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मुझे खूबसूरत लड़कियाँ बेहद भाती हैं, उन्हें देखकर इस दुनिया के सारे गम दूर हो जाते हैं. थोड़ी देर तक तो मैं अपने कमरे में ही रहा, फिर उठ कर बाहर हॉल में आया तो देखा मेरी बहन अपने कमरे में सोने जा रही थी, मैंने उसे आवाज़ लगाई- नेहा, मैंने यहाँ तीन किताबें रखी थीं, एक तो मुझे मिल गई लेकिन बाकी दो और कहाँ हैं?”मेरे पास हैं, पढ़कर लौटा दूंगी मेरे भैया!” और उसने बड़ी ही सेक्सी सी मुस्कान दी. प्रेषक : संदीप शर्मामैं चाची को धक्के लगा लगा कर जोर जोर से चोद रहा था और चाची हर धक्के पर वाह मेरे राजा ….

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मुझे दर्द हुआ मगर मैंने फिर भी उसका पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसा लिया।मैं ऊपर-नीचे होकर उसके लौड़े से चुदाई करवा रही थी, सुनील मेरे मम्मों को अपने हाथों से मसल रहा था।अनिल भी नीचे से जोर जोर से मेरी चूत में अपना लौड़ा घुसेड़ रहा था। इसी दौरान मैं फ़िर झड़ गई और अनिल के ऊपर से उठ गई मगर अनिल अभी नहीं झड़ा था तो उसने मुझे घोड़ी बना लिया और अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में ठूंस दिया. मोना आंटी की उम्र तब 43 की थी और उनकी चूचियाँ तो कमाल की थी, 40 इन्च की चूचियाँ और गाण्ड भी 40 की ही होगी. उनके पीछे उनका बॉस श्यामलाल आया और चपरासी से तीन चाय कह कर मुझे और दीदी को अपने कैबिन में बुलाया.

अब मैंने सोचा कि चुदाई तो होनी ही होनी है! तो फिर मज़े से ही क्यों नहीं करवाऊँ! मैंने मुकेश से कहा- मेरे हाथ खोल दो! तुम जैसा कहोगे, मैं वैसा ही करूँगी!मुकेश ने मेरी आँखों में देखा, शायद उसने मेरी आँखों के वासना के डोरे पढ़ लिए और उसने मेरे हाथ खोल दिए. ‘चाची, आह , मैं तो गया, हाय रे…’उसके हाथ अब सधे हुये ताकत से भरे हुये लण्ड के सुपारे और डण्डे को मसलने लगे थे बल्कि कहो तो लण्ड में टूटन सी होने लगी थी.

विपुल जीजू ने कुछ ऐसा ही मेरे साथ किया, वो जब भी अकेले में मेरे से मिलते तो कभी मेरी बोबे कस कर दबा देते, कभी गांड को सहलाने लगते, हौले-हौले सहलाते, फिर एकदम गांड की दरार में उंगली कर देते.

‘वाआवऽऽ वाहट ए लवली लौड़ाऽऽ!’ चूत के हमदम का आकार देख कर रीटा की चूत की धड़कन तेज हो गई.

अगले एक सप्ताह मैं उसके ऑफिस के सामने से काफी रुक रुक कर निकलता था कि शायद मुझे वो दिख जाए पर शायद मेरी किस्मत काफी खराब थी. थोड़ी देर मैं वैसे ही रहा, उसने भी लम्बी साँस ली, फिर मैंने लंड चूत से निकाला तो उसने उसे चूसा थोड़ा. उसने अपनी एक टांग मेरी कमर पर डाल दी और आंखे बन्द किये हुये बोली- सखि रे, सारा कस बल निकाल दिया.

एक दिन किस्मत ने साथ दिया, मैं घर पर अकेला था, घर के लोग शादी में गए हुए थे जो कि रात में करीब 11 बजे से पहले वापस आने वाले नहीं थे. खैर जो भी हो, सब चलता है…मैं अपना परिचय करवा दूँ! मेरा नाम कुमार है, उम्र अभी 26 साल है. बस यही सोच कर मैंने अभी तक 28 चूतें मारी हैं और हर चूत वाली को संतुष्ट किया हैं।तो अब असल कहानी पर आते हैं।मैं गाँव गया तो मैंने पूरा दिन घूम कर बिता दिया.

ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही…मैं- विश्रांती तो ले लो ना इसे…फिर विश्रांती प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी….

साला पड़ोसी की औलाद…उसके बाप के टट्टे उसकी माँ की चूत में घुसे तब यह टट्टेबाज़ पैदा हुआ था. तुम्हें पता भी है तुम्हारे गाल और होंठ कैसे खिल जाते हैं !” (इस समय उसके गाल पर चुम्बन ले सकते हैं)मुझे लगता है तुम बहुत थक गई हो…. मैं तुरंत कुत्ते वाली अवस्था में आ गई, गाण्ड थोड़ी ऊपर की और तेल की बोतल का मुँह अपनी गाण्ड में लगाया और बोतल उलट दी.

मैं कभी टी वी पर फ़िल्म देखता तो कभी मेरी नज़रें रसोई में काम करती उस लड़की की छोटी स्कर्ट के नीचे उसकी गोरी टांगों पर चली जाती. अन्तर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से मेरा प्यार और नमस्कार! मैं अपनी कहानी आगे बढ़ाता हूँ. गौरी तो वैसे ही चुदने के लिए प्यासी हो रखी थी, सो कुछ ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

मैं वो देख ही रहा था कि सोनम ने बीच में ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे एक तरफ़ चलने को बोला.

