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पहली बार मैंने अपनी आंखों के सामने इस तरह किसी लड़के के लंड को यूं तना हुआ देखा था. भोजपुरी बीएफ फोटोघर जाकर मैंने सोनू के साथ हुई थियेटर वाली घटना को याद करके लगातार दो बार मुट्ठ मारी तब जाकर मुझे कहीं थोड़ी बहुत शांति मिली.

मेरे परिवार में मेरे माता-पिता व मेरी बड़ी बहन है और मेरे चाचा के परिवार में चाची और उनकी 2 साल की बेटी है. नंगी वाली बीएफ पिक्चरवो ऐसे चल रही थी, मानो कोई हीरोइन सच में रैम्प पर कैट वाक कर रही हो.

अपनी पेंट की हुक खोलकर मेरा हाथ अपनी पैंटी उठाके अन्दर फुद्दी पे रख दिया.बीएफ हिंदी देवर भाभी की: उसके बाद तो उन पूरे पंद्रह दिनों तक लगातार भाभी और मैं रात को सेक्स करते रहे.

कहानी पर कमेंट करके बतायें कि कहानी लिखने में कोई ग़लती न हो गई हो.हम घर क्यों आये हैं … कुछ रह गया क्या?” वसुंधरा ने कार से उतरते हुए उलझन भरे स्वर में पूछा.

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फिर दूसरे दिन भी वही … और जब हम शॉप में मिले तो मुझे यकीन हो गया कि तुम मुझे वासना वाली नज़रों से नहीं देखते.काफी लोगों ने कई बार मुझे ऐसा बोला भी है कि आपकी बीवी श्रद्धा कपूर जैसी दिखती है.

ज्योति भी ऐसी ही औरतों में से थी क्योंकि वो एक चुदासी रांड थी और उसका हस्बैंड कमजोर दुबला-पतला था जिसके कारण वो उसे ढंग से चोद नहीं पाता था. बीएफ हिंदी देवर भाभी की मैंने उसकी एक टाँग उठा कर अपने कंधे पर रखी और एक नीचे … और लंड को उसकी चूत के छेद पर टिकाया.

मैंने उसके कपड़े निकालने शुरू किये तो उसने मना कर दिया, कहा- दीदी यहीं है, अभी नहीं, मैं रात को आऊँगी.

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मुझे देख कर लगा कि भाभी शायद मुझे दिखाने के लिए जानबूझ कर पहन के आई थी. मुझे पहली बार लंड से निकले पानी का टेस्ट मिला था जो मुझे बहुत अच्छा लगा. मेरी गांड में अपनी जीभ को नुकीली करके अन्दर तक डाल कर वंश बोल रहा था- साली रंडी तेरी गांड … चूत … मुँह पूरा जिस्म मेरा है … साली कुतिया.

फिर मैंने उसके पैर को कंधे से नीचे सरकाया और एक हाथ से जांघ को पकड़ कर उसके होंठों को किस करते हुए धक्के मारने लगा. जीतू कभी कभी मेरे घर आता था तो मम्मी जीतू को गरमागरम खाना खिलाती थी और वो अक्सर हमारे घर आता था. यह शर्मनाक वाकया होने के बाद भी मैंने कुछ भी नहीं किया क्योंकि मेरे खानदान की इज्जत का सवाल था.

जीतू भी नंगा हो गया और मेरी पेंटी निकाल कर मुझे सोफे पर लिटा दिया, मेरी चूत को चाटने लगा. उसका लंड बार-बार झटके देकर मेरी जांघ को छू रहा था जैसे वो मेरी जांघ में छेद ही कर देगा. उन्होंने अपने लंड पर थूक लगाया और चुत के मुँह में लंड रख कर उसको अन्दर की ओर धकेल दिया.

हम दोनों लोग एक दूसरे को किस करते करते बहुत गर्म हो जाते थे और उनका लंड टाइट हो जाता था, जिसको मैं महसूस करती थी. अब मैंने उसके ब्लाउज का एक बटन खोल दिया और ब्रा ऊपर कर के एक चूचा बाहर निकाल दिया और उससे खेलने लगा.

