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वो मेरी तरफ देख कर बोला- तू आराम से खुल कर मजे ले रंडी, मुझे भी अपने बाप की तरह ही समझ. कुंवारी लौंडिया की सेक्सी पिक्चरउसने काजल को दिखाते हुए उसकी राय जाननी चाही और काजल ने भी अपनी पसंद की मोहर लगा दी सुमिना की पसंद पर।सुमिना खुश हो गई और फिर उसको ट्राई करने के लिए ट्रायल रूम की तरफ चली गई.

मन तो कर रहा था कि उससे बात करने की पहल कर दूं लेकिन ज़बान में जैसे दही जम गई थी.बीएफ दीजिए बीएफ सेक्सी: इसी बीच जैसे ही मैं अपने उभरे हुए लंड को अड्जस्ट करने लगा, तो मेरी इस हरकत को भाबी ने देख लिया.

इसी तरह मुझे अब इतने से कहाँ सब्र होने वाला था, मोनी ने मुझे अब भी कुछ कहा नहीं तो मेरा दिल अब और भी आगे बढ़ने के लिये कहने लगा।मैंने कुछ देर तो पेंटी के उपर से अपने लंड को मोनी के नितम्बों पर घिसा, फिर पता नहीं मुझमें इतनी हिम्मत कहाँ से आ गयी कि मैंने धीरे से उसकी पेंटी के किनारों से अपने लंड को अन्दर ही घुसा दिया जो कि सीधा ही उसके नंगे नितम्बों की गहराई में घुस गया.वो क्क ओ कॉन्डोम … लगा लेता हूं!” मैंने फिर से कहा मगर मोनी ने अब भी मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और मुझे अब भी वैसे ही पकड़े रही! मैंने अब धीरे से उठने की‌ दोबारा कोशिश की जिससे कि मोनी ने हल्का सा कसमसाकर अब अपना दूसरा हाथ भी मेरी गर्दन में डालकर मुझे पकड़ लिया और पहली बार उसके मुंह से कुछ ऐसे शब्द निकले- म म मुझे … रखना है!मोनी ने हल्का सा कुनकुनाते हुए कहा जिसे सुनकर मुझे झटका सा लगा.

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फिर मैंने उसकी गांड का छेद भी चाटा बहुत अच्छा स्वाद था और बहुत नाजुक भी.मैंने उसके होंठों को फिर से चूसना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उसकी चूत में लंड को अंदर बाहर करने लगा.

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मैं सन् 2012 से ही इस साइट का नियमित पाठक हूं। अन्तर्वसना के बारे में मुझे तब पता चला जब मैं ट्रेनिंग ले रहा था। ट्रेनिंग के दौरान मेरी मुलाकत एक व्यक्ति से हुई जो हमारे साथ ही ट्रेनिंग ले रहा था। वह राजस्थान के किसी जिले का रहने वाला था। आज मैं सेंट्रल गवर्नमेंट में एम्प्लोई हूं और अच्छी पोस्ट पर काम कर रहा हूं. एक बार मेरे पड़ोस में एक आंटी रहने आई। कुछ दिन के बाद उनसे जान-पहचान हुई तो पता चला कि उनका नाम ज्योति था.

आपको तो पता ही होगा कि गुजरात में नवरात्रि बड़े धूमधाम से मनाई जाती है.

”आंटी अपना हाथ मेरे लोअर में डालकर मेरा लण्ड पकड़कर बोली- बहुत बड़ा है तेरा.

मैंने एक दो बार इसी चुप्पी की अवस्था में अपने खड़े होते लंड की नोक को उनकी गांड में लगाने की कोशिश भी की, जिससे मुझे उनकी कोई प्रतिक्रिया देखने को मिल जाए. उससे बात करने पर पता चला कि वह आगरा में ही रहती है और अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है. मगर उस दिन के बाद से मेरे मन में हर लड़की के लिए अलग ही इज्जत का भाव अपने आप ही पैदा होने लगा था.

