप लोगों का मनोरंजन करने के साथ साथ आपके अंदर सेक्स का नया जोश भरने के लिए आये हैं।हम लोग अच्छी तरह जानती हैं कि शादी के बाद व्यक्ति की जिन्दगी में कई तरह के बदलाव आ जाते हैं. अब उन्हें ये काम दिया गया कि सभी मर्दों को अपना अपना लिंग उत्तेजित करना है और फिर उसी अवस्था में पेशाब करना है. क्योंकि मुझे पता चल चुका था कि राकेश को इस बात से कोई परेशानी नहीं है.

मगर साथ में सो रही आंटी का भी डर था इसलिए उस लड़की ने खुद ही लाइट बंद कर दी.

वो मेरे लंड बाबा का गोरा रंग देख कर मोहित हो गयी और उसकी चुम्मियां लेने में लग गयी. मेरी कामुक बहन भी मेरे गर्म लंड को पकड़ कर मजे से उसके टोपे को आगे-पीछे करने में लगी हुई थी.

बीएफ सरी वाली मुझे देख कर प्रिय पाठिकाओं, तुम सब भी अपनी चूत में उंगली कर सकती हो … क्योंकि ऐसा मुझे बहुत सी लड़कियों ने और औरतों ने कहा है. फिर अंकल अपने घुटनों पर बैठ गए और बोले- आ मेरे पास।मैं उनके पास गई और उन्होंने मेरे दोनों पैर अपनी कमर में लगा कर मुझे अपने से चिपका लिया और नीचे से अपना लंड पकड़ कर मेरी चूत में सटा कर मुझे जैसे ही बिठाया तो उनका लंड मेरी चूत में गच्च से समा गया.

बीएफ सरी वाली उसने बहुत ही प्यार से मेरे माथे पर किस किया और आगे बढ़ने की सहमति दे दी. मैं उनका इशारा समझ गया और उनका पैर का अंगूठा चाटते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा.

यह सेक्स कहानी मेरी शादी के एक साल बाद की है, तब मेरी बीवी अपने मायके कुछ महीनों के लिए गई हुई थी क्योंकि वो माँ बनने वाली थी.

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मैंने दस मिनट तक इसी पोज में उसकी चुदाई की और फिर मेरे लंड का माल मैंने प्रिया की चूत में ही गिरा दिया. उस कुंवारी लड़की के चूतड़ों को हल्के हाथों से दबाते हुए मैंने उसे अपनी ओर खींचा तो मेरा लण्ड उसकी बूर से सट गया. अब पहले तो मैंने उसके उरोजों को ज़ोर ज़ोर से काफी देर तक दबाया और खूब चाटा.

उन लोगों को पढ़ता देख कर मैं अंतरा को बोल कर निकल गया कि मैं मूवी देखने जा रहा हूँ. मेरा दिल धक धक धक धक हो रहा था … बल्कि मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा था. जैसे ही वो गेट से बाहर आयी, मैंने उसे हग किया और गाड़ी में बैठा लिया.

मैंने उनके होंठों चूसे और नाइटी के ऊपर से ही उनकी चूचियां भी दबाने लगा.

वहां मैंने काजल को अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर आकर बातें करने लगे. मामी जी केवल ब्रा पेंटी में थी और उनकी गोरी गोरी मांसल जांघें देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं अपने लंड को रगड़ने लगा. और इसी फिटिंग दिखने के चक्कर में उसने मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर दबा दिये।मैंने कोई बुरा नहीं माना तो उसने मुझे किसी दिन दोपहर को आने को कहा।मैं तो अगले ही दिन भरी दोपहरी में उसकी दुकान पर चली गई। गर्मी की वजह से दुकान में कोई ग्राहक नहीं था। मैं फिर से अपने लिए कोई ब्रा देखने लगी।मगर आज तो उस्मान ने बिना ब्रा लगाए ही मेरे दोनों मम्मे पकड़ कर खूब दबाये.