मेरे छूटने की कोशिश में गलती से मेरा हाथ उनके लुंगी पर आ गया और मैं शॉक हो गयी.

वह अपनी बांहों में लपेट कर मुझे जकड़े हुए मेरे चूचों के निप्पलों को मसलने लगा.

10 मिनट के बाद वो मेरे कंधों की तरफ वापस आ गया और मुझे फिर से मजा सा आने लगा. हालांकि पहले ऐसा नहीं था मगर जब से मैंने मानसी की गांड मारी थी, मैं गांड मारे बिना रह नहीं पाता था. मैंने भी सोचा कि पति के कारण में अपने भाई की शादी का प्रोग्राम क्यों कैंसिल करूं.

मेरी हालत समझ अंकल जी ने मुझे अच्छे से लिटा कर एक पिलो मेरी कमर के नीचे लगा दिया और मेरी नंगी गोरी जांघों को फैला कर उनके बीच में आके बैठ गए और अपना लण्ड मेरी चूत की दरार में ऊपर से नीचे तक; नीचे से ऊपर तक रगड़ने लगे. दूसरे दिन चुदाई के बीच में ही भाभी भी कॉफी लेकर आ गई थीं और उसको बताने लगी थीं कि मैंने ही तुम्हारे इस जीजू को सब सिखाया है. बोली- जानू जोर से … मैं झड़ने वाली हूँ!इतना कहकर वह मुझे पागलों की तरह चूमने लगी.

मैंने उसको एक झापड़ मारा और बोली- साले मादरचोद … रखैल नहीं, बीवी बनाना है.

उसने अपने हाथों से मेरे लण्ड को कॉन्डम पहनाया।वह बोली- यह कंडोम मत लगाओ। सिम्पल कंडोम लगा लो। इससे तो बहुत दर्द होगा।मैं बोला- नहीं होगा. रश्मि ने मेरी छाती के बालों से खेलते हुए मुझसे मधु के बारे में कुछ कहने को कहा. मैं राधिका को बीच बीच में किस कर रहा था और मौका मिलने पर उसके मम्मे भी दबा देता था.

वह बोली- यह क्या किया? तुमने तो मेरी ब्रा फाड़ दी।मैं बोला- कोई बात नहीं आंटी मैं नई लाकर दे दूंगा।फिर मैंने उसकी पैंटी खोल दी. चाची- धीरे धीरे … आआह … ऊऊह … ये सब गलत है जीशान … अपनी चाची के साथ ऐसे नहीं करते. लेकिन उसने मुझको अपने पास भी आने नहीं दिया, वो हर बार बोलती रही कि रात तक सब्र करो.

वह औरत मेरी तरफ देखकर बोलती है- हाय … कैसी गंदी बातें बोलते हो तुम?मैं बोला- अच्छा जब चूत में लंड डालते हैं, तो उसको चोदना ही तो बोलते हैं.

मुझे दर्द होने लगा तो मैं बोली- क्या कर रहे हो भोला?वो बोला- तेरी गांड का नाप ले रहा हूं. उनके करवट लेने से मेरी गांड फट के हाथ में आ गई और मैं हड़बड़ाहट से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा, जिससे दरवाजे के पास टेबल पर रखा ग्लास गिर गया.

बीएफ हिंदी देवर भाभी की मैं वहां से भाग गया क्योंकि शायद भाभी को शक हो गया था कि मेरे अलावा ये काम कोई नहीं कर सकता है. सीमा- ये क्यो जानू … क्या जान लेने का इरादा है?मैं- ऐसा ही समझो मेरी जान.

