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जैसे ही हम घर पहुँचे तो मम्मी और पापा ने हमें खाने के लिए बुलाया मगर मुझे भूख नहीं थी इसलिए मैंने मना कर दिया और मैं सीधा अपने कमरे की तरफ चल दिया.फिर मम्मी ने कहा- जब तक यह मर्दों के ड्रेस में है, ऐसा नहीं हो सकता… साली को साड़ी में चोद सकता हूँ मैं.

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लेकिन अब तक तो मैं बेताब हो गया था और मेरा मन लड़कियों के कपडे पहनने को करने लगा तो मेरे अन्दर की लड़की पूरी तरह से ज़िंदा हो गई.

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वीरवार को जब मैं कॉलेज से वापिस आया तो मम्मी बोली- बेटा! तुम्हारे दोस्त योगी का फोन आया था. मैं अगले दिन सुबह 8 बजे छत पर जाने वाला था पर कोहरा होने के कारण मैं 9-30 पर छत पर गया…अपनी नहीं रक्षिता की. अभी मुझे 2-3 दिन ही हुए थे कि भैया की साली आने वाली थी और भैया कोई काम की वजह से स्टेशन नहीं जा पा रहे थे तो उन्होंने मुझे स्टेशन जा कर मेघा (भैया की साली) को लाने के लिए कहा.

जैसे ही हम घर पहुँचे तो मम्मी और पापा ने हमें खाने के लिए बुलाया मगर मुझे भूख नहीं थी इसलिए मैंने मना कर दिया और मैं सीधा अपने कमरे की तरफ चल दिया. इससे मैं भी और जोश में आ गया और मैंने भी उनकी टी-शर्ट और जीन्स निकाल दी और पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत रगड़ने लगा जिससे वो झड़ गई और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया. जैसे ही मैंने दरवाजा बजाया तो योगी की छोटी बहन आयशा ने दरवाजा खोला, सुबह का वक्त होने की वजह से बाकी सारे सोये हुए थे तो मैं आयशा से बात करने लगा.

ही निकला।फिर मैंने कहा, तुम्हारी मध्यमा (बीच की) उँगली मापो। जब उसने नापी तो वह 9 से. ??मैं : गाली मत दे मेरे सामने…उसने जो किया उसका जवाब भी मैंने उसे दे दिया…वेदांत : क्या जवाब दिया तूने वो मैंने भी देखा.

मैं उसके ऊपर चढ़कर उसके चुचे दबाने लगा और अपना लण्ड फिर से उसके मुंह में डाल दिया, तान्या बिल्कुल एक रण्डी की तरह मेरा लण्ड चूसे जा रही थी.

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मैं पहली मर्तबा जीती जागती चूत के अन्दर अपने लंड को महसूस कर रहा था…वो अनुभूति अभी भी मुझे याद है…चूत की गीली, नर्म, गर्म सतह से लंड के जकडे होना ऐसे लग रहा था जैसे कि मैं सातवें आसमान में पहुँच चुका हूँ और आनंद के समुन्दर में गोते लगा रहा हूँ…धीरे धीरे कशिश का दर्द गायब हो गया…और वो मेरा साथ देने लगी.

प्रेषक : शशांक रावतसभी प्यासी चूत-मरियों को मेरे गीले लौड़े का सलाम ! मेरा नाम शशांक रावत है, मैं कक्षा 12 का छात्र हूँ। मैं अन्तर्वासना डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ। आप लोग सोच रहे होंगे कि मैं इतनी छोटी उम्र से अन्तर्वासना डॉट कॉम के बारे में कैसे जानता हूँ … असल में मैं बिगड़े बाप की सुधरी औलाद था … मेरे बाप को अन्तर्वासना डॉट कॉम की कहानियाँ पढ़ने का शौक है …. उसकी चूत मोटी और कसी थी और वो पूरे जोश में थी- सेक्स के चरम पर।मैंने ऊँगली करना जारी रखा, वो जोर जोर से उचक रही थी और धीरे धीरे बोल रही थी- फक मी फक मी …इतने में मुझे अहसास हुआ कि कुछ गीला गीला. हमने एक दिन तय किया पहली बार मिलने का और साथ में मूवी देखने जाने का।फिर दिए हुए समय पर हम मिले और मूवी देखने गए.

