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जिस दिन मैंने कोई ब्ल्यू फिल्म देखी हो उस रात मुझे नींद ही नहीं आती, पूरी रात माँ को देखने में ही निकल जाती, कभी उन की नाईटी ऊपर सरक आती और उन की गोरी जांघ दिखाई देती तो कभी उन के स्तनों की झलक मिलती.अंग्रेजी बीएफ वीडियो एचडी वीडियो: लंड की घिर्री पर जनाब !!!मैंने नेहा को हर जगह चूमा… गाल पे… होंठों पे… कनपटी के नीचे… ईयरलोब्स पे… गले पे… कांख पे… पीठ पे… दोनों मधुघटद्वय के बीच दरार पे… तने हुए मुनक्के के आकार के चुचूकों पे….

और ये तो मुंबई है !मुंबई के पोश लोकेलिटी में फ्लैट के अन्दर सब हो रहा था … चार कैमरा …दस बारह लोग ! हम दो लड़कियाँ !!डायरेक्टर : तो यह है श्रेया … कपड़े खोलो जरा !!श्रेया : पर सर …मोनिका : अरी करती जा ! मत शरमा … सब अपने लोग है यहाँ !मैंने अपनी जींस उतारी और टी शर्ट भी … सिर्फ अंडर-गारमेंट्स में रह गई थी मैं …डायरेक्टर : सब खोल ! तभी तो बोली लगेगी ….मैं सोचने लगा कि आखिर कहाँ है नीना? दरवाजे के पास ही अपना वाशरूम है, तसल्ली के लिए एक बार फिर से वाशरूम में झाँका.

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दस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो मैं बोला- इस बार भी मुँह में निकालने का इरादा है?तो वो शरमा कर बोली- नहीं! इस बार मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवाऊँगी!और उसने मेरे पूरे बदन को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.वो इस काम का मास्टर लग रहा था, पहले से ही मुझे अपने सिकंजे में जकड़ रखा था और मेरे होंठ अपने होंठों में दबा रखे थे.

प्रेषक : राज शर्माआज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ कि मैंने कैसे पहली बार चुदाई की ! उम्मीद है आप सबको यह कहानी पसंद आएगी !तो दोस्तो, बात आज से पांच साल पहले की हैं जब मैं बी. अंग्रेजी बीएफ वीडियो एचडी वीडियो उसने इतनी जोर से मेरी पेंटी को खींचा कि वो फट गई पर सब कुछ भूल के वो बस मेरी चूत सहलाने में लगा था … मैं तो मज़े से मरी ही जा रही थी … झड़ने ही वाली थी कि उसे दूर धकेला … झट से नीचे उतर कर उसके लौड़े को अपने मुँह में ले लिया.

विश्रांती की मादक मुस्कराहट ने और भी मजा भर दिया… फिर विश्रांती की पेंटी को एक ही झटके में खोल दिया….

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‘ रोहित… मत मार मुझे… बहन चोद… कुत्ते… अपनी माँ को मारना घर जा कर उसकी गांड की छिताई करना मैं गलियाँदेती हुई घोड़ी बन गई। उसने मेरे चूतड की दोनों फांकों को चीरते हुए… अपने लंड की सुपारी गांड के छेद में टिका दी…‘ले कुतिया… अब तेरी गांड की माँ चोद दूंगा. मुझे देखो ना, कितनी बढ़िया चोदा है दोनों ने!’मैं उठ कर बैठ गई, गोमती मुझे लेकर बाथरूम में आ गई. तूने भी तो लण्ड के मज़े लेने को ही मेरे से अपनी चूत चुदवाई है तो फिर मुझे क्यों नहीं अमिता की चूत दिला सकती है तू?वो बोली- नहीं!फिर मेरे जिद करने पर वो राज़ी हो गई पर बोली- मेरी चूत भी मारनी होगी! कहीं उस रण्डी के चक्कर में मेरी चूत को ही भूल जाये?मैंने कहा- नहीं मेरी जान! तेरी चूत को कैसे भूल सकता हूँ मैं?तो अगली रात उसने अमिता को भी साथ में सुला लिया और अब हम तीनों साथ में थे.

पहुंचा तो छवि की फोन दोबारा आया।फोन उठाते ही सुरीली सी आवाज आई- हेल्लो राकेश … राकेश बोल रहो हो?हाँ… राकेश बोल रहा हूँ. मैंने देखा कि विपिन की अंडरवीयर वाशिंग मशीन में पड़ी हुई थी, उसके कमरे में झांक कर देखा तो वो शायद सो गया था. कहानी का पहला भाग:बेटा और देवर-1अब आगे-देवर ने मेरी चूत के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा…स्सीईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईई ईईईई बस करो स्स्सीईईई देवर जी ब्ब्ब्स्स करो!” मैं बुदबुदाई.

!शब्बो- कुछ मत बोलो, चलो, कमरे ले लेते हैं।हमने एक साधारण सा कमरा ले लिया, उसमें एक पलंग और मेज और पंखा और लाईट थी।कमरे में जाते ही……. जब लन्ड को चूत में घुसा कर असली चुदाई होती है, चुदाई करते करते जब लंड अपना पानी छोड़ता है और साथ में चूत भी पानी छोड़ती है तब बच्चा होने की संभावना होती है और अक्सर समझदार लोग चोदने के बाद झड़ने के समय लंड चूत से निकल के झाड़ते है, जैसे मैंने मुठ मार के किया. इस चूमा चाटी से वासना की आग भड़क उठी थी और ना जाने कब मेरी जीभ उसके मुंह में चली गई और वो मेरी जीभ को बड़े प्यार से चूसने लगा.

मैं जाते ही प्रिया भाभी के कूल्हों पर हाथ फेरने लगा तो प्रिया भाभी ने उसका जवाब हँसते हुए दिया और सीधा होकर मुझसे बातें करने लगी. जवान कुंवारी बुर मेरी मधु की …मैंने जैसे उसमे ऊँगली डाली …ऊउई अम्मा आह्ह्ह सुनील ! बस ! मत करो ! कुछ होता है …मैंने ऊँगली निकाली.

