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मैं भी इसको बताना चाहता था कि इस दुनिया में अलग-अलग लिंग का मजा क्या होता है!आओ और इसको मजा दो!इतना कहना था कि मनोज नीचे आया और एक ही बार में मेरी चूत को फाड़ते हुए अपना लिंग अंदर डालने लगा. हिंदी बीएफ पिक्चर देमैं दिखने में स्मार्ट लगता हूँ और कोई भी जवान लड़का मुझे देखे तो मेरी गाण्ड मारने के लिए बेताब हो जाये।अब आप ही सोचो कि मै कैसा लगता हूंगा !यह बात उन दिनों की है जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था। तब मेरी उम्र थी 18 साल और कद 5′.

निर्लज्ज नंगी रीटा ने बहादुर की गदर्न में बाहों का हार डाल कर बहादुर को जबर्दस्ती अपने ऊपर खींच कर बहादुर की कमर अपनी सुडौल व गुदाज़ टांगों का ताला लगा दिया. डिलीवरी बीएफवो मेरे लंड को आगे पीछे करने के बजाए दबा रही थी, मैं गरम हो कर बोला- चाँदनी, चूस ना मेरा!तो वो बोली- ‘क्या’तो मुझे लगा कि पहले इसको समझा देना ज़रूरी होगा कि सेक्स कैसे करते हैं ताकि मजा आए.

मैं बार-बार उनके दाने को अपनी जीभ से सहला रहा था और हर बार वो मुँह से सेक्सी आवाज़ निकालती जो मुझको मस्त कर देती.बीएफ सेक्सी भोजपुरी बीएफ सेक्सी: जिस चीज़ की मुझे हवस थी यानि मर्दाना लण्ड, वो भला कोई लड़की कैसे दे सकती थी क़िसी को.

फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं… इन्कार मत करना भाभी…मैं भी एक बार और मजा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था… बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना.दोस्तो, यह थी मेरी आपबीती मोना क़ी दीदी क़ी चुदाई!आपको कैसी लगी, कृपया मुझको जरूर बताएँ ताकि मैं आपको अपनी और बातें बता सकूँ.

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मेरा निकलने वाला था, मैंने कहा- मेरा पानी कौन पिएगी?तो अमिता बोली- मेरे मुँह में डाल दो.वो देख रहा था कि कैसे उसकी बहन मस्त होकर चुदवा रही है अपने बॉस से और फ़िर उसका लंड भी हिला रही है।मेरे बॉस का रस निकलने वाला था… उसने लंड बाहर निकाल कर उसे मेरे दोनों बूब्स पे गिरा दिया…।मेरे हाथो में अभी भी राहुल का लंड था…वो अभी भी पूरा तना हुआ था और अपनी रूबी दीदी की बुर में जाने को बेताब था….

हम करीब 15 मिनट तक एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे, फिर वो बोली- छोड़ो ! कोई आ जाएगा. बीएफ सेक्सी भोजपुरी बीएफ सेक्सी आँखों में चमक… शरारत भरी कातिलाना मुस्कान से वो अपनी कक्षा की कई लड़कियों के दिलों पर राज करने लगा…यहाँ तक कि हमारे अलग होने की खबर के कुछ ही महीनों बाद उसे एक लड़की ने एक प्रेम पत्र लिखा.

और तो और वो समझेंगे भी नहीं कि यह सिर्फ दोस्ती है… और इससे ज्यादा कुछ नहीं…मैं इस बात से परेशान नहीं थी की घरवालों को पता चला तो क्या होगा.

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दोनों पंजों के बल बैठते हुये मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर छेद पर रखकर नीचे को जोर लगाया, सटाक से आधा लण्ड अन्दर सरक गया, धीरे धीरे सरकते हुये मैंने पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया लेकिन ऊपर उठते हुये मेरी सिसकारी निकल गई. तभी वो बोली- अपना लन्ड भी घुसा दे और फाड़ दे मेरी चूत!बस फिर मैंने एकदम से लन्ड उसकी चूत में पेल दिया और धक्के लगाने लगा. मेरा मन उसके तौलिये के खुलने का इंतज़ार कर रहा था… मेरा लंड लोहे की तरह कड़ा हो गया था ….

भाई! यह मत पूछना कि आगे क्या हुआ? वैसे समझ लो कि जो हर चुदाई में होता है, वही नीना की चुदाई में भी हुआ- चूमा चाटी, कपड़े उतारना फिर चूची चूसना, चूत चाट कर मस्त कर देना और फिर लंड-चूत का खेल. मम्मी 5 दिनों तक नहीं आई तब तक रोज़ वो अपना कॉलेज गोल करके मुझसे चुदवाने आती रही। रोज़ मै उसकी जम कर चुदाई करता था…. राजा ने लौड़े पे क्रीम लगाई और दो उंगली से सुनीता की गाण्ड में क्रीम लगा दी और धीरे से डाल दिया अपना लोहे जैसा लौड़ा।सुनीता- मर गई रे ! राजा क्या किया तूने? राजा तूने बजा दिया गाण्ड का बाजा।मौसी- नहीं रे ! अभी तो घुसा है ! बजाना तो बाकी है.

और इतना भीतर तक आज तक कुछ नहीं घुसा’मैंने पूछा- मोहन (उसका पति) का छोटा है क्या’?उसने कहा- तुम्हारे लंड का आधा भी नहीं होगा. न सिर्फ़ थामे हुए था बल्कि हौले-हौले सहला भी रहा था…मेरा लंड इस कदर अकड़ चुका था कि लगता था अभी पैंट फाड़ के निकल पड़ेगा। नेहा मुझे इतने जोर से भींचे हुए थी कि उसकी फूली हुई चूत मेरे लंड के उभार को महसूस कर रही थी… और वो अपने चूतड़ धीरे-धीरे मेरे उभरे लंड पे रगड़ रही थी। मैंने उसका चेहरा अपनी गर्दन से हटाया. तभी मैंने दीदी को बताया- दीदी, मैंने साधना मौसी और मौसा जी की चुदाई देखी है…तो दीदी ने कहा- हमारी मौसी बहुत चुदक्कड़ है….