?पीयू : हाँ हाँ सर ! कोई प्रॉब्लम नहीं…मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह हो क्या रहा है… ये दोनों क्या प्लान कर रही हैं. इसे प्यार से चोदो”तो मैंने अपनी रफ्तार थोडी धीमी कर दी और उसको और गरम करने के लिए उसके चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा और उसके लबों को चूसने लगा.

एक्स एक्स एक्स वीडियो देहाती बीएफ पर सोनिया को अपने काम के सिवा और कुछ नहीं सूझता। हालांकि वो भी सुनील को अपना अच्छा दोस्त मानती है लेकिन सिर्फ़ और सिर्फ़ दोस्त।यहाँ सोनिया अपनी सारी चिंता सुनील के साथ बांटना चाहती है. मेरे दिमाग में बड़ा उथल-पुथल चल रहा था, मुझे लगा, अब कैसे चलेगी जिंदगी?बड़े पशोपेश के बाद मुझे खुद को सम्हालने में एक सप्ताह का समय लग गया और मैंने तय किया कि अब हम खुल कर ओपन-लाइफ यानि खुली जिन्दगी जियेंगे.

एक्स एक्स एक्स वीडियो देहाती बीएफ अब वो सच कहते थे या अपने आपको और मुझे कल्पना की दुनिया में ले जा रहे थे यह तो नहीं मालूम लेकिन मैंने सोच लिया था कि अपने जिस्म की आग बुझाने का सबसे आसान और महफ़ूज़ ज़रिया यही है कि मैं अपने एक साल छोटे भाई के जिस्म को इस्तेमाल करूँ. तान्या ने मुझे कुछ देर इन्तजार करने के लिए कहा जो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा मगर और कोई रास्ता ना होने के कारण मैंने इन्तजार करना ही ठीक समझा, मैंने सोचा चलो एक दिन की ही बात है.

उसने कहा- घर में कोई लेडी है?मैंने मना किया, तभी चित्रा आई और बोली- रुको मुझे खरीदनी है!मगर उसको पसंद नहीं आई और उसने मुझे शाम को उसके साथ मार्केट चलने को कहा तो मैंने हाँ कर दी.

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मेरा निकलने वाला था, मैंने कहा- मेरा पानी कौन पिएगी?तो अमिता बोली- मेरे मुँह में डाल दो. चारपाई टूटते हुऐ रीटा बहादुर के नीचे थी और ज़मीन पर गिरने से बहादुर का लण्ड का सुपाड़ा रीटा की बच्चेदानी में घुस गया तो रीटा चिहुंक कर दोहरी हो गई. मुझे कुछ भी समझ में नहीं आता था कि हम दोनों में ऐसा क्या हो गया है कि छूना तक उसे बुरा लगने लगा था.

मैंने झट से उसका लौड़ा निकाला और अपने हाथों में ले लिया और फिर मुँह में डाल कर जोर जोर से चूसने लगी। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन कर उसका लौड़ा चूस रही थी और अनिल मेरे पीछे आकर मेरी चूत चाटने लगा. और एक रोमांटिक माहौल में किया गया लव और एक ब्लू फिल्म देख कर किये गये लव-मेकिंग में काफी अंतर होता है।यह सब करने के बाद मैं उसके आने का इंतज़ार करने लगा. मैं देखना चाहती थी कि कैसे कोई मर्द किसी औरत को बिना उसकी इच्छा के चोद सकता है और इसमें कितना मजा आता है… पर बबलू तो सारा मजा ही किरकिरा कर दिया.

हीरल पटेलमेरा नाम हरी है, मैं अहमदाबाद में रहता हूँ। मैं आपको मैंने अपने मामा की लड़की की सील कैसे तोड़ी यह बताने जा रहा हूँ….

मैंने मुकेश से कहा- अब तू चला जा!मुकेश ने मेरे आठ-दस कस कर चुम्बन लिए और उठ खड़ा हुआ. मैं दूसरी टीचर्स की तरह खूब मेक-अप करती और खूबसूरत साडियाँ पहन कर स्कूल आती थी, जैसे कोई स्पर्धा चल रही हो. मैंने भी उसके होठों पर अपनी ऊँगली फिराई और हाथ को नीचे खिसकाते हुए उसके गले से होकर मम्मों तक पहुँच गया.

हील वाले सेन्डिल के अलावा रीटा अब बिल्कुल नंगधड़ंग थी और बेइन्तिहा सैक्सी लग रही थी. एक बार तो मुझे लगा कि ऐसे ही खड़ी रहती हूँ, जो भी आएगा उसका लण्ड अपने मुँह में ले लूंगी पर मुझे लगा शायद गार्ड भी हो सकता है तो मैं तुरंत बाथरूम में वापस घुस गई. ! बेवकूफ कहीं का…!मैं चुपचाप अपने कमरे में चला गया… मैंने अपना लंड निकला… खड़ा था और रस टपक रहा था।चल बैठ जा.