काम की बात बोल…!!!मैं: तो मैं सोच रही हूँ कि प्रार्थना और साक्षात्कार हाल, प्रधानाचार्य के कक्ष के सामने हैं और तीसरा क्रियाकलाप हाल उनके कक्ष के ठीक पीछे… ऐसे में वहाँ पर कोई बच्चा नहीं फटकता…तो हम क्या करेंगे कि. थोड़ी देर में उनका शरीर ऐंठने लगा और मुझको भी लगा कि मेरा माल निकलने वाला है, मैंने अपना लंड उनकी चूत से जैसे ही निकाला, उनकी पिचकारी छूट गई, वो झड़ चुकी थी, मैंने अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया, फिर दो तीन झटकों के बाद मेरा सारा माल उनके मुँह में निकल गया. ? मैंने पूछा तो पिंकी ने कहा- कॉलेज को छुट्टी है तो तुम्हारे साथ कुछ खेल खेले ऐसा सोचकर हम चली आई ! तू भी तो अकेला है…क्या खेलें….

उसके बाद मैंने भी कोई जल्दी ना करते हुए आराम से उसकी साड़ी उतारी और उसको ब्लाऊज़-पेटीकोट में कर दिया.

मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सारी कहानियाँ पढ़ी हैं और अब मैं अपनी कहानी भी भेज रहा हूँ. अगली रात को मैंने उससे कहा- चल कुछ सेक्स हो जाये!तो वो बोली- नहीं!मैं- क्यों? तू तो मुझसे प्यार करती है फिर क्यों नहीं?शालू- मैं गन्दा काम नहीं कर सकती.

बीएफ मूवी मराठी मैंने भी कई बार मुठ मारा था पर उसके कोमल कोमल होंठों और हाथों से मुठ मरवाने में अलग ही मज़ा आ रहा था. उसके बाद मैंने अपना लंड चित्रा की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अंदर करने लगा पर अंदर जा ही नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी चूत कुँवारी थी.

बीएफ मूवी मराठी मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था… मैंने कहा प्लीज़ राहुल मुझे अब लण्ड चाहिए तुम्हारा… अपना लण्ड डालो मेरी बुर में. आपकी बाइक देख कर मैं समझ गई थी कि आप आ गए हैं!” राधा मुस्करा कर बाजार का सामान एक तरफ़ रख कर मेरे पास सोफ़े पर आ कर बैठ गई.

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मैं फिर उन दोनों की बातों में शामिल हो गया, बातों ही बातों में पता चला कि वो लड़का तो ज्योति का बॉयफ़्रेंड है. वो भी मेरा साथ दे रही थी पूरी तरह !उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गई थी- अम्म म्मम्म उफ़्फ़ अम्फ़ जैसी आवाज़ें करने लगी. जो शायद मेरे लिए बयां कर पाना भी बहुत मुश्किल है… शायद एक या फिर दो मिनट ही चला होगा… पर उस खूबसूरत एहसास को लिखना… उफ्फ्फ्फफ्फ़हमारे चुम्बन के बीच जैसा सब कुछ रुक गया.

मैं उसकी क्लास में जा पहुंची और उसकी अध्यापिका के पास जाकर बोली- वेदांत को मिस मोनिका बुला रहीं हैं…!!!वो मेरे साथ बाहर आया.

”जी, मैं विजय को बोल कर रात को आ जाऊँगी…”शाम को ही कोमल घर आ गई, साथ में अपना नाईट सूट भी ले आई… उसका नाईट सूट क्या था कि बस… छोटे से टॉप में उसके स्तन उसमे आधे बाहर छलक पड़ रहे थे. फिर उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा और जीभ से चोदने लगा।थोड़ी देर बाद उसने बोला- जान, मेरे नीचे कुछ निकल रहा है ! मैं उसका पूरा पानी चाट गया, कितना स्वादिष्ट पानी था. उसने बिना दरवाजा खोले आई-होल से देखा तो मेरे बॉस बाहर खड़े थे… वो समझ गया की ये भी यहाँ रूबी को पेलने आए हैं… फ़िर उसने आकर मुझ से कहा- तेरे बॉस हैं…फ़िर आगे कैसे मेरे बॉस ने मुझे चोदा और राहुल ने कैसे उनका साथ दिया… कैसे मेरा अगली तरक्की हुई अगले महीने में और राहुल ने कैसे मेरी बुर का सौदा कर के तरक्की ली पढ़िये अगले हिस्से में…आपकी रूबीमुझे लिखें[emailprotected]0439.

तभी मैंने अमिता को खड़ा किया और घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा और शालू भी अब लण्ड मांगने लगी. सभी के जाने के बाद मैंने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया और सोनम की तरफ देखा तो सोनम के चेहरे पर एक शर्म थी जो मुझे बहुत अच्छी लगी. शायद ज्योति ने उससे पहले कभी गाण्ड नहीं मरवाई थी, मगर मैंने उसकी एक भी ना सुनी और उसके दोनों चूतड़ों के बीच में अपना लण्ड घुसाने लगा.

