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वो बोली- आ आहह आह… प्लीज़ चूसो इन्हें प्लीज़ जीजू चूसो ना अपनी आज की बीवी के चूचों को… जी भर के चूसो… आह खाली कर दो इन्हें…मैं भी जोश में आ गया और मैंने उसके एक निप्पल को मुँह में भर कर दम से उसे चूसने लगा. एक दिन हमारे एक रिश्तेदार के यहाँ से शादी का बुलावा आया, वैसे जाना तो हम सब को ही था पर यही मौका देखते हुए अम्मी ने जाने से मना कर दिया और मुझे भी रोक लिया। बड़ी मान मनुव्वल के बाद अब्बू और भाई जाने के लिए तैयार हुए। उनको दूर शहर जाना था, सब जल्दी जल्दी में हुआ था तो रिजर्वेशन भी नहीं मिला था, अब्बू और भाई जाने के लिए रात में नौ बजे घर से निकल गए. वो मेरे मम्मों को घूरता हुआ बोला- उसका काम तो ऐसा है कि उसको बचाना मुश्किल है.

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मैंने विनय का हाथ दबा दिया, जिसे विनय ने भी महसूस किया और बोला- नेहा कल पूरी रात मैं बस तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा. अब कॉलेज की छुट्टी के बाद नीति मैडम अपनी अन्य साथी मैडमों को ये बोल कर निकल गई कि मैं आज अपने चाचा जी के घर जा रही हूँ, सुबह वहीं से कालेज आऊँगी.

इसी बीच कामिनी का बर्थडे था, वो बोली- मैंने अपना बर्थडे सेलिबरेट करना है!मैंने कहा- जो करना है, करो!मेरी बीवी ने अपने फ्रेंड्स को बुलाया, मेरी सिस्टर भी आई. मैंने अब रोशनी को धीरे से उठाया और कहा कि अपनी चूत को बाथरूम में पानी से साफ़ करके आओ. लेकिन मैं आज उसे अपने घर ले कर आऊंगा और तुम नाइट में मिनी स्कर्ट और चैन वाली टी-शर्ट में रहना और अन्दर ब्रा पेंटी भी मत पहनना.

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उसने वैसा ही किया।रात करीब दस बजे में डिम्पल के कमरे में गया और उसके साथ लेट गया।मैंने उसे लेटे लेटे हग किया, वह खुश हो गई.

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अब आगे:मैंने कहा- अंकल कुछ करिये… उंहहह अहहह… मुझसे रहा नहीं जा रहा!अंकल बोले- सच में मेरी बीवी बनना हो तो मैं चोद दूं?मैं चुप रही तो बोले- चलो ठीक है आरती, मेरी रखैल बनोगी? इसमें तो दिक्कत नहीं है।मैंने कहा- ठीक है, जो आप कहो!तो अंकल बोले- आरती, रखैल मतलब जानती हो?मैंने कहा- नहीं!तब वे बोले- आरती, बिना शादी के चुदाई करवाने वाली… जब मैं जिससे बोलूं चुदवाना पड़ेगा.

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हो सकता था कि माँ अपने जिस्मानी सम्बन्ध किसी दूसरे के साथ बना लेती तो क्या होता.

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लेकिन वो दोनों नहीं माने, फिर हम तीनों साथ में कॉलेज के पीछे चल दिए. मैं बड़ी ही तन्यमयता से उसको अपने मुंह के अन्दर लेता रहा, मैं उसके रस की एक एक बूंद को चाटता रहा और वो मेरे बालों पर अपने हाथ को फेरती रही। जब उसके रस की एक एक बूंद को चूस कर मैं उससे अलग हुआ तो बोली- सर मुझे बहुत मजा आया. क्या बुर थी उसकी गुलाबी गुलाबी… बुर के दोनों होंठ आपस में चिपके हुए थे जैसे अभी सील बंद हो!और मैंने अपनी एक उंगली उसमें डाल दी और बोला- चोरी का माल इसके अन्दर छुपाया है क्या?और उसकी बुर को मैं अपनी एक उंगली से सहलाने लगा.

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मूवी खत्म हुई और हम लोगों ने प्लान किया कि अगले सन्डे को फिर से मिलेंगे.