नहीं आप झूठ बोल रही है ?पर गुरूजी तो ऐसा ही कहते हैं।ये गुरूजी कौन है ?इसीलिए तो मैं कहती हूँ तुम एक नम्बर के लोल हो !जरा खुल कर बताओ !तो फिर प्रेम आश्रम में क्या गांड मरवाने जाते हो ?वो.

जब नीना खुद ब खुद गरम हो गई तो अमित का मूसल के माफ़िक लण्ड को जबरन पकड़ कर उसने अपनी चूत में घुसा लिया और अनाप-शनाप बकने लगी.

‘उफ़्फ़्फ़ जीजू, बहुत मजा आ रहा है, क्या मस्त लण्ड है… और जोर से मेरे जीजू!’‘ये ले… मेरी जान… तेरी चूत तो आज फ़ाड़ कर रख दूंगा. जब भी मन किया मुझे जहाँ मर्ज़ी वहा पटक कर मेरी चूत में अपना लंड डाल देते थे और मेरी जमकर धुनाई करते थे. फिर मैं खड़ा हुआ और अपना साढ़े सात इंच लम्बा लौड़ा उसकी चूत में घुसाया। ३-4 इंच तो आसानी से घुस गया, फिर उसकी चूत थोड़ी टाइट लगी.

रात को दस बजे मैंने टॉप फ्लोर पर सोने का प्लान बनाया और नीना से कहा- तुम दोनों बच्चों के साथ नीचे सो जाओ, मैं ऊपर खुली हवा में सोने जा रहा हूँ. । जब तुमने मुझसे बाम मसलवाई थी तो मैंने तुम्हारी योनि देख ली थी। बस यूँ ही दिल चाहने लगा…. वो बोला- जानेमन, अभी तो पूरा अन्दर भी नहीं गया…और तुम अभी से…?मैंने कहा- नहीं और नहीं… मेरी चूत फट जाएगी…उसने कहा- ठीक है, इतना ही सही…और फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगा…मैं भी उसका साथ देने लगी…फिर वो आधे लण्ड को ही अन्दर-बाहर करने लगा, मेरा दर्द कम होता जा रहा था.

हुम्म… आह!फिर मैंने उन्हें सोफे पर ही लिटा दिया और उनके पूरे शरीर को दबोचने लगा। चाची भी पूरे जोश में थी और मेरे बालों में तो कभी मेरे हाथों को सहलाती। अब चाची चुदने के लिये बिल्कुल तैयार हो चुकी थी, वो ऐसे तड़प रही थी जैसे सालों से भूखी हों।मैं उनकी नाईटी खोलने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी, घण्टी की आवाज़ सुनते ही हम दोनों घबरा गये और रुक गये। तभी हमरी नज़र सामने लगी घड़ी पर पड़ी, शाम के 5.

मेरे हाथ तो उसके ब्लाउज के बटन खोल रहे थे। उसका हाथ मेरे हाथ पर था। लेकिन कोई हरकत नहीं थी. अब वो फ़ायरिंग करने को बेताब था…… मेरा लंड गीला होता जा रहा था और दीदी की चूत की प्यास बढ़ती जा रही थी। अब उसे रोकना नामुमकिन सा लग रहा था………. मेरा दम घुट रहा था लेकिन मैंने उसके ताकतवर लंड का आदर करते हुए उसे मुंह से नहीं निकाला और थोडी ही देर में उसने अपने लंड से दही जैसा गाढ़ा वीर्य निकाला जिसका स्वाद गज़ब का था.

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इससे भाभी भी जोश में आ गई और उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने चूचों पर रख दिया और हम दूसरे को पकड़ कर चूमते रहे.

जानने के लिए पढ़ेंका अगला भाग शीघ्र ही आपकी अपनी अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर !अपनी बात इस कहानी की लेखिका वृंदा को कहने के लिए[emailprotected]पर मेल करें !. विश्रांती- उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?मैं- क्या विश्रांती! तू मुझसे पूछेगी तो कैसे चलेगा….

अंग्रेजी बीएफ वीडियो एचडी वीडियो मैं पूरी गर्म हो चुकी थी, मैंने उसे कहा- भोला, मेरी चूत को फाड दो…उसने मुझे नीचे पटक दिया, मेरी टांगें फैला कर बीच में आकर अपना लन्ड मेरी चूत पर लगाया…. अचानक जब मैं कमरे में आया तो मैंने देखा कि अंकल मम्मी के ब्लाऊज़ के अन्दर कुछ देख रहे हैं और मम्मी अपनी आंखे बंद कर उन्हें कुछ दिखा रही है.

अंग्रेजी बीएफ वीडियो एचडी वीडियो वो बोली- नहीं यार…तो मैंने कहा- शर्माओ मत फिर!हम लोग बात कर रहे थे पर उसकी नज़र मेरे लण्ड पर थी और मेरी नज़र उसकी उभरी हुई चूचियों पर…मन में चल रहा था कि कूद जाओ उस पर… पर मन काबू में किया हुआ था. भला कहीं आधे घंटे में कैसे याद होता?नकली गुस्सा दिखाते हुए विनोद ने उसके गाल पर थप्पड़ बढ़ाया क़ि नीना ने अपना चेहरा पीछे खींच लिया और विनोद का जोरदार हाथ नीना की चूचियों से जा टकराया.

?मोना ने कोई जवाब नहीं दिया।मुस्तफा की हंसी और गहरी हो गई और उसने पूछा- आरती का जो हाल हुआ, उसकी मुझको ख़ुशी है पर तुम्हारा वो हाल नहीं हुआ, इसका बहुत गम है।मोना गुस्से में बोली- कुत्ते हिम्मत है तो सामने आ !!!मुस्तफा- जरुर आऊँगा… इस बार तेरे पुलिस स्टेशन में आकर तुझको मिलकर.