मेरे हाथ की उंगली में व जींस पर थोड़ा सा खून लग गया था।और उधर भाबी कमरे के अंदर घुस गई थी।उन्होंने कमरे में अंदर घुसकर मुझे आवाज लगाई। मैं तुरंत बाथरूम के दरवाजे के पीछे हो गया। मैंने भाबी से कहा- कुछ देर रुको, मैं अभी आता हूं।तो भाबी ने सोचा शायद मैं बाथरूम यूज कर रहा हूं. उस कामवाली की सहेली की चूत चुदाई की कहानी मैं आपको अगली कड़ी में बताऊंगा. मैंने धीरे से कहा कि लंड को हाथ में पकड़ लो लेकिन उसने मना कर दिया.

क्या हुआ देर कैसे लग गई?वो बोली- पानी की मशीन खराब हो गई थी … तो कल फिर से जाऊंगी. मुझे उससे और कोई दिक्कत नहीं थी, वो बाकी कामों में वो एकदम परफेक्ट थी.

पहला आदमी रवि था, जो दिल्ली से था, दूसरा राजशेखर, जो गुजरात से और तीसरा कमलनाथ, जो मुम्बई से आया था. तभी निर्मला ने मेरे चूतड़ों पर 2-3 थपकी मारते हुए कहा- बस भी करो सारिका … अब मेरी बारी है. शुरू से ही मेरी बहुत इच्छा थी कि मेरी बीवी किसी दूसरे मर्द से चुदवाये।मैं चाहता था कि उसकी चूत में किसी पराये मर्द के लंड को अंदर बाहर होता हुआ देखूं.

वो देख भी रही थी और शर्मा भी रही थी, मगर उसने देखने से मना नहीं किया और न ही अपना मुँह दूसरी तरफ घुमाया.

मैंने कामुकता से भरी एक जवान लड़की की चुदाई उसी के घर में उसके उकसाने पर की. मैं उम्मीद करती हूं कि आपको मेरी जिन्दगी की पहली चुदाई की ये देसी फुद्दी की चुदाई कहानी पसंद आई होगी. दोस्तो, जब वो काम खत्म करके गई तो बिल्कुल सामान्य सी दिख रही थी लेकिन जब वो मेरे बुलाने पर बन-ठन कर आई तो मैं उसको देखता ही रह गया.

मैंने ध्यान दिया कि कांतिलाल बात करते हुए बीच बीच में मेरी जांघों के पास देख रहा. कुछ देर तक मेरे निप्पलों को छेड़ने के बाद मेरे भाई ने मेरी लोअर में हाथ डाल दिया.

उसके बाद में उसकी नाभि पर किस करते हुए सीधे उसके पैर में एड़ी के पास चूमते हुए धीरे धीरे घुटने की तरफ आने लगा. क्योंकि मुझे पता चल चुका था कि राकेश को इस बात से कोई परेशानी नहीं है. आपको मेरी यह भाई बहन की चुदाई की कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके बताना.

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निधि को वाइल्ड सेक्स और रफ़ सेक्स भी पसंद है।मुझे कुणाल ने यह भी बताया था कि निधि के पहले भी कई सेक्स अफेयर रह चुके हैं और पहले भी बहुत लण्ड ले चुकी थी.

मेरी बहन के मुँह से जोरदार सीत्कार निकल रही थी, जैसे उस की लंड से चुदाई में मस्त सीटियां बज रही हों. फिर मैंने उसकी पजामी के ऊपर से ही उसकी बुर पर हाथ फिराना शुरू कर दिया. मेरे पति रोशनी के ऊपर पीठ के ऊपर अपनी जीभ फिरा फिरा कर ऊपर से नीचे की तरफ किस करते हुए उसे चाट रहे थे.

फिर मैंने दोनों गिलास आधे आधे भरे और उससे कहा- तुम मेरी रखैल हो न!वो बोली- हां. [emailprotected]कहानी का अगला भाग: मैंने हॉस्टल गर्ल की सील तोड़ी-2. तिरपल सेक्सी वीडियो हिंदीउसने मेरी एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया और अपना लिंग तुरंत मेरी योनि की ओर ले आया.