बीएफ हिंदी देवर भाभी की मुझे लण्ड शब्द विशेष प्रिय लगता क्योंकि इस शब्द की साउंड में, ध्वनि में एक विशेष शक्ति का भाव निहित लगता था; फिर मैंने समझा कि जिन शब्दों के अंत में ण्ड, आधा ण और ड होता है वे शब्द अत्यंत प्रभावशाली और होते ही हैं जैसे लण्ड, दण्ड, प्रचण्ड, खण्ड, घमण्ड, ब्रह्माण्ड, मार्तण्ड इत्यादि. कुछ देर सोचने के बाद भाभी ने कहा- ठीक है, तुम आंखें बंद करके लेटे रहो, मैं चुम्मा ले लेती हूं.

आज मेरी चूत पर एक भी बाल नहीं था क्योंकि मैं अपनी चूत के बाल को साफ़ करके चुदने को रेडी हुई थी.

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मैं उनको जोर जोर से चोदने लगा … सारे रूम में बस चुदाई की ही आवाजें आ रही थीं ‘फच फच … आह … आह …’भाभी के मुँह से सीत्कारें फूटने लगी थीं. अरे बाप रे …” कहते हुए वो बाथरूम में घुस गई और जल्दी से तैयार होकर आ गई. एक रात को मैं घर पर अकेला था और उस रात मेरी बीवी भी मायके गयी हुई थी.

मैं उसको अपनी गोद में उठाकर चूमते हुए बिस्तर पे ले आया और उसके पेट के बल लिटा दिया. मैंने अपनी लोअर के अंदर हाथ डाल दिया और लंड को हाथ में लेकर मुट्ठ मारने लगा. पर बहन की लौड़ी … अपनी चुत की चुदाई की आग में सब कुछ सहन करते हुए बोली.

मैंने उससे पूछा- क्या हुआ, तुम उदास सी क्यों लग रही हो?मेरी बात सुनकर पहले तो वो सकुचाई और ‘कुछ कुछ नहीं बस यूं ही …’ कह कर बात को टालने लगी.

उसके मुँह पर चूचियां दबवाते हुए मैं बोली- हाय अंकल बहुत मज़ा आ रहा है. मैं एक हाथ से उसकी चुची दबा रहा था, दूसरे हाथ से उसकी जांघ को सहला रहा था. मैं भी दनादन लंड आगे पीछे कर रहा था और उसके पूरे शरीर को चूमते हुए चोदे जा रहा था.

”फिर अंकल जी मुझे सहारा देकर वाशरूम ले गए और मुझे एक पट्टे पर बैठा कर गीजर के गुनगुने पानी से उन्होंने मेरी चूत धोई. अब तुझे जो करना है सो खुद कर, मैंने तुझे सही रास्ता दिखा दिया है बस!” डॉली ने बात ख़त्म की. मेरा काम ही ये था कि बस खाया पिया और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फोन पर लग गया.

मैंने आंटी की गोरी चिकनी गुलाबी गांड भी बड़े प्यार से … आंटी के बिस्तर पर ही, आंटी की इच्छा से मारी. मैं बोली- ये क्या कर रहे हो?वह बोला- कुछ नहीं … बस वही, जो रोज करता हूं.

उसकी सांसे ज़ोर-ज़ोर से चल रही थीं।कुछ देर मेरी माँ के नंगे बदन के साथ खेल कर अंकल ने अपनी बनियान उतार दी. मौसी ने अपने गाउन को जांघों तक ऊपर कर रखा था और वो तेजी से अपनी चूत पर हाथ चलाते हुए कभी किताब में देखती तो कभी दूसरी तरफ करवट लेकर सोई मानसी की तरफ देख रही थी. आपने मेरी पहली कहानीदुबई में बेटे के साथ मनाया हनीमूनमें पढ़ा था कि कैसे मैंने अपने पति की मौत के बाद अपने आप को संभाला और किस तरह उसके बाद मैंने अपने बेटे रोहन के साथ सेक्स का मजा लिया.

जब शादी में आये हुए सारे मेहमान चले गये तो उसने मुझे आकर बताया कि उसकी सुहागरात नहीं हुई है.

