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मैंने पहली बार की लड़की की चूत देखी थी। मैं तो देखता ही रह गया। उसकी एकदम गोरी और गुलाबी रंगत लिए हुए चूत ऐसी लग रही थी कि इसे खा जाऊँ।फिर मैंने उसकी चूत पर चुम्बन किया और मेरे चुम्बन करते ही वो मज़े से मचलने लगी और एक हाथ से अपनी चूचियों को दबाने लगी।अब मैं उसकी चूत को चाट रहा था। फिर जब मैं उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा देता.बीएफ सेक्सी बड़े बड़े दूध: जाते समय ज्योति की आँख भर आई और वो मुझसे बोलीं- जीजाजी आप माँ का ख्याल रखिएगा।करीब 3 महीने तक मैं और सासूजी पति-पत्नी की तरह रहे। मैं रोज उनकी चुदाई करता रहा।कुछ दिनों बाद मेरी पत्नी भी आ गई, मैंने सासूजी के घर के करीब एक फ्लैट भी ले लिया, अब मैं वहाँ अपनी फैमिली के साथ रहता हूँ.

तो डेरी वाला बोला- ये क्या है? इसका फैट इतना कम कैसे है?तो मैंने बताया वो गाय का दूध है इसलिए फैट कम है…उसका अमृत जैसा दूध पीकर मेरी तबीयत खुल रही थी।अब मैं सुबह-शाम उसका दूध निकालने में मदद कर रहा था.मैं लंच करने घर आया तो वो कॉलेज से आ चुकी थी। वो बाथरूम से नह़ा कर वो बाहर निकली और मैं उसके कमरे में था।मुझे देखकर वो हड़बड़ा गई… उसके बदन पर लपेटा हुआ तौलिया नीचे सरक गया।मैंने उसे गोदी में उठा लिया सीधे कमरे में बिस्तर पर ले गया और जाते ही उसके जलते हुए होंठों पर अपने होंठ रख दिए।उसने मेरा हल्का सा विरोध किया.

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सुदर्शन के साथ मिलकर कल्लो की चुदाई करके 500 रूपए देता हूँ।मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को यह कहानी पसन्द आई होगी। आप सभी की ईमेल का इन्तजार रहेगा।. कब हुआ और शादी में 6 साल बाद रानी से मिलने के उपरान्त क्या घटना घटी और यह अनोखा देह शोषण कैसे कहलाया…? तब तक आप सभी मुझे ढेर सारे मेल कर के बताएँ कि आप लोगों को मेरी यह आपबीती कैसी लग रही है और इसे पढ़ने में आपको कितना मजा आ रहा है?कहानी आगे जारी रहेगी।. योनि की जगह से उनकी कच्छी पूरी गीली हो गई थी, मैडम की चूत पूरी पनिया गई थी, मैंने अपना हाथ कच्छी के अंदर घुस दिया और उनकी चूत के दाने को मसलने लगा।जैसे ही चूत के दाने को मैंने मसला तो मैडम पूरी तरह से कसमसा गई और सीईई… सीई ईईई… सी… सी.

मैं कश्मीर की रहने वाली हूँ, मेरी उम्र 24 वर्ष है और वर्तमान समय में मैं दिल्ली में किराए पर रहती हूँ।मेरी शादी असफल रही और मैं परित्यक्ता का जीवन बिता रही हूँ।चूंकि मैं MA पास हूँ. कैसे मैंने उसके घर में ही उसकी मस्त चुदाई की और उसकी गाण्ड भी मारी।तो मित्रो, प्लीज़ इस कहानी को ज़रूर पढ़ना और अपने विचार मुझ तक जरूर भेजना. फिर तो दुनिया की कोई परवाह ही नहीं होती और रात-दिन तुम्हारा लंड अपनी चूत में लिए हुए मज़े लेती।’कुछ देर तक मेरे लंड और झाँटों से खेलने के बाद भाभी ने हाथ निकाल कर मेरे पायजामे का नाड़ा खोल दिया.

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मगर ब्लू-फिल्म बहुत देखी हैं और मुठ मारकर रह जाता था।तो राधिका ने कहा- मतलब मुझे ही तुम्हें सब कुछ सिखाना है।मैंने कहा- मुझे कुछ-कुछ पता तो है.

मगर आह मम्मों पर रहम खाओ…यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !विकास- साली स्कूल में बड़ा मन मचल रहा था ना तेरा.

मालिश करने लगा।उधर उसने मेरे सोए लण्ड को चूस-चूस कर खड़ा कर दिया था।फिर मैं उसके ऊपर से उतरा और फिर उसकी चूत पर गया. उन दोनों ने मेरी जाँघ को सहलाया और जीभ से चाटने लगे।इतने में लोवर पैरों से खींच कर दादाजी ने उतार दिया…अब तीनों आँखें फाड़ कर एकदम से एक साथ बोले- ये क्या है निकी?मैं तो लेटी हुई थी. जिससे उसे एक पागलपन सा छाता जा रहा था। वो मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से चूसे जा रही थी।कुछ देर ऐसे ही चलता रहा.

हाय दोस्तो, मैं अनिल 28 साल का इंदौर से आप अभी से मुखातिब हूँ। मैं अपने जीवन के अनछुए पहलुओं को अन्तर्वासना पर आपसे साझा कर रहा हूँ।असल में मैं गाहे बगाहे मौका मिलने पर एक पड़ोसन आंटी को चोदा करता था, आंटी का परिवार और मैं एक बड़े से घर में किरायेदार थे। यह घटना भी एक बहुत ही मजेदार थी जो उन्हीं आंटी और मेरे बीच हुई थी।एक शाम को जब मैं आंटी के कमरे में गया. तभी सैम से भी ना रुका गया और उनके लंड ने मेरे मुँह में ही पिचकारी मार दी।सैम ने मुझसे कहा- भाभी आई एम वेरी सॉरी. और इतना कहते ही मैंने एक धक्का मारा और गीली मलाईदार चूत में लंड फिसलता हुआ सीधा बच्चेदानी से जा टकराया…भाभी के मुँह से सिर्फ ‘उईईईईई माँ.

इसका फायदा उठाते हुए विलास ने अपना बैग एक तरफ रख कर मुझको बाहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मुझे चुम्बन करने लगे। मैं भी चुदासी थी सो अपनी जीभ उसके मुँह में डाल कर चारों ओर घुमा रही थी। विलास अपने हाथों से मेरी गांड दबा कर मुझे अपनी ओर खींच रहा था.