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मैंने कहा- क्यों?उसने कहा- ऊपर से चाहे जो कर लो, पर अंदर नहीं!मैंने पूछा- क्यों? अंदर क्यों नहीं?तो उसने कहा- बस ऐसे ही!मैं ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराता रहा पर मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैंने उसे कहा- मेरा लण्ड तो पकड़ ले!उसने पजामे के ऊपर से ही लण्ड पकड़ कर सहलाया. ! ! मेरी योजना यही थी।जब आखिर में मैं झड़ने को हुआ तो मैंने सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और उसे कुतिया बना कर लण्ड चटवाने लगा।तब मैंने कहा,क्यूँ साली मुझे चूतिया समझती थी … क्या सोचा था प्यार से जाल में फंसा कर पैसे कमाएगी. ‘अब समझे राजू, बस जो कुछ करना है, बाहर ही बाहर से करो, मुझे चोदने की कोशिश नहीं करना!’‘चाची ऐसा क्या है जो मुझे कुछ भी नहीं करने देती हो?’‘मेरा तन-मन सब कुछ राजेश का है, तेरे चाचू का भी नहीं है, बस जवानी कटती नहीं है, सो तुझ पर मन आ गया.

मुझे फिर से दर्द होने लगा था… आधे से ज्यादा लण्ड अंदर जा चुका था… मेरा दर्द बढ़ती जा रहा था। मैंने फिर से उसका लण्ड पकड़ लिया और रुकने को कहा. जैसे ही मनीषा ने मुझे देखा तो उसने अपना एक हाथ अपने वक्ष और दूसरा हाथ अपनी चूत पर रख लिया. भैया के जाते ही मैं रक्षिता से लिपट गया…और उसे बहुत लम्बा किस दिया… और गांड पकड़ कर उसे अपने हाथों से उठा लिया…थोड़ी देर बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया.

‘भाभी, देखो तो आपकी टांगें चुदने के लिये कैसी उठी हुई हैं… अब तो चुदा ही लो भाभी…!’‘देवर जी ना करो! भाभी को चोदेगा… हाय नहीं, मुझे तो बहुत शरम आयेगी…!’‘पर भाभी, आपकी टांगें तो चुदने के लिये उठी जा रही है’ उसने लण्ड को मेरी चूत की तरफ़ झुकाते हुये कहा.

‘अब राजू जरा घोड़ा बन, और मजा आयेगा!’‘सच चाची, क्या करोगी…?’‘बस देखते जाओ’मैं धीरे से घुटनो के बल हो कर घोड़ी जैसा बन गया और अपनी गाण्ड उभार दी. मैं कुछ नहीं बोला और कुछ देर बाद बोला- भाभी, आखिर क्या चाहिए?तो वो बोली- रंजन, मुझे वो ख़ुशी चाहिए जो तुम्हारे भैया से बहुत कम मिलती है. आशा करता हूँ कि मेरी यह कहानी आप लोगों को बहुत पसंद आएगी और यदि कहानी पसंद आई तो मुझे मेल करियेगा, मैं और कहानियाँ आप लोगों की सेवा में पेश करता रहूँगा!मेरा नाम शामी है! मैं रायपुर में रहता हूँ, बी.

एक तरफ कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म चल रही थी और दूसरी तरफ वो मेरा लण्ड हाथ में लिए मुझसे चिपक रही थी. मगर मेरी मर्दानगी के आगे कहाँ टिक पाती, मैंने फिर से उसके पलंग पर पटक दिया और उसके लहंगे को ऊपर कर, उसकी चड्डी उतार फेंकी. वेदांत का चेहरा फिर से उतर गया था…वो फिर उसी उदासी की खाई में जा गिरा था, जहाँ से मैं उसे निकलना चाहती थी.

जितने जोर से मैं चूस रहा था उतने ही जोर से उसके मुंह से आवाज़ें निकल रही थी- ह्मम म्म्म उम्म हा ओर्र्र ओर्र्र्ररर्र ओर् करो हाआआअ!थोड़ी देर के लिए तो मैं डर गया था कि नीचे वाले यह न सोचें कि ऊपर भूत आ गए हैं. मुझे तो डॉगी वाला स्टाइल पसंद है !”हाई मैं मर जावां !” और उसने मेरे गालों को चूम लिया।गुड … मेरा भी पसंदीदा आसन यही है !”क्या तुम पहले से ही … मेरा मतलब.

??मैं : गाली मत दे मेरे सामने…उसने जो किया उसका जवाब भी मैंने उसे दे दिया…वेदांत : क्या जवाब दिया तूने वो मैंने भी देखा. ये सोचते हुए मैंने उसका मोटा लंड अपने मुंह में लेने की कोशिश की लेकिन मोटाई इतनी ज्यादा थी कि मेरे मुंह में लंड घुस नहीं पा रहा था. उधर शायद राजू भी चूत चूस चूस कर थक गया था इसलिए वो भी उठ कर खड़ा हो गया और मेरे मुंह के पास लंड ला कर बोला ‘प्लीज़ जान मेरा भी तो चूसो.

पहले तो मैं नीचे दबी हुई इसका आनन्द उठाने लगी फिर खूब दब चुकी तो देखा कि उसका वीर्य निकल चुका था.

वो भी धीरे धीरे गर्म हो गई, मैंने मौके का फ़ायदा उठाया और उसके चूचे अंदर हाथ डालकर पकड़ लिए और प्यार से हाथ फिराने लगा. ?देता क्यों नहीं…!!! किस्मत वालों को मुझसे काम करवाने का मौका मिलता है और तू अपने ही ख्यालों में खोया है…!!!वेदांत : तू कभी अपने मम्मी-दादी से दूर हुई है…. चोद… आ जा चोद दे… आ आहमेरे मुंह से ख़ुद ब ख़ुद ये सब आवाजें निकलने लगी।फ़िर मैंने एक हाथ से राहुल का लंड पकड़ा और हिलाने लगी…वो मेरे स्तन दबा रहा था… अ आ आह… मेरा बॉस मुझे चोदे जा रहा था… उसकी स्पीड बढ़ गई।मेरी बुर से पूरा रस निकल चुका था….

?”झंडे ने खुशामद भरे अंदाज में कहा,”चाची प्लीज, मना मत करना, तुम्हें मेरी कसम…”अच्छा जा, वह भी चलेगा। चल जगा दे उसे भी…. तब रीटा ने चीते की तेजी से झटके से बहादुर को अपने आगोश में खींच लिया और बहादुर की पैंट खोल कर उसके तड़पते लण्ड को आजाद कर दिया.