एक दिन उसने मुझसे पूछा- सुना है फर्स्ट टाइम बहुत दर्द होता है?मैं- पता नहीं, मैंने कभी महसूस नहीं किया!सुन कर तेज़ी से हंस पड़ी. मेरा लण्ड 6 इंच का है जो किसी भी चूत का पानी निकालने के लिए काफी है. अभी मेरा हाथ उनके पजामे में जाने वाला था, तो उन्होंने दबाके रोक दिया और अपने हाथ की रफ्तार बढ़ा दी.

मैंने उसको फोन करने की भी कोशिश की लेकिन उसने मुझसे फोन पर भी बात नहीं की. उन्होंने नीचे तो स्विम सूट पहना था पर सोसाइटी की वजह से ऊपर काफ्तान जैसी कोई ड्रेस पहनी थी.

वे दोनों अभी मेरा रस चाट ही रहे थे कि बड़ी वाली सरिता भी रूम में आ गई. मैं काफी सोच में पड़ गया, लेकिन जब वह आई … तो उसने बताया कि उसने मूवी की टिकट ऑलरेडी बुक कर दी थी. उनके भाई जो दिन में तो सही रहते थे, लेकिन जैसे ही शाम होती, वो पीने चले जाते और रात को एक दो बजे तक वापस आते थे.

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मैंने वैसा ही किया।रात के 11:30 हो चुके थे और एक बोतल बीयर भी खत्म हो चुकी थी.

उन्होंने अपने हाथ अलग रखते हुए मेरे होंठों पे किस किया और बोला- इंद्र, कितना मजा आ रहा है. चाची मुझ पर गुस्सा करने लगीं- अरे ये क्या कर रहे हो जीशान? छोड़ो मुझे. शर्म की वजह से मैंने भी कभी नहीं कहा, पर विकी ने मुझे वो मौका दिया.

एक बार क्लास के एक बन्दे का गवर्मेंट एग्जाम में पास होने पर हमारे टीचर ने एक बहुत अच्छे होटल में रात को डिनर की पार्टी दी, वो होटल शहर से थोड़ा बाहर था. उसी समय मामी के घर का लैंड लाइन वाला फोन बजा तो मामी मुझसे बोलीं- एक मिनट रुको यार … मुझे फोन तो सुन लेने दो. सास जमाई की बीएफबेबी ने मुझसे पूछा- कामिनी नहीं दिख रही, कहीं गई है क्या?मैंने उसे सब कुछ बताया और पूछा- कोई काम था क्या?वो कहने लगी- कुछ पूछना था.

पर नितिन थोड़ा शर्मीला था और कम पहल करता। नितिन मुझे लोगों के बीच छूता भी नहीं था. अंकल ने अपना अंगूठा कुछ देर वैसे ही रखा, फिर अचानक से उसे पीछे खींच लिया और अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया.

वह आनंद में डूबती जा रही थी और बोल रही थी- हाय जान, फ़क मी, आज मेरी चूत में वास्तव में कोई लण्ड गया है. सौरव जैसे हैंडसम लड़के का लंड मेरी चूत में जगह बनाता हुआ गहराई में उतर रहा था और मैं उसकी लार को उसके मुंह से खींचने की कोशिश कर रही थी. फाड़ डाल मेरी चूत को … आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे … और जोर से चोदो … और जोर से चोद।बेजन्ता आंटी के भावों से मैं समझ गया कि वह झड़ने वाली है.

फिर अचानक ही आनंद की वो लहर जिस्म में उठी जिसमें मैं बहता हुआ उस पल को जैसे वहीं रोक देना चाहने लगा मगर वो पल ऐसा पल होता है कि उसको रोक पाना नामुमकिन होता है. अब वो राहुल को शायद दिखाने के लिए भी ज्यादा ही खुराफात करने लगे थे. नीना कमरे से चली गई, तो उसकी आंखें मेरी चूचियों पर टिक गईं, जिससे मुझे उम्मीद हो गई.