मैंने उसको घुमा कर सीधा किया और उसकी टांगों को खोल दिया। फिर अपने लंड को उसकी चूत पर लगा दिया और अपने हाथ से निशाना लगाकर लंड को चूत पर रगड़ने लगा। लण्ड लगते ही वो बिस्तर पर मचलने लगी थी और मस्ती में इठला रही थी।मैंने उसकी तरफ मुस्कुराते हुए. अब आँखों में घबराहट के डोरे भी साफ़ दिखने लगे और उधर लगातार डोर-बेल बजे ही जा रही थी।मेरा मन तो कर रहा था जाऊँ और जाकर उस बेल को तोड़ दूँ. वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगी।मैं भी जोश में आ गया और ज़ोर से होंठों को काट लिया।वो मुझे धक्का देकर बोली- अह.

मैंने जल्दी से जीन्स और टी-शर्ट पहन कर दरवाजे को लॉक लगाया और सामने वाली बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 502 में पहुँच गया।दरवाजे की घन्टी बजाई. दूध निकालते समय पूनम ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और अपने आप को मेरे पूरे हवाले कर दिया और उस दिन मैं और पूनम एक हो गए।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !उसके बाद मैं पूनम को जन्नत की सैर करवाते स्वर्ग का सुख देता गया और मेरा किसी स्त्री या पूनम का दूध पीने का सपना सच होता गया।अब चुदाई करते समय मैं उसका दूध चूसने लगा. मैंने रिंकी की बाँह पकड़ कर उसे अपने ऊपर खींच लिया।उसकी दोनों चूचियाँ मेरी छाती से चिपक गईं।मैं उसके चेहरे को अपनी हथेलियों में लेकर उसके होंठों को चूमने लगा।रिंकी को मेरा यह प्यार शायद समझ में नहीं आया.

हाय बड़ा मज़ा आ रहा हाय…’ रिंकी ने मस्ती में कहा।‘अब तुम मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसो और ज़्यादा मज़ा आएगा.

तो तुम्हें मुझसे ही शादी करनी पड़ेगी।मैंने भी हाँ में सर हिला दिया।उस दिन से हमारी प्रेम कहानी चालू हो गई।मुझे भी वहाँ पूरे जून रहना था, पूरे 30 दिन तक हम रोज मिलते. तो दिल और भी कह रहा है सारी रात तुम्हारे नीचे अपना पानी छोड़ कर गुजार दूँ।ये हंस दिए और बोले- शुरू करूँ.

बीएफ सेक्सी बड़े बड़े दूध दीपाली ने उसका भी सारा पानी गटक लिया।बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है।तो पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए…मुझे आप अपने विचार मेल करें।[emailprotected]. अगर तुम्हें अंकिता की चूत चाहिए और ऐसा अग़र वो खुद तुमसे आकर बोले तो कैसा रहेगा।मैं एकदम से खुश होकर बोला- बहुत बढ़िया।रूचि आगे बोली- तो ध्यान से सुनो.

बीएफ सेक्सी बड़े बड़े दूध दुकानदार की इस बात ने मेरे मन में एक सवाल पैदा कर दिया कि आखिर इतने बड़े घर में कौन-कौन रहता होगा?? इस सवाल के जबाव की तलाश में अक्सर ताक-झांक करता रहता।इस तरह एक माह बीत गया और मैं दोपहर को जानबूझ कर किराया देने पहुँचा, मैंने घंटी बजाई. मैं भी समझ गया गया था कि वो क्या कह रही है।उसने मुझे चाय दी और कहा- भैया मैं घर जा रही हूँ।मैंने कहा- कहा रुक ना.

लेकिन शायद अब भी कुछ-कुछ शर्मा रहे थे।शौकत ने फिर पलट कर अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख कर चूमते हुए कहा- ज़रीना मेरी जान.

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मैं अपने कमरे में भाभी के नाम की मुठ मार रहा था मेरी नजर सामने बालकनी के तार पर कपड़े डाल रही भाभी पर पड़ी।भाभी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा था और वो अपने काम में मस्त थी।उसके ब्लाऊज़ से उसकी चूचियाँ दिख रही थीं।यह इतना उत्तेजित कर देने वाला नज़ारा था कि चाह कर भी भाभी के उरोजों से नजर हटाने पर भी नहीं हटी।मेरा दिमाग सोच रहा था कि कौन देख रहा है और मैं केवल देख ही तो रहा हूँ. सुमन- दीदी, ये आप क्या बोल रही हो? मैंने संजय का क्या बिगाड़ा जो वो मेरे साथ ऐसा कर रहा है और मेरे पापा की और कौन बेटी है? नहीं नहीं, ये ग़लत है!टीना- ये तो अंकल ही बता सकते हैं मगर भगवान का लाख लाख शुक्र है कि वक़्त रहते मैंने उनकी बातें सुन लीं, नहीं तो वो तुम्हें रंडी बना देते. दुकानदार की इस बात ने मेरे मन में एक सवाल पैदा कर दिया कि आखिर इतने बड़े घर में कौन-कौन रहता होगा?? इस सवाल के जबाव की तलाश में अक्सर ताक-झांक करता रहता।इस तरह एक माह बीत गया और मैं दोपहर को जानबूझ कर किराया देने पहुँचा, मैंने घंटी बजाई.

वो मस्ती में झूमने लगी।वो मेरे प्यार करने की कला पर मन ही मन बहुत खुश हो रही थी।मैंने उसके पूरे कपड़े निकाल कर नंगा कर दिया। पहले तो वो शर्मा रही थी. पर मेरे लंड की लंबाई बढ़ने लगी।मैंने जींस की पैंट पहनी हुई थी तो उसमें से वो 6 इंच का तम्बू बना रहा था।जल्द ही हमारे होंठ मिल गए और हम एक-दूसरे के होंठ चूमने लगे।कब उसकी जीभ मेरे होंठों पर रेंगने लगी मुझे पता ही नहीं चला। वो पहला मौका था. इस तरह से पूरे बिस्तर में कपड़े फ़ैलाने की क्या जरुरत थी? चल जल्दी से निपटा ले।तभी मैं अन्दर से निकला और मैंने शो करने के लिए शावर से थोड़ा नहा भी लिया था।मैंने निकलते ही पूछा- अरे रूचि तुम्हारा एग्जाम कैसा रहा?तो बोली- अच्छा रहा.