अब जीजू ने मुझे उल्टा किया और वो मेरी गांड को थपथपाने लगे, फिर उन्होंने अपनी एक अंगुली मेरी गांड के छेद में घुसा दी. मैंने देखा कि अंकल मम्मी को चूम रहे हैं और मम्मी उनको अपनी बाहों में लेकर किस करवा रही हैं. और साथ साथ मैं उसे चूस रहा था… वो भी मेरा लंड जान लगाकर रगड़ रही थी…थोड़ी देर बाद मैंने उसे ज़मीन पर लिटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा.

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तब से उसके एक स्कूल के टीचर के साथ उसकी अफ़वाहें उड़ने लगी थी… मैंने भी उन्हें होटल में, सिनेमा में, गार्डन में कितनी ही बार देखा था.

फिर मैं कमरे से बाहर गया और अपने दोनों हाथों में कुछ लेकर वापस आ गया और फिर मैंने अपने दोनों हाथ नीचे से उसकी बनियान में डाल दिए और जो मेरे हाथों में था वो मैंने उसकी दोनों चूचियों के ऊपर रख कर उनको पकड़ लिया ताकि वो उस चीज को गिरा ना दे. नये सेशन में जुलाई से उसने एडमिशन ले लिया… फिर चला एक खालीपन का दौर… सुमन कॉलेज जाती और आकर बस बच्चे में खो जाती. फिर आयशा और ज्योति दोनों ही कमरे से चले गए और करीब 8 बजे आयशा स्कूल के लिए निकल गई और ज्योति अपने कमरे में थी.

?तो मैं आपको बता दूँ कि बिना मर्ज़ी के सेक्स में मज़ा नहीं आता और यह जो चड्डियों वाला नया काम हमने किया, उसमें अपना अलग ही मज़ा है. मैने तुम्हारी चूत पर हेयर ओयल लगाया और तुमसे कहा कि तुम भी मेरे लन्ड पर तेल लगाओ। तुमने जैसे ही मेरा अंडरवीयर नीचे किया, मेरा लन्ड देख कर तुमने कहा-आओओ! ओह इतना बड़ा! मैने कहा- बड़ा है, लम्बा और मोटा है, तभी तो मज़ा आयेगा।तुम मेरे लन्ड पर तेल लगा कर अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी. जंगली जानवरों की सेक्सी फिल्मेंमैंने सोच लिया कि आज रात को मैं उन्हें जरूर चोदूँगा इसलिए मैं मम्मी और पापा के सोने का इंतज़ार करने लगा.

जब हम बहुत उत्तेजित हो जाते थे तो मेरा लण्ड कोमलता से सहला कर मेरा वीर्यपात करवा देती थी. मैं उसको देखता ही रहा, उसने टोका- अन्दर नहीं आने दोगे क्या?मैं शरमा कर पीछे हो गया और वो अन्दर आ गई.

उफ़्फ़ ! लाल रंग की ब्रा में उसके सफेद दूध जैसे स्तन ! एक अदभुत सुन्दरता थी उसके स्तनों में ! वैसे भी मेरा मानना है कि स्तन किसी भी लड़की के शरीर का सबसे खूबसूरत अंग होते हैं. हल्का सा शावर लेने के बाद मैंने उसे बाहर भेज दिया। वो मुझे साथ ही ले जाना चाहता था पर मैंने कहा- तुम चल कर दूध पीओ मैं आती हूँ।मिट्ठू जब बाथरूम से बाहर चला गया तो मैंने दरवाजे की चिटकनी लगा ली। आप सोच रही होंगी अब भला दरवाजा बंद करने की क्या जरुरत रह गई है अब तो मिट्ठू को कहना चाहिए था कि वो गोद में उठा कर बेडरूम में ले जाए। ओह …. मैं नीचे गिर गई मगर राणा अंकल ने मेरी गाण्ड को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उनके वीर्य का एक एक कतरा मेरी गाण्ड में ना उतर गया.

फिर एक दिन स्कूल बस खराब होने की वजहा से रीटा के डैडी ने अपने नये चपड़ासी को साईकल से रीटा को स्कूल छोड़ने और लाने की ड्यूटी लगा दी. आखिर आईसक्रीम ख़त्म हो गई और हम ठीक से बैठ गये।मैंने उसको कहा- विकास, मैं तुम को कैसी लगती हूँ?उसने कहा- बहुत अच्छी !तो मैंने पूछा- कितनी अच्छी?उसने फिर कहा- बहुत अच्छी ! भाभी…फिर मैंने कहा- मेरी एक बात मानोगे. मम्मी सर से पाँव तक पूरी तरह से गोरी नारी थी, उनकी चूचियों के निप्पल गोरे शरीर पर बहुत अच्छे लग रहे थे.

वो वैसा ही गुमसुम बैठा घास की ओर देखे जा रहा था…मैंने उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने की एक और कोशिश की…मैं : देखो वेदांत ! हाथ छोड़ के …!!!!बस मैंने इतना बोला ही था और एक झटके के साथ में झूले की उच्चतम छोर से नीचे गिर पड़ी…!!वो दौड़ा दौड़ा मेरे पास आया.

थोड़ी देर रुक कर मैंने दुबारा एक जोर का धक्का दिया और मेरा पूरा लौड़ा उसकी चूत में उतर गया. हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए गहरी साँस लेते हुए लेटे हुए थे। उसका नरम और गदराया बदन मेरी बांहों में था। मैं उसे हल्के-हल्के चूम भी रहा था। उसके सख्त उरोज मेरे सीने में दबे हुए थे।मेरी बीवी को इस तरह सीने से लगाने पर उसकी चूचियाँ मेरे सीने में दब कर चपटी हो जाती है.

अब दीदी घोड़ी बन गई और कहा- चल धीरे से लगा !तभी मैंने कोशिश की लेकिन लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था…. वो चारों मेरे करीब आ गए और दो लोगों ने मेरे एक एक बोबे को हाथ से दबाना शुरू कर दिया और एक जना नीचे बैठ कर मेरी चूत में जीभ डालने लगा. तभी भाभी बोली- बहनचोद, अपनी बहन की चूत का भोंसड़ा बना दिया! अब मेरी का भी बनाएगा क्या?फिर भी मैंने कोई रहम नहीं किया और अपने झटके तेज कर दिए.