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कुछ देर उसकी चूत को चोदने के बाद मेरे लंड ने उसकी चूत में ही वीर्य की पिचकारी लगानी शुरू कर दी. कभी कभी लगता था कि वह भी मुझे पसंद करती है, लेकिन कह नहीं पा रही है. मगर मोनी‌ की‌ नींद शायद अब फिर से खुल‌ गयी थी क्योंकि जैसे ही मैने अपना लंड उसके नितम्बों की दरार में घिसा उसने हल्की झुरझुरी सी ली और उसके‌ बदन‌ का‌ तापमान अचानक से बढ़ सा गया। मगर चर्म पर आकर अब मैं भी अपने आपको रोक नहीं पाया और न चाहते हुए भी कपड़ों में ही मेरा स्खलन होना शुरू हो गया.

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तो वे बोलीं- तो तुम यहाँ पर आए क्यों?मैं बोला- एक काम करो, लगे हाथ दर्शन कर लो और पाँच बजे की ट्रेन से वापस चलते हैं. उसके बाद जीजा ने भी अपनी जीभ को दीदी की चूत से बाहर निकाल लिय़ा और दीदी को घोड़ी की पोजीशन में झुका लिया.

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बीएफ दीजिए बीएफ सेक्सी आपने मेरी कहानी का पहला भागदेसी भाभी का प्यार और सेक्स-1पढ़ लिया होगा. उनके अंदर गजब की ताकत थी, अपने मोटे सख्त बाजुओं से बॉस ने मुझे जकड़ रखा था.

भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैंने बड़े रोमांटिक मूड में आगे बोल दिया- मुझे तो कोई और पसंद है.

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घर के पास पहुंचकर मैंने इधर-उधर नजर डाली और जल्दी से हम दोनों मेरे घर के अन्दर घुस गए. इधर लाके मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया, जिसका उसने भी पूरे ज़ोर से मेरे होंठ को काट कर जवाब दिया. मैंने बेड से नीचे उतर कर अपने पैर भी बेड के इधर उधर कर लिए और अपना लंड को भाभी की चूत पर रगड़ने लगा.

भाभी ने मुझसे कहा- सूरज, दिखा तो सही अपना औजार … जरा मैं भी तो देखूं कि ये बार बार क्यों तेरे औजार को बहुत बड़ा कह रही है. अगले दिन फिर रीना सुबह साढ़े ग्यारह बजे आ गयी, मैंने उसे अपनी बाइक पे बिठाया. मैंने अपने लिए छत पर बिस्तर लगा दिए ताकि शोर शराबे से दूर आराम से सो सकूँ.

भाबी की टाइट चुत भी आज मेरे लंड को ऐसे चबाए जा रही थी कि जैसे मेरे लंड को पूरा निगल ही जाएगी.

कुछ देर बाद मामी फिर से गर्म होने लगीं और उन्होंने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया. धीरे धीरे मैंने उसकी दोनों चूचियों को छोड़कर उसके सपाट पेट पर चूमना चालू कर दिया. वो भी बेबाक हो कर बोली- वो चीज क्या … साफ़ बोलिए न?मैंने कहा- छोड़ … तू नहीं समझेगी, तू अभी छोटी है.

मैंने भी खुशी खुशी हां कर दी और मुझे उस दिन ऐसा लगा, जैसे मुझे भाभी से प्यार हो गया है. उसने कहा- आशना यस आशना यस …मुझे पता चल गया कि वो लंड चूसने के लिए कह रहा है … पर मैंने पहले कभी लंड नहीं चूसा था, तो मुझे पसंद नहीं था. मुझे भी बाहर पानी निकालना अच्छा नहीं लगता … तो मैंने पूरा पानी उसकी चुत में ही निकाल दिया.

साथ ही में वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी, जैसे वो मुझे अपने में समा लेना चाहती हो. आने के बाद मैंने मानसी से पूछा- क्यों री … तूने तो रितेश जीजू के लंड को भी चूस डाला.

फिर अंकल मेरे मम्मों को देख कर बोले- मस्त लाल टमाटर लग रहे हैं और आज तो मैं गांड में भी लंड डालूंगा. मानसी रितेश के लंड को सहलाते हुए बोली- जीजू, कुछ दिन और रुक जाते!रितेश जीजू ने कहा- साली साहिबा, ऑफिस का काम भी तो देखना है. इससे पहले मैंने उनको तौलिया लपेटे हुए ही देखा था और उनका नीचे का भाग नहीं देख पाई थी.