शर्म देखना चाहती थीं।उस पीड़ा से बचने की वजह से मुझे आँखें भी खोलनी पड़ीं और मैं छत की तरफ देखता रह गया।मेरी कानों में उन सबके ज़ोर-ज़ोर से हँसने की और ‘कम ऑन तानिया.

पर मुझे कोई मौका ही नहीं मिल रहा था।इतने में विनोद उठा और वहीं सोफे के पास पड़े दीवान पर लेटते हुए बोला- मैं तो चला सोने. वो आज रंग लगाने में शर्मा रहा है…मैं- भाभी कहाँ खेल ली आपने रात को होली?भाभी मेरे लंड पर हाथ रखती हुई बोली- मुझे इतनी अनाड़ी और खुद को इतने बड़े खिलाड़ी ना समझो अनूप जी. निकाल लो।विकास ने लौड़ा निकाला और झट से दीपाली को उठा कर दूसरी तरफ़ झुका दिया यानि घोड़ी बना दिया और लौड़ा गाण्ड में पेल दिया।दीपाली- आह इतने भी क्या बेसब्र हो रहे हो अई कमर में झटका लग गया आह्ह.

अब चूत के आँसुओं के कारण लौड़े को रस मिल गया था।फिर एकाध मिनट के बाद मैंने चुदाई फिर से चालू कर दी। उसने मुझे भींच लिया और उसके हाव-भाव से ऐसा लग रहा था कि वो अब चुदाई को रोकना चाहती थी. तभी आंटी भी बाहर आईं।मैंने सोचा कहीं आंटी को कुछ पता तो नहीं चल गया।मगर जैसे ही आंटी मेरे पास आने लगीं. तो पूछने लगे- क्या हुआ निकी?मैंने कहा- कुछ नहीं…इतनी देर में दूसरे वाले अंकल ने भी मेरे एक मम्मे को पकड़ा और वे भी चाटने लगे और मेरे चूचुक में अपनी जीभ फेरने लगे।मुझे क्या पता था कि इन्हें वो सब पता है कि लड़की को कैसे मदमस्त करते हैं।अब दोनों अंकल ने मेरा एक-एक चूचा मुँह में भर लिया और चूसने लगे।मैं बस ‘उहह.

और मुझे अपने आप से लिपटा सा लिया।जैसे ही उन्होंने मेरे ऊपर मेरी जाँघों पर अपनी टांग रखी कि तभी मेरी जाँघों में कुछ सख़्त सी चीज़ गड़ी और वो लगातार उस सख्त चीज को मेरी जाँघ में रगड़ रहे थे।अब जैसे ही मैंने सोचा कि ये क्या चीज है. मैंने भी नींद में होने का नाटक करता हुआ फ़िर से उसके लन्ड से अपनी गाण्ड लगा दी।इस बार उसने कुछ नहीं किया तो मुझमें हिम्म्त आ गई।फ़िर मुझे अहसास हुआ कि वो भी अपना लन्ड मेरी गाण्ड से रगड़ रहा था।मैं ऐसे ही सोने का नाटक करता हुआ पड़ा रहा।अब उसने अपना एक हाथ मेरी गाण्ड पर रख दिया था और धीरे-धीरे सहलाता रहा।मैंने कुछ नहीं कहा और मजे लेता रहा।तभी अचानक वो बोला- चल भोसड़ी के.

फिर अपने हाथ पर थूक लिया और वो थूक उसने मेरी चूत पर और अपने लण्ड पर लगा लिया।फिर उसने अपने लण्ड को एक तेज झटका दिया. उसकी चूत खून से लाल हो गई थी। सारे पलंग पर खून ही खून देखा कर वो घबरा गई- ये क्या हो गया?मैं- कुछ नहीं. वो दोनों किसके पास गए होंगे?थोड़ी देर बाद उसके दिमाग़ में झटका सा लगा और अपने आप से ही उसने बात की।सोनू- अरे बेटा सोनू बन्द घर में दोनों एक साथ गए है दाल में जरूर कुछ काला है.

क्योंकि मेरे फैसले से पहले उसकी बस काफी दूर जा चुकी थी और उम्मीद भी लगभग पचास प्रतिशत थी कि पता नहीं मिलेगी या नहीं.

मैं भी रसोई में बर्फ लेने चला गया और बर्फ लेकर चाची के बेडरूम में दाखिल हुआ और देखा तो चाची अपने आप ही पेट के बल लेटी हुई थीं।मेरे अन्दर आते ही उन्होंने कहा- सन्नी. अब वो मेरे सामने थे।मैंने ज़रा भी देर ना करते हुए उसके मम्मों को मुँह में भर लिया।वो तड़प उठी और कहने लगी- जान सब कुछ तुम ही कर लोगे. दूध निकालते समय पूनम ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और अपने आप को मेरे पूरे हवाले कर दिया और उस दिन मैं और पूनम एक हो गए।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !उसके बाद मैं पूनम को जन्नत की सैर करवाते स्वर्ग का सुख देता गया और मेरा किसी स्त्री या पूनम का दूध पीने का सपना सच होता गया।अब चुदाई करते समय मैं उसका दूध चूसने लगा.

मज़ा आएगा।विकास ने दीपाली की टाँगें कंधे पर रखी और ‘घप्प’ से पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया।दीपाली- आईईइ मर गई रे आह… विकास- आह. ये खेल कैसे खेलते हैं।दीदी ने कहा- मैं तुझे सब सिखा दूँगी।उन्होंने मेरे पैंट और चड्डी को उतार दिया और पानी का छींटा मारकर मेरे लंड को साफ कर पौंछा, फिर मुँह में लेने लगी।मैंने कहा- यह गंदा है।दीदी बोली- जब तुम छोटे थे.

मम्मों को चुसवाने का मन है?मेरे मुँह से सीधे अपने आप ‘हाँ’ निकल गया…बोले- तू तो बहुत चुदासी हो रही है निकी…उन्होंने सीधे मेरी ब्रा को पकड़ कर जोश में खींच दी. प्लीज़ इसे गलत मत लो।अंकिता की आँखों में मुझे सच्चाई लगी और वो आंसू की बूँदें मुझे झकझोर गईं।मैंने अंकिता को पकड़ कर मजाक में कहा- अरे. मैं थक गई थी।करीब 20 मिनट बाद वो और तेज रफ़्तार से ठोकने लगा।मुझे लगा कि ये झड़ने वाला है और कुछ ही देर में वो मेरी गाण्ड में ही झड़ गया।वो मेरी पीठ के ऊपर ही लेटा रहा।करीब 15 मिनट बाद हम अलग हुए और बाथरूम में जाकर अपने आप को साफ़ किया।फिर हम बिस्तर पर आ गए… मेरी गाण्ड में बहुत जलन और दर्द था।थोड़ी देर में वो फिर शुरू हो गया.