मैंने दोनों जाँघों को हाथ में पकड़ कर कमर पर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उनकी कमीज़ को भी उतार दिया!अब एक ऐसा नज़ारा मेरे सामने था जिसके लिए मैंने हजारों मन्नत की थी. आंटी ने कहा- जोर जोर से चोदो मुझे! आज मेरी प्यास बुझा दो! अह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह सीईईईईई!मैंने अपनी गति बढ़ा दी और आंटी को जोर जोर से चोदने लगा.

उम्मीद है आपको मेरी कहानी अच्छी लगेगी। इससे आगे मेरी चुदाई का सफ़र कैसे चला यह मैं अगली बार अन्तर्वासना डॉट कॉम पर लिखूंगी। गुरुजी मेरी चुदाई को सबके सामने लाना ताकि मैं अपनी चुदाई का सफ़र लड़ीवार भेजती रहूँ और लोग मुठ मारते रहें !बाय बाय ![emailprotected]. रीटा भी नम्बर एक की मां की लौड़ी थी, अपनी शर्ट के ऊपर से, अपने चुच्चे की चौंच पे उंगली लगाती बोली- बहादुर बिल्कुल यहाँ लगाना है, टिप पे, जरा जल्दी करो. ?? हाँ, यह तुम्हारे शर्ट से झांकती तुम्हारी छाती… तुम्हारी घुटने से ऊपर हुई स्कर्ट में दिखती तुम्हारी जांघें … या फिर तुम्हारे मौज़े.

बोरीवली स्टेशन पर उतरने के बाद वो लोग ऑटो में चले गए, मैं उन्हें जाता देखता रहा पर अफ़सोस अनु से मैं उसका फोन नंबर नहीं ले पाया.

जिस चीज़ की मुझे हवस थी यानि मर्दाना लण्ड, वो भला कोई लड़की कैसे दे सकती थी क़िसी को. नहीं मैम आप उसे यहीं बुला लो यहाँ आपके सामने ही, बल्कि आप ही कह दो सारी बात !लो यह काम अगर मै करुँगी तो बाकी काम भी मै ही कर लूंगी उसके साथ!मैम!अच्छा बुलाती हूँ! यह कह कर मैंने रोहित को आवाज लगा कर बुलाया. पिंकी- हाय मनुजी! मैं क्या करती? साली ने बाथरूम में मेरी चूचियाँ दबा दी तो मैं गर्म हो गई, आप तो समझदार हो!मैंने कहा- पिंकी जी, आपका ज्यादा समय नहीं लूँगा!और मैंने उसके हाथ पकड़ कर हथेली चूम ली, उसके होठों से सिसकारी निकल गई.

मगर मेरी इस हरकत से तान्या के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई, मैं समझ गया कि रास्ता साफ़ है और मैं फिर तान्या की तरफ बढ़ा और फिर तान्या के होंठों को एक बार फ़िर से चूम लिया. उसे देख मैं भी रुक गया, मगर थोड़ी देर बाद मैं आगे बढ़ा और उसके पास चला गया और उसे बात की.

मैंने उसे जाकर कहा- भैये… एक चाय पिलाओगे क्या…?‘आ जाओ, अभी बना देता हूँ…!’ मेरे चाय पीने के दौरान मैंने देखा विनोद अंकल और राजेश अंकल दोनों ही मोटर साईकल पर निकल गये थे. मैंने एक हाथ से उसकी चूची दबानी शुरु कर दी और दूसरे हाथ से उसकी चूत को सहला रहा था. ? यहाँ…? ये…?निशा : हाँ, दिखाओ न सर…सर : ओके … पीयू जरा जांघें फैलाओ…सर उंगली डाल के उसे गरम कर रहे थे… चुदने का मन तो निशा को भी था… सो वो सर का लण्ड मसल रही थी… उसने भी नीचे सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी !सर : लम्बी लम्बी सांसें लो … और घुसने दो मेरे पेनिस को ….

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भगनासा पर चोट से उत्पन्न बिजली की लहरें… चरम बिन्दु का क्षितिज कहीं पास दिख रहा था। मैंने उस तक पहुँचने के लिए और जोर लगा दिया…कोई लहर आ रही है… कोई मुझे बाँहों में कस ले, मुझे चूर दे… ओह…कि तभी ‘खट : खट : खट’…मेरी साँस रुक गई। योनि एकदम से भिंची, झटके से हाथ खींच लिया…खट खट खट…हाथ में केवल डंठल और छिलका था।कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]2384.

मगर मुझे टीचर की नौकरी पसंद नहीं आ रही थी इसलिए मैंने स्वाति दीदी से सिफारिश लगाने के लिए कहा, तो दीदी ने कुछ दिनों तक इन्तजार करने के लिए कहा. लोग गले तक जितने पानी में तैरने का मज़ा इस तरह उठाते हैं जैसे सागर तट उठाया जाता है।मैं भी बह चला…. और जोर से चोदो… अ आ आया अह हह हह…उसकी स्पीड बढती जा रही थी अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और मेरी बुर से सर सर करता हुआ सारा पानी बाहर आ गया… राहुल रुकने का नाम नहीं ले रहा था… मेरी बुर के पानी की वजह से उसके हर धक्के से कमरे में फत्च फच की आवाज़ आने लगी.