चलो छोड़ो… कोई बात नहीं !”प्रेम मैं भी कई दिनों से तुम्हें एक अनुपम और बहुत खूबसूरत भेंट देना तो चाहती थी !”क…। क्या ?” उसने मुझे अपनी बाहों में कसते हुए पूछा।ऐसे नहीं ! तुम्हें अपनी आँखें बंद करनी होगी !”प्लीज़ बताओ ना ? क्या देना चाहती हो?”ना… बाबा… पहले तुम अपनी आँखें बंद करो ! यह भेंट खुली आँखों से नहीं देखी जा सकती !”अच्छा लो भाई मैं आँखें बंद कर लेता हूँ !”ना ऐसे नहीं…. उसने शायद पूरा खड़ा और चोदने को तैयार लंड पहली बार देखा तो उसका मुँह खुला और आँख फटी रह गई…मैं मौका देख कर खिड़की के पास जा कर मुठ मारने लगा और लौड़े को उसको हर तरफ से दिखाने लगा और जल्दी ही मैं झड़ गया और मेरा वीर्य सीधे पिचकारी मारता हुआ उसके घुटने में जा लगा…वो मेरे चेहरे और लंड को मिले सुकून से मुस्कुरा दी तो मैंने उसको बोला- अंदर आ जाओ. मैं उसकी खुशबू में खो गया।तो वो बोली- लगता है आज पढ़ाने का बिल्कुल भी मूड नहीं है.

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उसके स्तन देख कर सुनील के तो चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई … अब वो सोनिया के स्तनों ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था और सोनिया के मुँह से मादक कराह निकल रही थी … सोनिया अपना सर पलंग के दोनों तरफ मार रही थी. उसने मेरी बुर पर थूका, पैर फैलाए और लंड घुसाने लगा !लड़की होने के नाते मैं आपको बताना चाहती हूँ कि जब तक बुर पूरी तरह गीली नहीं हो जाती, लंड जाने में दर्द होगा।मैं : आह नहीं ! बहुत दर्द हो रहा है !रोहित : बस बेबी ! शुरू शुरू में होगा ! बाद में मज़ा आयेगा !मैं : आह अह नहीं. ? यहाँ…? ये…?निशा : हाँ, दिखाओ न सर…सर : ओके … पीयू जरा जांघें फैलाओ…सर उंगली डाल के उसे गरम कर रहे थे… चुदने का मन तो निशा को भी था… सो वो सर का लण्ड मसल रही थी… उसने भी नीचे सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी !सर : लम्बी लम्बी सांसें लो … और घुसने दो मेरे पेनिस को ….

मैं अपनी यौवनकलिका को हिला हिला कर अपनी उत्तेजना बढ़ाती चली गई और फिर स्खलित हो गई. श्यामलाल के ऑफिस पहुँचने के कुछ ही देर बाद श्यामलाल ने मुझे बुलाया और बोला- अभी तो मेरे पास कोई काम खाली नहीं है, मगर तुम्हारी बहन की सिफारिश के कारण मैं तुम्हें खाली हाथ भी नहीं भेज सकता. सेक्सी वीडियो देहाती मेंमैंने उसको दोपहर के खाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ भी बना लो पर दो बजे से पहले उसको डिस्टर्ब ना करूं.

अब मेरा भांडा फ़ूटने वाला है, मैं बहुत घबरा गया क्योंकि मैंने अंडरवीअर नहीं पहना था, सिर्फ बरमुडा पहना था।तभी पिंकी ने मेरा बरमुडा खींचना शुरु किया। मैं हलचल करने लगा पर आखिर में पिंकी ने मेरा बरमुडा खींच ही लिया। बरमुडा नीचे आते ही मेरा सात इंच का लंड तीनों को सलामी देने खड़ा हुआ था। तीनों दंग रह गई। रेशमा चिल्लाई- बाप रे ! कितना बड़ा है सुहास तेरा लंड….

उसकी झिल्ली थी शायद …आह ! आह ! नहीं मेमसाब !सुनील से बोलो कि अब निकाल ले !और नहीं सह सकती मैं…बहुत दर्द हो रहा है …मम्मी ने पूछा …क्यूँ पहली बार कर रही हो क्या?हाँ मेमसाब …ठीक है बेटे … एक हे झटके में डाल दे …और तू चुपचाप मेरा हाथ पकड़े रह …मैंने उसकी बुर को फाड़ दियाऔर दना-दन दना-दन घस्से मारने लगा …. उसने मुझसे कहा- चिंता मत कीजिये मैडम, मैं इसी कोच में हूँ, कोई भी परेशानी हो तो मुझे बता दीजियेगा, मैं हाज़िर हो जाऊँगा! आपके साथ वाली बर्थ खाली है अगर कोई पेसेंजर आया भी तो कोई महिला ही आएगी इसलिए आप निश्चिंत हो कर सो सकती हैं.

मैंने कहा- कोई परेशानी?वो बोली- नहीं!फिर मैंने उसे कंडोम दिया, वो फिर शरमा रही थी. उन्होंने मुझसे पूछा- घर चलना है?मेरे हाँ कहते ही उन्होंने कार का दरवाजा खोला, मैं उनके बगल की सीट पर बैठी और थोड़ी ही देर में घर पहुँच गई. फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं चूसने के साथ साथ उसके मोम्मों को कस कस कर दबाने लगा.

दीपू मेरी एक एक चूची को बारी बारी से दबा और मसल रहा था साथ में मेरे मुंह में अपनी स्वादिष्ट जीभ भी डाल चुका था.