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मेरी तरफ देख रही थी।मैं धक्के पर धक्के लगा रहा था और चूचियों को भी दबा रहा था।कुछ देर बाद वो भी मस्ती में झूमने लगी और अपनी गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद अब हम अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुके थे और झड़ने ही वाले थे।फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा और राजेश्वरी की भी सिसकियाँ निकल रही थीं- आआ.

पर मौका न मिलने से परेशान था। मुझे लगने लगा था कि मैं अपने आप पर ज्यादा दिन काबू नहीं रख पाऊँगा। चाहे जोर जबरदस्ती करनी पड़े. सोनू के लौड़े ने आग उगलना शुरू कर दिया।दीपाली भी ऐसी चुदाई से बच ना पाई और सोनू के साथ ही झड़ गई। अब दोनों बिस्तर पर पास-पास लेटे हुए थे. मैं चाभी लेकर आता हूँ।गार्ड ने कुछ ही देर में गाड़ी पार्क की और चाभी दे कर मुझसे बोला- साहब जी देर बहुत लगा दी आने में?तो मैंने बोला- हाँ.

थोड़ी देर में ही लौड़ा तन कर अपने विकराल रूप में आ गया।प्रिया- भाई अब ये चूत में जाने के लिए तैयार है. अब मेरा लण्ड मेरे काबू में नहीं था। मैंने अपना काम ज़ारी रखा और अच्छे से उसके पैरों की मसाज करने लगा और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ना शुरू किया।अब मैंने उसकी जाँघों की मसाज की जिसमें बार-बार मेरा हाथ उसके नितम्ब को छू रहे थे. सेटिंग्स की सेक्सी वीडियोसेक्स कहानियाँ तो आप रोज ही पढ़ते हैं, आज आपको यह चैट पढ़ कर मज़ा आया या नहीं, आपको कैसा लगा मुझे जरूर इमेल करें…[emailprotected].

कितनी गंदी हो गई है?मैंने तुरंत आज्ञाकारी बच्चे की तरह चाची की ब्रा के हुक को पीछे से खोला और निकाल दिया।अब चाची कुछ और ही रंग में थीं- बेटा. इसलिए वो अपना दाहिना हाथ पीछे लाईं और मेरे लण्ड को पज़ामे के ऊपर से ही पकड़ कर सहलाने लगीं, बोलीं- ऊओह.

तुम तो अभी भी अपना लण्ड हिला रहे थे ना? यह अभी भी खड़ा है। जरा मुझे भी तो दर्शन कराओ इसके !भाभी की यह बात सुन कर मेरी तो बांछें ही खिल गई, मैं समझ गया कि आज तो मुझे भाभी की चूत मिल ही जएगा।पर मुझे अभी भी हिचक थी तो भाभी ही उठ कर मेरे पास आई और मेरा लोअर खींच दिया।मेरा लण्ड देखते ही भाभी के मुँह से ‘वाऊ. अतः सभी बुर वाली शादी-शुदा महिलाओं को कुंवारों के लंड को अपनी बुर में आसरा देकर भलाई की सप्लाई जारी रखनी चाहिए।कमरा छोड़ते समय भाभी ने अपने पति से मेरे लिए एक लाँग बूट और कोट गिफ्ट दिलाया।कैसे मैंने एक बारात में सैटिंग की. मैंने अपना एक हाथ उनके सर के नीचे ले गया और अपने होंठों को उनके होंठों पर रख कर वापिस चोदने लगा। वो भी मेरा पूरी तरह से साथ दे रही थीं।करीब 5-6 मिनट के बाद हम दोनों हाँफने लगे थे.

इतने बड़े चूतड़ों वाली और इतने बड़े मम्मों वाली कुतिया नहीं देखी थी।चुदाई का यह मस्त नजारा देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. नीता ने मुझे पकड़ कर मेरे होंठों को जो चुम्बन किया तो एक बार तो लगा कि ये लड़की मुझे आज कच्चा ही खा जाएगी।खैर. होंठों को चूसते हुए मैं उसके चूचे बड़ी बेदर्दी से मसल रहा था और वो मस्ती में होकर ‘सीसीसी…’ जैसी आवाजें अपने मुँह से निकाल रही थी।फिर धीरे-धीरे मैंने उसकी साड़ी उसके शरीर से अलग कर दी और ब्लाउज भी उतार दिया, नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी।उसके ठोस और गदराए हुए चूचों को देख कर मैं पागल हो उठा.

चुस्त टी-शर्ट में से उसके मम्मे साफ दिख रहे थे और जींस में से गाण्ड एकदम बाहर को निकल रही थी।कोई अगर उसको पीछे से देख ले तो उसके मन में बस यही विचार आए कि काश एक बार इसकी गाण्ड मार लूँ.

घर में सभी मुझे निकी कहते हैं।बड़ी मुश्किल से मैं बहुत दिनों में अपनी सच्ची घटना लिख कर बताने की हिम्मत जुटा पाई हूँ।यहाँ मेरा लिखा हुआ एक-एक शब्द सच है. मैं उसे पी गया।ऐसा रस मैंने कभी नहीं पिया था। मुझे बहुत अच्छा लगा।हम काफी देर तक ऐसे ही एक-दूसरे को चाटते रहे।फिर मैंने राधिका से कहा- राधिका.

तो अभी हमारी कामवाली आंटी गई नहीं थी तो मैंने उनसे हमारे लिए जैली बनवा ली।फ़िर आंटी चली गईं और घर पर बस मैं और भानुप्रिया ही रह गए।मैं और भानुप्रिया जैली खा रहे थे. थोड़ी देर में ही लौड़ा तन कर अपने विकराल रूप में आ गया।प्रिया- भाई अब ये चूत में जाने के लिए तैयार है. सब्र कर आह्ह…दीपक ने तीन-चार जोरदार झटके मारे और अंत में उसके लौड़े का जवालामुखी फट गया।वो प्रिया की गाण्ड में वीर्य की धार मारने लगा।दीपक के गर्म-गर्म वीर्य से प्रिया को गाण्ड में बड़ा सुकून मिला।उसने एक लंबी सांस ली।प्रिया- आई ससस्स.