मेरा पजामा उतार दो ना और ये टॉप… खीच दो ऊपर… मुझे नंगी करके चोद दो… हाय…”कहानी का दूसरा भाग :समझदार बहू-2. उसके बाद हमने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ किया, लगभग 11 बजे अनिल चला गया और उसके बाद मैंने और ज्योति बातें करने लगे. सनी लियोन का बीएफ फुल एचडी वीडियोमुझे वो बार बार बुला कर पीने के कहता था- भाभी, भैया तो हैं नहीं, चुपके से एक पेग मार लो!’ मस्ती में वो मुझे कहता ही रहा.

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बेचारी तीन-फोल्ड हुई रीटा किसी घायल हिरणी की भांति छटपटा कर रह गई- आहऽऽऽ नहीं छोड़ो मुझे! प्लीज़ छोड़ो नाऽऽऽ! मैं मर जाऊँगी, आपका बहुत बड़ा है. एक अजीब सी ख़ामोशी छा गई, एक सवाल ने हम दोनों के बीच की तीन दिन की दूरियों को खाई में बदल दिया…दादी भले ही उसकी माँ के दूर होने के बाद. ‘ऐ चुप… ये क्या रण्डी की तरह बोलने लगी…’‘सच में जीजू… अब बस कर ना!’ मैं रुआंसी हो कर विनती करने लगी.

बातचीत का विषय चलते चलते यहाँ तक आ पहुँचा कि अमित ( अमित अंकल कहना मैं छोड़ चुकी थी ) बोले- जिस दिन तुम्हारी चूत के गुलाबी होठों को खोलकर अपना लंड उस पर रखूँगा, तुम जन्नत में पहुँच जाओगी. फिर मैंने अपनी साइड बदल कर उसकी तरफ मुँह कर लिया और उसके मोमे जोर जोर से दबाने लगा. शुक्रिया… आपका नाम क्या है?”थाने नाम कांई करनो है… छबीली नाम है म्हारो, ओर थारा?”नाम से क्या करना है… वैसे मेरा नाम छैल बिहारी है!” मैंने उसी की टोन में कहा.

रात के करीब 11 बजे मुझे मेरी बहन ने उठाया और कहा- खाना खा लो!मैं उठा और हाथ मुँह धोकर खाने के लिए मेज़ पर गया, वहाँ अनीता दीदी भी बैठी थी.

कारण यह कि अमित का लंड करीब 8 इंच लम्बा और काफी मोटा था, मुझे मालूम था कि यह मेरी चूत का भुरता बना देगा. मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में बाहर आई, सामने दर्पण में अपने आपको देखा तो सच कहूँ किसी सेक्सी लड़की की याद आ गई.

तो वो समझ गई कि मैंने उससे झूठ कहा था, बोलो- नौटी बॉय !और कह कर फिर से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मेरा लंड बहुत शरारती था और बार बार भड़क रहा था … यह देख कर दीदी भी मुस्कुराने लगी…. ”और कहा,” धीरे धीरे चोदो बेटा, मंहगाई का ज़माना है, इस २ इंच की चूत को जिंदगी भर चलाना है !”कुछ ही देर में चाची ने बाहर निकाल दिया और कहा,”तू नीचे लेट जा….

‘बहादुर थोड़ा सहला दो नाऽऽऽ!’ रीटा बहादुर को आँखों ही आंखों में पी जाने वाली नजरों से देखा तो बहादुर के लण्ड में झुरझुरी सी दौड़ गई. जोर से… और जोर से… आईईई…फाड़ दे बहन चोद……”मैं बिना कुछ बोले अब धक्कों की गति पर ध्यान दे रहा था।सोनिया अब मस्त गांड उठा उठा कर मेरा लण्ड ले रही थी अपनी चूत में।करीब दस मिनट के बाद सोनिया का शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्ला उठी- मैं तो गईईई. खैर तू यह गोली खा ले ! बेबी नहीं होगा !श्रेया : नहीं यार, अब ऐसी चीज़ें से दूर रहना है, कल लड़के वाले देखने आने वाले है ….

एक्स एक्स एक्स वीडियो देहाती बीएफ फिर मैंने अपने कपड़े पहने और हस्पताल चली गई,रात को मैं अकेली ही घर होती थी इस लिए वो अनिल और सुनील दोनों रात को मुझे हस्पताल से घर ले जाते और सारी रात मेरी चुदाई करते, सुबह होते ही वो दोनों लोगों के जागने से पहले निकल जाते और मैं बाद में हस्पताल आ जाती. मुकेश ने मुझे बैग तो दिया लेकिन इस तरीके से कि जब तक में बैग संभालूं वो मेरे दोनों बोबों को पकड़ चुका था.

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एक बात पूछूं ?”बोलो ?”फिर वो तुमने चीका को थप्पड़ क्यों मारा था ?”मैं एक भारतीय नारी हूँ कुछ तो भारतीयों जैसा करना पड़ेगा ना इस लिए ? वो सब चीका और डाइरेक्टर का प्रायोजित ड्रामा था यार !”कैसे ?”तुम भी अक्ल के दुश्मन ही हो… अरे बाबा उस शिल्पा को इऽच लो, साली हरामजादी रांड उस फिरंगी (गेर) के साथ एक चुम्मा देकर कितना फेमस हो गई थी ? और. जैसे ही आयशा अंदर घुसी मैंने आयशा को पकड़ लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए मगर इस बार आयशा ने बिल्कुल भी विरोध नहीं किया और मेरा साथ देने लगी. साले सब के सब हवस खोर होते हैं। यहाँ एक अच्छा है कि जिसे भी इच्छा होती है चला आता है, पैसे देकर चोद कर चला जाता है। कोई नौटंकी नहीं। थोड़ी देर तू अकेली इस कमरे में बैठ कर देख कैसे कैसे लोग आते हैं.