जब मैंने यह बात योगी को बताई तो योगी मेरा मजाक उड़ाने लगा और बोलने लगा- लगता है अब तो मुस्लिम भाभी आएगी!मैं बस में बैठ गया और योगी मेरे पास बैठने के बजाए कहीं और बैठ गया. मत कर… वो उछल पडी… क्या गोरी और चिकनी गांड थी उनकी।अब उन्होंने मुझे भी निर्वस्त्र कर दिया… आअह्ह ऊओ इतना बड़ा और मोटा… बाप रे… तभी तो रश्मि को दो-तीन दिन तक दर्द हुआ…‘उनकी बात छोड़ दो भाभी! लेकिन आपको तो यह अच्छा लगेगा।’ मैंने फ़िर से उन्हें दबोच लिया.

लेकिन अचानक दीपू ने मेरे मुंह में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और मेरा सर पकड़ कर अपना पूरा लंड मेरे मुंह में अन्दर बाहर करते हुए ज़ोर से चिल्लाने लगा ‘आ…ह…. बहुत मोटा है…मैंने उसके स्तन को दबाते हुए उसे प्यार किया और लंड को अन्दर धकेलता रहा. अंकल मम्मी से बात करते करते उन्हें कुछ इशारा कर रहे थे पर मैं समझ नहीं पाया कि दोनों में क्या इशारेबाज़ी चल रही है.

मैंने उसके होंठो को चूमा और अब मैंने आहिस्ता-आहिस्ता लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

जीजू तो मेरी चूत की सील तोड़कर चले गए थे लेकिन उसके बाद मेरी क्या हालत हुई वो मैं आपको बताती हूँ. इसका कारण ये था कि मेरी माहवारी ख़तम हुए अभी एक ही दिन बीता था और जैसा कि आप सब लोग जानते हैं ऐसे दिनों में चूत की प्यास कितनी बढ़ जाती है. मैं कुछ कहता इससे पहले चित्रा ने कहा- मैं तुमसे प्यार करती हूँ!और यह कह कर उसने मुझे गले लगा लिया.

इसीलिए समझे मेरे प्यारे अन्नू !मैंने कहा- ठीक है ! मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा !फिर हम दोनों ने एक दूसरे से लव यू ! लव यू ! कहा, फोन पर एक दूसरे को चूमा भी, और फोन रख दिया !फोन रखने के बाद मेरे दिमाग में दूसरे दिन के लिये कुछ शरारतें घूमने लगी. सुनील- अच्छा बाबा, जैसे तुम ठीक समझो … कम से कम मेरे फ्लॅट में जाने में तो तुमको कोई दिक्कत नहीं है … या वहाँ के लिए भी कोई बहाना सोच कर रखा हुआ है?सोनिया- तुम्हारा फ्लॅट!सुनील- हाँ मेरा फ्लॅट, अब ज्यादा आना-कानी मत करो … चुपचाप चलो अगर नहीं डरती इन चीज़ों से तो ! और अगर डरती हो तो तुम यहीं रहो … पर काम के सिलसिले में जिंदगी में किसी भी तरह की आगे कोई मेरे से मदद की उम्मीद मत करना.

उन की इस हरकत को देख मैंने उन्हें अपने ऊपर खींच लिया, अपनी बाहों में समेट लिया और उन की चूचियाँ दबाता, चूमता तो कभी उन की ग़ाण्ड पर हाथ फेर उसे दबाता. ” इस संक्षिप्त से उत्तर से शायद वो लोग खुश नहीं हुए।खैर, उस समय तो वो दोनों इन्हें घर छोड़ कर चले गए पर आते-जाते मुझ पर बुरी निगाहें डालते रहे। जब भी मौका मिलता कहते, आह! तेरी चढ़ती जवानी और बूढ़े का साथ…छीई. बस ऊप्पर ऊप्पर मज़ा देवे अन्दर कुछ णी … आज बी मैं तरसूं हूँ … बोहोत जी मै आवे केर कियां मर्द सै चोदे लगवाऊँ …मैं : फिर.

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नहीं कहूँगा…”अच्छा बताओ तुम्हारी बहन है?”हाँ मैम… है ! एक बड़ी बहन है !तुम उसे भी ऐसे ही देखते हो? उसकी चुंचियां भी ऐसी हैं…मेरे जैसी?”नहीं मैम… वोऽऽ उसकी तो आप आपकी आपसे छोटी हैं… ” रोहित शरमाते हुए बोला।तुम्हें कैसे पता.