रजनीश का आधा लंड विभा की चूत में घुस चुका था।अब रजनीश ने तीसरा धक्का मारा…विभा की तो मानो चूत फट ही गई. वो मुझे बहुत अच्छा लगा।वो अक्सर मुझसे बातें ज्यादा करता था और उसकी कामुक बातों से मैं अपनी चूत में ऊँगली करके झड़ जाती थी. प्लीज़ इसे गलत मत लो।अंकिता की आँखों में मुझे सच्चाई लगी और वो आंसू की बूँदें मुझे झकझोर गईं।मैंने अंकिता को पकड़ कर मजाक में कहा- अरे.

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क्योंकि कई महिलाएँ अपने नितंब के आकार को लेकर काफी आशंकित रहती हैं।जैसे ही आप भग क्षेत्र या बाह्य जननेन्द्रियों (genital area) को पाते हैं, तो उसमें छलांग लगाना काफी सरल होता है। लेकिन उसके पहले भगशिश्न के ऊपर स्थित उस गुद्देदार क्षेत्र को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो रोमों (pubic hair) से घिरा होता है।इसे थपथपाना और रगड़ना उसे सिसकने को मजबूर कर देगा. अब मेरा लण्ड मेरे काबू में नहीं था। मैंने अपना काम ज़ारी रखा और अच्छे से उसके पैरों की मसाज करने लगा और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ना शुरू किया।अब मैंने उसकी जाँघों की मसाज की जिसमें बार-बार मेरा हाथ उसके नितम्ब को छू रहे थे. सासु जमाई की सेक्सीतुझे उस वक़्त इन बातों का ख्याल नहीं आया कि मैं तेरा क्या हूँ?मैंने थोड़ी हिम्मत कर के कहा- आगे मत आना.

मुझे मेरे काम के सिलसिले में एक ईमेल आया जो किसी रीना नाम की लड़की का था। उसने मेल में मेरी होम-सर्विस के बारे में जानकारी मांगी थी.

सलवार सूट और गाउन पहनती थी। मैं हमेशा इसी ताक में रहता था कि वो झुके और मैं उसके मस्त गोरे-गोरे मम्मे देख सकूँ।अकसर जब भी मैं उनके घर जाता था. तो वो एक जोर की ‘आआअह्ह्ह्ह’ के साथ चिहुंक उठती।फिर मैंने माया की चड्डी एक ही झटके में हाथों से पकड़ कर उतार दी और जैसे ही मैंने फिर से बर्फ का टुकड़ा दोबारा से उठाया.

आज मैं इससे अपनी चूत की प्यास बुझवाऊँगी।अब हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे।मैं एक हाथ उसकी चूत पर ले गया तो देखा. तुझे सिर्फ़ चूत चाटना ही आता है या चोदना भी आता है?यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैं- मैं. वो सिहर कर मुझसे और चिपक जाती थी।अब नीता पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और वो मेरे लंड को पकड़ कर उससे खेलने लगी थी। मेरे लौड़े से खेलते-खेलते उसने अपने मुँह में लंड को डाल कर चूसना शुरू किया.

वो भी मेरे लंड को बड़े मज़े लेकर चूस रही थी। मैं अपने एक हाथ से लगातार उसकी चूत में उंगली किए जा रहा था.

मैं रोज़ उसके अंतर्वस्त्रों पर ध्यान रखता था और उसे सही-सही बताता था।लेकिन एक दिन वो तो मुझसे भी सवा शेर निकली और पूछा- बताओ आज मेरी पैन्टी का कौन सा रंग है?मैंने बताया- पिंक है. ताकि मैं पिछले हिस्से से शुरूआत कर सकूँ क्योंकि ऐसा करने से उसकी शरमाहट और हिचकिचाहट दोनों ही कम हो जातीं।वो पलट गई. ’ वो ऐसे ही कहे जा रही थीं।ये आवाजें सुन कर मुझे और ज़ोश आ रहा था और मैं और जोर से उनके चूचे दबा रहा था। करीब 5 मिनट उनके चूचे दबाने के बाद मैंने उनके शरीर पर से ब्रा और पैन्टी भी उतार दी। मैं आज पहली बार किसी नंगी औरत को इतने करीब से देख रहा था।फिर आंटी मुझसे कहने लगीं- मेरी चूत में ऊँगली करो।तो मैं वैसे ही उनके चूत में दस मिनट तक ऊँगली करता रहा.

भाटिया का सेक्सी वीडियोजिससे उसकी गाण्ड का उठाव अलग ही नज़र आता था।भले ही वो साँवली हो मगर कोई इसको ऐसी हालत में देख ले उसका लौड़ा बिना चोदे ही पानी टपकने लगेगा।चलो अब प्रिया को नंगा तो अपने देख लिया।अब इन दोनों कमसिन कलियों की रगड़लीला भी देख लो।दीपाली- वाउ यार तेरे मम्मे तो बहुत अच्छे हैं गोल-गोल…।प्रिया- रहने दे यार इतने ही अच्छे हैं तो कोई देखता क्यों नहीं. चूस रहे थे। फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ कविता की चूची पर रखा और सहलाने लगा।फिर मैं उसे चूची को दबाने लगा। अब मेरा एक हाथ कविता की पीठ पर और एक हाथ से बारी-बारी से दोनों चूची दबा रहा था।कुछ समय तक ऐसा करने के बाद मैं अलग हुआ.

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दीपाली जीभ से विकास के लौड़े और गोटियों को चूस और चाट रही थी।दीपाली की पीठ प्रिया की तरफ थी।प्रिया थोड़ी सी पर्दे के बाहर निकल कर सब देख रही थी। उसकी चूत भी पानी-पानी हो गई थी और ना चाहते हुए भी उसका हाथ चूत पर चला गया. तू आराम से लौड़ा चूस।दोनों 69 कि स्थिति में आ गए, दीपाली बड़े प्यार से लौड़ा चूसने लगी थोड़ी देर बाद वो दाँतों से लौड़े को दबाने लगी।विकास- आआ. वो बड़े प्यार से मस्त होकर उसे चूसने लगी।फिर मैंने 69 होकर उसकी चूत चाटना चालू कर दी। उसकी चूत मुझे पूरी जिंदगी याद रहेगी.