उसने बड़े गले की टी-शर्ट और नीचे पायजामे जैसा हल्का सा कुछ पहना हुआ था.

तभी जैक ने भी नीचे आकर मेरी चुत में हल्की सी जगह बना कर अन्दर डाल दिया. मैंने मना किया तो आंटी ने कहा- मैं तुमको कोई गिफ्ट देना चाहती थी, लेकिन इस वक्त सम्भव नहीं है, प्लीज़ तुम बुरा मत मानना, अपने लिए कुछ भी मेरी तरफ से ले लेना. तुम कितनी देर में पहुंच रही हो?मैंने कहा- ठीक है, अभी तो मैं जीजा के साथ चित्रकूट के लिए निकल रही हूं.

आपको बता दूँ कि वो दोनों इतनी हॉट हैं कि कोई भी उनको एक बार देखकर चोदने का जरूर सोचेगा. मानसी की टांगों को चौड़ी करके वो उसकी टांगों के बीच में बैठ गये और उसका टॉप उतारने लगे.

उपिंदर ने स्पीकर ऑन किया- और मालिनी कैसी है, बड़े दिनों से तेरी सवारी नहीं की, कब आ रही है?तुम्हें मेरे ऊपर चढ़ने की पड़ी है, यहां बड़ी गड़बड़ हो गयी. मैनेजर ने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर लिया और कहा- अगर कोई रास्ता निकला, तो तुम्हें कॉल कर देंगे. ख़ैर! वसुन्धरा के पापा मुझे 28 नवंबर को शिमला आने का न्यौता भिजवाने का कह कर ख़ुशी-ख़ुशी विदा हो गए.

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उसका यौवन और ज्यादा निखरने लगा था लेकिन जवानी का असली रंग तो लंड लेने के बाद ही चढ़ना शुरू होता है.

हम लोग बाजार में कुछ देर तक एक साथ घूमे और उसके बाद उसने बोला- क्या तुम मेरे साथ होटल में चलोगी, वहां पर हम दोनों कुछ देर आराम से रुक कर ये सब आराम से कर सकते हैं. मेरी चूत टाइट थी इसलिए जीजा जी पंद्रह मिनट से ज्यादा मेरी चिकनी चूत के सामने टिक नहीं पाये और उन्होंने मेरी चूत में अपना वीर्य उड़ेल दिया. अपने बैग से मैंने अपना व्हिस्की का हाफ निकाला और सीधे बोतल से नीट दारू खींच ली.

उसने कहा कि ऐसा हो नहीं सकता कि आजकल कोई बिना गर्लफ्रेंड के रहता हो. कुछ दिन विकी के साथ ऐसे ही हैंगआउट पे चैटिंग करते करते गुजर गए … क्योंकि कोई मौका नहीं मिल रहा था. सेक्सी वीडियो कोलकाता वालीनम्रता भी अपने अनुभव का प्रदर्शन कर रही थी, मेरे लंड को हलक के अन्दर तक ले जाती, तो कभी सुपारे पर अपनी जीभ चलाती, तो कभी अंडों को मुँह में भरने की कोशिश करती, नहीं तो फिर अंडों पर ही जीभ चलाती.

दीदी के आने के बाद उस रात मैं उनके बच्चों के साथ दूसरे कमरे में सो गयी. दोस्तो, मुझे मेरी पिछली कहानीकैब से बेडरूम तकमें आप सभी का इतना ज्यादा प्यार देने के लिए धन्यवाद.

मैं उसको उठाने वाला था लेकिन उससे पहले मैडम ही नीचे झुक कर शीट को उठाने लगी. भाभी ने बेड पर लेटते ही सेक्स के लिए अपनी बांहें मेरी तरफ फैला दीं. ऐसा कहते हुए किस करने के साथ मम्मों को दबाते हुए मैंने उसकी चुदाई को जारी रखा.

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वो चिल्लाना चाहती थी लेकिन मेरे होंठों में उसके होंठ होने की वजह से अन्दर ही घुट कर रह गयी.

नीचे से उसने मेरी चूत पर अपनी हथेली से सहलाना शुरू किया तो मेरी टांगें खुलने लगीं. मैं अपनी बाजू में लेटी सोनल के मम्मे मसलते हुए उसे किस कर रहा था और वो भी मेरा साथ देती हुई अपनी चुत में उंगली घुमा रही थी.