वो दर्द करहाते हुए कहने लगी और मुझसे चिरौरी करने लगी- आह … बहुत दर्द हो रहा है … निकाल लो इसे … कमीने निकाल जल्दी से … मेरी चूत फट गई है … लंड बाहर निकाल … आह तेरा लंड है कि क्या है!पर मैं कहां मानने वाला था. मैंने कहा- नहीं आंटी, अगर आपने उनको फोन किया तो मुझे बहुत मार पड़ेगी.

उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी जान … मेरी रानी … तुम्हारी गर्म चूत में लंड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं. उसने अपने घुटने को जांघों तक मोड़ लिया था और मैंने भी अपनी टांग उसकी जांघों पर चढ़ा दिया था. तभी वो धीरे धीरे मेरी टी-शर्ट में हाथ डाल कर मेरे दूध दबाने की कोशिश करने लगा.

और आज अंडरवियर मत पहनना केवल लोवर ही पहन लेना।यह कहकर वह नीचे चली गई. रवि का लिंग शिथिल पड़ चुका था, तो मैंने उसे अपने ऊपर से हटने को कहा. मौलीश्री तो इतने दिन में बहुत सारे बॉयफ्रेंड बदल चुकी है लेकिन मैं अभी भी उसी से चुदवाती हूँ.

बस फिर कमरे में देखते ही देखते कमर हमारे चुम्बनों की आवाज़ से भर गया ‘उउम्म उउम्म आउच उच उच पुच पुच.

इसी बीच मुझे पता लगा कि भाभी अपनी सहेली के भांजे से भी चुद चुकी हैं. पर मुझे भाबी की कहानियां पढ़ने में अलग ही मजा आता हैक्योंकि आप सब को तो पता है कि भाबी के साथ रोमांस करने का मजा ही अलग है.

ये सुनकर मुझे बहुत जलन हुई कि इतनी सेक्सी सुन्दर भाभी को किसी और ने भी लूट लिया है. फिर उसने मुझे नीचे किया और चड्डी में छुपा अपना लंड मेरे मुँह के सामने कर दिया. फिर रात को असली खेल शुरू होने से पहले मां ने कहा- चलो, पहले नहा लेते हैं.

तभी मुझे ध्यान आया कि एक और दूसरा कमरा, जो हमने लिया था … वो खाली पड़ा है. लगभग नंगे हो जाने पर उससे रहा ही नहीं गया और उसने मेरी ब्रा पकड़ कर खींच दी. मगर अपने डर को दरकिनार करते हुए भी चुदाई को अंजाम देना भी हर किसी के बस की बात नहीं होती.

बीएफ सरी वाली रात को मैंने कई बार कोशिश की कि उनकी चुदाई की आवाजें मेरे कानों में आये लेकिन उनके कमरे से कभी कोई ऐसी आवाज नहीं आती थी. यही सोच कर मैं साली को पाटने का जुगांड सोचने लगा।एक़ दिन की बात है कि मैं अश्लील फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया.

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आज जो घटना मैं आप को बता रहा हूं उसके बाद तो मुझे सेक्स का चस्का ही लग गया था. अब जब भी साराह मैम का फोन आता तो ज्यादातर बात गर्लफ्रेंड को लेकर ही होती और वो मुझे समझाती रहती थी. उसने एक तकिया लेकर उसकी कमर के नीचे रखा, दूसरी बांह गर्दन के चारों तरफ लपेट ली.

मुझे नहीं पता था कि किसी के मुंह में लंड को देकर चुसवाने में इतना मजा आता है. मैंने झट से आंटी को पूरी नंगी कर दिया और उसको मेरे तने हुए लंड पर बैठने के लिए कहा. सेक्सी छोटी-छोटीमुझे कुछ हो तो नहीं जायेगा!मैंने कहा- यही कला तो मैं तुम्हें सिखाऊंगा.

मौलीश्री तो इतने दिन में बहुत सारे बॉयफ्रेंड बदल चुकी है लेकिन मैं अभी भी उसी से चुदवाती हूँ.