तो मैंने भी उसको पकड़ा ओर जबरदस्त तरीके से उसके मुँह में अपना मोटा ओर लंबा लंड पेलना शुरू कर दिया। वो भी किसी मंजी हुई राण्ड की तरह बड़े मज़े से मेरे लंड को अपने हलक तक लेकर चूस रही थी।कुछ देर बाद लंड चुसवाने के बाद मैंने उसे सीधा पलंग पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगों को खोल कर. जो कि बाद में सारे जीवन तुमको याद रहने वाला है।मैं ये सब कहते हुए उसके मम्मों को सहलाता जा रहा था और उसकी चूत के दाने पर अपने अंगूठे से छेड़खानी भी कर रहा था।उसका दर्द अब कम हो चला था क्योंकि अब लण्ड ने ठोकर मारना बंद कर दी थी. मैंने जल्दी से जीन्स और टी-शर्ट पहन कर दरवाजे को लॉक लगाया और सामने वाली बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 502 में पहुँच गया।दरवाजे की घन्टी बजाई.

गोरा पेट भी साफ नज़र आ रहा था।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !दीपक का लौड़ा पहले ही एकदम तना हुआ था और उसकी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी।उसके लौड़े से पानी की कुछ बूँदें टपक आई थीं और आएं भी क्यों ना. मेरी इज्जत अब आपके हाथ है।मैंने कहा- आप बिलकुल चिंता मत कीजिए।मैंने यह कह कर उसके गालों को हल्का सा स्पर्श किया। उसने कुछ नहीं कहा. जिससे मेरा लंड एक ही झटके में पूरा अन्दर फिसल गया।चाची के मुँह से एक जोरदार चीख निकल गई और वो मुझसे कहने लगीं- आराम से नहीं डाल सकते थे क्या.

होते हैं।इसी प्रकार लंड के प्रचलित नाम- लंड, लवड़ा, पेलहर, लौड़ा, मुन्नी, नुन्नी, मुल्ली, लुल्ली, लिंग,लन आदि के अतिरिक्त नए नाम भेजिएगा। आप भी नए नाम की जानकारी देते हुए मुझे अपने कमेंट जरूर प्रेषित करें।[emailprotected]. दोस्तो, प्रिया का फिगर तो आपको पता ही है 30-26-30 चलो अब प्रिया को नंगी भी देख लो।जैसा कि मैंने पहले आपको बताया था प्रिया थोड़ी साँवली है लेकिन दोस्तों रंग का कोई महत्व नहीं होता.

भाई सबसे छोटा है।यह बात आज से 3 साल पहले की है।जब मैं अपनी बुआजी के यहाँ घूमने गई थी और बुआजी बीमार भी थीं.

दिखने में अच्छा-खासा गबरू नौजवान हूँ।मैं औरों की तरह झूठ नहीं बोलूँगा, मेरा जननांग जिसे कि लंड भी कहा जाता है 6 इंच का है।हाँ. नंगा सेक्सी चाहिएमेरे जिस्म के अब चीथड़े होने वाले थे और मैं खुद ऐसा करवाने को राजी थी।अब दादा जी बोले- पहले आराम से घुसड़ेना. जानवी सेक्सीलेकिन मैंने उसे सहलाते हुए व लण्ड को अन्दर-बाहर करते हुए उसे तैयार कर लिया और धीरे-धीरे अपनी गति तेज कर दी। अब वह भी मेरा सहयोग कर रही थी। खून के लाल रंग व वासना के रंग में रंगा मेरा लण्ड आग का गोला लग रहा था।लगभग 20 मिनट में उसकी चूत ने दो बार पानी छोड़ा. !तो उसने धीरे से अपने मुँह को ‘नहीं’ में हिलाया। फिर भी मैंने उसको बात बताना शुरु कर दिया। थोड़ी देर तक तो वो ‘ना.

Ankita ki Chabhi Kara Gai Uski Chudai-2मैंने अपना लंड उसके हाथ में दिया, वो हाथ में लेकर बड़े प्यार से देख रही थी, मैंने उसे चूसने को बोला तो वो मना करने लगी।तो मैं उठा और अपनी पैन्ट पहनने लगा, वो बोली- क्या हुआ?मैंने कहा- मेरी प्यारी.

लेकिन मज़ा आया और मैं भी उनकी जीभ को चूसने लगा… वो इस चुम्बन में मस्त थीं और मैंने उनकी चूत को चोदना शुरू कर दिया।तकरीबन 5 मिनट तक चूसने के बाद मैंने चाची की जीभ को छोड़ा और अब सीधा बैठ गया और ज़ोर-ज़ोर से चाची को धक्के लगाना शुरू कर दिया। चाची की चूत में से मस्त रस निकल रहा था. मगर उसको बार-बार प्रिया का ख्याल आ रहा था। अचानक वो उठी और दीपक को फ़ोन लगा दिया।रिंग बजी सामने से शायद किसी और ने फ़ोन उठाया।दीपाली ने काट दिया. उसे गाण्ड में ऊँगली करने से गुदगुदी हो रही थी और चूत पर जीभ का असर उसे पागल बना रहा था।करीब 10 मिनट बाद उसकी चूत ने उसका साथ छोड़ दिया और वो झड़ने लगी।दीपक ने सारा चूतरस पी लिया।दीपक- आह्ह.

और कामाग्नि में पूरी तरह डूब कर मेरे वशीभूत हो चुकी थी।कुछ ही पलों के बाद वो सिर्फ़ पैन्टी और ब्रा में बची थी और उसके बालों से गिरता पानी. और वो काँप रही थी।मैंने उसे बिस्तर पर गिरा दिया और उस पर चढ़ गया।अब मेरा लंड भी उसकी जांघों को छेड़ रहा था. वो चीखने लगी।मैंने उसके मुँह पर अपना मुँह लगा दिया और फिर से जोर से धक्का लगाया।तो वो रोने लगी, बोली- प्लीज़ निकालो इसे.