मुझे उसकी टेंट के अन्दर से केवल परछाई नज़र आ रही थी लेकिन वो परछाई भी इतनी कातिल थी जिसकी कोई हद नहीं. ‘ऐ चुप… ये क्या रण्डी की तरह बोलने लगी…’‘सच में जीजू… अब बस कर ना!’ मैं रुआंसी हो कर विनती करने लगी. ‘आआह्ह हा आदित्य आह्ह्ह्ह्…’लेकिन मेरा सिर उन्होंने अपनी छाती पर दबा लिया। ऊऊफ़्फ़ धीरे! इतने ज़ोर से मत दबा!’मैंने कुछ सुना नहीं, बिस्तर पर धकेला… उनके पैर नीचे लटक रहे थे…मेरा तो लंड अब बेकाबू होने लगा….

कई बार तो रीटा सबके सामने सबकी नजरें बचा कर राजू से घोड़ा घोड़ा खेल खेल कर अपनी उधड़ी सलवार में से ही राजू का लण्ड अपनी चूत में सरका लेती थी. वो अब वहाँ पीने लगा है…शायद दो चार अन्ग्रेज़नों के साथ हमबिस्तर भी हो चुका है पर मैं आज भी उसे चाहती हूँ. हिंदी सेक्सी पिक्चर देवर भाभीमम्मी 5 दिनों तक नहीं आई तब तक रोज़ वो अपना कॉलेज गोल करके मुझसे चुदवाने आती रही। रोज़ मै उसकी जम कर चुदाई करता था….

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अनिल जब भी अपनी जीभ मेरी चूत में घुसता तो मैं मचल उठती और आगे होने से सुनील का लौड़ा मेरे गले तक उतर जाता. उसकी अण्डरवीयर शायद ठीक नहीं थी सो उसने उतार कर पेशाब किया और सिर्फ़ अपनी सफ़ेद निकर को ढीली करके बिस्तर पर लेट गया. आलोक का हाथ धीरे धीरे अब मेरी पूरे हाथ और कलाई पर रेंग रहा था।‘हाँ! मैं हफ्ते में दो बार ब्यूटी पार्लर जाती हूँ…’मुझे अब आलोक का सहलाना और अच्छा लग रहा था.

ऐसे घुट घुट कर प्यार करने से क्या मजा आएगा।मैं भी अब अपने आप को रोक नहीं सकती थी…मैंने अपनी बांहें उसके गले में डाल दी… फिर तो जैसे वो पागल हो कर मुझे चूमने चाटने लगा…मैं बहुत दिनों से प्यासी थी… मुझे भी ऐसे ही प्यार की जरूरत थी जो मुझे मदहोश कर डाले और मेरी चूत की प्यास बुझा दे. शायद उसने ऐसा पहले इसीलिए नहीं किया क्यूंकि मैं उसके साथ हर समय रहती थी… और हमारे प्रेम संबंधों की अफवाह से सभी लड़कियाँ उससे दूर भागती थी और मुझे भी कोई लड़का आंख उठा कर नहीं देखता था…उसके लिए यह एक मौका था और दोस्त बनाने का. नाज़ुक-नाज़ुक नर्म हाथ और पांव, छातियाँ खूबसूरत और जवानी से सरशार जैसे मौसम-ए-बाहर में कोई ताज़ा कली अपना सिर उठाए तन कर ठंडी हवा में झूमती है ऐसे ही मेरी नाज़ुक और हसीन छातियाँ ज़रा सी जिस्मी तहरीक पर जाग उठती और तन कर यूँ खड़ी हो जाती जैसे कह रही हों कि.

फिर एक दिन मुझे कहीं काम से बाहर जाना था, तो उसने मुझे एक जगह छोड़ने को कहा तो मैंने उसको हाँ कर दिया.

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जब हम बहुत उत्तेजित हो जाते थे तो मेरा लण्ड कोमलता से सहला कर मेरा वीर्यपात करवा देती थी.

अरे गौरी, अंकल से कह ना कि छोड़ दे मुझे!” राधा के स्वर में इन्कार से अधिक इककार था. मेरी नज़र उसकी चूचियों से हट ही नहीं रही थी, उसके गोरे गालों को चूमने का मन कर रहा था. जब चार-पाँच बार के बाद कोई ऑब्जेक्शन नहीं हुआ तो मुझे लगा या तो यह इग्नोरेंट है या फिर घुटी हुई है।जो भी हो.