कोई एक मिनट बाद मैंने उसके हाथ को पकड़ा और पास पड़े सोफे पर उसको लिटा दिया. मगर मैं आपकी जानकारी के लिए उसके फीगर का नाप अभी बता दे रहा हूं ताकि आपको पता लग सके कि वो दिखने में कैसी रही होगी.

बीवी की चुत में उंगली डाली और बोला- इस बार के हफ्ते के बदले … ये दस दिन पोलिस स्टेशन रहेगी. मेरे मुँह से ‘आहह … आएहहह …’ की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगीं. मैंने ध्यान दिया तो कांतिलाल, रवि और राजशेखर तीनों बीच बीच में मदिरा पीते हुए अपने अपने लिंग पर हाथ फेर रहे थे.

उसने कहा- मैं और औरतों को तो नहीं जानता, मैं बस तुमको ही जानता हूँ.

मैं खुद में ही सोच कर खुश थी कि किसी तरह मेरी जोड़ी कमलनाथ के साथ नहीं बनी, वरना इतनी जोर से वो धक्के मार रहा था मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता. अब जब भी मुझे मौका मिलता है, भाभी से फोन पर बात करके हम लोग चुदाई कर लेते हैं. उनके ये मदमस्त मम्मे मुझे तो क्या … हर किसी को बरबस ही उनका लुत्फ़ उठाने को मजबूर कर देते थे.

बाबा सेक्स व्हिडीओवो बोली- बताइये न सर, कॉलेज में भी कोई अच्छे तरीके से इसके बारे में नहीं बताता है. मैंने देखा कि वो काम करते वक़्त बीच बीच में मेरी तरफ देखती और फिर मन ही मन में मुस्कुरा देती.

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अंधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन उसकी चिकनी टांगों पर उंगलियां फिराते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था. अब मैंने नमिता से कहा- मुझे तुम्हारे दोनों छेदों में लण्ड डालना है, पहले किसमें डालूँ?लोअर के ऊपर से ही मेरा लण्ड पकड़ कर नमिता ने अपनी बूर पर रख दिया. फिर मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और अपनी एक उंगली को उसकी चूत में डाल दिया.

चट्ट की आवाज के साथ गर्म भाभी की ब्रा के हुक टूट गये और मोनू ने उसकी ब्रा को उसके चूचों के ऊपर से हटा दिया. मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और उसकी जीभ को अपने मुंह में खींचते हुए उसकी किस करने लगा जिससे कि धक्के का असर उस पर कम से कम हो. मैंने भी अब मम्मी की चुदाई शुरू करना सही समझा और मम्मी की दोनों टांगों को फैला कर बीच में आ गया.

उम्म्ह … अहह … हय … ओह … क्या बताऊं यारों, अपनी ममेरी बहन की चूत में लंड देने का वो पहला अहसास … आज भी उस पल को याद करते ही मुट्ठ मारने का मन कर जाता है. बरहराल हम सब के लिए एक अच्छी बात ये थी कि हम 4 के मुकाबले 5 औरतें थीं, तो इस वजह से किसी एक को थोड़ा विश्राम मिलने का मौका मिल जाता. ऑफिस से आते ही मैं दीदी की ठुकाई करता था और फिर रात में सोते टाइम भी उनकी चूत को खूब चोदता था.

तभी रवि ने बोला- रमा जब तुम जानती थी, तो इतना नाटक क्यों किया?रमा बोली- अरे यार थोड़ी बहुत मौज मस्ती और क्या … मैं सबको चौंकाना चाहती थी. जिसको मैंने अपनी आँखों के सामने जवान होते देखा, छोटे से बड़े होते मम्मे, चूतड़, जांघें … अब सब मेरे कब्जे में थीं.

मैं बड़े कामुक और लुभावने अंदाज में बोली- प्लीज जानू इतना भी मत तड़पाओ.

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उनके बूब्स एकदम नंगे थे क्योंकि उन्होंने अपनी नाइटी के सामने वाले बटन खोल रखे थे.

इस दौरान हम दोनों ये तो भूल ही गए थे कि कोई चुपके से हम दोनों को देख रहा है. कमलनाथ इतना अधिक उत्तेजित था कि वो शुरूआत से ही गहरे और ताकतवर धक्के लगाने लगा था. नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राज है और मैं जयपुर के पास के एक गांव से हूं.