मैंने तान्या को बाहों में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया, उसके बाद सारे नौकर वहाँ से चले गए. उसका गुस्सा ठंडा ही नहीं हो रहा था…!!!उसकी माँ चोदूँगा न तब साले को पता चलेगा गाण्ड में डंडा कैसे किया जाता है…बहुत स्याना बनता है.

मत कर… वो उछल पडी… क्या गोरी और चिकनी गांड थी उनकी।अब उन्होंने मुझे भी निर्वस्त्र कर दिया… आअह्ह ऊओ इतना बड़ा और मोटा… बाप रे… तभी तो रश्मि को दो-तीन दिन तक दर्द हुआ…‘उनकी बात छोड़ दो भाभी! लेकिन आपको तो यह अच्छा लगेगा।’ मैंने फ़िर से उन्हें दबोच लिया.

मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा। उससे उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी- राहुल….

बस यही सोच कर मैंने अभी तक 28 चूतें मारी हैं और हर चूत वाली को संतुष्ट किया हैं।तो अब असल कहानी पर आते हैं।मैं गाँव गया तो मैंने पूरा दिन घूम कर बिता दिया. सारी धमकियाँ धुंआ हो गई? पहली बार किसी असली मर्द से पाला पड़ा है तुम्हारा?सोनिया खुद पर काबू पाती हुई- सलीम… कुत्ते की औलाद… मैं तुझको जिन्दा नहीं छोडूंगी… तूने मुझे चूमा… तूने मेरी योनि में…. !नहीं मेरा तो निकालने वाला है तुम भी अपनी स्पीड बढ़ाओ ना !क्या तुमने अपनी गांड में अंगुली डाल रखी है ?हाँ मैं तुम्हारी तरह ….

’ कहते हुए मेरे सर को अपने सीने पर दबाने लगी।मैंने अब उसकी साड़ी को निकालना शुरू किया. 2-3 दिन के बाद उसका एक संदेश आया- क्या हम एक दूसरे को जानते हैं?मैंने कहा- नहीं जानते पर अगर आप चाहो तो जान पहचान बढ़ा सकते हैं।उसने कहा- मैं शादीशुदा हूँ !मैंने जवाब में कहा- जान-पहचान बनाने के लिये शादीशुदा ना होना कोई नियम तो नहीं है?तो उसने जवाब में स्माइली बना कर भेज दी. वो एक साथ तीन तीन उँगलियाँ मेरी चूत में डालता और फ़िर चाटता रहता…मैं भी तेजी से बॉस के लंड को चूस रही थी… राहुल ने मुझे पूरी तरह से मस्त कर दिया था।अब मेरी बुर तरस रही थी चुदाने के लिए… मैं मन ही मन खुश हो रही थी.

हमारे घर के ठीक सामने वाले कमरे में अजीत अंकल रहते थे, वो बंगाल से रायपुर काम करने आए थे.

तभी भाभी बोली- बहनचोद, अपनी बहन की चूत का भोंसड़ा बना दिया! अब मेरी का भी बनाएगा क्या?फिर भी मैंने कोई रहम नहीं किया और अपने झटके तेज कर दिए. ??”वेदांत : कभी पूछते हैं… बात आगे कहाँ तक बढ़ी… अरे… तू किसी और लड़की से बात मत करना वरना वो जल-भुन जाएगी. मैंने आयशा के रूम का दरवाजा बजाया, आयशा ने उठकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि वो नाईटी में है, मैं अंदर घुस गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया क्योंकि आयशा को देखने के बाद अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था.

आगे मेरी जिंदगी में क्या-क्या हुआ! जैसे उस रात भाभी के कमरे में कौन था और आगे क्या-क्या हुआ, यह मैं बाद में लिखूँगा!अपनी राय बताने के लिए मुझे मेल कीजिये![emailprotected]. घर में कोई नहीं था इसलिये अन्दर की खिड़की आधी खुली हुई थी क्योंकि इस समय हमारे घर कोई भी नहीं आता जाता था. मैंने सभी के लण्ड देखे, सारे तने हुए थे।शर्मा अंकल का नंबर पहला था, मैं उठी और शर्मा अंकल को नीचे लिटा कर उनके लण्ड पर अपनी चूत टिका दी और धीरे धीरे उस पर बैठने लगी.

मैंने एक हाथ से उसकी चूची दबानी शुरु कर दी और दूसरे हाथ से उसकी चूत को सहला रहा था.

जब मैंने बुआ की एक लड़की शालू को अपने मन की बात बताई कि मैं अमिता को प्यार करने लगा हूँ, तो शालू ने तभी अपने प्यार की बात बताई कि वो मन ही मन मुझे प्यार करने लगी थी और मुझे चूम लिया. वो पेड़ के पीछे जा कर बोली… ऐसे भी कोई ?!?तो फिर बैठी रहो रात भर यहाँ ! या ऐसे ही कपड़े पहन लो… मैं चला !मैं मुड़ा ही था कि वो बोल पड़ी- अरे सुनो तो….

बीएफ सेक्सी भोजपुरी बीएफ सेक्सी सुनील- अच्छा बाबा, जैसे तुम ठीक समझो … कम से कम मेरे फ्लॅट में जाने में तो तुमको कोई दिक्कत नहीं है … या वहाँ के लिए भी कोई बहाना सोच कर रखा हुआ है?सोनिया- तुम्हारा फ्लॅट!सुनील- हाँ मेरा फ्लॅट, अब ज्यादा आना-कानी मत करो … चुपचाप चलो अगर नहीं डरती इन चीज़ों से तो ! और अगर डरती हो तो तुम यहीं रहो … पर काम के सिलसिले में जिंदगी में किसी भी तरह की आगे कोई मेरे से मदद की उम्मीद मत करना. मैंने उसको पूछा कि यह बात उसने राजू को तो नहीं बताई तो उसने जवाब दिया कि चाचा वाली बात तो नहीं बताई लेकिन शादी वाली रात की बात बता दी थी.