उन्होंने मुझसे पूछा- घर चलना है?मेरे हाँ कहते ही उन्होंने कार का दरवाजा खोला, मैं उनके बगल की सीट पर बैठी और थोड़ी ही देर में घर पहुँच गई. जीजू के जाने के बाद मैं हर मर्द को उसी नजरिये से देखने लगी, 18 साल का लोंडा हो या 50 साल का बुढ्ढा, मेरी निगाहें हमेशा उसकी कमर के नीचे होती, निगाहें तलाशती रहती कि इसका लौड़ा कैसा होगा, कितना लम्बा या मोटा होगा और अगर यह मेरी चूत में होता तो कैसा लगता. सेक्सी बीएफ लड़की वालीमैंने उनसे पूछा- बुआ की तबीयत कैसी है?तो उन्होंने कहा- वो शायद बच नहीं पाएगी इसलिए वो चाहती है कि मनीषा(चित्रा की बड़ी बहन) की शादी जल्द से जल्द हो जाए.

शाम को जब मीनाक्षी रसोई में खाना बना रही थी, तब भाभी मुझे अपने बेडरूम में ले गई और बोली- रोहित, यार आज तो चोदो मुझे.

सोनू ने हाथ से उसे नाकाम रोकने की कोशिश की- भैया… ये मत करो… मुझे शरम आ रही है… मुझे बेवफ़ा मत बनाओ!’ सोनू ने ना में हाँ करते हुए कहा. जितने जोर से मैं चूस रहा था उतने ही जोर से उसके मुंह से आवाज़ें निकल रही थी- ह्मम म्म्म उम्म हा ओर्र्र ओर्र्र्ररर्र ओर् करो हाआआअ!थोड़ी देर के लिए तो मैं डर गया था कि नीचे वाले यह न सोचें कि ऊपर भूत आ गए हैं.

मैं कुछ कहता इससे पहले चित्रा ने कहा- मैं तुमसे प्यार करती हूँ!और यह कह कर उसने मुझे गले लगा लिया. कुछ समय बाद अंकल ने कहा- आज की चुदाई पसंद आई या नहीं?तो मम्मी ने कहा- अब मुझे हमेशा चोदना!और फिर अंकल ने अपना लंड बाहर निकाल लिया. उसके बाद शीतल ने मुझे कंडोम पहना दिया और फिर मैं उसे दनादन चोदने लगा। मेरा चिक बहुत जल्दी निकल गया था। मगर थोड़ी ही देर में मैं अच्छे से चोदने लगा। उसे मैं बहुत जबरदस्त शारीरिक सुख दे रहा था और वो उससे आनंदित हो रही थी।सच में जब लंड चूत में जाता है तब जो आनंद मिलता है उससे कोई आनंद बड़ा नहीं।हाए ओह ओह ओह….

‘अरे मैंने सोचा तुम्हें लग जायेगी, लगता है अब चूत को बढ़िया पिटाई चाहिये!’ जीजू हंस पड़ा.

मैंने उनके गाल पर चूम कर उन आँसुओं को अपने होंठों से पी लिया और अपनी बाहों में भर लिया. मेरे स्तनपान करने के कारण भाभी धीमी धीमी सिसकारियाँ लेने लगी मगर शायद भाभी को इस सब में मजा आ रहा था. फिर हम लोग एक गोला बना कर खड़े हो गए। इस बार मैं अपनी दादी का और दादी मेरी मम्मी की गांड मार रही थी। मेरी मम्मी अपनी साली की और उनकी साली यानी मेरी मामी मेरी चाची की गांड मारने के लिए तैयार थी।क्या नजारा था.

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! बेवकूफ कहीं का…!मैं चुपचाप अपने कमरे में चला गया… मैंने अपना लंड निकला… खड़ा था और रस टपक रहा था।चल बैठ जा. मैंने भी देर न करते हुए दीदी के होंठो पर अपने होंठ रख दिये और हम दोनों पंद्रह मिनट तक एक-दूसरे को चूमते रहे. मैंने भी एकदम प्रफुल्लित होकर उसको कस के पकड़ा और चूमने लगा… मैं उसके नरम होंठों का रस पिए जा रहा था…फिर मेरे हाथ पहले उसकी गांड पर पड़े… आये हाय….

सिर्फ़ टट्टे (अंडकोष) ही बाहर रह गये थे… और हर धक्के के साथ दोनों टट्टे उसकी गांड से ऐसे टकराते… मानो रूठ गये हों और शिकायत कर रहे हों और कह रहे हों,”हमको यहां तो अंदर जाने दो !”तकरीबन बीस मिनट बाद नेहा ने बहुत जोर-जोर से धाप मारना शुरू कर दिया और…करीब पन्द्रह-बीस धक्कों के बाद मुझे पूरी ताकत से भींच कर चिपट गई…उसने मुझे दोनों हाथों… दोनों पैरों और दोनों स्तनों से भींच रखा था…. जाने साधारण अवस्था में वो मुझे चोदता या नहीं, पर नशे में टुन्न उसे भला बुरा कुछ नहीं सूझ रहा था, बस जानवर की तरह उसे चूत नजर आ रही थी, सो लण्ड घुसा घुसा कर उसे चोद रहा था. मेरा पजामा उतार दो ना और ये टॉप… खीच दो ऊपर… मुझे नंगी करके चोद दो… हाय…”कहानी का दूसरा भाग :समझदार बहू-2.