इससे आपके पार्टनर को ये अहसास होता है कि आप उससे बहुत प्यार करते हो. लंड चूसने के बाद नम्रता बोली- यार तुमने मुझे जिंदगी का सब सुख दे दिया. खाने के दौरान मैंने उसको बताया कि मेरा काम नहीं हो पाया है, शाम तक हो गया तो ठीक है वरना रात को रुकना पड़ेगा.

वो बोल रही थी- आरव प्लीज़ धीरे प्लीज़ धीरे मैं मर गयीई … आरव प्लीज़ मुझे छोड़ दो … लंड निकालो बाहर. निहारिका की सलवार मेरे छूटने से गीली हो गई थी, तो जब निहारिका ने सलवार उतारी, तो उसके चूतड़ों के दर्शन मुझे कई महीनों बाद हुए थे. दोपहर का खाना खाने के बाद ताऊ जी घर की छत पर बने ऊपर वाले कमरे में आराम कर रहे थे.

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मैंने दरवाजे के पास कान लगाकर सुना तो अंदर से सेक्सी आवाजें आ रही थीं. जीजा जी के इस प्रहार को दीदी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लेकिन मेरे चोदू जीजा ने मेरी दीदी के कूल्हों को अपने हाथों में पकड़ रखा था. फिर बिस्तर के पास आकर उसने एक चादर उठा ली। अब पता नहीं मोनी ने वो चादर किस लिये उठाई थी और किस लिये नहीं … मगर वो जैसे ही बिस्तर के पास पहुँची तो मैंने बिस्तर पर अन्दर की तरफ खिसक कर उसके लिये सोने की जगह बना दी‌ थी जिससे मोनी अब मेरी तरफ घूर-घूर कर देखने लगी.

पर मेरा लेखक मन एक ही चरित्र की सीरियल कहानियों से उभर कर कुछ नया लिखने का प्रयास, कोई नयी थीम तलाशता रहता था. मैं अपनी कहानी शुरू करने से पहले अपने नए मित्रों को अपना परिचय दे देता हूं. चिल्लाने वाला सेक्सीमैंने उसकी दोनों चूचियां बारी बारी से अपने मुँह में भर कर खूब चूसीं.

उधर काजल की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं, जिसकी वजह से उसकी दोनों चूचियां बहुत तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थीं.

मेरे जैसा ही हाल मेरी अन्य क्लासमेट्स का भी होता था और हम अक्सर सेक्स के विषय पर हंस हंस कर बातें करतीं थीं जैसे किसका पीरियड कब होता है, किसकी ब्रा का नंबर क्या है, कौन कौन अपनी बुर उंगली से सहलाती है, बुर में कहां रगड़ने सहलाने से ज्यादा मज़ा आता है, कौन कौन चुदवा चुकी है इत्यादि. मैं बोली- वंश, हमारे पास करोड़ों रुपए हैं … हम दोनों चाहें, तो पूरी जिन्दगी ऐश करेंगे, फिर भी पैसा खत्म नहीं होगा.

पतली कमर एकदम कातिल, 28 के साइज की, चूतड़ उभरे हुए 36 के साइज के हैं। रंग गोरा, एकदम हीरोइन लगाती है किसी पोर्न फ़िल्म की। मेरी दीदी मेरे से दो साल बड़ी है. काफी देर तक एक दूसरे को फोरप्ले का मजा देने के बाद हम बिस्तर पर चुदाई के आसन में हो गए. मेरी एक खास बात है, मैं जल्दी नहीं झड़ता … कम से कम आधे घंटे तक लगा रहता हूँ और ज्यादा से ज्यादा डेढ़ से दो घंटे तक बिना थके चूत पेल सकता हूँ.

थोड़ी देर बाद मैंने सुना अर्पित के रूम से टीवी से अजीब सी आवाजें आ रही थीं- आहह अहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… यासस … याअसस्स.

वो अपने हाथों से मेरी गर्दन को पकड़ कर अपने लंड पर मेरे मुंह को ऊपर-नीचे करने लगा. मैं बोला- दीदी जब तक तुम खुद नहीं कहोगी, मैं कुछ भी जबरदस्ती नहीं करूंगा. उसकी गर्म सी चूत की गर्मी मुझे जांघ पर महसूस हुई और मेरे शेर ने अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी.