पूरी प्लानिंग करके मैं अपने बेडरूम में गयी और बाथरूम में जाकर शावर लेने लगी.

वही सरु सा ऊँचा कद, वही कमान सा तना हुआ सुडौल गोरा बदन, वही रौशन पेशानी, माथे पर हवा में कुछ-कुछ उड़ती ज़ुल्फ़ें, तीखा सुतवां नाक, सुडौल गुलाब सी कलियों से होठों का अर्ध-चन्द्रात्मक ख़म, नाभि से ज़रा नीचे बंधी शिफ़ौन की प्लेन महरून साड़ी में से पारे की तरह थिरकती लम्बी पुष्ट जाँघें. उसकी चुत गीली होने की वजह से पूरी कमर फच फच और आआहह की आवाज से गूंज रहा था.

जब वो स्कूल जाती, तो मैं अपने घर के बाहर खड़ा हो जाता और इस तरह से हमारी नजरें रोज मिलने लगी थीं. उसके दो दिन बाद नैना का कॉल आया- आज मेरे घर कोई नहीं है, तुम मेरे घर आ जाओ. फिर मैं परेशान हो गया, मैंने मानसी से कहा- ऐसे तो मैं तड़प कर ही मर जाऊंगा.

जब दोनों को यकीन हो गया कि मैं बिल्कुल नींद में हूँ तो दोनों उठ कर बेडरूम की तरफ चले गये. पर स्टोरी पढ़ पढ़ कर अब मैंने गली के जवान लड़कों को चुपके से देखना सीख लिया था. भाभी ने पूरी मस्ती और दम लगा कर लंड चूसा, जिससे मेरा पानी उनके मुँह में ही छूट गया.

बीएफ हिंदी देवर भाभी की मुझे कोई बनाना भी नहीं है क्योंकि सब मतलबी होते हैं।उसका जवाब सुनकर मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो इस बारे में बात तो स्टार्ट हुई हमारी।मैं- किस तरह से मतलबी होते हैं, मैं समझा नहीं कुछ?पुष्पिका- भाई, आपकी गर्लफ्रैंड है?मैं- पहले थी, अब तो कोई नहीं है? क्यों, तुमने ऐसा क्यों पूछा?पुष्पिका- बस वैसे ही पूछ लिया. बस फिर क्या था, मैंने नम्रता की कमर कस कर पकड़ा और जितनी ताकत लगा सकता था, लगाते हुए एक जोर का धक्का लगा दिया.

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उसके निप्पल पे होंठ के बीच में रखकर दबाए जा रहा था और जीभ से चाट रहा था. चूंकि उसकी चूत गीली थी और कई सालों से शायद उसने लंड भी नहीं लिया था इसलिए चूत नवयौवना की भांति लंड को अंदर नहीं ले रही थी. उन्होंने मुझसे कहा कि आपको मेरे से जो कुछ चाहिये हो, तो बेझिझक बोलो … मैं दे दूंगी.

सच कह रहा हूँ पाठकगण! तन्हाई में, सेज़ पर, कभी आँख मिलाती … कभी चुराती, आने वाले पलों में होने वाले अभिसार की प्रत्याशा से रह-रह कर थरथराती, कभी अपने यौवन को दिखाते-दिखाते छुपाती या छुपाते-छुपाते दिखाती, शर्म से लाल हुयी जा रही जवान अर्ध-नग्न अभिसारिका के ज्यादा सम्मोहक़ इस संसार में कोई और चीज़ है ही नहीं. उसके मुंह से भी कामुक सिसकारियाँ निकल रही थीं और पूरा माहौल कामुकता से भर गया था. बीएफ सेक्सी खून वालावो मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुँह में लेने लगी- मैं बिना लंड लिये पहली बार इतना झड़ी.

फिर जब से हमने नए घर में रहना शुरू किया, तो हमारे में ज्यादा बोलचाल नहीं थी.