लण्ड राजा अपने ट्टटों की सेना समेत, रीटा रानी की चूत की सील को तोड़ता और धज्जियाँ उड़ाता हुआ, चूत की मुलायम दीवारों को बेरहमी से रगड़ता हुआ अंदर और अंदर और अंदर घुसता चला गया. वो अभी अपनी गाण्ड ऊपर कर-कर के मरवा रही थी।मैंने कहा- देखा, कितना मज़ा आ रहा है !तो बोली- हाँ बेटे. फिर एक दिन श्यामलाल का फोन आया और वो गुस्से में बोला- तान्या तेरे बच्चे की माँ बनने वाली है.

मैंने माँ से पूछा- अगर मेरा वीर्य चूत में चला गया तो क्या होगा?माँ ने हँसते हुए कहा कि उन का ऑपरेशन हो चुका है और वो अब गर्भवती नहीं हो सकती. ‘मैं बताऊँ… हाथ से कर लेती हो… बोलो ना?’उसने मेरी ओर शरमा कर देखा और धीरे से सिर हाँ में हिला दिया.

”क्या फ़ायदा था भला…?”मेरी भी चुदाई की इच्छा पूरी हो जाती थी, अब मम्मी को चुदते देख, मेरी चूत में आग नहीं लगेगी क्या?” उसने भोलेपन से कहा.

राजू रीटा के घुटने मोड़ कर रीटा को कंधों से मिला दिये और बोला- जाती कहाँ है साली! माँ की लौड़ी, अभी तो तेरी मां की चूत भी मारनी है. भोजपुरी में सेक्सी पिक्चर बीएफमैं हाथ पैर मारने लगी……तो कमल ने वहीं कबाड़ से एक पुरानी साड़ी उठा कर मेरे दोनों हाथ पीछे करके बाँध दिए…. बीएफ सेक्सी चूत वीडियोफिर हम दोनों एक दूसरे से काफी देर तक बात करते रहे, बातें करते-करते हम दोनों को ही नींद आ गई. राधा के पति की मृत्यु हुए करीब एक साल हो चुका था, उनका छोटा सा परिवार था, उनके कोई बच्चा नहीं हुआ तो उन्होंने एक 10 वर्ष की एक लड़की गोद ले ली थी, उसका नाम गौरी था.

बाजी ने जब उनका लुल्ला देखा तो पागल हो गई- याल्लाह! इतना बड़ा लुल्ला! वो भी कटा हुआ नहीं है!मैं भी इतना बड़ा लौड़ा देख कर दंग रह गया जो लगभग दस इन्च लम्बा और पांच इन्च मोटा था.

उसके अनुसार देवरानी बिल्कुल भी सैक्सी नहीं है… वो शुरू से ही सेक्स से बचती फ़िरती है…कभी भी उसने देवर के साथ सेक्स में सहयोग नहीं किया. वैसे मेरा घर बहुत बड़ा है, चाल में हमारा घर ही बड़ा है, एक बेडरुम, किचन और हॉल – ऐसे तीन कमरे थे, जिनमें हॉल सबसे बड़ा है।कविता बोली- राज कौन लेगा…. मुकेश मेरे फ़ूले गालों पर थपकियाँ देता रहा और कहने लगा- तेरी चिकनी जांघों पर मेरी कब से नजर थी बहन की लौड़ी! मैं तो कब से सोच रहा था कि तेरी चूत देखने को मिलेगी, कब अपना लंड उसमें घुसाने का मौका मिलेगा, मेरी छप्पन-छूरी! आज तो तेरी चूत, तेरी गांड, तेरे बोबों के इतने मज़े लूँगा और दूंगा कि तू तो क्या, तेरी अम्मा भी मुकेश को याद करेगी.

मैंने काफी देर तक उसे अपनी चुन्चिया देखने दी…मुझे अब विश्वास हो गया कि वो गरम हो चुका है. पर मोटे लौड़े का मज़ा लेने की सोच कर मेरी चूत और गीली हो गई। उसकी उंगली अब मेरे दाने को सहला रही थी और मैं उसके बड़े से लौड़े को हिला रही थी. मैंने उसको एक सेरिडान की गोली दी और बाहर आते हुये उसके कमरे का दरवाजा भी भेड़ दिया.

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गाँव की औरतें : रंडी को सबके सामने चोदो… गंदगी फैला रखी है बाप-बेटी नेमुखिया : हाँ यही होगा ! बांध दो भुवा को और बुलाओ उस रांड को …लोगों ने पापा को पेड़ से बांध दिया पर उनकी आँख खोले रखा ताकि वो मेरी इज्ज़त लुटते हुए देख सकेंमुखिया जी ने धीरे धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए … मेरी जांघे कंपकंपा रही थी, वो उन्हें छू रहा था …. तुम निरे लोल हो कुछ समझते ही नहीं।प्लीज बताओ ना ?देखो ज्यादा गांड मरवाने से उसका रंग काला पड़ जाता है. उन्होंने मुझसे पूछा- घर चलना है?मेरे हाँ कहते ही उन्होंने कार का दरवाजा खोला, मैं उनके बगल की सीट पर बैठी और थोड़ी ही देर में घर पहुँच गई.