बीएफ सेक्सी भोजपुरी बीएफ सेक्सी ‘देखो लग गई ना… जल्दी से धो कर दवाई लगा लो… जरा मेरी गाण्ड भी देख लो ना!’ मैंने जीजू को सहानुभूति दर्शाई. पापा और मम्मी भी साथ थे, इसलिए उन्होंने मेरे सर को चूमा और फिर जल्दी आने को बोल कर चलेगये।मगर मैं पूरा दिन और पूरी रात बिस्तर पर ही अपनी चूत और गाण्ड को पलोसती रही.

लो जनंननन्वो : फक्क मीईई जानुउ हार्ड वेरी हार्डइस तरह हम तीस मिनट तक लगे रहे वो सीत्कार करती रही।वो कह रही थी मुझे आज मम्मी बना दो और मैं कह रहा था कि मेरी आज तुम बनोगी हमारे बच्चों की मम्मी….

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उन दोनों ने अन्दर आते ही कूपे को अन्दर से लाक कर लिया और दोनों मेरे पास आ कर खड़े हो गए. जैसा कि मैंने आपसे कहा था, मैं पलक और अंकित की अधूरी कहानी लेकर आप के सामने हाजिर हूँ. सभी को यह लगता है कि सब कुछ सामान्य है।इस बार जब भैया गए तो कह गए कि अब उनका आना बहुत कम या नहीं के बराबर रहेगा, उन्हें कनाडा के नागरिकता मिल चुकी है।सयाली और भाभी दोनों ही अब मां बनने वाली है.

आज मैं आपको वो दास्तान सुनाने जा रही हूँ जो अपने अंदर और कई दास्तां छुपाए हुए है। मैंने अपनी ज़िंदगी में जो कुछ किया, जो पाया, जो खोया सब आपके सामने रखूंगी। यह मत समझिएगा कि यह कोई गमगीन दास्तान है. 15-20 मिनट तक झटके मारने के बाद मैं तान्या की चूत में ही झड़ गया मगर इस बीच तान्या पहले ही झड़ चुकी थी. ‘विनोद, देखो…बोबे दबा कर चोदना… तुम्हें खूब मजा आयेगा!’ सोनू ने वासना भरी आवाज में कहा.

हमारे स्कूल में तीन मुख्य हाल हैं… एक है प्रार्थना हाल, दूसरा साक्षात्कार हाल और तीसरा क्रियाकलाप हाल.

रीटा तिरछी निगाहों से बहादुर की झुकी झुकी नजरों को अपनी स्कर्ट कर अंदर अपनी पेंटी से चिपकी देख समझ गई कि चूतिये को आसानी से पटाया जा सकता है. मैंने उठना चाहा लेकिन उसने मुझे अपने ऊपर खीच लिया और मेरे होंठों को अपने होठों से दबा कर चूसने लगी। थोड़ी देर तक हम दोनों इस प्यार भरे चुम्बन में लगे रहे लेकिन तभी…. उसके बाद शादी की वजह से मैं और दीदी दो दिनों तक सही से एक-दूसरे से बात भी नहीं कर पाये.

कुछ ही देर में हम दोनों सामान्य हो चुके थे… और एक दूसरे को प्यार भरी नजरों से देख रहे थे… हम दो बार झड़ चुके थे…पर तरोताजा थे… थोड़ी देर के बाद हमने कपड़े पहने और फिर मैं अपने कमरे में आ गया. पर मेरे पति का लंड बहुत छोटा है सिर्फ 6 इंच का! न ज्यादा मोटा है न ही वो ज्यादा वक़्त चोद पाते हैं. और ककड़ी खींचने लगी… पिंकी ने ककड़ी नहीं, मेरा लंड पकड़ लिया था पर उसे कुछ नहीं पता था। इधर दोनों ने मुझे कस कर पकड़ लिया था।रेशमा बोली- पिंकी ककड़ी निकालो…पिंकी बोली- नहीं निकल रही है…कविता बोली- अरे शायद सुहास ने अंदर में ककड़ी रखी होगी….

‘हाय… हट जाओ अब… बस दर्द नहीं है अब…’‘यहाँ नहीं तो इधर सीने में तो है…!’मैंने अब सीधे ही उसके सीने पर हाथ रख दिये… और उसकी चूचियाँ दबा दी. या चाकू खरबूजे पर कटता तो खरबूजा ही है ना…उसी तरह फटती तो चूत ही है ना…”मैंने उसे गाली दी.

सेक्सी आंटी की चुदाई का मौक़ा मुझे तब मिला जब शहर में दंगों के कारण कर्फ्यू लगा हुआ था. फिर मैंने धीरे से उसकी पेंटी उतार दी और उसे बिस्तर पर लिटा दिया और फिर मैंने जैसे ही उसकी चूत पर अपना मुँह रखा वो सिसकारियाँ लेने लगी और रुकने के लिए बोलने लगी. सुन्दर रीटा मस्ती में आकर सीऽऽ सीऽऽ सिस्कारें मारती और उसी अंगड़ाती पोज़ में अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी, तो बहादुर का लण्ड के मुँह से लार टपक पड़ी.

?उसने कहा- नहीं भाभी…मैंने कहा- फिर इतना डर क्यों रहे हो…उसने कांपते हुए होंठों से कहा- नहीं भाभी, डर कैसा…?मैंने कहा- मुझे तो ऐसा ही लग रहा है…फिर मैंने चम्मच फेंक दी और अपनी ऊँगली से उसको आईसक्रीम चटाने लगी…वो डर भी रहा और शरमा भी रहा था और चुपचाप मेरी ऊँगली चाट रहा था.