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वो एक-दूसरे को मिले तो सलाम किया।जब मैं सामने आई तो हसन भाई के चेहरे पर गुस्सा आ गया और वो नफ़रत से मुझे देख कर चले गए।मैंने सलाम भी किया लेकिन उन्होंने सलाम का जवाब तक ना दिया।फिर रात को छत पर मदीहा और हसन भाई अकले में मिले तो दोनों एक-दूसरे से गप्पें मारने लगे और चुम्मा-चाटी भी की।दोनों मोहब्बत में पागल थे. जो तुम्हारे अंकल नहीं दे पाते हैं।मैं उनसे कहने लगा- मैं तो अंकल के मुक़ाबले में आधी उम्र का भी नहीं हूँ।तो आंटी ने अपना हाथ मेरे लन्ड पर रखा और कहने लगीं- यह किस काम आएगा?यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !वो मेरे लन्ड को सहलाने लगीं. तो सुबह 10 बजे आँख खुली।मेरा उससे हटने का मन नहीं कर रहा था।मैंने उसके लिए चाय बनाई और उसे जगाया।इतने में दरवाजे पर घन्टी बजी और देखा कि पूजा वापस आ गई थी।उसने हँस कर पूछा- कैसी रही तुम्हारी रात?योगिता ने पूजा से कहा- राज़ अब मेरा है.

यह भी बताया।वह बोली- आज मैं बताती हूँ कि मैं रोज क्या देखती थी।उसने नेट पर कुछ पोर्न जैसा कुछ लिखा और सर्च किया।अब मैंने देखा कि लैपटॉप की स्कीन पर कुछ नंगी तस्वीरें आ गईं और वीडियो चलने लगी थी।उसमें एक लड़का.

पर तभी मेरे सीने पर ब्रा के ऊपर दूसरे वाले अंकल अपनी टाँगें इधर-उधर करके बैठ गए और अपना लण्ड मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे मम्मों पर रगड़ने लगे।अब सब कुछ मेरी आँखों के सामने देख कर मेरा गला सूखने लगा.

इसलिए आप ही उन्हें कह देना।फिर अपनी बात को समाप्त करते हुए बोली- क्यों कैसा लगा सबको मेरा आईडिया?तो सब ने एक साथ बोला- बहुत ही बढ़िया. अब से हरामजादी को चुदने बड़ा शौक था ना ले आह…दीपक को शायद प्रिया को चोदना अच्छा नहीं लग रहा था इसी लिए उसको जरा भी रहम नहीं आ रहा था।उसने तो लौड़े को पूरा जड़ तक घुसा दिया और अब दे-दनादन झटके मारने लगा था।प्रिया जल बिन मछली की तरह तड़फ रही थी. सेक्सी वीडियो फिल्म दिखाना!”पर मैं कभी-कभी देखता था, तो अगर देख लेती थीं तो मुस्करा देती थीं, तो मुझे डर कम लगता था। वरना क्या मेरी हिम्मत थी कि मैं उन्हें इस तरह देखूँ.

पर जब मामी वहाँ से गईं तो सोनम ने अचानक से मेरा हाथ पकड़कर अपने स्तन पर रखा और दबाया।मैंने एकदम हाथ हटा कर नासमझ बनने की कोशिश की. पर अब क्या हो सकता था उसे तो निकाला भी नहीं जा सकता था और उसकी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया जो कि मुझे बाद में पता चला।खैर. मेरी इज़्ज़त अब तुम्हारे हाथ में है।भिखारी- अरे मुझे क्या पागल कुत्ते ने काटा है जो मैं किसी को बताऊँगा.

तो उसे चुप करने के लिए फिर से होंठ चूसने लगा और मम्मों दबाने लगा और साथ-साथ अपने लंड को घस्से मारता रहा।तो उसे मजा आने लगा. फिर मैंने ज्योति के पति को फोन करके कहा- अब तुम ज्योति की माँ यानि की तुम्हारी सासूजी को फोन करके उनका हाल-चाल पूछो और ज़्यादा बात मत करना.

मैं इस बार रुका नहीं और ज़ोर से अपना लंड उसकी चूत में लगातार पेलता रहा। कुछ देर बाद मेरे लंड ने अपनी जगह बना ली और अब वो भी मस्त होकर मेरा साथ देने लगी, अपनी गाण्ड उछाल-उछाल कर मेरे लंड को अन्दर बाहर लेती रही.

और ना मेरी हिम्मत हुई। जबकि मुझे यह लगता था कि ये सब जानबूझ कर मुझे चूत दिखाती है।एक बार मैं गर्मी में दोपहर में उसके पास गया. 5 इंच व्यास की मोटाई है, अब तक मेरे लण्ड ने अच्छी-अच्छी चूतें फाड़ डाली हैं।बात उस वक्त की है जब नवरात्र की धूम मची हुई थी।गुजरात में नवरात्रि का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।हम लोग रोज रात को साथ में गरबा खेलते थे।एक बार वो मेरे घर कुछ काम से आई।वो सबसे बातें कर रही थी. गरदन पर जमकर काटा।जब कुरता को फटा देखा तो मैंने पूछा- भाभी ये फटा कैसे?तो उन्होंने बोला- मेरे ‘वो’ दारू में धुत थे रंग लगाते टाइम फाड़ दिया…मैंने भी उन्हें आँख मारी और चूचियों के बीच में हाथ डालकर ब्रा से लेकर कुरता पूरा नीचे तक फाड़ दिया।भाभी के मुँह से निकला- हाय जानू.

सेक्सी पिक्चर मूवी दिखाएं तो उसकी गुठलियाँ नहीं बनेगीं और दर्द नहीं होगा।पूनम अब सोनम की मदद से चोरी-छुपे अपना दूध निकालती रहती थी और मैं आते-जाते देखकर मुस्कुराता रहता था।एक दिन सोनम के हाथ को छुरी से कट गया था और पूनम बहुत ही परेशान लग रही थी।तो मैंने पूछा- क्यों. ना ठीक से सोया… मेरे मन में रूचि के लिए एक सहानुभूति थी और शायद इसी वजह से मैंने उसकी मदद करने की ठान भी ली थी।रूचि का उद्देश्य भी गलत नहीं था और फ़ायदा तो मेरा भी था।अगली सुबह फिर से कॉलेज जाने को मैंने बस पकड़ी तो देखा रूचि अंकिता के पास बैठी है.

और आप इसी मेल आईडी के माध्यम से फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।अगले भाग तक के लिए सभी चूत वालियों और सभी लौड़े वालों को मेरा चिपचिपा नमस्कार।मेरी चुदाई की अभीप्सा की यह मदमस्त कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]. कल आकर नेट चलायेंगे।अब हम लोग दूसरे दिन मिले।विन्नी ने मुझे नेट चलाना बताया और साइट को कैसे सर्च किया जाता है. तो लंड ने उसकी गाण्ड में अपनी जगह बना ली और फिर उसे भी मज़ा आने लगा।अब वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत में उंगली कर रहा था और धबाधब उसकी गाण्ड को पेल रहा था।करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद अब मैं अपने पूरे जोश में आ चुका था.