త్రిబుల్ ఎక్స్ డాట్ కాంवो भी गालियाँ बके जा रहा था- रंडवी साली … तेरे भोसड़े में मेरा लोड़ा … तुझे आज घोड़ी बना दूंगा, तेरी चुत चोद चोद कर फाड़ दूंगा, तेरी गांड मार दूंगा. फिर हम दोनों तैयार हो गये और मैं उसको स्टेशन पर छोड़ कर वापस घर आ कर सो गया.

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उसकी चूत को चोदते हुए मैं देख रहा था कि उसके चूचे यहां-वहां जा रहे हैं. मेरा 2 इंच लंड उसके मुँह में चला गया और उसने डरकर तुरन्त मुँह से लंड को बाहर निकाल दिया. इस सब को पूरे विस्तार से लिखने का मन है, इसलिए आपको ये सब अगले भाग में लिखूंगा.

उसके मुरझाए लंड को देख कर मैं समझ गई कि वह अब चूत चोदने लायक नहीं रहा. काफी देर तक और अच्छे से मालिश करने के बाद उसने गप्प से लंड को अन्दर लिया और अपनी दोनों हथेलियों को मेरे सीने पर रखते हुए धक्के लगाने लगी. उसने आंखें बंद कर ली और मेर सर पकड़ कर अपनी चुत पर झुकाने लगी और बोली- चूसो मेरे भोले राजा … मुझे भी मजा दो!मैंने भी उसकी चुत को चूसना शुरु कर दिया.

जब मैंने उसे छोड़ा, तब उसने आखिरी घूँट गटक कर चिहुँक के ऐसे सांस ली, जैसे उसकी जान में जान आयी हो. मैं उसका लंड गले तक ले रही थी और वो मेरी चूत और गांड को अपनी जीभ को नुकीली करके अन्दर तक चाट रहा था. मैंने भाभी के चूचों को जोर से दबाना शुरू कर दिया और जल्दी ही भाभी गर्म हो गई.

मैंने कहा कि मुझसे छुपाने की कोई जरूरत नहीं है, आखिर हम स्कूल के समय के साथी हैं. मैं जिम करता था इसलिए मुझे वजन उठाने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी.

अपने लंड से इसको चोद कर शांत कर दो राज … प्लीज!मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को सेट किया और धक्का देकर एक ही झटके में पूरा लंड उसकी टाइट सी चूत में फंसा दिया.

10 मिनट मेरी गांड चोदने के बाद उसने अपना माल मेरी चुत में भर दिया और उठ कर अंदर चला गया. www.com देहाती सेक्सी वीडियोदो तीन बार ऐसा करने के बाद मुझे मजा आने लगा, तो मजे के लिए मैं तुम्हारे जिस्म से चिपक जाती. ব্লু ফিল্ম দীক্ষাওफिर बारी आयी उस चीज की जिसकी कल्पना करना किसी लड़की के लिए बहुत मुश्किल होता है. उसने मुझे घुटनों के बल कर लिया और मेरी गर्दन को पकड़ कर अपने लंड पर मेरे मुंह को रख दिया और दबा दिया.

बात शुरू करने के लिए मैंने पूछ लिया- ये केक किसके लिए है?सायमा मुस्कुराते हुए बोली- आज मेरा जन्मदिन है.

उसके ब्लाउज में भरे हुए चूचे देख कर मैं उन पर टूट पड़ा और उनको ब्लाउज के ऊपर से ही जोर से भींच दिया. फिर वो बोले- अब तू मेरी बीवी की तरह मेरे पास आकर बैठ और बोल कि मेरी कमर में मोच आ गई. हालांकि वसुन्धरा की पलकें तो झुकी हुई थी लेकिन आवाज़ में हल्की सी सत्तात्मक लरज़ बता रही थी कि शेरनी वापिस चैतन्य हो रही थी.

नम्रता- अरे मेरे राजा, तुम उड़कर आ जाओ और अपना लंड मेरी चूत में पेल दो. हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और जल्दी से घर जाने की तैयारी करने लगे. इससे पहले मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा, जिन्होंने मेरी स्टोरीप्यासी भाबी निकली लंड की जुगाड़को पसंद किया.