मैंने मन ही मन में उन्हें गालियाँ दी- साले भेन के लौड़े, तेरी तो माँ चोद दूंगा मै, माँ को हाथ लगाता है?पर तभी मेरे होश उड़ गये, मम्मी ने तो गजब ही कर डाला. रात को करीब 8 बजे जब ज्योति घर पहुंची तो वो खाना खाकर सीधा अपने कमरे में चली गई और फिर आयशा भी अपने कमरे में सोने के लिए चली गई और मैं टी. दोस्तो,स्वीटी और जानू का मिलन-1में आपने पढ़ा कि मैंने श्रेया की चूत नहीं चाटी।अब आगे पढ़ें कि मैंने चूत क्यूँ नहीं चाटी….

उसके स्कूल जाने के बाद 8 बजे मैं ज्योति के कमरे में उसको जगाने के लिए गया तो उसके कपडे अस्त-व्यस्त थे. भाभी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया मगर उन्होंने इस बात पर कोई नाराज़गी भी नहीं दिखाई.

मगर भाई! तुम ही बताओ कि ऐसा कभी संभव है?क्या 18 साल की लौंडिया चोदने को मिले और कोई छोड़ देगा, भरपूर चुदाई किये बिना ही?नहीं ना?फिर नीना की चूत को अगले तीन साल तक विनोद अगरबत्ती दिखाता रहा?हाँ, नीना ने ईमानदारी के साथ एक बात जरूर बताई क़ि विनोद का लण्ड देखकर वह डर गई थी. यह सभी कुछ हम बारिश में गीली छत पर ही कर रहे थे और मुझे लगा काम को आखिरी अंजाम देने के लिए हमे बेड पर जाना ही पड़ेगा. वो इशारा कर रही थी कि चुदवा लो… आह, पर कैसे… बॉबी क्या सोचेगा… तभी बॉबी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रख दिया.

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पर आजकल तो प्यार को सिर्फ जिस्मानी मिलन का रूप दे दिया है…उसकी रश्मि वाली बात सुन कर मुझे उसकी कोई बात सुनाई नहीं दे रही थी … मन ही मन मैं रश्मि को कोस रही थी.

मैं- गन्दा मतलब?शालू- वो ही जो तुम चाहते हो!मैं- चुम्मी तो दे दे!शालू- चल ठीक है!मैंने उसको खूब चूमा और उसकी कपड़ों के ऊपर से ही चूचियाँ सहलाई. उसका गुस्सा ठंडा ही नहीं हो रहा था…!!!उसकी माँ चोदूँगा न तब साले को पता चलेगा गाण्ड में डंडा कैसे किया जाता है…बहुत स्याना बनता है. भला कहीं आधे घंटे में कैसे याद होता?नकली गुस्सा दिखाते हुए विनोद ने उसके गाल पर थप्पड़ बढ़ाया क़ि नीना ने अपना चेहरा पीछे खींच लिया और विनोद का जोरदार हाथ नीना की चूचियों से जा टकराया.

दो दिन के बाद उसका एक फ़ोन आया और फिर जो हुआ वो आपको अगली कहानी में सब विस्तार से बताऊंगा…तब तक आप अपने विचार और सुझाव मुझे जरूर बताएँ !. उसमें से एक मुझे काफी सुन्दर लड़की की प्रोफाइल में उसका फोटो दिखा, शायद शादी के पहले का फोटो था. हिंदी बीएफ साड़ी वाली औरतपर मैंने भी फूल हाथ से नहीं छोड़ा…जब मेरे इस कारनामे पर भी उसका ध्यान नहीं गया तो मैंने उन्हीं रक्त भरे हाथों से उसके सामने फूल कर दिया…यह काम कर गया…उसकी नज़र फूल से पहले मेरी हथेली पर गई…उसने झट से मेरे हाथ से फूल छुडा कर फेंक दिया… मेरे हाथ थाम कर हथेली को अपने हाथ पर रख दूसरे हाथ से कांटा निकालने लगा.

मैंने उसके एक स्तन को पंजे से पकड़ा और ज्यादा से ज्यादा मुँह के अन्दर लेकर चूसने लगा…‘आह. तुम जैसे चाहे हमें चोद सकते हो ! शादी के बाद तो हमारा पति हमें चोदेगा, उससे पहले कैसे चोदते हैं यह सीख लिया तो शादी के बाद परेशानी नहीं होगी।कैसे शुरुआत करें….

तो वो बोली- ठीक है!और मैं एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसको जकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसकी चीख मेरे मुँह में दब के रह जाए और उसकी गाण्ड के छेद में उंगली करते हुए उसको और ज़्यादा गरम किया. अब आई ना लाइन पर साली साहिबा!”जीजू, क्या यह सब ठीक है? हम दोनों जवानी के नशे में दीदी को भूल रहे हैं! दोनों धोखा दे रहे हैं दीदी को!क्या करूँ? बहुत प्यासा हूँ! मैं तेरे ऊपर पहले से फ़िदा था!इतने में हम फ़ार्म हाऊस पहुँच गए. लेकिन एक बात तो मेरे समझ आ गई थी कि भगवान किसी लोंडिया की शादी चाहे उस पैसे वाले से नहीं करे जिसका लौड़ा चार इंच का ही हो, शादी उससे करे जिसका लौड़ा नौ इंच का हो और जो चूत का रोज बाजा बजाये.