मुझे उसकी टेंट के अन्दर से केवल परछाई नज़र आ रही थी लेकिन वो परछाई भी इतनी कातिल थी जिसकी कोई हद नहीं.

2-3 धक्कों के बाद ही मेरा पानी भी निकल गया और मैंने शिखा की नर्म, मुलायम और गर्म चूत के कोने कोने को भिगो दिया.

जब मैं चोद रहा था, तब भाभी मीनाक्षी को चुचूक चूस रही थी और मैं भाभी के चूसने लगा …मीनाक्षी बोली- आज तो बड़ा मजा आ गया जान. उसके बाद खुद ही उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे कपड़े उतारने लगी और बोली- मैं आज तुमको वो सब कुछ सिखा दूँगी जो एक मर्द और औरत के बीच में होता है!मैं कुछ भी नहीं बोला और मन ही मन में बहुत खुश हो रहा था लो आज मुझे वो सब कुछ मिलने वाला है जिसके बारे में सिर्फ सपने में ही सोचता था. बीएफ लड़का लड़कामेरी स्पीड भी बढ़ रही है !मैं भी अंगुली तेज कर रही हूँ !हाँ मेरा पप्पू भी बहुत जोर लगा रहा है !क्या अभी पप्पू ही है ?हाँ अभी काला नहीं पड़ा है ना पप्पू ही है बिलकुल गोरा चिट्टा ?हाय राम कितना मोटा है ?कोई १.

फिर मैंने उसे सीढ़ी पर बैठने को कहा, वो बैठ गई, मैंने उसका पैर फैला दिए और थोड़ा सा नीचे होकर मैं उसकी टांगों के बीच में घुस गया और उसकी चूत चाटने लग गया और एक हाथ से उसके स्तन मसल रहा था. कुछ देर मैं हल्की सी नींद में था, तभी मुझे लगा कि मेरे बगल में कोई है जिसका पैर मेरे पैर से लग रहा था. चित्रा के साथ सेक्स करते हुए पकड़े जाने के बाद दीदी की आग शांत करने की जिमेदारी मेरे मजबूत लौड़े पर आ गई.

मेरा दिल आ गया है उस पर… कुछ मदद कर ना…!‘अरे चाचा! क्या बात कर रहे हो? अभी तो वो छोटी है और तुम… तुम मरवाओगे एक दिन. वहाँ मौजूद सभी गुंडे पूरी तरह घायल थे !और अपने ऑफिसर्स को बोलकर सोनिया ने एम्बुलैंस मंगवा ली और उन सब को वहाँ से भिजवा दिया। लेकिन सोनिया की नजर मुस्तफा को खोज रही थी।दोस्तो, मुझे आपके मेल नहीं मिल रहे।आगे जानने के लिए अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर आते रहिए….

अन्दर रस भरी चूत की गुफ़ा नजर आई, उसने अपना लौड़ा पहले तो हाथ से हिलाया और फिर मेरी गुफ़ा में घुसाता चला गया.

राजा : बोली ठीक 15 मिनट बाद आरम्भ होगी ताकि आप सभी इस समय में इसके जिस्म का मुआयना कर लें और अपने हिसाब से बोली लगायें. तभी विनोद अंकल मुस्कराते हुये आगे बढ़े और राजेश का लण्ड पीछे से आ कर थाम लिया और उसकी मुठ्ठ मारने लगा. फिर ?दूसरे हाथ की अंगुली पर तेल या क्रीम लगा कर एक अंगुली अपनी गांड में भी तो घुसा मेरी तरह ?उस से क्या होगा ?चुतिया है तू एक नंबर का ?कैसे ?अबे मुट्ठ मारना ही नहीं आता तुम्हें ?अच्छा तुम समझा दो ना ?देखो मुट्ठ मरते समय एक अंगुली अगर गांड में डाल ली जाए तो मज़ा दुगना हो जाता है !ठीक है ऐसा ही करता हूँ !आआ….

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अंकल ने मम्मी को अपने बिस्तर पर लेटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें प्यार से किस आदि करने लगे. पर रुक गया जहाँ गर्म फिल्म आ रही थी।अब तो मेरी नींद भी जाती रही, एक तो बीवी से डेढ़ साल में पहली बार रात में अलग सोना, उस पर से रैन टी. फिर हम दोनों एक दूसरे से काफी देर तक बात करते रहे, बातें करते-करते हम दोनों को ही नींद आ गई.

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वो मछली की तरह छटपटा रही थी- आ आह ऊ उई ईई ईई म्म म्म म्मह की आवाजों से कमरा गूंज रहा था. खैर मैं पढ़ाने में अच्छा था और प्रिंसिपल मुझसे खुश था, मुझे स्कूल में थोड़ी आजादी भी मिल गई थी, मैं अपने खाली समय में स्कूल की बाऊँडरी के बाहर एक दुकान में चला जाता था. ‘रागिनी तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें पाने के लिए मैं बहुत बेताब हूँ!’कहते हुए उसके कान के लैब अपने होंठो में लिए.