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वो मेरे लंड को पकड़ना तो चाहती थी लेकिन शर्म के मारे पूरे तरह से खुल नहीं पा रही थी. फिर मैं अपने लंड पर भी क्रीम लगा ली और धीरे से उसकी चुत पर रखकर रगड़ने लगा. अपनी सारी उत्तेजना को मोनी की चूत में उगलने के बाद मैंने उसे छोड़ दिया और करवट बदलकर अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया।उसके बाद पता नहीं मोनी ने क्या किया और क्या नहीं … मगर शराब के नशे के कारण मुझे कुछ देर बाद ही नींद आ गयी।कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.

वैसे ये कहानी मेरी अम्मी बारे में है, इस कहानी में मैंने अपनी अम्मी के अकेलेपन का इलाज ढूंढा है.

जैसा रानी ने आदेश किया था, वैसे मैंने लंड बाहर निकाला तो, कितना खींचना है उसका अंदाज़ा सही न होने के कारण, वो पूरा का पूरा सड़प्प की आवाज़ से रानी की बुर से बाहर हो गया.

मैं- अंकल, आपसे एक बात कहूँ, आप बुरा तो नहीं मानोगे?अंकल- नहीं उस्मान … बोलो क्या बात है?मैं- अंकल, आपको मेरी अम्मी कैसे लगती हैं. मैंने जब उसकी चुत को देखा तो पाया कि मेरा लंड का सुपारा पूरी तरह से बहन की चुत में चला गया है. आज का कुमकुम भागतो मैं उनके पास आया और सुमेर से बोला- ये तुम क्या कर रहे थे? मुझे भी करना है, नहीं तो मैं शोर मचा दूंगा.

”तो वो हँसते हुए बोले- अब देख लो मेरे शरीर को!उनके शरीर के सामने तो मैं बिल्कुल बच्ची लग रही थी. कुछ देर बाद उसने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया और मेरी प्यासी चूत को चाटने लगा. तुम कितनी देर में पहुंच रही हो?मैंने कहा- ठीक है, अभी तो मैं जीजा के साथ चित्रकूट के लिए निकल रही हूं.

सुमन का हाथ मेरी चूत पर आकर उसको सहलाने की कोशिश कर रहा था और मैं जैसे सुमन के जिस्म में घुस जाना चाहती थी. उस सब के बाद तो मुझ में और वसुन्धरा में इतना फ़ासला बढ़ गया है कि वसुन्धरा को मुझ से बात किये भी मुद्दत हो गयी है.

फिर मैंने बोला- मिलवा दे यार इन दोनों से … मुझे तो बस चूत का कचूमर निकलवाना है इनके लौड़ों से.

चूत रस से लबाबाब भरी हुई थी इसलिए लंड फिसलता हुआ पूरा भीतर जा घुसा जब तक कि सुपारा बच्चेदानी से लग के रुक नहीं गया. तुम्हारी बेटी भी कैसी है … दुनिया में इतने सारे लंड हैं लेकिन इसने अपनेबाप से ही चूत चुदवा ली. उसकी बहन से मेरी ज्यादा बात-चीत नहीं हुई मगर उसकी बेटी मेरे साथ काफी घुल-मिल गई थी.

रविवार की छुट्टी पर निबंध जब मैडम मेरे पास एग्जाम शीट लेकर आई तो पंखे की हवा से वो शीट नीचे फर्श पर गिर गई. मैंने कहा- मगर मैंने तो फोन पर सुना था कि तू मामा के लड़के राज से चुदने के लिए हेतल के साथ सेटिंग कर रही है.

ज़ाहिर सी बात थी कि काजल के बाद सुमिना घुसने वाली थी और सबसे आखिर में मैं. रितेश सब जान चुका था कि मैं चुपके से छिप कर जीजा-साली की चुदाई देख रहा हूं. मैंने विक्की को निहारिका को किस करने व चूचियां दबाने का इशारा किया.