सील पैक एचडी बीएफमैंने फिर अपने घर पर फोन मिलाया और बोल दिया कि मैं 3-4 दिन तक योगी के घर पर रहूँगा. पूछने पर पता चला कि मनीषा और बुआ आज हमारे घर आ रहे थे क्योंकि मनीषा को लड़के वाले देखने आने वाले थे इसलिए भाभी ने छुट्टी ले ली थी.

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हम दोनों एक दूसरे से लिपट पड़े। दोनों की बाहें कस गई। काम रस चूत के द्वार से पांव के सहारे नीचे बह चला। मैं आभा के गालों और होंठो को चाटने लगा। उसके मुझे झटके दे कर दूर किया।आपके लण्ड में जोर है …. मेरी गांड में जैसे गरम गरम लावे का सैलाब आ गया हो! मैं जमीन पर गिर गई और मुकेश मेरे ऊपर!कहानी का अगला भाग: मैं फिर से चुदी-3. इसको पहले मुँह में लेगी या इससे पहले तेरी सील तोड़ूँ?मोना कुछ भी नहीं बोली और उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया…यह देख अब्बास को बहुत गुस्सा आया और उसने झुक कर मोना के दोनों मम्मों पर अपनी जीभ रगड़ी… इस हमले से मोना के मुँह से मादक कराहें निकलनी शुरू हुई… मोना ने बोला- नहीं… ऐसा … मत…कर !मोना बेचारी तो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी ….

जहाँ सिग्नल थोड़ा ठीक था।सोनिया- हेल्लो… हेल्लो… कोई है क्या?समीर- मैडम, मैं समीर !सोनिया- समीर, कहाँ थे तुम लोग… मैं कब से सिग्नल दे रही हू… तुम्हारी तरफ से कोई भी जवाब नहीं आ रहा था।समीर- सॉरी मैडम, यहाँ पर सिग्नल की परेशानी थी।सोनिया- हाँ, जल्दी से यहाँ आ जाओ ! मुस्तफा यहीं पर है और मैंने उसको बेहोश कर दिया है… जल्दी से यहाँ पहुँचो बाकी लोगों को लेकर. मैं चुपके से उस घर चली गई जहाँ भाई ने सिर्फ दोस्तों के रुकने का इंतजाम किया हुआ था. मैं थोड़ी देर तक उनको मसलता रहा, फिर मैंने उसके चुचूक अपने मुँह में ले लिए और उनको पीने लगा.

मेरा घर सबसे पहले था इसलिए वो मुझे सबसे पहले लेता और स्कूल से आने के बाद छोड़ता भी सबसे बाद. उसने फिर से मेरे बदन को अपनी बांहों में ले लिया… मैं भी उसकी बांहों में सिमट गई… उसका बड़ा सा लण्ड मेरी जांघों के साथ टकरा रहा था जैसे मुझे बुला रहा हो कि आओ मुझे अपने नाजुक होंठों में भर लो…वो मजदूर अपनी टाँगें फैला कर चारपाई पर बैठ गया, मैं उसके सामने अपने घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई. मैंने कहा- क्यों?उसने कहा- ऊपर से चाहे जो कर लो, पर अंदर नहीं!मैंने पूछा- क्यों? अंदर क्यों नहीं?तो उसने कहा- बस ऐसे ही!मैं ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराता रहा पर मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैंने उसे कहा- मेरा लण्ड तो पकड़ ले!उसने पजामे के ऊपर से ही लण्ड पकड़ कर सहलाया.

मैंने उसे शांत रहने का इशारा किया, फिर मैंने फ्लश चला दिया ताकि बाहर वाले को लगे कि अंदर कोई है. खैर, जहाँ चाह वहाँ राह!वीना आंटी ( अमित की पत्नी ) कुछ दिनों के लिए अपने मायके गई.

उसके बाद मैंने भी कोई जल्दी ना करते हुए आराम से उसकी साड़ी उतारी और उसको ब्लाऊज़-पेटीकोट में कर दिया.

जब मैं स्नातकी में था तब मेरी दोस्त की बहन १२ कक्षा पास करने के बाद मेडिकल प्रवेशिका परीक्षा देने की तैयारी कर रही थी. बीएफ गाने मेंआँखों में चमक… शरारत भरी कातिलाना मुस्कान से वो अपनी कक्षा की कई लड़कियों के दिलों पर राज करने लगा…यहाँ तक कि हमारे अलग होने की खबर के कुछ ही महीनों बाद उसे एक लड़की ने एक प्रेम पत्र लिखा. सेक्सी ब्लू पिक्चर वाला!तभी भाभी ने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्ल-फ्रेंड है?तो मैंने कहा- है तो भाभी!तो उन्होंने पूछा- तुम उससे मिले भी हो या सिर्फ़ फोन पर ही बात करते हो?तो मैंने कहा- भाभी मिल ही नहीं चुका, उसके साथ कर भी चुका हूँ. रीटा की बल खाई नागिन सी पतली कमर के नीचे रीटा के सरसराता यौवन का रस रीटा की गाण्ड को गीला करके टिप टिप कर टपकने लगा और फर्श को गीला करने लगा.