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विनय अभी नहीं झड़ा था, इसलिए दो पल बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड मेरी चूत में पेल दिया.

अब मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने पूछा- माल कहां निकालूँ?उन्होंने बोला- अन्दर ही निकाल दो. भाईसाहब बोले कि रूम में तो चलिए फिर दिखाते हैं कि साठा कितना पाठा है. किस करते टाइम हमारी जीभ काफ़ी अन्दर तक जाकर एक दूसरे को मजा दे रही थी.

अब मेरा दायाँ हाथ प्रिया की पीठ पर धीरे धीरे दायें-बायें, ऊपर-नीचे फिर रहा था. कॉलेज के पीछे करीब 2 या 3 किलोमीटर तक कुछ भी नहीं है, सिर्फ़ झाड़ियां बबूल और बेर के पेड़, सरपट या काँस की झाड़ियां हैं. उस लंड को देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया क्योंकि मुझे गुलाबी टोपे वाले लंड बहुत पसंद हैं और ऊपर से उस स्किन ने लंड पर चार चाँद लगा दिए थे!मैंने झट से फोन नीचे रखा और दोनों हाथों से लंड को पकड़ लिया और बस यही दुआ करने लगा कि अब ये पकड़ कभी ढीली ना हो!बस उसी समय मैंने वो शानदार लंड अपने मुँह में ले लिया.

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मैं आपको दे दूँगी।मैं बोला- वो तो ठीक है परन्तु तुम मिलोगी कहाँ?वो बोली- मैं घर से बाहर तो आ नहीं सकती। इसलिए आपको मेरे घर ही आना होगा। कैसे. अब आगे:पूजा को बड़ी भाभी ने छोटी भाभी को बातों में लगाने को बोला और मुझे अपने बेडरूम में ले आईं. वो बीच बीच में मेरे सिर को पकड़ कर मेरे मुँह में अपने लंड को अन्दर बाहर करता रहा.

यूं तो मेरी साली के साथ मेरा ऐसा कोई गहरा रिश्ता नहीं था जैसे कि आमतौर पर जीजा साली का होता है.

अब रतन से मेरा और बिंदु का भी दिन भर चुका था, अब हमारी चूतें कोई नया लंड लेना चाहती थीं.

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थोड़ी देर बाद भाभी ने मेरी तरफ अपना चेहरा किया तो मैंने उनके होंठों को चूमना शुरू किया. उसे देख कर मुझे लगा कि वो भी मुझे पसंद करता है या यूं कहें मुझे चोदना चाहता है.

नवीन मॉम की गांड के बिल्कुल करीब पहुँचा और हाथ से मॉम की चुत टटोलने लगा.

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”पिंकी बिना चूत दिखाए ये कैसे बनेगा? रोशनी, तुम अपनी शेप दिखाओ पिंकी को. साफ नजर आ रहा था कि अब मेरी नताशा को इतना मजा आ रहा था कि वो स्वयं ही अपने चूतड़ ऊपर की और उठाते हुए हमारे मेहमानों के लंडों पर पटकने लग गई थी! उसके शरीर में एक नई उर्जा का संचार हो चुका था और अब उसे बिल्कुल भी थकान महसूस नहीं हो रही थी. करीब बीस मिनट बाद मेरे शरीर में ऐंठन सी होने लगी और मैं एकदम से शिथिल सी हो गई.

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मेरी पिछली सेक्सी कहानीऑफिस में बॉस से गांड चुदाई करवाती पकड़ी गईमें आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने बॉस से उनके केबिन में गांड मरवा रही थी कि ऑफिस स्टाफ का एक लड़का अंदर आ गया और उसने हमें गांड चुदाई करते देख लिया. मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी पैंटी उतार कर उसकी चूत पर लंड रगड़ने लगा. अचानक मेरे निचले होंठ पर किसी मधुमक्खी ने डंक मारा हो जैसे… मैं एकदम से हड़बड़ा गया और बैडरूम प्रिया की खनकदार हंसीं से गूँज उठा.