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मैं भी तेजी से धक्के लगाने लगा और 5-7 झटकों में मैं भी अनुषी की चुत में ही झड़ गया. नींद में ही मैंने उसकी तरफ करवट ली तो मेरा लण्ड उसको जांघ से छूने लगा. उसके इतना बोलते ही मैंने उसके होंठों पर अपना होंठ रख दिए और उसके मम्मे दबाते हुए उसके होंठ चूसने लगा.

उस दिन के बाद मौसी का बर्ताव भी बदल गया … हमने कभी मौसी के घर में, तो कभी मेरे घर में, तो कभी खेत में जम कर चुदाई का मजा किया. छोटा लंड भी आपको भरपूर आनंद दे सकता है बशर्तें अगर आपके और आपके पति के बीच कॉर्डिनेशन होगा तो।अब बात आती है मेरे लंड की तो आपने अगर मेरी पूरी कहानी पढ़ी हो तो उसमें मैंने अपने लंड के साइज का जिक्र किया है किंतु फिर भी बता देता हूँ कि मेरा लंड 6 इंच का है। आप मन से यह धारणा निकाल दो.

पेशे-ख़िदमत है एक अद्धभुत प्रेम-कथा के बीज के सालों पहले धूल-धूसरित होने और फिर कालांतर में उसमें से अंकुर पल्लवित होने से लेकर फ़ल के पकने और उस फ़ल की अद्धभुत लज़्ज़त चखने तक की … कच्चे-पक्के जज़्बातों और आधे-अधूरे अहसासों की पूरी दास्तान.

उसने भी मेरी जिप खोल कर मेर लंड पर कब्ज़ा कर लिया और उसे नापने की कोशिश करने लगी. उसने मेरे लंड को हाथ में लेकर ज़ोर से दबा दिया और फिर लंड के ऊपर एक के बाद एक कई किस कर दिए. मैंने सही समय समझ कर पहले उसकी ब्रा और फिर पैंटी को उसके शरीर से अलग कर दिया.

मैं भी कभी-कभी अपनी गांड उठा कर उसका पूरा साथ दे रही थी और हम दोनों लोग बड़े मजे से सेक्स कर रहे थे. भाभी के मुंह से अंदर ही उम्म्ह… अहह… हय… याह… की दबी हुई सी आवाज आ रही थी. मैं वनिता से बोली- अकेली आई हो, तुम्हारा ठोकू किधर है? मुझे क्या करना है?वो बोली- हां यार, वो आने वाला है.

जब मैं उससे मिलने जाता, वो इतना खुश होती कि मानो वो वर्षों से मेरा वेट कर रही हो.

बीएफ दीजिए बीएफ सेक्सी: वर-वधू की कुंडलियाँ तो मिलाई जाती हैं लेकिन वर-वधू की मानसिक-अनुकूलता की किसी को कोई परवाह नहीं रहती. इस बार चुदाई वाली पार्टी रखो, कोई लौंडिया हो, तो बुला लो, उसी के साथ दोनों भाई मस्त दारू पी पी कर रात भर चुदाई करेंगे.

उनके अंदर गजब की ताकत थी, अपने मोटे सख्त बाजुओं से बॉस ने मुझे जकड़ रखा था. मैंने बहुत प्यार से उसके हाथों को हटाया और उसकी चुचियों को अपने मुँह में लेकर जोर से चूसने लगा. उसने मुझे फ्रेश होने के लिए कह दिया और बोली कि तब तक मैं खाना लगा देती हूँ.

अब मुझे उससे चुदवाने में डर भी नहीं लग रहा था और हम दोनों लोग आराम से सेक्स कर रहे थे.

मैंने स्माइल दे दी।उसके दोस्त के आने के बाद उसने मुझे तैयार होने को कहा. तय कार्यक्रम के अनुसार शनिवार को सुबह सात बजे मैं और डॉली लखनऊ के लिए निकल पड़े, रास्ते में चाय नाश्ता करने के बाद लगभग नौ बजे डॉली के सेन्टर पहुंच गये. मेरी यह कहानी सोनम जी की प्रथम चुदाई की है जो उन्होंने मुझे संक्षेप में सुनाई थी जब हम मिले थे और मुझसे आग्रह किया था कि मैं उनकी इस सत्य कथा को अपने शब्दों में विस्तार से लिख अन्तर्वासना पर प्रकाशित करवा दूं.