मेरा तो लण्ड निहाल हो गया तेरी और तेरी माँ की चूत में जाकर…”बहनचोद बोल मत बस जोर जोर से धक्के मार.

उसने मुझे सीधा किया और अपने दोनों होठ मेरे होंठों पर रख दिए और उन्हें बेदर्दी से चूसने लगा. पहले तो मैंने उन्हें डांटा लेकिन फिर हँसते हुए मैंने भी उनके साथ जल्दी से एक बड़ा सा पैग लगा लिया. उसके हाथ में कोई किताब थी और उसके पैर पिंडलियों तक खुले हुए थे… खाली गाउन पहनने के कारण उसके बड़े बड़े मम्मे एक तरफ लटक रहे थे.

उसकी सिसकारियाँ सुन-सुन कर मेरा जोश बढ़ जाता और मै उनको ज्यादा जोर से दबा-दबा कर चूसने लगता. ये सोच कर मैंने उनको डराते हुए कहा ‘ठीक है मैं तुम लोगों को केवल आधा घंटे का समय देती हूँ तुम लोग जल्दी जल्दी अपना काम करो और यहाँ से निकल जाओ और अब कोई और इस कूपे में नहीं आना चाहिए. !?मैं : आपको कैसे पता कि मेरे वहाँ बाल हैं…???मम्मी : मेरे भी हैं… सभी के होते हैं…!!!मैं : पर आप तो वहाँ कंघी नहीं करती…???मम्मी : तू कंघी करती है क्या.

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तुम भी एक नंबर के लड्डू गोपाल ही हो। मुझे कोई शादी वादी नहीं करनी मैं तो किसी ढंग की आसामी की तलाश में हूँ। अगर कोई अक्ल का अँधा और गाँठ का पूरा (मालदार फुद्दू) मिल गया तो मजा इच आ जाएगा जैसे…… ऐलिश ?” कहते हुए राखी खिलखिला कर हंस पड़ी।मैं क्या बोलता मैं तो सोचता ही रह गया ये टीवी वाले भी कैसे कैसे टोटके आजमाते हैं अपनी टी. इसको पहले मुँह में लेगी या इससे पहले तेरी सील तोड़ूँ?मोना कुछ भी नहीं बोली और उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया…यह देख अब्बास को बहुत गुस्सा आया और उसने झुक कर मोना के दोनों मम्मों पर अपनी जीभ रगड़ी… इस हमले से मोना के मुँह से मादक कराहें निकलनी शुरू हुई… मोना ने बोला- नहीं… ऐसा … मत…कर !मोना बेचारी तो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी …. मन ही मन मैं भी उसकी बहुत इज्जत करने लगा था क्योंकि उसने मुझ पर भरोसा रखा और मेरे घर आई.

‘तो अब मैं जाता हूँ, राधा की इच्छा पहले है… इनकी जब इच्छा हो मुझे मोबाईल पर बता दे!’ मैंने भी नखरा दिखाया.

‘ऐ चुप… ये क्या रण्डी की तरह बोलने लगी…’‘सच में जीजू… अब बस कर ना!’ मैं रुआंसी हो कर विनती करने लगी.

तेरी फ़ुद्दी नहीं फड़क रही क्या………सोमा ने मुझे देखा और कमल से बोली- पकड़ इसको………कमल ने तेजी से लपक के मुझे पकड़ा और घसीट के वहीं पटक दिया……मैं कराह उठी…. मैंने कहा- ज्योति तो सो रही है और वो सात बजे से पहले नहीं उठेगी!तो आयशा मान गई और मैं योगी के पापा के कमरे में गया और वहाँ से दो कंडोम उठा कर ले आया ताकि आयशा को चोदने के बाद मुझे अपना लण्ड जल्दी में बाहर ना निकलना पड़े. बीएफ चोदी चोदा सेक्सी पिक्चरसोमा ने भी अपनी चूत मेरे मुँह की तरफ कर दी और बोली- चाट इसको रंडी…मैं तो मस्ती में आ गई थी….