इंशा को लंड चूसते देख कर शिफा भी पास आ गई, तो मैंने उसे भी अपनी ओर खींच लिया. वो मेरी बात से सुनकर मस्त हो गई और बोली- अच्छा करके बाद में बता देना … मगर अभी बता दो तो कि इससे क्या करते हैं?मैंने पूछा- तू तो ऐसे पूछ रही है जैसे तूने चुदाई की फिल्म कभी देखी ही न हो. राहुल ने मेरी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा हटाकर गर्दन के पीछे से किस करना चालू कर दिया.

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अंदर मैंने देखा कि मेरा भाई अपने लंड को हाथ में लेकर सू-सू करने की पोज में खड़ा हुआ था लेकिन वो सू-सू करने की बजाय अपने लंड को आगे और पीछे की तरफ किये जा रहा था. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था. कुछ देर तक दोनों ने भाभी के नंगे जिस्म को खूब चूसा चाटा और अपना लंड भी चुसवाया.

उस दिन तो उनके दूध इतने बड़े लग रहे थे, जैसे मानो वो बाथरूम में खुद अपने दूध चूस कर बाहर आई हों.

राज- वैसे रुचि ने मुझे बताया था कि तुम्हारा बॉयफ्रेंड भी आने वाला था!मैं- हां यार, लेकिन वो आ नहीं पाया … मेरी किस्मत खराब थी.

मैं कहा- हां ये बड़ा ही होता है … इसकी लम्बाई के लिए तो लड़कियां मरती हैं. मुझे जॉब करते हुए 2 महीने हो गए थे और अब हमारे बीच अच्छी खासी बातचीत होने लगी थी. सेक्स वीडियो सफिर मैंने दीदी को भी नंगी कर दिया और ऊपर लेट कर दीदी के बोबे चूसने लगा.

अगर आप इस बारे में गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने डॉक्टर से ही संपर्क करें. इन दिनों मैं फेसबुक का काफी ज्यादा इस्तेमाल करता था और गर्लफ्रेंड बनाने के लिए तड़फ रहा था. रात के 9 बजे का समय हो चुका था और गांव में सब लोग 9 बजे तक सो ही जाते हैं.

यह मेरी पहली पोर्न स्टोरी हिंदी भाषा में है, मैं आशा करता हूँ कि आप लोगों को मेरी पोर्न स्टोरी पसंद आएगी. मेरी पैंटी को निकालने के बाद मेरे भाई ने मेरी चूत को अपने हाथ रगड़ना शुरू कर दिया.

आप ऐसे मुझे सुझाव दें, जिससे मैं आपको मेरी बहुत सी कहानियों को आप लोगों के साथ शेयर कर सकूं.

उसकी ऐसी आवाज सुनकर उसकी मां बोली- क्या हुआ?भाभी बोली- कुछ नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे पीछे कुछ चुभ रहा हो. जैसे ही मेरी जीभ स्वीटी की चूत में गई तो उसने बेड की चादर को नोचना शुरू कर दिया. दूसरा कारण यह कि मेरी मां ने अपने बदन को काफी मेंटेन करके रखा हुआ है.

पंजाबी में सेक्सी फिल्म कई मिनट में मां संभली और मुझे पीछे धकेलने लगी लेकिन तब तक मैंने पूरा लंड गांड में घुसा दिया था. उनकी गांड को सहलाते हुए चुचे चूसते और काटते हुए चुदाई की गति को तेज से तेज करने लगा.

यह मैं आपको अपनी अगली कहानी में लिखूंगी।तो दोस्तो, यह थी मेरी नीता बनने की हिंदी गे सेक्स स्टोरी।कृपया आपके कमेंट मुझे[emailprotected]पर भेजें।धन्यवाद. मुझे आपकी ईमेल का इंतज़ार रहेगा, मैं कोशिश करूंगा कि जल्द ही अपनी एक और नई व सच्ची सेक्स कहानी लेकर आपके सामने पेश होऊं … तब तक के लिए आप सभी से विदा लेता हूँ. फिर मैंने सोचा कि अब दिल्ली आया ही हुआ हूं तो थोड़ा घूम ही लेता हूं.