चाची दर्द से कराह उठी और बोली- देव, उम्म्ह… अहह… हय… याह… दर्द हो रहा है. रात को जब सोने का टाइम हुआ तो भाभी ने कहा कि मैं अपनी टांगें भाभी की तरफ कर लूं.

वह औरत मेरी तरफ देखकर बोलती है- हाय … कैसी गंदी बातें बोलते हो तुम?मैं बोला- अच्छा जब चूत में लंड डालते हैं, तो उसको चोदना ही तो बोलते हैं. पुष्पिका- परम भाई, चाय पी लो, कब तक सोते रहोगे? रात में ठंड लगी क्या आपको जो अब तक सो रहे हो?मेरी आँखें जैसे ही खुली मैं उसे देखता ही रह गया. दीक्षा बहुत ही मादक सिसकारियां ले रही थी, जो मुझे और मदहोश कर रही थीं.

जब वो अंकल के घर की सीढ़ियों से नीचे गईं, तो अंकल को देखकर अम्मी की आंखें खुली रह गईं.

लण्ड अब मेरे कंट्रोल में नहीं था। वो झुक कर अपनी चूत में साबुन लगाने में मस्त थी। मैं चुपके से अंदर घुस गया। साथ में पाजामा और अंडरवियर भी उतार लिए। वो तो झुकी हुई थी और पीछे से मैंने अपना लण्ड उनकी उभरी गांड पर टिका दिया।वो अचानक से हुई मेरी इस हरकत से घबरा गई और मेरी तरफ घूमी. आंटी ने अपना सामान खरीदा और हमने बाजार में साथ में बैठकर चाय पी और हम वापस घर आ गए. वसुन्धरा ने बिना कुछ बोले आगे बढ़ कर मेरे दोनों हाथ थाम लिए और सर उठा कर तरसी आँखों में हज़ारों शिकायतों का भाव लेकर मेरी ओर निहारा.

एक्स एक्स बीएफ सेक्सी एचडीशायद ये मेरा वहम था या हक़ीक़त, जो भी था बहुत हसीन था।उसके बाद फिर हमने पूरा रूम साफ किया और वहीं बैठ कर बातें करने लगे थोड़ी देर बात करने के बाद उसने कहा- चलो अंदर चलते हैं।मैंने कहा- हम अंदर तो हैं. उसके ऊपर स्लीवलेस फिट टॉप में से उसके बूब्स उसकी फिगर को परफेक्ट बनाते थे.

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खाने के बाद मैं फिर से उसको चोदना चाहता था, पर वो बोली- अभी नहीं, पहले मुझे थोड़ी देर आराम करने दो. अब अब्बू ने एक बार फिर लंड हाथ में लिया और मुट्ठ मारनी शुरू कर दी।लेकिन मुझे लगा कि अब्बू इतने से संतुष्ट नहीं थे, तो उन्होंने कौसर के पैरों को धीरे धीरे एक दूसरे से दूर सरका कर फैला दिया. अंगिया और ब्लाउज़ हटने के बाद वसुन्धरा की साड़ी, अस्त-व्यस्त ही सही … रंग में भंग डाल रही थी.

ट्रक की बात सुनकर मैं थोड़ा डर गया, क्योंकि मैंने कभी ट्रक में सफर नहीं किया था. अब दोनों बाजार वाले स्टॉप पर उतर गए। मां बाजार की तरफ जाने लगी, तो वह आदमी मेरी मां के पीछे आने लगा। मेरी मां जिस दुकान में जाती, वह उस दुकान में जाकर कुछ लेने का बहाना करने लगता। मेरी मां थोड़ी डरने लगी।बाजार से लौटते समय वह आदमी मेरी मां के पीछे आने लगा तो मां एकदम रुकी और उससे पूछा- मेरा पीछा क्यों कर रहे हो? तब उसने कहा- जी, बस आपसे बात करनी है. तो वो मुस्कुरा दी और उनके पति की एक रम की बोतल ले आयी। जिसे देखते ही ऐसा लगा कि प्यासे को रेगिस्तान में शरबत मिल गया हो।फिर कुछ देर के बाद वो कपड़े बदल कर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