पिंकी- हाय मनुजी! मैं क्या करती? साली ने बाथरूम में मेरी चूचियाँ दबा दी तो मैं गर्म हो गई, आप तो समझदार हो!मैंने कहा- पिंकी जी, आपका ज्यादा समय नहीं लूँगा!और मैंने उसके हाथ पकड़ कर हथेली चूम ली, उसके होठों से सिसकारी निकल गई. रीटा ने भी नौकर को शह देने के लिये अपना पैर से बहादुर के लण्ड को सरेआम दबा दिया और पैर से सहला कर बहादुर के लण्ड को खडा कर दिया. ”मेरा लौड़ा अब चोदने को बेताब हो उठा था लेकिन मुझे कुछ नहीं करना पड़ा, चाची ने मेरा एक हाथ पकड़कर नीचे रख दिया और कहा,” बेटा इसको सहला दे इसमें बहुत खुजली है !”तब मैंने कहा,” चाची जी यह तो बहुत गर्म है।”तो उन्होंने गुस्सा करके कहा,”मुझे चाची मत बोल … या तो पारुल जान कहो या सिर्फ जान कहो ….

इस बीच मैं उसके बहुत चक्कर लगा लेती हूँ, पर कभी ऐसा कोई मौका ही नहीं आया कि विपिन पर डोरे डाल सकूँ.

रणजीत… अपने हाथों से मेरी गांड भी दबाओ… !”मैंने फिर उसके पैर अपने कंधे पर रख लिए और फिर से धक्के देना चालू किया, उसे पैरों को काटता तो कभी चूमता !मेरे धक्कों के उसके स्तन यूं झूलते मानो आंधी में लालटेन !” रणजीत, अपने लौड़े की वर्षा से एक बार फिर मेरे चेहरे को नहला दो, जोर से डालो अन्दर……आअह्ह…. उधर अनिल के चाटने से मैं भी झड़ चुकी थी।अब अनिल का लौड़ा मुझे शांत करना था।अनिल सोफे पर बैठ गया और अनिल के आगे उसी की तरफ मुंह करके उसके लौड़े पर अपनी चूत टिका कर बैठ गई। उसका लोहे जैसा लौड़ा मेरी चूत में घुस गया.

उसका एक हाथ मेरे सर पर था, वो मुझे ऐसे दबा रही थी कि मानो कह रही हो- मेरी चूत में घुस जाओ!इतनी कामुक लड़की मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी!मैं कोमल के ऊपर आ गया. रेशम सी मुलायम चूत तन्दूर सी गरम और दहक रही थी और पहली चुदाई के पानी से अभी भी पच्च पच्च गीली थी. हालांकि इससे मेरी चूत गीली हो जाती थी और मेरे चूचे तन जाते थे लेकिन मैं इसे जीजा का साली के प्रति प्यार समझ कर टाल देती थी.

मैंने अपनी बहन को कहा- मैं तो तुझे एक ऐसी गश्ती बनाऊँगा कि तू साली तीन-तीन लौड़े एक साथ लेगी मेरी बहन! जो तेरी चूत, गांड और मुँह में होंगे! क्यों मेरी रांड बनेगी न गश्ती?तो बोली- सच भाई? मैं भी यही चाहती हूँ! और बाकी आपकी मर्जी! आप जो मर्जी बनाओ मुझे! मेरे दलाल भाई!फिर तो मैं रोज चोदने लगा कुतिया को! मेरे साथ ही जो सोती थी. रानी एकदम बेदम थी… यही तो मैं चाहता था…मगर इतनी देर चुदाई के बाद मेरा लंड भी गर्म हो गया था और चूत में झड़ना चाहता था. और मेरी बेरहमी के लिए माफी भी माँगी तो वो बोली- आपने मुझे कली से फूल बनाया, आप तो मुझे अब मार भी डालो तो मुझे कोई शिकवा नहीं होगा.

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!मैंने इधर उधर देखा और उसके पास जाकर उसको मनाते हुए सॉरी बोला।पर वो थी कि मानने का नाम ही नहीं ले रही थी। मेरा भी मूड खराब हो गया, मैं अपने आप को कोसने लगा कि मैंने कमल के कमरे में रुकने का कहा ही क्यों।मैं बुझे मन से ऊपर कमरे में चला गया।कहानी अगले भाग में समाप्त होगी।आपकी मेल का इन्तजार रहेगा।आपका अपना राज. जैसे ही हम अलग आये तो सोनम ने मुझे एक लाल गुलाब पकड़ाया और मुझे ‘आई लव यू ‘ बोलकर मेरे गले लग गई. कुछ अंकल के अहसान, कुछ नई उमंग और कुछ अनजानी सी चाहत ने मेरे मुँह से हाँ निकलवा दी.

की आवाज़ निकली। मैं उसकी गर्दन और कंधे मसल रहा था। वो थोड़ा सा कसमसाई।अब मैंने उसकी साड़ी को उसके वक्ष से पूरी तरह हटा दिया। वो हल्का विरोध कर रही थी. मैंने उसके गले और छाती पर चूमना शुरु कर दिया और मेरा हाथ उसकी स्कर्ट के अंदर जाने लगा. देहात वाला बीएफपूरा कमरा आंटी की सिसकारियों से गूंज रहा था और वो सिसकारियाँ मुझे अच्छी लग रही थी.

फिर प्यार से देखो… और अपने होंठ लगा कर इसे मदहोश कर दो…यह तुमको प्यार करने के लिए है…तुमको तकलीफ देने के लिए नहीं…मुझे भी इतना बड़ा लौड़ा देखने की इच्छा हो रही थी… मैंने उसके कच्छे को उतार दिया… उसका फनफनाता हुआ काले सांप जैसे लौड़ा मेरे मुँह के सामने खड़ा हो गया…ऐसे लौडा मैंने कभी नहीं देखा था.

मेरी दादी और चाची ने बहुत कोशिश की थी कि मेरी मम्मी उन दोनों से गांड मरा ले पर मेरी मम्मी मानती नहीं थी। इस पर उन्होंने कसम दिलाई कि अगर मैं साड़ी में उनकी गांड मार लूं तो वो चाची या दादी से गांड मराएंगी. मैंने अपना मुँह उनकी गुलाबी चूत पर रख दिया और कभी उसको चाटता तो कभी अपनी जीभ उनकी चूत में डाल देता.