पर आजकल तो प्यार को सिर्फ जिस्मानी मिलन का रूप दे दिया है…उसकी रश्मि वाली बात सुन कर मुझे उसकी कोई बात सुनाई नहीं दे रही थी … मन ही मन मैं रश्मि को कोस रही थी. मामी पूरा लो! खा जाओ! मैं तो झड़ने वाला हूँ ऽऽ!!और एक जोरदार धक्का लगाकर मैं उनके मुँह में झड़ गया. मैं अपने मम्मी-पापा और अपनी बड़ी बहन के साथ कोलकाता में एक किराये के मकान में रहता था.

तो मैं उसके साथ बैठ गई।वैसे भी लड़का इतना सेक्सी था कि उसको मना करना मुश्किल था। रास्ते में उसने अपना नाम अनिल बताया। मैंने भी अपने बारे में बताया। थोड़ी आगे जाकर उसने कहा- भाभी अगर आप गुस्सा ना करो तो यही पास में से मैंने अपने दोस्त से कुछ किताबें लेनी थी. वो धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी और बोली- आज मुझे असली मजा आया है! आज के बाद मैं तुम्हारी हूँ! तुम जब चाहो मुझे चोद सकते हो! मेरी चूत हर वक़्त तुम्हारी राह देखेगी!और उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और अपनी हालत ठीक करके चली गई.

कहाँ है…? दम है तो सामने आ !!मुस्तफा- मुझको पकड़ने का ख्वाब देखती हो तो देखती रहो ! तुम्हारे इतने करीब होकर.

कह कर मैं रसोई में गया और वहाँ से मक्खन ले कर आया। मैंने उसकी गांड पर और अपने लंड पर बहुत सारा मक्खन लगाया। फ़िर उसके चूचियों पर भी लगाया और उन्हें चूसना शुरू किया. दो मिनट में रोहण को पूरा नंगा कर के उसके सात इंच के मोटे लंड से खेलने लगी…रोहण को भी काफी मज़ा आ रहा था. हीरल पटेलमेरा नाम हरी है, मैं अहमदाबाद में रहता हूँ। मैं आपको मैंने अपने मामा की लड़की की सील कैसे तोड़ी यह बताने जा रहा हूँ….

गुजराती sex अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा सलाम !यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम अवनीश यादव है, मैं कम्पयूटर साइंस तृतीय वर्ष का छात्र हूँ। बात उन दिनों की है जब मैंने अपनी बारहवीं की परीक्षा पास करके बी. !मैंने कहा- मुझे नहीं पहनना !तो वो हंस पड़ी और बोली- मत पहनो ! ऐसे ही अच्छे लगते हो !मैं भी हंस पड़ा !फिर हमने एक-दूसरे को पकड़ कर प्यार किया और उसने मेरी गोलियों को थोड़ा सा सहला दिया.

बहादुर आँखों से रीटा की जवानी का रसपान करता घबरा कर हकलाता सा बोला- वो! वो! मैं बेबी?पर रीटा अब रूकने वाली नहीं थी रीटा ने चारपाई पर बैठे बैठे अपने कपड़े उतार नंगी होती चली गई. ‘नहीं रे… तेरी गाण्ड तो ठीक है बिल्कुल… बस छेद में थोड़ी लाली है या सूजन है… ‘‘अन्दर जलन सी लग रही है…’ मैं कुछ कुछ बेचैन सी हो गई थी. बोलते बोलते मैंने अपने खाना लगे हुए हाथों से उसको निकालने की नाकाम कोशिश की और इधर उधर से ऊँगली डाल कर टिकेट पकड़ने की कोशिश करते हुए उसे अपने बूब्स के दर्शन करवाती रही.

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जैसे ही उसकी जीभ मेरे दाने से टकराती, मेरे मुँह से अपने आप स्स्सीईईईई हाआआआ आआ निकलता. उन्होंने मेरी टाँगें फैलाई और बीच में आकर बैठ गए और अपना लौड़ा चूत पर टिका कर बोले- इसको ज़रा सही जगह पकड़ कर रखना!उन्होंने मुझे पूरा जकड़ लिया. और कब उसके हाथ मेरी कमर से मेरे स्तनों तक पहुँचकर मेरे स्तन मसलने लगे, मुझे पता ही नहीं चला…वो बार बार अपने होंठ मेरी टीशर्ट के ऊपर ले जा कर मेरे स्तनों के चूचक चूसता और फिर होंठ चूसता… ऐसा लग रहा था… जैसे होंठों की मिठास से मेरे चुचूकों के दूध को मीठा करके पी रहा हो…!!!थूक से गीली हुई सफ़ेद टीशर्ट में से भूरे चुचूक अब दिखने लगे थे.