और जोर से … आआअह्ह्ह्ह …मैंने अपने नाख़ून सोफे में घुसा दिए थे … मेरी चूत में पानी भर गया था और छप-छप की आवाज़ आ रही थी। मकान-मालिक ने एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दिया। मैं भी कराह उठी …. ऐसा करने पर निधि पहले तो कसमसाई , फ़िर बोली सर आप ये क्या कर रहे हैं, प्लीज़ मुझे जाने दीजिए. अब बस जालंधर पहुँच चुकी थी और सब बस से उतर रहे थे, मुझे भी उतरना था और उस लड़के को भी।बस से उतरते ही लड़का पता नहीं कहाँ चला गया, मेरा चुदने का मन कर रहा था, मगर वो लड़का तो अब कॉलेज चला गया होगा, यह सोच कर मैं उदास हो गई।अब मुझे अस्पताल जाना था, मैं बस स्टैंड से बाहर आ गई और ऑटो में बैठने ही वाली थी कि वही लड़का बाईक लेकर मेरे पास आकर खड़ा हो गया.

ब्रेस्ट टाइट करने की मेडिसिनचोद जोर जोर से चोद… फाड़ दे इस को… लण्ड देख कर बहक गई… इसकी सजा तो मिलनी ही चाहिए इसको… फाड़ दे जोर जोर से चोद कर फाड़ दे…. मतलब वो भी चुदाई का मज़ा लेने लगी थीं।तो मैंने भी एक बार में पूरा लंड बाहर खींच कर वापस एक ही झटके मे पूरा ठोक दिया।30 मिनट की ज़ोरदार चुदाई में भाभी 4 बार झड़ीं।अब जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने भाभी से कहा- भाभी मैं झड़ने वाला हूँ.

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लेकिन शायद आयशा कि चीख की वजह से ज्योति को यह याद नहीं रहा कि उसने ब्रा-पेंटी के अलावा और कुछ नहीं पहना है. !उसने सिसकारती आवाज़ में कहा- आपको रोका किसने है सर … मैं तो कितने दिनों से यही चाह रही थी …उसका इतना कहना था कि मैंने अपने होंठ उसके नर्म मुलायम होंठों पर रख दिये और दोनों हाथों से उसके स्तनों को मसलने लगा. मुझे अपने कानो पर विश्वास नहीं हो रहा था पर वो सच में मेरे सामने थी और मुझसे मिलने की बात कर रही थी.

मैं समझ गई …घर में कोई नहीं था, मैंने अपने मम्में बाहर निकाल लिए टी शर्ट से ! क्यूंकि मैं हर वक़्त ब्रा नहीं पहनती. ऊपर से रीटा बहादुर को उकसाने के लिये अपनी स्कूल स्कर्ट ऊपर उठा कर अपने चूतड़ जानबूझ कर दायें बायें उछालती बहादुर के आगे आगे चलने लगी. पीछे से उसका पार्टनर फर्श पर खडा होकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर एक ही झटके में लंड उसकी चूत में ठोक देता है बिना रहम किये.

मुझे लगा कि मामी अब बाहर निकलेगी तो मैंने मामी को पेट के नीचे हाथ डाल कर पकड़ लिया और ऊपर से ऐसा जोर लगाया कि लंड अन्दर धंसने लगा. कह अपनी एक उंगली मेरे गांड के छेद में घुसाने लगी।मुझे अनायास ही असीम आनंद की अनुभूति होने लगी। एक हाथ से आंटी गांड में उंगली कर रही थी और दूसरे हाथ से वो लौड़े को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी ……. बातचीत करते करते देवर ने अभी मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरना शुरू किया ही था कि दरवाजे की घन्टी बज गई.

एक दूसरे से बंधे…एक दूसरे में खो जाने के लिए… उस एक गर्म चुम्बन से बहार की ठंडक भी गर्मी में बदल गई थी…फिर धीमे से हम दोनों जब अलग हुए. मैंने बोला- ठीक है, जब तक तुम नहीं चाहोगी मैं सेक्स नहीं करूँगा … लेकिन मैं तुमसे प्यार करता हू और तुम्हारे पूरे बदन को मैं चूमना चाहता हूँ…यह सुनने के बाद उसने मुझे नहीं रोका।फिर मैंने उसका कुरता उतारा, काले रंग की ब्रा में क्या चूचियाँ थी बिल्कुल मक्खन जैसी….

उसके उम्र करीब छब्बीस साल की थी, रंग गोरा और करीब पौने छह फीट लंबा हेंडसम नवयुवक लग रहा था.

भाभी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया मगर उन्होंने इस बात पर कोई नाराज़गी भी नहीं दिखाई. सेक्सी वीडियो फुल एचडी चाहिएशशांक : मैं वहीं हूँ तुम्हारे पास……अब मैंने तुम्हारे पीछे जा कर हग कर लिया है…और अब मैं तुम्हारे कान की लटकन को चूस रहा हूँ…. मुंह खोलने की टेबलेटसभी मस्त हैं ऊपर! किसी को ध्यान नहीं है!प्लीज़ छोड़ो!उसने मुझे उठाया और स्टोर रूम में ले गया, कुण्डी लगा दी और पास में पड़ी रजाई पर डाल मुझ पर सवार हो गया. करीब दो मिनट बैठने के बाद मेरी अन्तर्वासना ने मुझे एक नया निर्णय लेने के लिए विवश कर दिया.

मैंने कहा- क्या?आंटी बोली- तुम्हारे अंकल तो महीने-महीने में आते हैं, क्या तुम मेरे साथ ऐसा हर रोज करोगे?तो मैंने कहा- क्यों नहीं मेरी जान! अब तुम मेरी हो.

हाँ हाय हाँ हाँ हाँ…” वो बड़ी ही रोमांचित थी और मैं भी !मैं फिर से निकलने वाला था, मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह की तरफ रख कर हिलाने लगा … एक-दो बार हिलाने के बाद मेरा पूरा चीक निकल गया,”ओह , आ आ…. भैया के जाते ही मैं रक्षिता से लिपट गया…और उसे बहुत लम्बा किस दिया… और गांड पकड़ कर उसे अपने हाथों से उठा लिया…थोड़ी देर बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया. जोकि उनके गोरे बदन के ऊपर और भी खूबसूरत लग रही थी।मैंने उनकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया और उनकी कड़क चूचियों को दबाने लगा.