लगभग 5 मिनट की चूत चुसाई के बाद परवीन का सब्र जवाब दे गया और अपनी चूत मेरे मुँह से उठाकर मेरे लंड पर बैठ गयी. वो दर्द से तड़पने लगी थी, पर मैं ठहरा मेडिकल स्टूडेंट, मुझे सब पता था कि पांच मिनट में यही लौंडिया गांड उठाकर चुदने लगेगी. वो हंसते हुए बोली- तुम 22 साल के हो चुके हो, तो क्या तुमने अभी तक जवानी के मजे लिये ही नहीं?मैंने कहा- अभी तक मौका ही नहीं मिला.

मैं शर्म भूलकर दोनों चूचियों पर हाथ रखकर बोली- अंकल धीरे से दबाइएगा, मुझे दर्द होगा. रीना- फिर एक दिन उन्होंने कंपनी की कोई डील बताई और मुझे साथ में शिमला चलने को कहा.

फिर अब्बू ने अपनी जीभ मेरी बीवी की गर्म चूत के आस पास घुमाना शुरू कर दिया.

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शावर लेने के बाद मैंने अलमारी से एक गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी निकाली.

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हमारी मौसी के आने के बाद मानसी और मेरी चुदाई बंद हो गई थी क्योंकि मौसी अब मानसी के साथ ही सोती थी. यह सोचकर कि इस मौके को अब मैं हाथ से नहीं जाने दूंगा, अचानक से मैंने उसका लंड दोबारा अपने हाथ में पकड़ा और पूरे मन के साथ उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने लगा. पुष्पिका- आजकल के लड़कों को सिर्फ लड़की के साथ कुछ टाइम बिताना होता है.

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हम धीरे-धीरे एक दूसरे के इतने क्लोज़ हो गए थे कि हम एक दूसरे से किसी भी विषय पर बात कर लेते थे. उसके हिलते हुए मम्मों को मैं अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रहा था. मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स चूसना शुरू कर दिए तो उसकी ब्रा गीली हो गई.

मैं अपने एक हाथ से उनके बाल सहला रही थी और दूसरे हाथ से उनके लंड को मुट्ठी में भर कर दबा रही थी. मगर थोड़ी देर बाद घर के काम में लगकर थोड़ी देर के लिए उस किस्से को भूल गई। दूसरे दिन मां जान-बूझकर बाजार नहीं गई ताकि वो आदमी भी उस बात को भूल जाए और सब ठीक हो जाए।फिर मां दोबारा बाजार जाने के लिए बस स्टैंड पर गई.

पर एक बात जो राहुल को नयी लगी कि पंकज-सारिका अब कुछ ज्यादा ही बेशर्म होते जा रहे थे.

उसने अपना लंड अचानक से मेरी चूत में घुसा दिया और मैं दर्द के मारे मरने को हो गई. क्या मस्त नजारा था दोस्तो … चाची के भरे हुए मम्मे देख कर मेरे तो होश ही उड़ गए थे. चाचा जी की नौकरी शहर में है तो वे कम ही गांव में आ पाते हैं, इधर का काम चाची और उन ताऊ जी के जिम्मे है.

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वैसे मूवी इंग्लिश थी, इसलिए भीड़ भी कुछ नहीं थी और हॉल में मुश्किल से 20 लोग थे. मैंने विक्की के लंड को थोड़ी देर के लिए हिलाया और लंड को किस किया और लंड के सुपारे पर जीभ फिराने लगी. ”मैने आंखें बन्द कर लीं।उसने मेरी ब्रा उतार दी और चुचियाँ दबाने लगी।अब मुंह खोल”मुंह खोलूँ? क्यों?”पूछ मत बस मुंह खोल और याद है न आँखें नहीं खोलनी चाहे कुछ हो जाए.