जाने साधारण अवस्था में वो मुझे चोदता या नहीं, पर नशे में टुन्न उसे भला बुरा कुछ नहीं सूझ रहा था, बस जानवर की तरह उसे चूत नजर आ रही थी, सो लण्ड घुसा घुसा कर उसे चोद रहा था. ऽऽऽ करके रह गई पर अगले धक्के में लण्ड ने चूत की जड़ को छू लिया।मौसी की दबी सी चीख निकल गई- अ आ आ…वो धनुष बन गई। दोनों टांगें मेरे सीने के पीछे से ले जाकर वो मुझे लपेटे थी, उनकी आँखें वासना के ज्वर से बंद हो गईं थी, उनकी नाजुक कमर मेरी मजबूत बाजुओं में जकड़ी हुई थी। वो अपनी गाण्ड उठा-उठा कर लण्ड अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी।पूरा लण्ड बाहर तक खींच कर मैंने एक जोर का धक्का मारा और मौसी आआ. दर्द की वजह से रीटा बुरी तरह से राजू की मजबूत बाहों में फड़फड़ाई और उसकी आँखें बाहर उबल पड़ी.

आग जैसे गरम गोरे गुलाबी जिस्म पर पानी की नन्ही नन्ही बूंदें पड़ती तो मेरे तर बदन से जैसे जजबातों का धुआँ सा उठने लगता.

अब मामी ने धीरे से अपने पैर उठाये और अपनी छाती के पास ले गई जिससे अब उनकी गांड का छेद मेरे सामने आ गया था. सुबह सवेरे अगर लौड़ा मिल जाये तो काम देव की आराधना भी हो जाती है, और फिर पूरा दिन मस्ती से गुजरता है. फिर माँ मेरे पास आई और मुस्कुराते हुये कहा- इतना परेशान मत हो, मिल जायेगी! चल सब सामान वापस रख दे अभी!इतना बोल वो वहाँ से चली गई और अपने काम में लग गई.

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वो उसकी पहली चुदाई होने के बावजूद एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह जुम्बिश देती जा रही थी और अपने कमर को लचका रही थी. !शब्बो- कुछ मत बोलो, चलो, कमरे ले लेते हैं।हमने एक साधारण सा कमरा ले लिया, उसमें एक पलंग और मेज और पंखा और लाईट थी।कमरे में जाते ही……. दीपू मेरी एक एक चूची को बारी बारी से दबा और मसल रहा था साथ में मेरे मुंह में अपनी स्वादिष्ट जीभ भी डाल चुका था.

”हे भगवान्…” अनीता दीदी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई- तू सच कह रही है? सोनू लेकर आता है?नेहा उनकी शकल देख रही थी- तुम इतना चौंक क्यूँ रही हो दीदी?”अनीता दीदी ने एक लम्बी साँस ली और कहा- यार, मैं तो सोनू को बिल्कुल सीधा-साधा और शरीफ समझती थी. ”सोमा ने मुझे बहुत पीटा। मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि साले कुत्ते के बच्चे ने मुझे किताब दिखाई होती तो रंडवे को मुठ मारने की जरुरत नहीं पड़ती…. । अब मैंने उन्हें कुछ आसन भी करवाने आरम्भ कर दिये और मैं उसके जिस्म के कटाव और उभारों को मन में बसा लेता था।मेरे मन में अब उसे भोगने का लालच बढ़ता गया। फ़लस्वरूप मैं अब उसके जिस्म को भी छूने लगा था। अभ्यास के दौरान मैं उसके प्यारे से गोल गोल कसे हुये स्तनों को छू लेता था….

मैंने उसके लाख मना करने पर अपने लंड उसके गरम होंठों के अन्दर ठूंस दिया- अहह मेम और चूसो न. यह नेहा थी जो अपने बदन पर चादर डाल कर मेरे कमरे की तरफ ये देखने आई थी कि मैं क्या कर रहा हूँ और वो सिसकारी किसकी थी. अरे तुम तो घर गयी थी ना… ?” राहुल ने पूछा।हाँ पर भइया आ गए थे… वो ही मुझे अभी छोड़ कर गए हैं… ”तुम रात का खाना हमारे यहाँ खाना… बना लिया है… ”साहिल भी बाथरूम से आ गया था.

’मैंने खड़े होते हुए उससे हाथ मिलाया और पुराने वाले से बोली ‘ये तो ठीक है पर तुमने अभी तक अपना नाम तो बताया ही नहीं. राजा अब झड़ने वाला था… राजा ने एक झटके से अपना लण्ड फिर मेरी चूत में पेला और झड़ने लगा…आगे बढ़ कर मेरे होंठ चूसने लगा… उसने मेरी चूचक मसले … और मेरे अन्दर ही झड़ गया… उसके बाद वो मुझ पर से हट गया.

तू कमाल की है… अगर राजा का चूचे काटने का फरमान नहीं होता तो शायद में तेरे चूचे चूसने, दबाने के लिए तुझे हमेशा के लिए अपने पास रख लेता…तभी साहूकार पिनियाते हुए आया और बोला- इसके होंठ मेरे हैं… तू क्यों चूम रहा है.

शुरू से आखिर तक बहादुर ने रीटा को पूरी स्पीड से चोदने से रीटा बहादुर की बहादुरी पर बलिहारी हो तीसरी बार लगातार झड़ती चली गई. बीएफ चोदते हुए दिखाएं‘ओये होये, क्या बात है भाभी… मजा आ गया इस बात पर… तुसी फिकर ही ना करो जी… यह देवर भाभी के बीच के बात है…’मैंने गिलास को मुँह से लगाया तो बहुत कड़वी सी और अजीब सी लगी. xxx देसी बीएफमुझे पीछे से पकड़ कर अपनी कमर कुत्ते की तरह से हिलाने लगा जैसे कि मुझे वो चोद रहा हो… मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया. तभी जाने कहाँ से गौरी आ गई और ताली बजा कर हंसने लगी- तो मम्मी, आपने मैदान मार ही लिया?”राधा एक दम से शरमा गई और छिटक कर अलग हो गई.