हम तीनों अब बिस्तर पर आराम से अधलेटे पड़े थे, गौरी कह रही थी- अंकल, प्लीज, जब आप फ़्री हों तो आ जाया कीजिये… हम दोनों आपका इन्तज़ार करेंगी. !हम दोनों अपनी मस्ती में जोरदार चुदाई का आनन्द ले रहे थे लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मन्जूर था…अभी चुदाई चल ही रही थी कि मुझे किसी के होने का अहसास हुआ… !अभी आगे और भी है उसे भी किसी दिन ज़रूर सुनाऊँगा।दोस्तो कैसी लगी मेरी आपबीती? जरूर बताइएगा !. इस तेज प्रहार से मुझे दर्द तो बहुत हुआ…मगर थोड़ी देर के बाद मुझे उससे कहीं ज्यादा मजा आ रहा था.

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मेरी सिमरन… ओह… स्वर्ण नैना… आज मैं कितना खुशनसीब हूँ तुम्हें इस प्रकार पाकर मैं पूर्ण पुरुष बन गया हूँ। आज तो तुमने पूर्ण समर्पिता बन कर मुझे उपकृत ही कर दिया है। मैं तो अब पूरी जिंदगी और अगले सातों जन्मों तक तुम्हारे इस समर्पण के लिए आभारी रहूँगा !” कह कर उसने मुझे एक बार फिर से चूम लिया।मेरे प्रेम… मेरे… मीत… मेरे साजन…. जैसे ही वो कमरे में आई मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और बोला- कब से तुम्हरे लिए तड़प रहा था !उसने भी मुझे अपनी बाहों में ले लिया और चूमने लगी…. माँ ने मुझे कस कर पकड़ रखा था, फिर मैंने धीरे धीरे चोदना शुरु किया, दोनों टाँगों को पकड़ा और अपनी स्पीड तेज़ की.

घर पर सब होते थे और सबको पता था कि वो पढ़ने आती है तो एक कमरा हम दोनों के लिए खाली रखा जाता था। फिर ऐसे ही चलता रहा, वो पढ़ने आती रही.

सुनील अपने अपार्टमेंट में गाड़ी पार्क करता है और गाड़ी से सुनील और सोनिया दोनों बाहर निकलते हैं … गाड़ी लॉक करके सीधा सातवीं मंज़िल के लिए लिफ़्ट में जाते हैं … और वहाँ सुनील अपने घर को खोलता है और सोनिया के साथ अंदर दाखिल होता है।सोनिया के चेहरे पर हालांकि अभी भी चिंता साफ नज़र आ रही होती है.

नेहा ने भी वैसी ही फुर्ती दिखाई और अनीता दीदी के पेंटी को हाथों से निकालने के लिए खींच दिया. साथ देखने की हिम्मत अभी तक नहीं थी…उसी दौरान उसकी दादी का देहांत हो गया वो तीन दिन तक स्कूल नहीं आया…सभी मुझसे पूछते थे. इंग्लिश फिल्म हिंदी सेक्सीबहादुर का लण्ड भी शहर की लौंडिया की चूत पाते बुरी तरह से मस्ता के अकड़ गया था और रीटा गांव के तन्दरूस्त ताकतवर और फौलादी लौड़े को पाकर निहाल हो उठी और उसकी चूत झनझना उठी.

फिर आगे जाकर उसने एक बड़े से शानदार घर के आगे बाईक रोकी, गेट खुला था तो वो बाईक और मुझे भी अन्दर ले गया।उसका दोस्त सामने ही खड़ा था. चुदती चूत ने ठेर सारा पानी उगल दिया, तो लण्ड बिना तकलीफ अंदर बाहर घचर पचर की मीठी मीठी आवाज के साथ चूत में अन्दर बाहर फिसलने लगा. ‘सोनू, शरम मत करो अब… तुम बेवफ़ा नहीं हो… अपनी प्यास बुझाने से बेवफ़ा नहीं हो जाते!’‘ना रे… मत करो ना…!’पर मैंने उसका पेटीकोट नीचे सरका ही दिया और लण्ड से चूत टकरा ही गई.

अब दीदी सुबह ही अपनी जॉब पर निकल जाती और शाम को लेट आती इसलिए मेरे लिए उनके पास कोई वक़्त नहीं बचता था और रविवार को सभी घर पर होते थे. आह अआह आहाह आः आह आह की ध्वनि फ़ूटने लगी।मैंने उसके टॉप को निकाल दिया और उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से चूसने लगा। उसकी सेक्सी आवाजें ओह आह आह आहा आह आह ….

मौसी किसी को बुलाओ न ! किसी को भी अभी बुला दो चुदवा दो मुझे …मौसी : इबजा कोई नी आवैगा ए ऐसे छोरी … इब तनै बेरा लागया ना के यो छेद नी, शैतान की नलकी है … घणे गंदे काम करवावै सै यो … इन्ना गोल गोल बोब्बों नै चूस चूस कर इतने बड़े बना दयूंगी तेरे ब्याह सा पैल्लाँ ई … लौंडों को बड़े पसंद आवे हैं !मैं : मौसी कुछ कर ना !मौसी :.

उसका दोस्त मेरे अधरों के रस को बराबर पी रहा था और बॉबी मेरी गाण्ड को चोदता हुआ मेरी चूचियों का भरता बनाये जा रहा था. शिखा अब मेरे साथ चुदाई का मजा लेने लगी और उछल-उछल कर मेरे धक्कों का जवाब देने लगी. इतना मोटा मेरे छोटे से छेद में… ओह नो… मुझे डर लगता है।” वो कुछ सोच नहीं पा रही थी।.

सेक्स सेक्स मूवी इतने में मैंने फिर से पाना लण्ड जाकर ज्योति में मुँह में रख दिया और वो उसको बड़े मजे से चूसने लगी. बोली- चाटो आआआअ ह्ह्ह्ह ह्हह्ह्ह और ज़ोर से आआ अह्ह्ह्ह ह्ह्ह चाटो…मैं चाटता रहा, फिर वो झड गई…मेरी हालत ख़राब हो रही थी, अभी मेरा नहीं निकला था.