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अब मैं परी की चूत चाट रहा था और चूस रहा था और परी मेरा लंड चूस रही थी. मुझे भी मजबूरी में आंटी से अलग होकर अपने घर वापस जाना पड़ा।उसके बाद हम दोनों को मिलने में एक हफ्ते से भी ज्यादा का समय लग गया. फिर उन लोगों के जाने के बाद हम दोनों ने समुद्र किनारे बैठकर एक बियर मंगवाई.

कुछ देर की ना नानुकुर के बाद जब मैंने अपना लम्बा लंड खोल कर मॉम के सामने लहराया, तो मेरी मॉम मेरा लंड देख कर हैरान रह गईं. चूंकि हम पांच लड़कियां हैं और पांचों ही लड़कियों ने कॉलेज के दिनों से अपनी चूत चुदवानी शुरू कर दी थी तो इन कहानियों का सफर काफी लम्बा चलने वाला है जिसमें आपको पूरा मजा आने वाला है.

मैंने उनकी चूचियों को चूसना शुरू किया और अपने खड़े लंड को एक बार फिर से भाभी की चुत में पेल दिया.

ऐसे बोल बोल कर मैंने उसकी गांड के छेद में सुपारा घुसाना शुरू कर दिया. शायद वो जानते थे कि औरत हर तकलीफ झेल लेती है और शायद इसी वजह से मैं भी अपना उपयोग होने दे रही थी. मैंने अपने हाथ से लौड़े को उनके भोसड़े के खांचे में रखा और एक तेज सांस लेकर एक ही धक्के में लौड़े को उनके भोसड़े में अन्दर तक घुसा दिया.

मैंने फिर धीरे धीरे अपने झटकों की रफ्तार को बढ़ाया, तो आंटी की चीखें अब कामुक सिसकारियों में बदल गयी थीं. जैसे मैंने बताया कि रुचि के बूब्स 34 इंच के हैं, जिससे उसके बूब्स टी-शर्ट के बाहर निकलने को होते हैं. जब मैं और मेरी पत्नी बातें करते थे, तो वह बार-बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती रहती थी.

राजेश्वरी की योनि पहले से इतनी गीली थी कि 2-3 बार के धक्के में ही समूचा लिंग भीतर पहुंच गया.

बीएफ सरी वाली: कमलनाथ दनादन धक्के मारे जा रहा था और कविता वहीं कराह कराह कर अपने चूतड़ों को उठाने का प्रयास कर रही थी. उनमें से ज्यादातर स्त्रियां घर से जब निकल जाती थीं, तब मैं बड़ा ही बोर फील करने लगती थी.

मेरे दिमाग में अब ये था कि कांतिलाल कैसे इतना उत्तेजित हो जाए कि वो सीधा संभोग करने लगे ताकि झड़कर वो भी सो जाए और मैं भी आराम कर सकूं. राजेश ने कहा कि मैं अपनी पत्नी को खुश नहीं कर पाता हूं इसलिए वो पैसे लेकर सेक्स का मजा ले लेती है. उनके स्पर्श से मेरा साढ़े छह इंच लंबा और सवा दो इंच मोटा लौड़ा मेरी जींस में खड़ा होता जा रहा था.

मेरी इच्छा तो हुई कि करवट बदल लूं, उसकी तरफ अपनी पीठ कर लूं और वह अपना मस्त फनफनाता लंड मेरी गांड में डाल दे.

और आज भी हम में से कोई भी सहेली आपस में एक दूसरे से मिलती है तो उन दिनों को सब उतना ही मिस करती हैं जितना कि बाकी सहेलियां. मैं अपने भाई एक साथ ऑफिस जाती थी और अपने भाई के साथ ऑफिस से आती थी. कभी कभी मैं दोनों चुचियों को एक साथ सटा कर चाटने की कोशिश भी करता था, लेकिन चूचों के बड़े साइज़ के चलते मैं पूरी तरह से ऐसा नहीं कर पा रहा था.