शायद उसके बॉस श्यामलाल पहले भी उसकी गांड मार चुके थे इसलिए मैंने ज़ोर का धक्का लगा दिया जिससे मेरा लगभग आधा लंड स्वाति की गांड में समा गया और वो चिल्ला उठी.

?” उसने शरमा कर अपनी नज़रें झुका लीं!मैं जानता था कि रश्मि तो अभी बिलकुल कोरी है। मैंने पूछा प्लीज बताओ न?”वो शरमाते हुए बोली,”किया तो नहीं पर………!”पर क्या………. और शायद सुन भी नहीं रहा था…मैंने उसका ध्यान बटाने की एक बार फिर कोशिश की…मैं : देखो वेदांत खड़े होकर ! बहुत मज़ा आ रहा है… तुम भी झूलो ना आकर … वेदान्त…. तभी बाजी ने कहा- ओह्ह्ह मेरे चोदू राज! मेरा पानी निकलने वाला है! हाय ऊह्ह्ह अऔह्ह्ह्ह! और जोर से चूस मेरी बुर को!बाजी अपनी बुर को राज अंकल के मुँह रख कर अपनी गांड को जोर जोर से हिलाने लगी- ओहह्ह औऊउ हाय औऊउ ले साले मेरी बुर का पानी!और बाजी ने अपनी बुर का पूरा पानी राज अंकल के मुँह में गिरा दिया.

वो देख रहा था कि कैसे उसकी बहन मस्त होकर चुदवा रही है अपने बॉस से और फ़िर उसका लंड भी हिला रही है।मेरे बॉस का रस निकलने वाला था… उसने लंड बाहर निकाल कर उसे मेरे दोनों बूब्स पे गिरा दिया…।मेरे हाथो में अभी भी राहुल का लंड था…वो अभी भी पूरा तना हुआ था और अपनी रूबी दीदी की बुर में जाने को बेताब था…. अन्तर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से मेरा प्यार और नमस्कार! काफी मित्रों के ढेरों संदेश मिले, आप लोगों को मेरी जीवन की कहानी इतनी अच्छी लगेगी, मैंने सोचा भी नहीं था. । पहले हम एक दूसरे का चूसते रहे फिर पापा ने मेरी गांड चाटी, चाट चाट कर मेरी गांड नरम कर दी। फिर मुझसे वैसलिन लाने के लिए कहा। मैं वैसलिन लेकर आया।पापा ने कहा- यह तकिया मुँह में रखो और कुतिया बन जाओ !मैं कुतिया बन गया। पापा.

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काश मैं भी आप ही की तरह अपनी कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठी आप ही की तरह अपने दिल की धड़कन थामे यह कहानी पढ़ रही होती और आप ही की तरह अपने ही जिस्म के मखसूस हिस्सों से लज़्ज़त लेती, लुत्फ़ ले हो रही होती. मैंने कहा- कुतिया साली! ले अपने भाई को लौड़ा अपनी चूत में! मैं भी झड़ने वाला हूँ रांड!मैं उसकी आहें सुनते ही झड़ गया. तभी मुझे उसके हाथ पर एक काला दाग दिखा, मैंने उसका झट से हाथ पकड़ कर पूछा- यह दाग कैसा है?वो उसके बारे में बताने लगी और मैंने उसका हाथ पकड़े रखा, और मैं हल्का हल्का मसल रहा था, बातों-बातों में मैं उसके करीब जा रहा था धीरे धीरे.

अब गांड की बारी !”कभी गांड और कभी बुर करते हुए मैं आंटी को चोदता रहा करीब तीन घंटे तक …आंटी साथ में गाना गा रही थी :तेरा लंड मेरी बुर …अंदर उसके डालो ज़रूर …चोदो चोदो, जोर से चोदो …अपने लंड से बुर को खोदो …गांड में भी इसे घुसा दो …फिर अपना धात गिरा दो …इस गाने के साथ आंटी घोड़ी बन चुकी थी और और मैं खड़ा होकर पीछे चोद रहा था। मेरा लंड चोद चोद कर लाल हो चुका था.

पर हाँ उनका लण्ड दूसरों की अपेक्षा छोटा है, यानि राहुल, रोशन, गोवर्धन, गोविन्द के लण्ड से तो छोटा ही है.

अंकल मम्मी से बात करते करते उन्हें कुछ इशारा कर रहे थे पर मैं समझ नहीं पाया कि दोनों में क्या इशारेबाज़ी चल रही है. मनीषा वैसे तो बहुत ही ज्यादा सुन्दर थी मगर उसमें बाकी लड़कियों की तरह घमंड बिल्कुल भी नहीं था. गुजराती हिंदी बीएफजब भी मौका मिलता, मैं उन के गुप्त अंगों को देखने की कोशिश करता और मस्ती मस्ती में उन्हें छू भी लेता था.

यहाँ तो दो दो है… पर दो क्यूँ…? राजेश अंकल आ गये थे, उनका मोटा सा लटका हुआ लण्ड देख कर तो मैं भी हैरत में पड़ गया. मैं अपने मम्मी-पापा और अपनी बड़ी बहन के साथ कोलकाता में एक किराये के मकान में रहता था. ‘दीदी… प्लीज, बुरा मत मानना… मुझे करने दो!’‘आह विनोद… यह क्या कर रहे हो… मुझे तुम दीदी कहते हो…?’‘प्लीज़ दीदी… ये तो बाहर वालों के लिये है… आप मेरी दीदी तो नहीं हो ना.

अब तो मेरी गांड भी रवां हो चुकी थी। मिट्ठू तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रहा था। हाई. देवर ने देखा तो उसने मुझे बेड पर लिटाया और हथेली से उस निशान के ऊपर मालिश करने लगा.