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फिर अब्बू ने अपनी जीभ मेरी बीवी की गर्म चूत के आस पास घुमाना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में मुझे भी आनन्द आने लगा था, मैं रंडी सी बोलने लगी- डाल साले कुत्ते … मेरी चुत में पूरा लंड डाल दे … दिखा दे अपना लंड का दम … मिटा दे मेरी चिकनी चुत की प्यास. मैंने अपनी एक टांग को उठा कर उसकी टांग पर इस तरह रख दिया कि मेरा घुटना मुड़ कर उसके लंड के ऊपर जाकर टच हो गया.

फिर मैंने उसका टॉप ऊपर उठा के उसकी चूचियों को अच्छे ऐ सहलाया और फिर चूसा. दोस्तो, पड़ोस की मेरी पहली गर्लफ्रेंड की हिंदी सेक्स कहानी आपको कैसी लगी.

मैं उसके चुचों को जोर जोर से दबाता, लेकिन उसे तो जैसे फर्क ही नहीं पड़ रहा था … उलटे उसे आनन्द आता.

जब वो वापस आई तो मैं उसे देख कर काफी खुश हो गई और मैंने उसका हाल-चाल पूछा. अंकल के हाथ अम्मी के मम्मों पर थे और वो उन्हें बेदर्दी से मसल रहे थे. अब मैं अपने हाथों को ऊपर करके उसकी कमीज के ऊपर से उसके मम्मों को दबाने लगा.

फिर मैंने हिम्मत करके उससे पूछा- अच्छा एक बात बता, तू इतनी खूबसूरत कैसे होती जा रही है? कोई बॉयफ़्रेंड है क्या तेरा जो उसकी वजह से इतनी खूबसूरत दिखने लगी?पुष्पिका- क्या भाई … आप दिल्ली में रह कर भी ये सब पूछोगे? मेरे फ़्रेंड तो हैं लेकिन बॉयफ्रेंड कोई नहीं है. फिर अचानक ही दोनों का शरीर अकड़ गया और दोनों की वासना का ज्वार उमड़ पड़ा. मैंने उसे क्लास में काफ़ी बार देखा था क्योंकि मेरी क्लास का ही था, लेकिन हमारी बात नहीं होती थी.

हर वक़्त सोते रहते हो, हटो यहां से!मैं हट गया, जाकर कमरे में चला गया, तब उसने अपनी पैंटी डाली और उसको अपनी स्कर्ट से ढक दिया.

बीएफ हिंदी देवर भाभी की: मैं बस से अपने बहन के ससुराल गया, तो वहां मेरे जीजा भी उसी दिन अपनी सर्विस से छुट्टी पर आये हुए थे. मेरी बात पूरी होने पर मैंने दीदी को बोला, तो दीदी ने सर हिलाकर इशारा किया.

मैं पहले वाशरूम गया, फ्रेश होकर वापिस आया … तो उसको जगाने के लिए ‘एक्सक्यूज़ मी. मैं बोर हो जाती हूं, इसलिए सोचा आज तुम्हारी छुट्टी होगी, तो क्यों ना तुमको बुला लूँ. भोला के लंड से चुदते हुए मैं मजा ले रही थी और भोला ठाकुर मेरी चूत में अपने मोटे लंड को पेलता जा रहा था.

वह उठी, मैंने उसकी कमर से पकड़कर उसको घुमाया और उसका चेहरा अपनी तरफ कर लिया.

फिर भी मैंने भी उसे विश किया और वहीं एक तरफ किनारे होकर खड़ा हो गया।वहाँ जितने भी लोग थे, सारे ऑफिस के ही थे शायद उसी के टीम मेम्बर्स. मैं जानता था कि रेखा खुलकर सेक्स नहीं करेगी, फिर भी वो जैसा प्यार कर रही थी, वो ही बहुत था. मैंने भी मस्ती लेते हुए कहा- आज तो भाभी आप पूरी स्वर्ग की अप्सरा जैसी लग रही हो … लगता है किसी के कत्ल का इरादा है.