‘दीदी आप कितनी अच्छी हैं… लगता है कि बस आपको…’ मैंने लण्ड उसकी गाण्ड में और दबा दिया. अंकल मम्मी से बात करते करते उन्हें कुछ इशारा कर रहे थे पर मैं समझ नहीं पाया कि दोनों में क्या इशारेबाज़ी चल रही है.

‘चाची, बस एक बार चुदा लो!’‘राजू, ऐसी बात ना कर!ऊँह, भला यह कैसी चाची है, मर्दों का तो कबाड़ा कर देती है पर खुद को हाथ ही नहीं लगाने देती है.

वो अपनी गाण्ड उठाने लगी और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं उसकी चूत चूसता रहा और थोड़ी देर मैं उसकी चूत ने अपना कामरस छोड़ दिया।मेरा पूरा चेहरा उसके काम रस से गीला हो गया।फिर हम दोनों कमरे में आ गए. फिर कुछ देर चूमने के बाद मैंने उसकी आँखों में देखा और उसको ‘आई लव यू ‘ बोला, वो शरमा कर नीचे देखने लगी और फिर उसने भी हिम्मत कर के ‘आई लव यू टू बोला’. और मेरा दुर्दांत लंड कहीं दिख न जाये…लंड शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। जब लहरें उठी मैंने गोता लगाया…ऊपर आने ही वाला था कि मेरे लंड पे एक किसी के हाथ का कसाव महसूस हुआ। ऊपर आकर देखा कोई नज़र नहीं आया….

प्रेम एक दैविक शक्ति है… और इस शक्ति से ही इस जीवन ओर सरे विश्व का निर्माण हुआ है…उसकी जलेबी सी बातें सुनकर एक बार तो मेरा भी सर घूम गया था…एक बार तो मुझे भी लगा कि कोई साध्वी टकर गई. सुबह भैया-भाभी को ऑफिस जाना था इसलिए सभी अपने अपने कमरों में जाकर सो गए और मैं भी आराम से अपने कमरे में आ गया और दुबारा भाभी को चोदने की योजना बनाने लगा मगर एक सवाल मेरे दिमाग में अभी भी था कि आखिर शनिवार की रात को भाभी के कमरे में कौन था. यह नेहा थी जो अपने बदन पर चादर डाल कर मेरे कमरे की तरफ ये देखने आई थी कि मैं क्या कर रहा हूँ और वो सिसकारी किसकी थी.

भाभी के तबादले से पढ़ाई में मेरी मदद करने वाला भी कोई नहीं बचा था इसलिए मैं पढ़ाई में ज्यादा ध्यान देने लगा.

एक्स एक्स एक्स वीडियो देहाती बीएफ: ऽऽऽ करके रह गई पर अगले धक्के में लण्ड ने चूत की जड़ को छू लिया।मौसी की दबी सी चीख निकल गई- अ आ आ…वो धनुष बन गई। दोनों टांगें मेरे सीने के पीछे से ले जाकर वो मुझे लपेटे थी, उनकी आँखें वासना के ज्वर से बंद हो गईं थी, उनकी नाजुक कमर मेरी मजबूत बाजुओं में जकड़ी हुई थी। वो अपनी गाण्ड उठा-उठा कर लण्ड अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी।पूरा लण्ड बाहर तक खींच कर मैंने एक जोर का धक्का मारा और मौसी आआ. यह पहली बार तो नहीं था कि मैं किसी लड़की को चूम रहा था पर फिर भी इतने नर्म होंठ मैंने कभी चूमे नहीं थे.

तभी जाने कहाँ से गौरी आ गई और ताली बजा कर हंसने लगी- तो मम्मी, आपने मैदान मार ही लिया?”राधा एक दम से शरमा गई और छिटक कर अलग हो गई. उनके पीछे उनका बॉस श्यामलाल आया और चपरासी से तीन चाय कह कर मुझे और दीदी को अपने कैबिन में बुलाया. तूने भी तो लण्ड के मज़े लेने को ही मेरे से अपनी चूत चुदवाई है तो फिर मुझे क्यों नहीं अमिता की चूत दिला सकती है तू?वो बोली- नहीं!फिर मेरे जिद करने पर वो राज़ी हो गई पर बोली- मेरी चूत भी मारनी होगी! कहीं उस रण्डी के चक्कर में मेरी चूत को ही भूल जाये?मैंने कहा- नहीं मेरी जान! तेरी चूत को कैसे भूल सकता हूँ मैं?तो अगली रात उसने अमिता को भी साथ में सुला लिया और अब हम तीनों साथ में थे.

मैं वहीं बैठ गया और रोते हुए सोचने लगा कि भैया के रहते हुए भाभी को इसकी क्या जरूरत पड़ गई.

इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया. प्रेषक : समीर रंजनमेरा नाम समीर है, मैं लखनऊ में रहता हूँ, 27 साल का हूँ ! मैं इससे पहले कई कहानियाँ अन्तर्वासना. देवर ने पति से झूट बोला कि वो देवरानी के लिये बाजार से कुछ कपड़े खरीद कर दोपहर को निकल जायेगा.