उसकी बातें सुन कर मैं रोने लगी और रो रो कर सब कुछ बता दिया कि मेरे साथ क्या क्या हुआ. मेरा परिवार एक मध्यम वर्गीय परिवार था तो मुझे भी दूसरी लड़कियों की तरह सजना संवरना और महँगी चीजों का शौक था.

वो बहुत रो रही थी, मैंने उसके होंठों पर होंठ रखे और एक और धक्का मार दिया.

हमारे ऑफिस में मुझे मिला कर तीन लड़कियां काम करती थीं और बाकी सब पुरुष थे. मैंने उसे अपने पलंग पर लिटा दिया और उसके होंठों को बेतहाशा खाने लगा. जब चिंटू का लंड मेरी चूत के अन्दर पहुँच गया, उसके बाद परीक्षित ने भी अपने मोटे लंड को मेरी गांड में अन्दर तक पेल दिया और अब दोनों मुझे पकड़कर मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.

शायद इस जन्म में मुलाकात हो ना हो…’पूरी रात हमने जमकर हॉट सेक्स किया. और तभी भाभी मेरे लंड को कस कर पकड़ कर चाटने लगी, मैं समझ गया कि भाभी झड़ने वाली हैं और मैंने उनकी चुत को चाटने का काम जारी रखा और भाभी मेरे मुख में ही झड़ गयी. अब एक बार फिर से मेरी चूत और गांड एक साथ चुदने के लिए तैयार थी और दोनों ने ही धक्के लगाने शुरू कर दिए.

वे फिर बोले- प्लीज करो!मैंने उनकी पैंट खोल दी और जैसे ही अंडरवियर नीचे करने लगी कि उनका लंड बहुत बड़ा होकर खड़ा था, उसे देख कर मैं चौंक गई, मेरे हाथ के बराबर मोटा और दस इंच लम्बा रहा होगा। अंकल बोले- आरती, अपने हाथों से पकड़ो प्लीज!और मेरा हाथ ले जाकर अपने लोड़े पर रखवा दिया.

बीएफ एचडी चाहिए: लेकिन अब पास जा कर देखना था कि मर्द दमदार है या नहीं!लेकिन एक समस्या वाली बात भी थी कि उससे कुछ दूरी पर 2-3 लोग और भी बैठे हुए थे जो शायद अस्पताल में भर्ती किसी मरीज के रिश्तेदार लग रहे थे और आराम की मुद्रा में बैठे थे जिनका वहाँ से जाने का कोई प्लान नहीं था. तब नवीन ने अपना लंड कसके मॉम की चुत में धकेला और मॉम के चुचों के कसके दबोच कर मॉम की चुत में ही अपने लंड का माल गिराने लगा.

चुदाई के बाद मैंने लौड़ा उसकी चूत में ही पड़ा रहने दिया और उसे चूमने लगा. तभी मैंने परीक्षित को भी, जो मुझे किस कर रहे थे, उन्हें अपने से अलग किया और उनके भी लंड को सहलाने लगी. जब मैंने उस के कमरे की बेल बजाई तो वो गालियां देता हुआ बोला- इस वक्त कौन साला बहनचोद आ गया है.

आंटी आँख मार कर बोलीं- कब से तड़फ रहा है?मैंने कहा- उसी दिन से आंटी, जब से आपके पास कमरे को लेने के लिए बात करने आया था.

तभी जीजा उंगली और तेजी से चलाने लगे और अब मेरी चूत के अंदर से रस निकलने लगा, उस चूत रस को जीजा जीभ से चाटते भी जा रहे थे, बोले- क्या मस्त सुगंध है तुम्हारी चूत की! बहुत प्यारी महक है!और अपनी नाक मेरी चूत में रगड़ने लगे, फिर मेरी टांगों को फैलाकर मेरी चूत में पूरी जीभ को घुसा दिया, मैं जोर सी सी उम्म्ह… अहह… हय… याह… सी उहह ओहह करने लगी. वो बोली- और नहीं है क्या?मैंने पूछा कि तुम भी पीती हो?वो बोली- कभी कभी. मैं- आपसे रिलेटेड एक बात बोलूं, आप बुरा तो नहीं मानोगी?माँ- पर्मिशन लेने की ज़रूरत नहीं है… जो कहना है साफ़ बोलो.