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जो कुछ ज्यादा ही फूली हुई थी। तब अमन और उसकी गैंग नीचे खड़ी थी। राज ने शायद नीचे से मेरी टाँगों और पैन्टी के दर्शन कर लिए थे।मेरी टाँगों पर कुछ ज्यादा बाल हैं. मैंने उसके मुँह से लण्ड निकाल लिया और उसे लेटा कर उसकी चूत पर रख दिया।मैंने अपने अपने लण्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और एक ज़ोर का धक्का मारा।उसकी चूत बहुत टाइट थी. तो दोस्तो, यह मेरी सच्ची कहानी थी मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को अच्छी लगी होगी।प्लीज अपने कमेंट्स जरूर लिखिएगा।.

मगर मेरे ख्याल से वो उस वक्त सोने का बहाना करके उस प्राप्त होते असीम मस्ती के अनुभवों को समझने का प्रयत्न करती थी और बेचारा मैं. मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई और खून तेज रफ़्तार से दौड़ने लगा।उधर सासूजी का भी यही हाल था और फिर वापिस मैं उनकी तारीफ करने लगा।मैंने कहा- सासूजी आपकी पीठ इतनी चिकनी है कि मुझे बचपन याद आ गया.

सर ने रुपये मेरे अकाउंट में डाल दिए हैं।वह मुझे अपने कमरे में ले गई।वहाँ उसने कहा- आप आज मालिश जिस तरह से करना चाहते हो.

पानी पिया और थोड़ा उसे भी दिया।उसके बाद पानी की बोतल एक तरफ रख कर मैं लेट गया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया।इसके बाद उसकी चुदाई का नम्बर था क्या मैं उसको आज चोद पाया?इससे मैं आपको रूबरू कराने के लिए कहानी के दूसरे भाग में ले चलूँगा।आप मुझे मेरे ईमेल के ज़रिए मुझे अपने विचार लिख कर भेज सकते हैं।. बात आराम से हो जाएगी।मैंने अपना सिस्टम ऑन किया और 5 मिनट में सिस्टम खोल कर कैम पर बात करने लगा।उनका याहू मैसेंजर ठीक से काम नहीं कर रहा था. इसका मतलब है कि कुछ तो गड़बड़ है।वैसे यह नई चुदाई मस्त थी।कुछ ऐसा ही मेरे दिमाग में भी चल रहा था कि कब ये बोले कि कैन यू डू मी अ फेवर प्लीज़.

लगता है रूचि कुछ ज्यादा ही गर्म हो गई थी। इसे क्यों न और गर्म कर दिया जाए ताकि ये भी अपनी माँ की तरह ‘लण्ड. उसकी गर्म साँसें मेरे बदन से टकराने लगीं और मेरी वर्षों की सोई हुई ‘अन्तर्वासना’ फूट पड़ी, मैं उसके होंठों को चूसने लगी और उसके हाथ को पकड़कर अपनी चूचियों पर रख कर दबा दिया।वो ऊपर से उनको दबाते हुए मसलने लगा, फिर उसने मेरे कुर्ते के गले में हाथ डाल कर चूची को पकड़ने की कोशिश की. इधर रज़ाई के अन्दर मेरे और नीता के पैर अभी तक मिले हुए थे और हम दोनों के शरीर में गर्मी भर रही थी।तभी नीता अचानक मेरे बगल में आ गई और उसने मेरी जांघ पर अपना हाथ रख दिया। मेरा लंड खड़ा हो चुका था और मैं हिल-डुल कर उसे ठीक करने की कोशिश कर रहा था।तभी इधर नीता ने पूछा- क्या तुमने कभी किसी को चुम्बन किया है?मैंने मना किया.

मैंने अपना एक हाथ उनके सर के नीचे ले गया और अपने होंठों को उनके होंठों पर रख कर वापिस चोदने लगा। वो भी मेरा पूरी तरह से साथ दे रही थीं।करीब 5-6 मिनट के बाद हम दोनों हाँफने लगे थे.

बीएफ सेक्सी बड़े बड़े दूध: ?वो बोली- आजके टोके खेये फेल्बो (आज तुम्हें खा जाऊँगा)उसकी आँखें लाल हो गई थीं और वो अपनी कमर को हिला-हिला कर मेरे लंड पर अपनी चूत का दबाव बना रही थी।दोस्तों. वो दवाइयों की वजह से बढ़ने लगा और स्तनों में दूध ज़्यादा होने से उसकी गुठलियाँ बनने लगीं।इससे उसको स्तनों मे दर्द होने लगा.

और सॉरी जो मैंने तुम्हें इस दलदल में धकेला…दीपाली- अरे दीदी आज ये आप कैसी बातें कर रही हो और ‘सॉरी’ क्यों? और हाँ आपने ही तो कहा था. आवाज़ तो जानी ही थी।मेरी अम्मी एकदम बाहर आईं और जोर से चिल्ला कर मुझे आवाज लगाई- क्या हुआ साना?वो डर गई थीं।हसन ने एकदम मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर मेरे मुँह को बंद कर दिया।मदीहा साथ वाले कमरे में चली गई थी. साली को तेरे सामने पूरी रात चोदूँगा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !अब मुझे आनन्द की भाषा अच्छी नहीं लग रही थी।सलीम- हाँ आनन्द.

तो अधिकतर भाभी रात को जाग कर टीवी देखती रहती थीं।मैं उनको चोदने के लिए बहुत बेचैन रहने लगा था।वो छोटी होली की रात थी.

लेकिन मुझे याद है मेरी वो पहली चुदाई, जब मैंने कोमल को चोदा था।वो मेरी पहली चुदाई थी।पहले मैं आपको कोमल के बारे में बता दूँ।कोमल का कद साढ़े पाँच फुट का रहा होगा. उह्ह… उह्ह्ह…मुझे भी मज़ा आ रहा था क्योंकि लण्ड के ऊपर मुझे कुदवाना अच्छा लगता है। मेरे मुंह से मस्ती भरी आह्ह. हम दोनों खूब चुदाई करते।आप सबको मेरी कहानी कैसी लगी प्लीज़ ईमेल ज़रूर कीजिएगा।मैं आपके ईमेल का इन्तजार करूँगा।आप इसी आईडी पर मुझसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।.