मगर मेरी मर्दानगी के आगे कहाँ टिक पाती, मैंने फिर से उसके पलंग पर पटक दिया और उसके लहंगे को ऊपर कर, उसकी चड्डी उतार फेंकी. यह कह कर उसने मेरा सर पकड़ा और अपने स्तनों को लगा दिया। फिर क्या मैंने उसे चोदना चालू किया।अब हर शनिवार, रविवार या फिर माँ घर पर नहीं होती तब मैं उसे चोदता हूँ। अब तक लगभग 200 कंडोम, 50 गर्भ निरोधक गोलियाँ सेक्स के लिए ख़त्म कर दी। मेरे सारे पैसे कंडोम खरीदने में जाने लगे हैं। हा हा हा हा.

15 मिनट तक लण्ड चुसवाने के बाद मैंने उसके मुँह से अपना लण्ड निकाला और उसकी चूत के कोने पर रख दिया और एक जोर का झटका मारा.

मम्मी प्लीज… एक बार चाचा की तरह करने दो ना… सिर्फ़ एक बार!”कर तो लिया था तूने शादी वाली रात… बस अब नहीं…” मैंने कहा. मैंने उसके गले और छाती पर चूमना शुरु कर दिया और मेरा हाथ उसकी स्कर्ट के अंदर जाने लगा. तुम जैसे चाहे हमें चोद सकते हो ! शादी के बाद तो हमारा पति हमें चोदेगा, उससे पहले कैसे चोदते हैं यह सीख लिया तो शादी के बाद परेशानी नहीं होगी।कैसे शुरुआत करें….

कहकर अन्दर डाला !अहह अह्ह्ह बस और अन्दर नहीं !बेबी, अभी तो सिर्फ टोपा गया है … लम्बी लम्बी सांसे लो. किया… शायद आज तुम कुछ भूल गए… शायद आज हमारे बीच इतनी दूरियाँ आ गई हैं कि एक दूसरे की जिंदगी में क्या चल रहा है. और अलग हो गई… हम दोनों एक दूसरे की आँखों से एक दूसरे का मन पढ़ रहे थे…!!!पढ़ते रहिए ![emailprotected].

मैं भी अब लौड़े की अभ्यस्त हो गई तो मैंने भी अपनी गांड को नीचे से हिलाना शुरू किया ताकि चूत और लौड़े का संगम अच्छी तरह से हो सके.

बीएफ मूवी मराठी: अगले दिन मैं दिए पते पर पहुँच गया!दरवाजा खुला, आज आकांक्षा कल से ज्यादा स्मार्ट लग रही थी!उसने मुझे चाय के लिए पूछा, मैंने मना कर दिया. मैंने बोला- क्या मतलब?एजेंट ने मेरे पीछे खड़े खड़े अपने दोनों हाथ मेरे कन्धों पर रख दिए और बोला- बस हमारे साथ ठोस सहयोग करिए.

उसने मुझे अपनी छाती से लगाते हुए कहा- तुमने आज मुझे इतना आनन्द दिया कि मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूल सकती, अब मैं तुम्हारी हो चुकी हूँ. खैर मैं पढ़ाने में अच्छा था और प्रिंसिपल मुझसे खुश था, मुझे स्कूल में थोड़ी आजादी भी मिल गई थी, मैं अपने खाली समय में स्कूल की बाऊँडरी के बाहर एक दुकान में चला जाता था. ‘हिच, मां की लौड़ी, तेरी चूत मारूँ… चिकनी है भाभी…!’ अब उसकी गालियाँ मुझे बहकाने लगी थी.

चुदाई का स्वाद नहीं चखी ना तू … जाकै देख तेरी माँ क्या कर री … चुदरी होगी … तेरा बाप बांका मर्द है … घोड़े की तरह ….

रात को करीब 11 बजे दरवाजे की घण्टी बजी और जब मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि ज्योति नशे में थी और उसके साथ एक लड़का खड़ा था. मैंने बोला- ठीक है, जब तक तुम नहीं चाहोगी मैं सेक्स नहीं करूँगा … लेकिन मैं तुमसे प्यार करता हू और तुम्हारे पूरे बदन को मैं चूमना चाहता हूँ…यह सुनने के बाद उसने मुझे नहीं रोका।फिर मैंने उसका कुरता उतारा, काले रंग की ब्रा में क्या चूचियाँ थी बिल्कुल मक्खन जैसी…. उसके गुलाबी होंठ हमेशा जैसे किसी सवेरे गुलाब की पंखुडियां सुबह की ओस में भीगी सी नजर आती थी.