तो आंटी बोली- रुको सागर! चाय तो पी लो!मैंने कहा- ठीक है!फिर आंटी चाय बनाने के लिए रसोई में चली गई और मैं टीवी देखने लगा. पहले तो मैं नीचे दबी हुई इसका आनन्द उठाने लगी फिर खूब दब चुकी तो देखा कि उसका वीर्य निकल चुका था. चुदी हुई रीटा अपने चकराते हुऐ सिर को पकड़ जमीन पर बैठ अपनी बेतरतीब सांसों को सम्भालने लगी.

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उस दिन पढ़ते हुए उसने कुछ गलती की तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- आज तुमको इस गलती की बड़ी सजा मिलेगी. अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि इसे उतारूँ कैसे!मेरे दिमाग में एक विचार आया, मैंने कैंची ली और उसकी ब्रा को काट दिया. और जैसे ही आगे बढ़ाने वाला था कि एक साया लपक के मेरे पास आया और पीछे वाली सीट पर बैठ गया… इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता… उसने अपने हाथ मेरे कमर पे कस दिये और धीरे से कहा जल्दी चलिये.

फिर हम लोग एक गोला बना कर खड़े हो गए। इस बार मैं अपनी दादी का और दादी मेरी मम्मी की गांड मार रही थी। मेरी मम्मी अपनी साली की और उनकी साली यानी मेरी मामी मेरी चाची की गांड मारने के लिए तैयार थी।क्या नजारा था. उन्हें भी तुम्हारी गांड के किस्से पसंद आये तो मैंने उन्हें आज बुलाया था। घर में सब जा रहे थे तब ही मैंने उन्हें फ़ोन कर के बुला रखा था। मुझे पता था कि तुम शुरू करोगे, वरना मैं ही थोड़ी देर में शुरू कर देता।”मुझे लगा कि मैं बड़ा बेवक़ूफ़ था, यहाँ पर सारे मेरे जैसे ही हैं और मैं बाहर जाने की सोच रहा था।फिर हम सब एक बिस्तर पर लेट गए। मैं दादी का.

यह सभी कुछ हम बारिश में गीली छत पर ही कर रहे थे और मुझे लगा काम को आखिरी अंजाम देने के लिए हमे बेड पर जाना ही पड़ेगा.

‘बस चुप… तू तो बस मेरी है जान… ये लण्ड भी तेरा है…’‘जीजू, मेरे साथ शादी कर लो ना… छोड़ो ना दीदी को…’ मेरा मन जैसे तड़प उठा. फिर वो बोली- अगर हम दोनों ही इतने सेक्सी हैं तो क्या हम वो काम नहीं कर सकते जो ये लोग कर रहे हैं?और यह कह कर उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. भाभी बोली- मजा आ गया पहली बार गांड मरवाने में! बहन का लौड़ा, मेरा पति तो मेरी गांड चोदता ही नहीं है.

उस नीले रंग की नाइटी के साथ-साथ तान्या ने अपने होंठों पर भी नीले रंग की लिपस्टिक लगा रखी थी, तान्या के इस रूप को देखकर मैं इतना मस्त हो गया कि मैं सब कुछ भूल गया, मैं उसकी तरफ इतना आकर्षित हो चुका था कि मैंने उठकर जबरदस्ती उसे बाहों में भर लिया और अपने होंठो से उसके होंठ बंद कर दिए. मैंने पास में मार्केट से एक बिकनी खरीदी और कमरे पर गया।सिमरन ने पूछा- कहाँ गए थे?मैंने कहा- तुम्हारे लिए यह लेने!वो पहले तो बॉक्स देखकर खुश हुई पर जब खोल कर देखा तो शरमा गई… कहने लगी- यह क्यों?मैंने कहा- कल यही पहन कर घूमने चलना दूसरी लड़कियों की तरह!उसने कहा- यह नहीं हो सकता!कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]कहानी का अगला भाग : सिमरन मैडम गोवा में-2. मैं न चाहते हुए भी उससे दूर होने लगी थी… मेरा यह आकर्षण हमारी दोस्ती को दीमक की तरह चाट रहा था…एक दिन …मेरा जन्मदिन था.

अफसर हैं, सरकारी नौकरी होने के कारण उनका 2-2 साल में तबादला हो जाता है, तो हमें भी बार-बार घर बदलना पड़ता है। मैं 18 साल का था जब हम नॉएडा आये। यहाँ हमें बहुत अच्छे पड़ोसी मिले।हमारे पड़ोस में एक परिवार रहता था। जिसमे एक आंटी, उनके पति तथा उनका बेटा जो दसवीं कक्षा में पढ़ रहा था, रहते थे। अंकल आई.

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मैं अपने मम्मी-पापा और अपनी बड़ी बहन के साथ कोलकाता में एक किराये के मकान में रहता था. मुझे दर्द हुआ मगर मैंने फिर भी उसका पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसा लिया।मैं ऊपर-नीचे होकर उसके लौड़े से चुदाई करवा रही थी, सुनील मेरे मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था।अनिल भी नीचे से जोर जोर से मेरी चूत में अपना लौड़ा घुसेड़ रहा था। इसी दौरान मैं फ़िर झड़ गई और अनिल के ऊपर से उठ गई मगर अनिल अभी नहीं झड़ा था तो उसने मुझे घोड़ी बना लिया और अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में ठूंस दिया. मुझे कुछ अजीब सा लगा, क्यूंकि आमतौर पर ऐसे काम करते वक़्त लोग सारे काम धीरे धीरे और शांति से करते हैं.

?”झंडे ने एक पल को सोचा और फिर बोला,”हाँ, तो इसमें हर्ज़ ही क्या है?…वह भी सुहागरात वाली रात को इसी तरह से मिल-बाँट कर खाई जायेगी.

जब भी मौका मिलता, मैं उन के गुप्त अंगों को देखने की कोशिश करता और मस्ती मस्ती में उन्हें छू भी लेता था. आधे घण्टे तक चली होगी यह चुदाई और अकेले अमित ही मेरी नीना की चूत गर्मी शान्त करता रहा. आज निचोड़ डाल मुझे नीबू की तरह। फाड़ दे मेरी चूत…मेरी बुर में वर्षों से आग लगी है मेरे लाल, मिटा दे इसकी भूख.