थोड़ी देर मैं उसकी चूत इसी पोजिशन में मारता रहा फिर मैंने उसको पेट के बल लिटाया और उसके घुटने मोड़ के उसको घोड़ी बनाया.

क्या मजा था उसमें! एकदम चिकनी और गोरी टाँगें थी उनकी! मैंने उनकी स्कर्ट इतनी ऊपर कर दी कि मुझे उनकी पेंटी दिखने लगी. काश यह दोनों लड़के आज मेरी चुदाई कर दें !फिर अनिल ने अपने दोस्त से मिलवाया, उसका नाम सुनील था, सुनील ने मुझे अन्दर आने को कहा मगर मैंने सोचा कि सुनील के घर वाले क्या सोचेंगे।इसलिए मैंने कहा- नहीं मैं ठीक हूँ !और अनिल को जल्दी चलने को कहा. हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी.

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पर मम्मी का लेक्चर अभी भी चालू था…!!और अगर कभी ज्यादा रिसाव हो तो सावधान रहना कि कपड़े गंदे न होने पाएँ… और खून देख कर घबराना नहीं. मैं दूसरी टीचर्स की तरह खूब मेक-अप करती और खूबसूरत साडियाँ पहन कर स्कूल आती थी, जैसे कोई स्पर्धा चल रही हो. कुछ देर बाद आंटी कह रही थी- और जोर से सागर! और जोर से!मैं भी पूरे जोर से आंटी को चोद रहा था.

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‘नहीं जवान लड़की की गाण्ड ऐसे नहीं फ़टती है, बस दर्द ही होता है… अब इसे भी तो अपने लायक बनानी है ना… देख इसे भी चोद चोद कर मस्त कर दूंगा!’ जीजू हाँफ़ने लगे थे. बेचारी तीन-फोल्ड हुई रीटा किसी घायल हिरणी की भांति छटपटा कर रह गई- आहऽऽऽ नहीं छोड़ो मुझे! प्लीज़ छोड़ो नाऽऽऽ! मैं मर जाऊँगी, आपका बहुत बड़ा है. रास्ते में रीटा की जवान चूचों और टाँगों को देख देख कर बहादुर का लण्ड फुंफकार उठता.

उस दिन जैसे ही मुकेश ने मुझे घर के बाहर उतारा तो मैंने उसे अपना बैग ऑटो के पीछे से उतार कर देने को कहा. अब वो मेरे पैर की तरफ सर करके लेट गई और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं उसकी चूत चाटने लगा, मतलब हम अब 69 तरीके में थे.

अगले दिन सुबह 7 बजे मेरे कमरे का दरवाजा बजा, मैंने जब उठ कर दरवाजा खोला तो देखा कि आयशा चाय ले कर आई हुई थी.

मेरा भाई-भाभी भी जॉब पर चले जाते थे और घर में मैं और चित्रा बचते थे मगर फिर भी मेरी चित्रा से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी क्योंकि तब मैं थोड़ा शर्मीला था. वह मुस्कुरा दी और कहा- तो सिर्फ आप कुँवारी लड़कियों को लिफ्ट देते हैं?मैंने कहा- नहीं! मैं हर खूबसूरत लड़की को लिफ्ट देता हूँ!मैंने उससे दो मिनट का समय माँगा और पिज्जा-हट कॉल करके दो वेज पिज्जा का आर्डर दे दिया. मैं सोने का नाटक करते हुए सब सुन रहा था, मेरा लण्ड तूफान की तरह हिल रहा था और मैं अपने लण्ड को शालू की गाण्ड पर रगड़ रहा था पर इस तरह कि अमिता को पता न चले.

पर थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपने पैर के अंगूठे से उसके मोमों को रगड़ना शुरु कर दिया. ”ठीक है तू माल ला और मुझे मस्त कर दे… बस…” हम दोनों एक दूसरे का राज लिये मुस्कुरा उठे. ‘बस अब यूँ ही बैठे रह, हिलना मत!’वो टीवी देखती जा रही थी और मेरा लण्ड मलती जा रही थी.

थोड़ी देर बाद मेरे मन में भी हलचल होने लगी… दोस्तो, बता दूँ कि मेरे मीनू भाभी कमाल की दिखती हैं, रंग गोरा, शरीर भरा-भरा.

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क्योंकि मैं गुस्से में था इसलिए भाभी ने मुझे अकेले नहीं जाने दिया और मेरे साथ चल दी. तभी मुझे उस रात की याद आई जब घर पर मेरे और भाभी के अलावा कोई नहीं फिर भी मुझे भाभी के कमरे से भाभी और उनके साथ किसी मर्द की आवाज आई थी. घर पहुंचा तो मेरी बहन ने जल्दी से आकर मुझसे पापा के बारे में पूछा और तभी अनीता दीदी भी अपने घर से बाहर आ गईं और पापा की खबर पूछी.

उसे देखकर मुझे हंसी आने लगी क्योंकि यह तो वही बात हो रही थी ‘लंगूर के मुँह में अंगूर’कुछ देर बाद लड़के वाले चले गए और शादी छः महीने बाद की तय हुई क्योंकि लड़का अभी पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहता है.

की आवाज गूंजने लगी। एक हाथ से मैं उसके स्तन भी मसल रहा था। उसको तो तिहरा मज़ा मिल रहा था वो कितनी देर ठहर पाती। ऊईई … माँ आ. करीब १० मिनट के बाद वो बोली कि जल्दी जल्दी करो, मुझे कुछ हो रहा है, शायद मैं झड़ने वाली हूँ, जल्दी से चोद दो ना मुझे. थोड़ी देर में जब वो कुछ सामान्य हुई तो मैंने धीरे धक्के लगाने शुरू किये …कुछ ही देर में उसको भी मज़ा आने लगा ….